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Blog: मेरे विचार मेरी अनुभूति

Blogger: Kalipad "Prasad"
मधुरआम उपवन उपज, करते सब रस पान |तिक्त करेला कटु बहुत, करता रोग निदान ||काला जामुन है सरस, मत समझो बेकार |दूर भगाता मर्ज सब, पेट का सब बिकार ||पपीता बहुत काम का, कच्चा खाने योग्य |पक्का खाओ प्रति दिवस, है यह पाचक भोज्य ||खट्टा मीठा रस भरा, अच्छा है अंगूर |खाओ संभल के इसे, अम्ल कारी ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   10:32am 3 Jan 2017
Blogger: Kalipad "Prasad"
न किसी को कभी रुलाना हैहर दम हर को तो हँसाना है|१कर्मों के फुलवारी से ही यह जीवन बाग़ सजाना है |२ दुःख दर्द सबको विस्मृत कर जश्न ख़ुशी का ही मनाना है |३ मौसम का मिजाज़ जैसा हो प्रेम गीत तो गुनगुनाना है |४ रकीब की मरजी पता नहीं अपना घर नया बसाना है |५ चश्मा द्वेष का उतार देखो दुनि... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   9:04am 22 Dec 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
कमजोर जो हैं तुम उन्हें बिलकुल सताया ना करोखेलो हँसो तुम तो किसी को भी रुलाया ना करो |दो चार दिन यह जिंदगी है मौज मस्ती से रहोवधु भी किसी की बेटी है उसको जलाया ना करो |चाहत की ज्वाला प्रेम है इस ज्योत को जलने ही दोलौ उठना दीपक का सगुन उसको बुझाया ना करो |अच्छी लगी हर बात जब ब... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   6:00am 6 Dec 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
प्रदूषणब्रह्म राक्षस अबनहीं निकलता है घड़े सेडर गया है मानव निर्मितब्रह्म राक्षस से |वह जान गया हैमानव ने पैदा किया हैएक और ब्रह्म राक्षसजो है समग्र ग्राहीधरा के विनाश के आग्रही |यह राक्षस नहीं खर दूषणयह है प्रदूषण |काला गहरा धुआंनिकलता है दिन रातकारखाने की चमनी से,म... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   3:09am 15 Nov 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
फागुन में होली का त्यौहारलेकर आया रंगों  का बहारलड्डू ,बर्फी,हलुआ-पुड़ी का भरमारतैयार भंग की ठंडाई घर घर।पीकर भंग की ठंडाईरंग खेलने चले दो भाईसाथ में है भाभी  और घरवालीऔर है साली ,आधी घरवाली।भैया भाभी को प्रणाम करपहले भैया को रंगा फिर भाभी संगपिचकारी मारना ,&... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   11:45am 6 Nov 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
ग़ज़ल अवाम में सभी जन हैं इताब पहने हुएसहिष्णुता सभी की इजतिराब पहने हुए |गरीब था अभी तक वह, बुरा भला क्या कहेघमंडी हो गया ताकत के ख्याब पहने हुए |मसलना नव कली को जिनकी थी नियत, देखोवे नेता निकले हैं माला गुलाब पहने हुए |अवैध नीति को वैधिक बनाना है धंधावे करते केसरिया कीनखा... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:37am 3 Nov 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
ग़ज़ल अवाम में सभी जन हैं इताब पहने हुएसहिष्णुता सभी की इजतिराब पहने हुए |गरीब था अभी तक वह, बुरा भला क्या कहेघमंडी हो गया ताकत के ख्याब पहने हुए |मसलना नव कली को जिनकी थी नियत, देखोवे नेता निकले हैं माला गुलाब पहने हुए |अवैध नीति को वैधिक बनाना है धंधावे करते केसरिया कीनखा... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   2:37am 3 Nov 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
मिटटी से मेरा जनम हुआ, मिटटी में मिल जाता हूँछोटी सी है जिंदगी मगर, जगत को जगमगाता हूँ | दीवाली हो या होली हो, प्रात:काल या सबेरा जब भी जलाया मुझे तुमने, किया दूर सब अन्धेरा |जलना ही मेरी नियति बनी, जलकर प्रकाश देता हूँ मिटटी से मेरा जनम हुआ, मिटटी में मिल जाता हूँछोटी सी है ज... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   4:59am 1 Nov 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
हम हैं जवान रक्षक देश के,  अडिग जानो हमारा अहद,प्रबल चेतावनी समझो इसे, भूलकर पार करना न सरहद |अत्याचार किया अबतक तुमने, हमने भी सहन किया बेहद,सर्जिकल का नमूना तो देखा, अब तो पहचानो अपनी हद |मानकर तुम्हे पडोसी हमने, दिया तुम्हे समुचित मान ,उदारता को तुम कमजोरी समझे, हमारी श... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:57pm 21 Oct 2016
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करवा चौथ समाज में कुछ है आस्थाउससे ज्यादा प्रचलित है व्यवस्था,प्रगतिशील वैज्ञानिक युग में ज्ञान का विस्फोट हो चुका है उसके रौशनी में छटपटा रही है कुछ आस्था तोड़ना चाहती है पुरानी व्यावस्था |  मानते हैं सब कोई ..,कुछ रस्मे रीति रिवाजेंमुमूर्ष साँसे गिन रही हैं,फिर भी उ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   10:42am 19 Oct 2016
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स्वदेश :जन्मभूमि को कभी भूलो नहीं, यही है स्वदेश पढ़ लिख कर हुए बड़े, तुम्हारा परिचित परिवेश एक एक कण रक्त मज्जा, बना इसके अन्न से कमाओ खाओ कहीं, पर याद रहे अपना देश |विदेश :विदेश का सैर सपाटा सब सुहाना लगता है नए लोग, परिधान नई, दृश्य सबको भाता है‘वसुधैव कुटुम्बकम’ जिसके मन म... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   5:30am 18 Oct 2016
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गीतिका ----नौ दुर्गा –प्रार्थनाबहर: २१२२ २१२२ २१२२ २१२रदीफ़ : चाहिए ; काफिया : “आ” नौ दिनों की माँग भक्तों की माँ सुनना चाहिएवे बुलाते तो माँ उनके घर में आना चाहिए |शांति की देवी तू, संकट मोचनी दुख नाशिनीभक्त को सुख शान्ति का वर दान देना चाहिए |खड्ग हस्ता, ढाल मुद्गर, शूल अस्... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:17am 6 Oct 2016
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ना करो ऐसे कुछ, रस्म जैसे निभाती होआरसी भी तरस जाता, तब मुहँ दिखाती हो |छोड़कर तब गयी अब हमें, क्यों रुलाती होयाद के झरने में आब जू, तुम बहाती हो |रात दिन जब लगी आँख, बन ख़्वाब आती होअलविदा कह दिया फिर, अभी क्यों सताती हो ?जिंदगी जीये हैं इस जहाँ मौज मस्ती सेगलतियाँ भी किये याद क... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   2:29am 3 Oct 2016
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उरी में शहीद हुए,शहीदों को समर्पितपकिस्तान मिट जायगा !कश्मीर होगा अब से देखो, भारत देश की शानपाकिस्तान का मिट जायगा, सभी नामो निशान|सोना, मरना एक जैसा, निर्जीव शव है जैसा सोता अनजान होता है, आस पास कौन कैसा|कायर हो तुम अधम, सोते में उनकी जान लीनिर्जीव शव को मार कर, बहादुरी ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   2:39am 21 Sep 2016
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बुद्ध, जैन, सिख, ईशाई, हिन्दू, मुसलमान सबका मत एक ही है, क्षमा ही महा दान |हर धर्म मानता है क्षमा,शांति का है मूल जानकर भी फैलाते नफरत, क्यों करते यह भूल?त्यागना होगा खुद का स्वार्थ, करके अंगीकारत्यागना होगा भेद भाव, धन जन का अहंकार |धर्म के नाम से धंधा कर, बोते हैं विष वेल क्... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   3:07am 20 Sep 2016
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अर्ज करो भगवान से, वे हैं बड़े महान |सफ़ल करे हर काम में, सबको देते ज्ञान ||गए नहीं गर स्कूल तुम, आओ मेरे पास |उन्नति होगी वुद्धि की, छोडो ना तुम आस ||वर्णों का परिचय प्रथम, बाकी उसके बाद |याद करो गिनती सही, होगे तुम आबाद ||पढ़ो लिखो आगे बढ़ो, करो देश का नाम |पढ़ लिख कर सब योग्य बन, करना वि... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:54am 18 Sep 2016
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कर्मणि अधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन भाग इंसान भागतेरा भाग्य तभी उठेगा जाग,सुस्त पड़ा सोता रहेगायह जग तेरे आगे निकल जायगा |यह शरीर मिला है तुझेइसका कुछ कर्म हैहर अंग का कुछ धर्म हैउसका तू पालन कर |श्रीकृष्ण ने कहा,“बिना फल की इच्छातू कर्म कर .......”किन्तु बिना फल की इच्छा,ते... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:16am 17 Sep 2016
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प्रजातंत्र के देश में, परिवारों का राजवंशवाद की चौकड़ी, बन बैठे अधिराज|वंशवाद की बेल अब, फैली सारा देशपरदेशी हम देश में, लगता है परदेश|लोकतंत्र को हर लिये, मिलकर नेता लोगहर पद पर बैठा दिये, अपने अपने लोग|हिला दिया बुनियाद को, आज़ादी के बादअंग्रेज भी किये नहीं, तू सुन अंतर्न... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:10am 14 Sep 2016
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मौसम है बरसात का, मच्छर के अनुकूल डेंगू और मलेरिया , गन्दी नाली-कूल      मसक भगाने वास्ते, उत्तम पत्ती नीम    जलाओ इसे शाम को, नीम का गुण असीम  छत की टंकी साफ़ हो, घर में पहुँचे धूप बचने दोनों मर्ज से, करो कुछ दौड़–धूप  राग द्वेष सब दूर हैं, मन जब होता शांत   मन व... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:51am 21 Aug 2016
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हम अपनी आज़ादी का जश्न, बोलो अब कैसे मनाएँ अमर शहीदों के बलिदान की, गाथा किसको सुनाएँ ?भूखे रहे, गोली खाए वे, लड़ते लड़ते सब शहीद हुए मजबूत आंग्ल डंडा भी, हौसला वीरों का तोड़ न पाये |गोरे अंग्रेज तो चले गए, काले अंग्रेज को कौन भगाएँ हम अपनी...जालियाँवाला बाग़ को देखा, देखा नोआखाली ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:53am 17 Aug 2016
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आपसी झगडा भूलकर बोलो, भारत एक परिवार हैएक स्वर में बोलो सभी, कश्मीर पूरा हमारा है |अलग अलग हैं रहन सहन, अलग अलग है भाषाअलग अलग खान पान हैं, अलग अलग वेश भूषामज़हब का कोई बंदिश नहीं, इबादत की आजादी हैविविधता में एकता है, यही हमारी अंतर्धारा है |आपसी झगडा भूलकर बोलो, भारत एक परि... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:37am 11 Aug 2016
Blogger: Kalipad "Prasad"
उस ने सोचा सही आदमी की तरहभावना से भरा दिल नदी की तरह  |हर समर जीतना, है नहीं लाज़मीमैं न माना है, बेचारगी की तरह |अडचनों से कभी, हम डरे ही नहींहम ने देखा नहीं, जिंदगी की तरह|इंतजारों  के पल तो, गुज़रता नहींहर घडी बीतती, चौजुगी की तरह |होती वर्षा कभी, मूसलाधार भीनाली बहती है क... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   4:16am 23 Jul 2016
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बह्र: २१२२ २१२२ २१२ सारी सारी रात-जग जिन के लिए पूछते वे जागरण किन के लिए |1|चाँद तारों तो  झुले  हैं  रात में एक सूरज को रखा दिन के लिए |२|आसान नहीं भूलना यूँ भूत को आज तक तो मोह है इन के लिए |३|रात भर आँसू कभी थमती नहीं  अश्रु जल यूँ लुडकते किन के लिए|४ |वो सुखी हैं य... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   2:42am 21 Jun 2016
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तीन मुक्तक जाति वादी भावना लेकर, मन्दिर में जो जातेराजनीति करते मन्दिर में, भक्ति भूल वो जाते हर काया में ईश्वर हैं, प्रत्येक के ह्रदय में ईर्ष्या से ही मन मन्दिर, उनके निन्दित हो जाते |1|राजनयिक औरों के कन्धे पर से बन्दूक चलाता है अपना विशेष गुप्त मिशन संदूकों में गोपन र... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:19am 12 Jun 2016


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