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Blog: हमसफ़र शब्द

Blogger: sandhya arya
जुनूने-तख़्त पर बैठा रहा वो सजाते रहे, सँवारते रहे ख़ामोशी में आहट इसके टूट जाने की रही यक़ीन मानो दोस्त जब भी पाँव ज़मीन पर रखा कुछ-ना-कुछ टूटता रहाबहुत मुश्किल से, होश को संभाला है छोड़ दिया है अब, नशेमन होना या रब तेरे आग़ोश में ना ज़मीन के रहे और ना ही आसमान के भटके बहु... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   4:38pm 11 Apr 2021 #
Blogger: sandhya arya
जुनूने-तख़्त पर बैठा रहा वो सजाते रहे, सँवारते रहे ख़ामोशी में आहट इसके टूट जाने की रही यक़ीन मानो दोस्त जब भी पाँव ज़मीन पर रखा कुछ-ना-कुछ टूटता रहाबहुत मुश्किल से, होश को संभाला है छोड़ दिया है अब, नशेमन होना या रब तेरे आग़ोश में ना ज़मीन के रहे और ना ही आसमान के भटके बहु... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   4:38pm 11 Apr 2021 #
Blogger: sandhya arya
चाहो तो ख़ुशबू एहसासऔर चाँद बना दो तुमसे होकर गुज़र जाऊँ और तुम एहसास ख़ुशबू  और चाँद से भर जाओ ना ‘तुम’ जिस्म और ना ‘मैं’जिस्महमारा खोना क्या और पाना क्या  नदी और पुल का प्रेमईश्वरीय प्रेम है ।... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   6:29am 8 Jan 2021 #
Blogger: sandhya arya
उदासदिनोंमेंकाग़ज़परउँगलियाँकाँपनेलगतीहैं समंदर बनकर आँखेंडूबजातीहैं होंठकुछकहनेसेपहलेकपकपाजातेहैं औरआवाज़किसीबर्फ़केतूफ़ानसेघिरजातीहै सिर्फ़औरसिर्फ़आकाशकीतरफ़देखतीहैंआँखें किबेसुधसन्नाटापसरामिलताहैदिनों,महीनोंऔरवर्षों।कईबारकुछ... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   3:03pm 7 Nov 2020 #
Blogger: sandhya arya
जब गरज थी,तब सबबड़ी ही ख़ुशी से मिलेख़्वाहिश पूरी हुईउसके दरवाज़े परवह मसीहा ना थाएक ईमानदार बेटा थादादा जी का गरज पूरी हुई सब चलते बनेअपने दबड़े मेंऔर बुद्धिमान बन गएशालीन और कुलीन भीऔर ना जाने क्या क्या दादा जी आहत थे तमाशे सेउनके विश्वास के ख़ज़ाने कोउनके बे... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   5:09am 18 Mar 2020 #
Blogger: sandhya arya
रातअंधेरी जगमगतारा सुबहकोभुला चाँददुलारा भोरहुईतब पनघटलौटे किसनेफोड़ी गगरीतेरी सूरजनिकला दिन चले तब  दुपहरी प्यासी छांवबेचारी शामआईहै नाँवकिनारे लहरोंकीठोकर धरतीखाती मेराखोना तेरापाना पलभरकाहै खेलखिलौना जीवनचक्रपर ब... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:17am 31 Jan 2020 #
Blogger: sandhya arya
कईबारदुनिया  मेरेदादाजीकेबाज़ारजितनासिमटीनज़रआतीहै ऐसालगताहैकि उसबाज़ारमेंसबतरहकेलोगहैजैसेकिटीवीपरहैं दूसरेदेशोंमेंहैंजैसाकीफ़िल्मोंमेंहैआदिआदि कुछलोगहैंजोउसबाज़ारमेंपहचानबनानेमेंलगेहैं तोकुछलोगदुकानलगानेमें तोकुछलोगपूरेबाज़ा... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:51am 23 Jan 2020 #
Blogger: sandhya arya
एकबचपन जोआजफिरफिरमिलताहै ख़ालीवक़्तमें औरमिट्टीरूहमेंघुलतीहै जबसपनोंसेभररहीथीपिताजीडूबेहुएथे दादाजीबाहर आरहेथेतबएकसाथ वक़्तकहीसुंदरथा क़रीबथा औरदूरहोताजारहाथा आजभीवक़्त ख़्वाबहै पासपासहै दूरहोकरमुस्कुरारहाहैफिरकिसेपाना ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   1:29pm 14 Jan 2020 #
Blogger: sandhya arya
एकबचपन जोआजफिरफिरमिलताहै ख़ालीवक़्तमें औरमिट्टीरूहमेंघुलतीहै जबसपनोंसेभररहीथीपिताजीडूबेहुएथे दादाजीबाहर आरहेथेतबएकसाथ वक़्तकहीसुंदरथा कही क़रीबथा और कही दूरहोताजारहाथा आजभीवक़्त ख़्वाबहै पासपासहै दूरहोकरमुस्कुरारहाहैफिरक... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   1:29pm 14 Jan 2020 #
Blogger: sandhya arya
गुनाहधर्म का ग़लत मतलब निकालना हैइश्क़ आत्मा हैभौतिकता द्वैत के साथ आई हैजन्म और मृत्यु के बीच ख़त्म होगीक्षणभंगुर जिस्म परसामाजिक नाच की समय सीमा ज़िंदगी हैघुँट घुँट पीने सेप्यास की मिठासरूह तक पहुँचती हैपहाड़ी से फूटने वाला सोताउसके लिये हैयह यक़ीन उसे कौन देग... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   4:46pm 6 Jan 2020 #
Blogger: sandhya arya
हमारे मर्म मेंधरती और आकाश तत्व थातलाश उन बादलों की थीजिनके ना होने सेअकाल था औरकाल कल्वित लोग थेशब्ददर्द के पुकार थेरोकर थकते नहीं थेवे पुन: पुनर्जीवित हो जाते थेतूफ़ान में फँसे लोगआँख से नहींसिर्फ़ दिल से देख पाते हैं,साहबहम जिस जगह होते है वही खो जाते हैं ।... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   6:48pm 22 Nov 2019 #
Blogger: sandhya arya
तमाम यादों से बनीएक रात का सपनों ने उसे बाहर किया तबसमन्दर में लहरें बहुत तेजउठ-उठकर ठीठक रहीं थीं तबवही किनारे पर बैठी हुई बची जिन्दगी नेउसे नई सुबह का इंतजार करने को कहारौशन जहान मेंमाना की सितारे&n... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   11:12am 26 Aug 2019 #
Blogger: sandhya arya
घुप अंधेरे कोतलाशएक सितारे की थीपर वह हमेशा टूटता मिलाएक दीपक जलता हैरात भररौशन जमाने मेंकौन सा अंधेरा थाजो दीप से रौशन रहाहम बुझ जाये किमिट जायेये सवाल हमेशा दो तरफ़ा रहाजैसे रात के बाददिन या दिन&nbs... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:38am 19 Aug 2019 #
Blogger: sandhya arya
दुनिया की तमाम धर्मों के चेहरेअगर आकाश और धरती की तरह हो जायेतब भी हरे लहलहाते जमीन परगेहूं की बालियों मेंचांद का चेहरा होगाऔर उसकी पूजाइंसानियत बचाने के लिये हैइश्क अगर जिस्म हैतो रुह से निकलने वा... Read more
clicks 266 View   Vote 0 Like   7:45am 27 Jul 2019 #
Blogger: sandhya arya
हम अपने बाहरी और भीतरी अस्तित्व से ही नहीबल्कि उस समाज से भी बनें हैंजहां हमसब रहते हैंऔर जिसकी संरचना से बाहर होने की कोशिशएक छलावा हो सकती हैचाहे जिस रुप में साकार होपहचान तभी संभव हैजब तक सूरज ... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   3:25pm 10 Jul 2019 #
Blogger: sandhya arya
वह उन समस्त संभावनाओं कोबचा लेना चाहती थीजिनका अंत वर्षों पहले हो चुका थाऔर जिसके ना होने सेउथल पुथल मची थीऔर मानवीय संवेदना का चेहरा पूर्णत: परिवर्तित हो चुका थासंभावनाओं के गुणतत्व मेंवह सब कुछ थाजिससे हम और तुम बने थेनदी थीबयार थीरौशनी थावो तमाम पहाड़ थेजिसस... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   12:57pm 4 Jul 2019 #
Blogger: sandhya arya
धरती की सतह परजिस्म इंद्रियों का एक संग्रह भरऔर इसका नष्ट होनानई संभावनाओं को जन्म देना हैऔर आकाश के नीलेपन पररुह एक सफ़ेद बिंदी है! जब तक रौशनी हैउसकी सतह पर हरियाली हैपर शरीर का संबंधअंधकार से है... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   12:07pm 12 Jun 2019 #
Blogger: sandhya arya
आसमान से लगकरटीकता वजूद मेरा पर उसके पहलेजमीन नेहमें तोडा बहुत है यूं आये हो तोबरस भी जाओकाले साये काडेरा बहुत है गिनते हुये एहसासगिरते है जबऊंगलियों से छूटकरक्या कहेउन्हें जोडा बहुत है !... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   6:57pm 7 May 2019 #
Blogger: sandhya arya
लोटे में दुबका बैठा है समन्दरऔर लोटे को सब भूल गये हैं क्योंकि चेतना धुंधली है जिन औरतों ने अपने पति को परमेश्वर माना हैऔर चांद को चांदनी में देखा हैवे ईर्ष्या करती हैंचांदनी सेऔर कत्ल करती है अन्धेरे&... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   3:41pm 26 Apr 2019 #
Blogger: sandhya arya
हम बादल थे बरस गये पर जमीन सूखी रह गई तेरे समान के तह में दुनिया जहान सब था शरीर कुछ भी ना था हमारे लिये इक रुह की प्यास में हम जुदा रह गये ओंस थे घास पर और नमी आंखों की शब्द शब्द पिघले प... Read more
clicks 296 View   Vote 1 Like   3:10pm 15 Apr 2019 #
Blogger: sandhya arya
चिट्टियों ने बनाये हैघर मिट्टी के हे मानवतुमने तोड़े हैदिल चिट्टियों के वे काटते नही हैजंगलनही मिटातेसंस्कृतियों कोवे रौपते है दिलमिट्टी मेंहे मानव, तुमनेतोड़े है घरमिट्टियों के !... Read more
clicks 283 View   Vote 0 Like   9:06am 7 Apr 2019 #
Blogger: sandhya arya
अवसाद मेंजब आप टटोलते होजमीनजहां ठंडक और छांव मिलस केउसकी जगह आपकोकुछ नीले-पीले पत्तों वालीजमीन देखने को मिलेआप सांस लेना चाहोऔर ठीक उसी वक्तऊंच-नीच और उबड-खाबड जमीन परअपने आसपास के अधिकांश लोगों कोसिर्फ़&nb... Read more
clicks 284 View   Vote 0 Like   8:20am 22 Mar 2019 #
Blogger: sandhya arya
गुलशन से रुखसत हुईइस उम्मीद में किफ़ूल खिलेंगेंपर पत्थर परकब फ़ूल खिले हैंपांव जख्मी थेकांटे की सफ़र मेंजमीन का जो हिस्साउसके हिस्से में आयावह बंजर थाइंतजार में बैठी रहीएक नन्ही गौरैया कीजो खिंच लायेग... Read more
clicks 297 View   Vote 0 Like   4:41am 16 Mar 2019 #
Blogger: sandhya arya
बडे शहर मेंबडी बिमारियां निगलने लगी है इंसान कोबात आंखों से मुस्कुराने वाली लडकी की है जिसने अभीना गरमाहट देखी थी उगते सूरज काऔर ना ही चांद देखा था चांदनी कीबस यादों में रहने को मजबूर कर गईउन सभी लोगो को जो उसके अपनो में शामिल थे उसके मुस्कुराते होंठजब हाय और हेल... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   12:54pm 8 Mar 2019 #
Blogger: sandhya arya
बडे शहर मेंबडी बिमारियां निगलने लगी है इंसान कोबात आंखों से मुस्कुराने वाली लडकी की है जिसने अभीना गरमाहट देखी थी उगते सूरज काऔर ना ही चांद देखा था चांदनी कीबस यादों में रहने को मजबूर कर गईउन सभी लोगो को जो उसके अपनो में शामिल थे उसके मुस्कुराते होंठजब हाय और हेल... Read more
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