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Blog: अनकहे किस्से

Blogger: Amit Mishra
यह समय बड़ा ही मुश्किल हैभारी  भारी  सा  हर  पल   हैतुम ईश का ध्यान लगाए रखनाइच्छाशक्ति  जगाए  रखनायुद्ध  बड़ा  जब  लड़ना  होताकतवर से जब भिड़ना होतुम पूरा जोर लगाए रखनाइच्छाशक्ति  जगाए  रखनाजब गति हृदय की बढ़ जाएजब श्वास श्वास पर चढ़ जाएजीने की आस लगाए र... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   4:24am 29 Apr 2021 #
Blogger: Amit Mishra
 रोज इसी वक़्त छत पर आओगीतो पड़ोसी कानाफ़ूसी करेंगेपकड़ी तुम जाओगीऔर शामत मेरी आएगीबिन बात मुस्कुराती होबेवज़ह चौंक जाती होजो किसी को भी शक हुआअपनी जासूसी हो जाएगीअब आ ही गयी होतो बालों को खुला छोड़ोचूम के ऊँगली उछाली है मैंनेगालों से ज़ुल्फें हवा उड़ाएगीरोज रोज चुनर लहर... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   9:54am 31 Mar 2021 #
Blogger: Amit Mishra
'मैं तो यही चाहूँगी कि हम बीच बीच में मिलते रहें, बाकी तुम्हारी मर्जी'ये उसकी आख़िरी लाइन थी जो मेरे कानों ने सुनी थी। उसके बाद हम कभी नही मिले।एक आम आशिक़ की तरह मैंने भी कई बार उससे कहा था कि तुम आँखों से जादू टोना करती हो क्योंकि मैं जब भी इन्हें देखता हूँ बस खो जाता हूँ। स... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   11:59am 2 Mar 2021 #
Blogger: Amit Mishra
कितनीहीदीवारेंहैंजिन्हेंघरहोनेकाइंतज़ारहैऔरमुसाफ़िरहैंकिबसभटकतेहुएदमतोड़रहेहैंजानेकितनाहीवक़्तखोजतेहुएखर्चकरदियापरजोढूँढ़लियाउसेसंभालनेकासमयनहीमिलाजल्दपहुँचनेकीख़्वाहिशलिएसुकूनभरीछाँवछोड़तेरहेपरकौनजानेइसलंबेसफ़रमेंकोईऔरपेड़मिलेनामिलेहमभागनेके... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   7:41am 23 Feb 2021 #
Blogger: Amit Mishra
हम मिले सालों बादऔर शिष्टाचार में पूछ ही लियाकैसे हो?जवाब में ठीक हूँ कहने की हिम्मतचाहकर भी नही जुटाई जा सकीक्योंकि ठीक वैसा अब कुछ भी नहीहम जानते थे कितितलियों के पंख तोड़ लिए गए हैंउपवन के पक्षी अब उड़ना भूल चुके हैंझरनों में पानी की जगह अब काई ने ले ली हैऔर रातों में ... Read more
clicks 54 View   Vote 0 Like   11:25am 17 Feb 2021 #
Blogger: Amit Mishra
किसीअज्ञातशत्रुकीतरहपीछेसेवारकरताहैअतीतबिल्कुलहृदयाघातकीतरहआकरलिपटजाताहैस्मृतियोंकेहथौड़ेजबचलनाशुरूकरतेहैंतोदिमाग़कीनसोंकोलहूलुहानकरदेतेहैंकमीज़परलगादागहमजितनाछुपातेहैंवोउतनाहीगाढ़ाहोताजाताहैकिशोरावस्थामेंआईमोचकोहमजवानीमेंनज़रअंदाजजरूरकरत... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   11:33am 9 Feb 2021 #
Blogger: Amit Mishra
 मेरी उदास कविताओं कोजीवंत बना देती हो तुमपढ़ने के अनोखे अंदाज सेजीने की मृत इच्छा कोपल भर में बदल देती होकंधे पर हाथ भर रख करकिसी नास्तिक को भीमंदिर की सीढ़ियाँ चढ़ा दोईश्वर की भेजी एक दूत हो तुमऔर मैं ख़ुद के होने की वजह ढूँढ़तालौह पुरुष होने का ढोंग रचता हुआहार जाता हू... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   9:09am 3 Feb 2021 #
Blogger: Amit Mishra
किसी एक इच्छा के पूरी ना होने की उदासी कितनी और चीजों के मिलने की ख़ुशी को निग़ल जाती है। ऐसे ही किसी ख़ास रिश्ते के ख़त्म होने के बाद कोई और रिश्ता बनाने की हिम्मत हम कभी नही जुटा पाते।यूँ तो रिश्तों की कोई उम्र नही होती। कई बार ये बस कुछ सालों के मेहमान होते हैं और कई बार ताउ... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   11:31am 29 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
मेरेमनकीसारीमुश्किलोंकोकितनाआसानबनादेतीहोतुमअपनेमुस्कानकेअनोखेजादूसेकुछतोहैकरिश्माईतुम्हारेभीतरजोहारीहुईमुरझाईसाँसोंमेंताजीहवाकाझोंकाभरताहैतुमबिल्कुलउनतितलियोंजैसीहोजोअनजानहैंअपनोंमोहकरंगोंसेजिन्हेंनहीपताकिउनकोछूनेकीतमन्नालिएकितनेबच्... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   9:21am 18 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
कुछ तस्वीरें हम अपने पास नही रख सकते क्योंकि उन तस्वीरों को देखने का हक़ हम खो चुके होते हैं। कुछ सपनों की तस्वीरें नही बनाई जा सकती क्योंकि उनका कोई आकार नही होता। ऐसे में सिर्फ़ एक ही ज़रिया बचता है उन सबको देखने का और वो हैं बंद आँखें।जिन्हें हम खुली आँखों से सबके सामने ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   12:00pm 9 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
विकसित और विकासशील बनने की होड़ के बीच मैंने खोजी बनना चुना। जहाँ लोग बातें बनाना सीख रहे थे वहीं मैं चुप रहकर बातों के मतलब खोजने में लगा रहा। जब आगे बढ़ने के लिए लोग आवाज़ को ताकत बना रहे थे तब मैं ख़ुद में सुनने की क्षमता को विकसित करने में लगा हुआ था।ग़ुस्सैल और झल्लाई हुई... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   6:58am 5 Jan 2021 #
Blogger: Amit Mishra
दुःखों का कोई तय ठिकाना नही होताहम सुख ढूँढ़ते हैं, दुःख तक पहुँच जाते हैं ।सुख बंजारे हैं भटकते रहते हैंदुःख जगह ढूँढ़ते हैं और बस जाते हैं ।सुख के दिन छोटे हुआ करते हैंदुःख के हिस्से लंबी रातें हैं ।हम सुख में कितना कुछ भूलने लगते हैंदुःख आते ही सब कुछ पहचानते हैं ।सुख ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   11:32am 27 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सपने तब तक आकर्षक होते हैं जब तक वो पूरे ना हो जाएं और जो सच हो जाए वो सपना कैसा।ये बात सच है कि पार्क की बेंच पर बैठे हुए तुमने अपना सिर मेरे कंधे पर झुका दिया था और तुम्हारे नर्म हाथों को अपने हाथों में लेते हुए मैंने हमेशा के लिए उन्हें थामने का वादा किया था। पर मैं अपने ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   12:00pm 25 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
जब तक हम साथ थे तब तक तो तुमने कभी इतनी ख़ूबसूरत कविताएं नही लिखीं और जहाँ तक मैं समझती हूँ कि मुझसे पहले और मेरे बाद अभी तक कोई और ऐसा नही आया जिसे सोचकर तुम कविताएं लिखते हो (बातों ही बातों में उसने मुझसे सवाल किया)मैं जो पिछले दस मिनट से उसे अपलक निहारे जा रहा था (अब क्यों... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   11:30am 11 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सड़कें हमें कहीं नही पहुँचातीहम सड़क पर चलते हैं और गलत जगह पहुँच जाते हैं।दुःख भी हम तक चल कर नही आतेकुछ अलग होता है और हम दुःखी हो जाते हैं।हम किसी को याद नही करतेपर कुछ लोग याद आ जाते हैं।भूलने का कोई फॉर्मूला नही होताजिसे हम सोचते नही उसे हम भूल जाते हैं।अमित 'मौन'P.C.: GOOGLE... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   11:30am 7 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
पुरानी किताबों के पन्ने पलटते हुए एक मोरपंख हाथ लगा। उसे देखते ही मन जैसे ख़ुद बख़ुद फ्लैशबैक में चला गया। ये फ़्लैशबैक शब्द मैंने पहली बार फिल्मों में सुना था और वो फ़िल्म भी शायद इस मोरपंख को देने वाले के साथ ही देखी थी।अचानक ये मोरपंख वाला किस्सा याद आया। किसी ने कहा था ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   11:30am 3 Dec 2020 #
Blogger: Amit Mishra
सुख और दुःख एक सिक्के के दो पहलू हैं। पर विडम्बना ये है कि कभी कभी हमारे हिस्से वो सिक्का आता है जिसके दोनों पहलू में दुःख ही छिपे होते हैं।ऐसे में भाग्य का सिर्फ़ इतना महत्व होता है कि वो सिक्के को उछालने के बाद ज़मीन पर गिरने ही ना दे।मैं अपने जीवन में सिर्फ़ इतना भाग्यशा... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   11:22am 28 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
चलते चलते अचानकरास्ता बदल लोगेतो भुलक्कड़ लगोगे।दोस्तों को देखोगेऔर मुँह फेर लोगेहर पल तन्हा रहोगे।किताबें खोल के बैठोगेऔर कुछ नही पढ़ोगेतो अनपढ़ दिखोगे।सुबह शाम बिना वजहकिसी भी गली भटकोगेतुम आवारा बनोगे।साइकल खड़ी रहेगीऔर तुम पैदल चलोगेवक़्त बर्बाद करोगे।कितना क... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:02pm 20 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
तुमने भूख लिखीकिसी भूखे ने नही पढ़ीभूखे को रोटी चाहिए कविता नहीकहो रोटी दे सकते हो क्या?तुमने बेरोजगारी लिखीवो किसी काम की नहीआदमी को काम और पैसे चाहिएकाग़ज पर छपी कविता नहीकहो काम दे सकते हो क्या?तुमने व्यंग्य लिखापर किसी को हँसी नही आईसुधार हँसी ठिठोली से नही आतेमिल ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   11:38am 9 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
क्या बात हुई वो बात कहोआओ बैठो और बात करोहैं नाज़ुक लब क्यों सिले हुएअब शिकवों की बरसात करो।जो बीत गया वो जाने दोबातों को बाहर आने दोइस मन का बोझ उतारो भीकर लो गुस्सा और ताने दो।यूँ चुप रहने से क्या होगाघुट कर सहने से क्या होगाअब कह भी दो ये बिन सोचेआख़िर कहने से क्या होगा... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:10am 2 Nov 2020 #
Blogger: Amit Mishra
मुझे शुरू से ही ख़ामोशियों से बड़ा लगाव था और तुम्हें चुप्पियों से सख़्त नफ़रत थी। हमारे बीच हर बार हुई घंटों लंबी बातचीत में सबसे ज्यादा योगदान तुम्हारा ही हुआ करता था। माँ-बाबा से मिली डाँट, भाई से हुई नोक-झोंक और टीचर से मिली शाबाशी से लेकर सहेलियों के साथ हुई कानाफूसी त... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   7:31am 21 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
एक बात के कई मतलब निकालने वाली इस दुनिया ने कई बार उन शब्दों के भी मतलब निकालने चाहे जिनका अर्थ समझाने के लिए शब्द बन ही नही सके। कई बार हम समझ ही नही पाते कि कुछ अर्थों को शब्दों से नही भावनाओं से समझा जाता है।हम बहुत ख़ुश होते हैं तो ख़ुशी बयान नही कर पाते और दुःखी होते हैं... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   7:05am 7 Oct 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी ये जीवन एक आखेट की भाँति प्रतीत होता है और मैं ख़ुद को एक असफल आखेटक के रूप में पाता हूँ। मेरी चाहतें, मेरी ख़्वाहिशें, मेरा लक्ष्य एक मृग की भाँति है। एक ऐसा मृग जो दिखाई तो देता है पर जब मैं उसे पकड़ने जाता हूँ तब वो गायब हो जाता है। मैं वर्षों से उसके पीछे भाग रहा हूँ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:18pm 27 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
कभी कभी लगता है कि अब आगे बढ़ जाना चाहिए। अब यहाँ रुकने का कोई औचित्य नही है। ऐसा कुछ नही है जिसके लिए रुका जाए। मैं गठरी बाँध कर आगे बढ़ने ही वाला होता हूँ कि एक ख़्याल आता है जो कहता है कि अगर तुम वापस आयी और मैं यहाँ ना मिला तो क्या होगा, तुम क्या सोचोगी, कहीं तुम मुझे गलत तो न... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   12:07pm 12 Sep 2020 #
Blogger: Amit Mishra
आज खोया आसमां हैकाले मेघों से घिरा हैरोक दो इन बारिशों कोडूबी जाए अब धरा है।आँसुओं की उठती लहरेंनयन का सागर भरा हैशूल बन कर चुभती यादेंघाव अब तक वो हरा है।और फ़िर ऐसे समय मेंआ बसी हो तुम हृदय मेंअस्त होती हैं उम्मीदेंकोई रुचि है ना उदय में।घटती साँसें पूछे मुझसेवक्त कि... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   10:53am 24 Aug 2020 #
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