POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: अनुगूँज (Anugoonj)

Blogger: Rajeev Ranjan Giri
सूखे पत्तों के ढेर में तब्दील हुए ख्वाब मेरेजला  दूँ  या सहेज लूँ  बोरे  में भर करशायद काम आ जाएं किसी नम रात मेंअतीत की रोटियाँ सेकने के लिएया कभी जला कर इन्हेंठंडे  पड़े रिश्तों  में नई गर्मी भर सकूँया उड़ा  दूँ हवा में की ये बिखर जाएँ हर ओरजैसे अभी अभी टूट... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   11:06am 14 Apr 2013 #अतीत
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
नए लोग हैं , नया शहर हैनया ये वायु आवरण हैनयी ज़िन्दगी , नए तरीकेनयी सोच का आडम्बर हैये सब तो हैं मेरे साथ !!मैं अकेला नहीं हूँ ...भीड़ बहुत है, लोग कई हैंअनजाने भी और दोस्त कई हैंपर नहीं लेता कोई खबर किसी कीखुद से ही करनी पड़ती है बातमैं अकेला नहीं हूँ ....सवाल कई हैं, जवाब नहीं ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:52am 15 Feb 2013 #अकेला
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
चल रहा हूँ सोचकर कि साथ कोई आयेगाअनंत से कोई एक आवाज़ तो लगाएगारोक लेगा वो मुझे और प्यार से समझाएगाकि ज़िन्दगी शुरू हुई हैतू खुद को न निराश करअब मैं भी तेरे साथ हूँतू मुझ पे विश्वास करकि चल जहाँ तक तू चलेगाकौन सी तू रह लेगामैं खड़ा हु साथ तेरेजो तेरी परवाह करेगाकि दस कद... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:44am 15 Feb 2013 #
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
तब थाम लेना तुम हाथ मेराजो चलते हुए कदम लडखडायेजब मुश्किल लगे उस पार जानादुखों के भंवर से जब हो पार पाना जीवन की नौका अगर डगमगाएतब थाम लेना तुम हाथ मेराजो चलते हुए कदम लडखडायेखड़ा हूँ यहाँ मैं हमेशा की तरह हीतुम्हारे लिए अपनी बाहें फैलायेतुम्हारी बगल में चुपचाप, ले... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   4:07pm 1 Dec 2011 #
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
Patjhad niras nahin haiPatjhar bekar nahin haibasant bhi aata haipatjhad hi to har bar nahin haipatjhad kehta hai-main pardarshi hoontum bhi pardarshi kahlaojo tumhare andar haiwahi bahar bhi dikheaisi chhavi banaopatjhad kehta hai-taiyarian karo swagat kibasant aanewala haimain ja raha hoonmera ant aanewala haihone wali hai subahdekho naya kal aanewala hai ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   6:18am 3 Jun 2011 #
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
रोकता हूँ भावनाओं कोजो पल-पल उठती हैं मन मेंऔर रोकता हूँ मन को जो भटकता है भावनाओं के वन में -शांत हो जाओ तुम सबमुझे भी शांत रहने दो एकांत में ही मैं खुश था मन में एकांत रहने दो आखिर क्यों उठती होमेरे अन्दर तूफान की तरह?और बहार निकलकर क्यों आना चाहती हो इस दुनिय... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   5:22pm 31 May 2011 #hindi kavita
Blogger: Rajeev Ranjan Giri
उस पेड़ को देखोमुरझा से गए हैं उसके पत्ते सारेटूट जायेंगे कुछ दिनों मेंएक-एक कर टूटते मेरे सपनो की तरह  उग आयेंगे नए पत्ते फिर सेये उनकी प्रकृति हैमैं सपने देखता रहूँगाये मेरी प्रकृति हैवहां देखो एक नदी हैकुछ पोधे भी हैं उसके किनारों पर सूख जाएगी वो नदीहर साल सूख जा... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:59pm 31 May 2011 #hindi poetry
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Publish Post