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Tag: नज़्म

Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
  तुमने बड़ी असभ्यता सेहमें घोषित कर दिया था असभ्यतुहारी इस घोषणा के साथ ही हैतुम बन गए थे सभ्यता के प्रतीकऔर फिर हमें असभ्य बताकरतुमने छीन लिए हमसेहमारे ही पहाड, जंगल और ज़मीनघोषित करके नदियों को पवित्रतुमने प्रतिबंधित कर दिया जल छूना तक हमारे लिए तुमने न केवल व्यं... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   5:43pm 4 Aug 2018 #नज़्म
Blogger: अनामिका at कविता...
अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहींउसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद हैकर भी लूँ नींदों से वाबस्ताख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है  रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जोघूँट पानी का न उतरा हद हैकर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमनेहुए फिर भी बदनाम हद हैदो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के चार दिनबाक... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:37pm 9 Nov 2017 #नज़्म
Blogger: Manav Mehta at मानव 'मन'...
बहुत देर हुई,होंठों पे नज़्म का ज़ायका महसूस किएख़ामोशी कब्र सी ना जाने कब से बिखरी है.. रातें देर तक ऊँघती हैं,पड़ी रहती है छत पर सितारे ओढ़े मगर इन सितारों में भी अब कोई चेहरा नहीं बनता कोई नज़्म कोई ख़याल दिल में नहीं आता |दिन बूढ़ा सा खस्ता सी हालत में आता है .. चला जाता है मायूस स... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   11:02am 28 Feb 2017 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
तुम हंसती अच्छी लगती हो। कुछ फूल है मेरे दामन मेंमैं सोचता हूँ इस सावन मेंतुमको ये अर्पित कर दूंगा मन अपना समर्पित कर दूंगा।तुम हंसती अच्छी लगती होतुम फूल सी मुझको दिखती होतुम देवी हो सुंदरता कीमुझे परियों सी तुम लगती हो।जब फूल खिलेंगे बागों मेंतब आ जाना तुम बाहो... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   11:56am 15 Feb 2017 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
ओ सुजाता ! Gaanu Prasadiमै तकता हूं तेरी राहऔर चखना चाहता हूंतेरी हाथ की बनी खीरदेख मै नही बनना चाहता बुद्धन ही पाना चाहता कैवल्यमै तो बस चाहता हूँ छुटकारादुखो से अपनेदेवी !दान दोगी न मुझेएक कटोरा खीर कान सही बुद्ध की मेरे लिए दूसरी सुजाता बनके। --सुधीर मौर्य ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:14pm 30 Dec 2016 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
देख लड़की मैं जानता हूँतूँ देखा करती थी कनखियों से किसी को अपनी छत पे टहलते हुएहाथो में कोई खुली किताब लिएदेख लड़की मैं जानता हूँ तूँ कामना करती थीमुरादों के दिन की दिसम्बर की कंपकपाती रात की तन्हाई मेंअपनी सांवली गुदाज़ उंगलियों सेअपनी कमर से इज़ारबंद खोल केदेख लड़... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:10am 25 Dec 2016 #नज़्म
Blogger: अनामिका at कविता...
पिघलते क़तरों में जो लम्हा है जीयाउन लम्हों की क़सम मैंने ज़हर है पीया -कोई वादा नहीं था इक़रार-ए-बयाँ  काकानों से उतर के वो दिल में बसा था ॥अश्क़ों से लबालब ये वीरान सी आँखेंग़म की ख़ुमारी और बोझल सी रातें -दीदार-ए-यार कभी सुकूँ-ए-दिल थादेके दर्दे इश्क़ तेरे साथ ही चला था ॥नालिश ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   3:03am 23 Aug 2016 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
देखो मेरे प्यारे कश्मीर बुरहान वानी से  दहशतगर्द जब - जब तुझे लहूलुहान करेंगे तब - तब तेरी रक्षा को सेना के जवान मुस्तैद मिलेंगे देखो मेरे प्यारे कश्मीर तेरी प्यारी वादियों को हरा भरा रखने के लिए कभी मेजर सोमनाथ तो कभी कर्नल रॉय अपना रुधिर बहाते रहेंगे देखो मेरे प्य... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   5:00pm 13 Jul 2016 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
अब वो नहीं गाती  वो अपमानजनक लोकगीत जिनमे उन्हें दी जाती है गालियाँ अब वो गाती है सुर और ताल में अपने मन की भाषा और करती है खुद से वादा अपने भीतर न आने देने के लिए कोई हीनभावना अब वो पहनती है अपनी मर्ज़ी के लिबास अपनी मर्ज़ी से कभी साड़ी, कभी जींस और कभी स्कर्... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:06am 18 Mar 2016 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
जिन्हे हम और वो खुद कहते है दलित उनके टोले की लड़कियाँ अपने कच्चे घर के आँगन में गाती है लयबद्ध स्वरों में 'ये बाम्हन का छोरा न माने रे'मैं सुनता हूँ ये लोकगीत और सोचता हूँ रात दिन वो कौन सी लड़की रही होगी इस टोले की जिसके होठों से दर्द बनके निकले होगे ये स्वर कुचले जाने के ब... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:01pm 6 Feb 2016 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
ओहबहुतबुराहुआ।सारिकाअपनीमाँकेपासबैठतेहुएबोली।परइसमेंकोईक्याकरसकताहै।येभाग्यतूउनकाखुदकाचुनहुआहै।अगरपार्टिशनकेवक़्तट्विंकलकेग्रैंडफादरइंडियाआजातेतोऐसाकुछभीनहोता।येतोपकिस्तानकीरोज़कीन्यूज़होगयीहैहुंडीलड़कीकाअपहरणकरकेजबरनमुस्लिमलड़केकेसाथव्या... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   6:28pm 24 May 2015 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
तुम साइबेरिया मेंलगाते हो यातना शिविरबिना युद्ध के हीजान ले लेते करोडो कीइज़राईल की आत्मरक्षक करवाई कीकरते हो भर्तसनाअपने ही देश कोडायन बताने वालो काकरते हो समर्थन  तुम कहते होअपने को कामरेडऔर गर्व करते हो।--सुधीर मौर्य... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   5:53pm 19 Apr 2015 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
उसने कहा था एक दिन कैसे रखोगे तुम याद मुझको मेरे गैर होने के बाद मै लिखता हूँ अपनी नज़्मों में उसका ही नाम खामोश लफ्ज़ो में और मेरी नज़्में सबूत है इसका मैं याद करता हूँ उसेअक्षर अक्षर। --सुधीर मौर्य... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   4:58pm 4 Dec 2014 #नज़्म
Blogger: रजनीश ‘साहिल’ at ख़लिश...
शहर में आजकल झगड़ा बड़ा हैकिसी की आँख में तिनका पड़ा हैबहुत कमज़ोर आँखें हो गई हैंअजब ये मोतिया इनमें मढ़ा हैकभी आकर हमारे पास बैठोपसीना ये नहीं, हीरा जड़ा हैकोई कैसे उसे अब सच बतायेइदारा झूठ का जिसका खड़ा हैवही दिखता है जो वे चाहते हैंनज़र पे उनकी इक चश्मा चढ़ा हैबटेरों की भी य... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   10:49am 31 Oct 2014 #नज़्म
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
बारहा हुआ यूँ कि ज़ेहन में दबे लफ्ज़ निकाल दूँ बाहर खाली कर दूँ भीतर सब रूह पर पड़े बोझ को कर दूँ कुछ हल्का लिखूं वो सब अनचिन्हा जो नहीं चिन्हित कहीं और सिवाय इस मन के ...पर हर बार लिखे जाने से पहले और बाद के अंतराल में  लौट आते हैं कुछ लफ्ज़ सतह को ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   7:02am 23 Aug 2014 #नज़्म
Blogger: RAHUL MISHRA at खामोशियाँ...!!!...
बदल रहा मौसम अब कुछ होने को है,जो हुआ था कभी अब फिर होने को है।यादें ठहरी कहाँ कुलाचे मार रही अब,जिंदगी सारी हदें फिर पार करने को है।पलकों की छांव में सपनों को बिठलाए,ये मन एक बार फिरफलक छूने को है।©खामोशियाँ-२०१४... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   8:25pm 9 Jun 2014 #नज़्म
Blogger: RAHUL MISHRA at खामोशियाँ...!!!...
©खामोशियाँ-२०१४//मिश्रा राहुल ... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   1:37am 7 Jun 2014 #नज़्म
Blogger: रजनीश ‘साहिल’ at ख़लिश...
ज़िद पे अपनी वो अड़े हैं, हद्द हैहम इबादत में पड़े हैं, हद्द हैलाख समझाने की कोशिश हो चुकींचिकने लेकिन वो घड़े हैं, हद्द हैजिनको बहा देने थे सारे बाँध वोअश्क़ मोती से जड़े हैं, हद्द हैबेतरह टूटे हैं कई-कई बार हमहाँ मगर अब भी खड़े हैं, हद्द हैहाथ में है चाँद लेकिन पाँव तोअब भी मिट्... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   12:31pm 10 Mar 2014 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
 शफक की धुप मेंमे जाकर छत पर तनहा खड़ा हो गयापड़ोस की छत पेबाल बनाती हुई लड़कीमुस्करा दीमैंने उसकी जानिबजब कोई तवज्जो न दीतो वो उतर करनिचे चली गईकाश कुछ साल पहलेमें एसा कर पाताकिसी की जुल्फों की असीरी से खुद को बचा पाताशायद तब ये शफक ये शब् मेरे तनहा  न होतेया ... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   4:57pm 26 Dec 2013 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
तेरे होंठ की सुर्खी ले-ले करहर फूल ने आज किया सिंगारतेरे ज़ुल्फ़ की खुशबु मौसम मेंतेरे दम सेकालियों पे है निखारजिस महफ़िल में तुम आ जाववहां एक सुरूर आ जाता हैमेरे शानो पे जब सर रखती होमुझे खुद पे गुरुर आजाता हैकविता संग्रह 'हो न हो'से..Sudheer MauryaGanj Jalalabad, Unnao... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   4:02pm 28 Nov 2013 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
अभीतकमहफूज़हैं रखेफाइलोंमेंवोमेरी सबमेरेहरएकख़तका दियाहुआजवाबतेरा...महकतीडायरीमेरी अबतलकअलमारीमें रखीजिसकेपन्नोंमेंरखाथादियाहुआगुलाबतेरा...मेरेआँखोंकेआगे हीतेरेसुर्खपहिरन थेअभीतकयादहै मुझकोदूरजानाशिताबतेरा...सबबठुकरानेकामुझकोतलाशाह... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   3:52pm 16 Nov 2013 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
इन दिनोंपलाश सा खिला हैचेहरा उसका...कोयल सी कुहक हैहोठों पे उसके...झील सी आँखें करती हैंअठखेलियाँ उसकी...खिलने लगी हैचंद्रिमा पूनम कीगालों में उसके...हिरन सी लचक हैचाल में उसकी...लगता है जेसेअवतरित हुआ है मधुमासशरीर में उसके...हो न हो...चड़ने लगा है उसपे                ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:54pm 29 Oct 2013 #नज़्म
Blogger: सु-मन (Suman Kapoor) at बावरा मन...
शाम की दहलीज पर जब उदासी देती है दस्तक खाली जाम लेकर दौड़ आते हैं कुछ लफ्ज़ मेरी ओर भर देती हूँ कुछ बेहिसाब से पल छलकने लगता है भरा जाम लेती हूँ एक घूँट गहरी हो जाती है उदासी बिखर जाते हैं लफ्ज़ बन जाती हैइक उदास नज़्म ....!!सु..मन ... Read more
clicks 235 View   Vote 0 Like   10:32am 5 Oct 2013 #नज़्म
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
मुझे देख करउनके होठों पेतैर गई, वही मुस्कानजो बचपन से उनकी सूरत की सहेली रही...और सच पुछो तो यही मेरे जीवन की सबसे बड़ी पहेली रही..... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   2:53pm 26 Sep 2013 #नज़्म
Blogger: स्वप्निल at रौशनी का जज़ी...
दरीचे बंद कर डाले हैं सारेमगर बस इस क़दर कोई नज़ारानज़र आये न बाहर सेकोई झांके तो कुछ भी देख ना पायेमगर थोड़ी जगह मिल जायेमुट्ठी भर हवा को आने जाने कीन सुन पाये कोई भी शख्स ये आवाज़ गोली कीतो मर जाने पे जब ये जिस्म सड़ने पर तुला होहवा के हाथ लोगों तक ख़बर पहुंचेलगा के कुण... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   8:08am 30 May 2013 #नज़्म
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