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Tag: मेरी गज़लें

Blogger: अमिताभ त्रिपाठी at रचनाधर्मिता...
सभी कहते हैं इसको ख़ुदकुशी हैभीड़ सी फिर यहाँ क्यूँकर लगी हैएक पल की किसी मीठी चुभन कादर्द क्यूँ ज़िन्दगी में लाजिमी हैलामकाँ, लाइलाज़, लापरवाइन ख़िताबों का हासिल आशिक़ी हैग़फ़लतों में तमाम हो जातीचार दिन भी कहाँ अब ज़िन्दगी हैहम सुकूँ की तलाश में अक्सरचैन दुश्वार ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:57am 14 Feb 2013 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी at रचनाधर्मिता...
ख़्वाब ही था ज़िन्दगी कितनी सहल हो जायेगीतुम जो गाओगे रुबाई भी ग़ज़ल हो जायेगीइतने आईनों से गुज़रे हैं यक़ीं होता नहींअज़नबी सी एकदिन अपनी शकल हो जायेगीमर्हले ऐसे भी आयेंगे नहीं मालूम थाउम्र भर की होशियारी बेअमल हो जायेगीहै बहुत मा’कूल फिर भी शक़ है मौसम पर मुझेतज्... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:32pm 17 Dec 2012 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी at रचनाधर्मिता...
दिल मुसाफ़िर ही रहा सूये-सफ़र आज भी हैहाँ! तसव्वुर में मगर पुख़्ता सा घर आज भी हैकितने ख्वाबों की बुनावट थी धनुक सी फैलीकूये-माज़ी में धड़कता वो शहर आज भी हैबाद मुद्दत के मिले, फिर भी अदावत न गयीलफ़्जे-शीरीं में वो पोशीदा ज़हर आज भी हैनाम हमने  जो अँगूठी से लिखे थे मिलकर... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   4:17pm 11 Dec 2012 #मेरी गज़लें
Blogger: अमिताभ त्रिपाठी at रचनाधर्मिता...
व्यर्थ की संवेदनाओं से डराना चाहते हैंसुन रहा हूँ इसलिये उल्लू बनाना चाहते हैंमेरे जीवन की समस्याओं के साये में कहींअपने कुत्तों के लिये भी अशियाना चाहते हैंधूप से नज़रे चुराते हैं पसीनों के अमीरकिसके मुस्तकबिल को फूलों से सजाना चाहते हैंमेरे क़तरों की बदौलत जिनक... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   5:18am 10 May 2012 #मेरी गज़लें
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