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Tag: किताब

Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
एक और पन्ना कोशिश, माँ को समेटने की से ... आपका प्रेम मिल रहा है इस किताब को, बहुत आभार है आपका ... कल पुस्तक मेले, दिल्ली में आप सब से मिलने की प्रतीक्षा है ... पूरा जनवरी का महीना इस बार भारत की तीखी चुलबुली सर्दी के बीच ...  लगा तो लेता तेरी तस्वीर दीवार पर जो दिल के कोने वाले ह... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   1:27am 6 Jan 2020 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
आज अचानक ही उस दिन की याद हो आई जैसे मेरी अपनी फिल्म चल रही हो और मैं दूर खड़ा उसे देख रहा हूँ. दुबई से जॉब का मैसेज आया था और अपनी ही धुन में इतना खुश था, की समझ ही नहीं पाया तू क्या सोचने लगी. लगा तो था की तू उदास है, पर शायद देख नहीं सका ...  मेरे लिए खुशी का दिन ओर तुम्हारे लिए ...... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   1:57am 17 Dec 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” का एक अन्श ... अक्सर जब बेटियाँ बड़ी होती हैं, धीरे धीरे हर अच्छे बुरे को समझने लगती हैं ... गुज़रते समय के साथ जाने अनजाने ही, पिता के लिए वो उसकी माँ का रूप बन कर सामने आ जाती हैं ... ऐसे ही कुछ लम्हे, कुछ किस्से रोज़-मर्रा के जीवन में भी ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:39am 18 Nov 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” में सिमटा एक पन्ना ...तमाम कोशिशों के बावजूद उस दीवार पे तेरी तस्वीर नहीं लगा पाया तूने तो देखा था चुपचाप खड़ी जो हो गई थीं मेरे साथ फोटो-फ्रेम से बाहर निकल के एक कील भी नहीं ठोक पाया था    सूनी सपाट दीवार पे हालांकि हाथ चलने स... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   4:26am 11 Nov 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
भाटे के  इन्तजार में कई पहर शांत बैठ जाता है पानी उतरता है तुरन्त रेत पर सब कुछ बहुत साफ लिख ले जाता है फिर ज्वार को उकसाने के लिये चाँद को पूरी चाँदनी के साथ आने के लिये गुहार लगाता है बोझ सारा मन का रेत में फैला हुआ पानी चढ़ते ही जैसे उसमें घुल कर अनन्त में फैल जाता है ना ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   2:39pm 7 Sep 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
आभार पाठक 'उलूक टाइम्स'पर जुलाई 2016 के अब तक के अधिकतम 217629 हिट्स को अगस्त 2019 के 220621 हिट्स ने पीछे छोड़ा पुन: आभार पाठकसुना गया है अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है हर पन्ना जिसका झक्क है सफेद है और साफ है सभी लिखते हैं आज कुछ ना कुछ बहुत बड़ी बात है कलम और कागज ही नहीं रह... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   4:35pm 31 Aug 2019 #किताब
Blogger: zeashan zaidi at Hindi Science Fiction हिंद...
विज्ञान कथा संग्रह 'प्रोफेसर मंकी'का पेपरबैक संस्करण प्रकाशित हो चुका है. जिसमें  मंकी, नादान मुजरिम, क़ैदी ऊर्जा जैसी कई रोचक व लोकप्रिय विज्ञान कथाएं संकलित हैं. अधिक जानकारी के लिए इमेज पर क्लिक करें .... Read more
clicks 245 View   Vote 0 Like   2:33pm 31 Dec 2018 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
यूँ ही पूछ बैठा गणित समझते हो जवाब मिला नहीं कभी पढ़ नहीं पायाहिसाब समझते हो जवाब मिला वो भी नहीं गणित में कमजोर रहा हमेशा दिमाग ही नहीं लगायामुझे भी समझ में कहाँ आ पाया गणित भी और हिसाब भी खुद गिनता रहा जिन्दगी भर बच्चों को घर पर सिखाता रहा पढ़ाना शुरु किया वहाँ भी पीछा नह... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   1:30pm 16 Oct 2018 #किताब
Blogger: विजय राज बली माथुर at विद्रोही स्व-...
जी हाँ पत्थर के टुकड़ों को देवी - देवता की मान्यता देकर समाज की जमीन को कब्जे में लेकर फिर कोई धंधा करना ऐसे लोगों का उद्देश्य होता है। बुद्धि, ज्ञान और विवेक से रहित अपने जीवन से डरे हुये लोग ऐसे अवैद्ध कर्म करने वालों के मंसूबे पूरे करने में मदगार बनते हैं ------विज्ञान और ध... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   3:48am 19 Sep 2018 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
दरवाजा खोल कर निकल लेना बेमौसम बिना सोचे समझे सीधे सामने के रास्ते को छोड़ कर कहीं मुड़ कर पीछे की ओर ना चाहते हुऐ भी जरूरी हो जाता है कभी कभी जब हावी होने लगती है सोच आस पास की उड़ती हवा की यूँ ही जबर्दस्ती उड़ा ले जाने के लिये अपने साथ लपेटते हुए अपनी सोच के एक आकर्षक खोल में ... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:31pm 13 Feb 2018 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
अपने ख़त का जवाब ले लोइन हाथों से गुलाब ले लोचाहो मिलना कभी जो मुझ सेदिल की मेरे किताब ले लोअनजाने ही दिए थे जो फिरउन ज़ख्मों का हिसाब ले लोमिलने वाला बने न दुश्मनचेहरे पर ये नकाब ले लोअमृत सा वो असर करेगीउनके हाथों शराब ले लोकाटेंगे ये सफ़र अकेलाइन आँखों से ये ख्वाब ले लो... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   11:11am 14 Nov 2016 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
ये तय है जो भी करेगा कोशिश लिखने की समय को समय पर देखते सुनते समय के साथ चलते हुए समय से ही मात खायेगा लिखते ही हैं लिखने वाले समझाने के लिये मायने किसी और की लिखी हुई पुरानी किताब में किसी समय उस समय केउसके लिखेलिखाये के समझते हैंकरेंगे कोशिश उलझने की समय से समय पर ही आम... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   5:13pm 4 Sep 2016 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
मत पूछ लेना कि क्या हुआ है अरे कुछ भी नहीं हुआ है जो होना है वो तो अभी बचा हुआ है हो रहा है बस थोड़ा धीरे धीरे हो रहा है इस सब के बावजूद भी कहीं एक बेवकूफी भरा सवाल मालूम है तेरे सिर में कहीं उठ रहा है अब प्रश्न उठते ही हैं साँप के फन की तरह पर सभी प्रश्न  जहरीले नहीं होते हैं ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   4:57pm 7 Feb 2015 #किताब
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
कुछ दिन पहले मैंने एक उपन्यास खत्म किया। नियम से पढ़ने के कारण उसे सप्ताह भर से अधिक समय नहीं लगा। कुल पन्ने 630 थे। कहानी की... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   12:34pm 27 Jan 2015 #किताब
Blogger: Manav Mehta at मानव 'मन'...
किताबें धूल फांकती है शेल्फ परअरसा हो गया है उन्हें पढ़े हुए मैं नहीं खोलता अब उनके वर्क –कि अब उन लफ्ज़ों में ठहरता नहीं है मन रात जब मद्धम करके रौशनी को अपनी टेबल पर बैठता हूँ तो उन किताबों से खुद ब खुद निकल कर आ बैठते हैं कुछ अल्फाज़ मेरे ज़ेहन में बहुत शोर करती है लफ्ज़ों क... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   10:52am 15 Sep 2014 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
वो गुलाब पौंधे पर खिला हुआ नहीं था पुरानी एक किताब के किसी फटे हुऐ अपने ही एक पुराने पेज परचिपका हुआ पड़ा था खुश्बू वैसे भी पुराने फूलों से आती है कुछकहीं भी किसी फूल वाले से नहीं सुना था कुछ कुछ बेरँगा कुछ दाग दाग कुछ किताबी कीड़ो का नोचा खाया हुआ बहुत कुछ ऐसे ही कह दे रहा थ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:33pm 18 Jun 2014 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
किताबें सब केनसीब में नहीं होती हैं किताबें सब के बहुत करीब नहीं होती हैं किताबें होने से भी कुछनहीं होता है किताबों में जो लिखा होता है वही होना भी जरूरी नहीं होता है किताबों में लिखे को समझना नहीं होता है किताबों से पढ़ कर पढ़ने वालो से बसकह देना ही होता है किताबों को खर... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   2:44pm 11 May 2014 #किताब
Blogger: कुमार हर्ष at khadanja...
हिन्दी ब्लॉग(चिट्ठा) जगत में सब लेखक है... कुछ की किताब छप चुकी है और कोई लिख रहा है......... पर मै अभी सिर्फ प्लानिंग कर रहा हूँ कि क्या लिखू और कैसे लिखू.........एक बात मेरी सम्हज में आ चुकी है कि लिखना सब के बस की बात नहीं है... शायद आप के लिए नहीं होगा पर मेरे जैसे यू पी बोर्ड से विज्ञा... Read more
clicks 234 View   Vote 0 Like   12:44pm 6 Aug 2013 #किताब
Blogger: कुमार हर्ष at chashmese...
हिन्दी ब्लॉग(चिट्ठा) जगत में सब लेखक है... कुछ की किताब छप चुकी है और कोई लिख रहा है......... पर मै अभी सिर्फ प्लानिंग कर रहा हूँ कि क्या लिखू और कैसे लिखू.........एक बात मेरी सम्हज में आ चुकी है कि लिखना सब के बस की बात नहीं है... शायद आप के लिए नहीं होगा पर मेरे जैसे यू पी बोर्ड से विज्ञा... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   12:44pm 6 Aug 2013 #किताब
Blogger: कुमार हर्ष at khadanja...
आज सुबह से मेरे कमरे में ढोल-मंजीरे के साथ हिमेश से भी बुरी आवाज़ वालो के रामचरितमानस के पाठ की आवाजे आ रही है. मेरे सर में दर्द होने लगा है. मुझे समहज में नहीं आता की दिन-रात भोपू पर तुलसीदास की लिखी लाइनों को चिल्लाने से क्या होगा और ये लोग करना क्या चाहते है????  कभी कबीर न... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   1:29pm 27 Jan 2013 #किताब
Blogger: RAHUL MISHRA at खामोशियाँ...!!!...
एक अर्शे से रखी थी दराज के कोने में .... वो आयातों की किताब .. !!आखिर क्या जफा हुई पकड़ न सका ...वो आयातों का सैलाब .. !!इन मुक्कादारों ने भी जाने कितने खीरोचे दी ए दोस्त ,ज़ेहन में लगे महीन धागों को लहू बना गया वो ख्वाब .. !! देख कैसे पालथीमार के बैठे हैं हर्शू ग़मों ... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   9:27pm 12 Oct 2012 #किताब
Blogger: RAHUL MISHRA at खामोशियाँ...!!!...
आज जा पंहुचा पुराने एक पुस्तक मेले में बड़े कम चेहरे थे ... अवाक रह गया मैं यह देख कर ... इतनी दुर्गति हो चुकी हैं साहित्य कि ... कभी हलचल जमती थी इन्ही मेलो में ... अब क्या बताए कितना आगे पहुच चूका ये समाज कि पूरे लाइब्रेरी को एक फोल्डर में समेटे बैठा हैं .. हमारे मित्र विभव कुमार ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   4:46pm 12 Oct 2012 #किताब
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