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मेरी डायरी के पन्‍ने

ख्‍वाबों की कश्‍ती वो ले चलेकिनारे को अकेला छोड़,उदास सा चेहरा लिए देखता, सहता रहेगा थपेड़ेतेरी यादों की लहरों के ।देखती रहेंगी वो गुमनान सी आंखेंइस किश्‍ती के लौट आने की राह में,कब मिलेगी गले किनारे सेउसके दामन में समाने के लिए ।----...
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  November 23, 2012, 6:54 pm
देखो!वो कौन खड़ा है?दर्पण के सामनेमौन।क्‍या देख रहा है वोएक टक दर्पण को ?आओ । पूछे इससेवो क्‍यों खड़ा है इस तरह ?क्‍या चाहता है आखिर वहइस दर्पण से ?मैने उसे क्‍या पाया आपनेउसने कहा अहसास । कैसा अहसास,मैंने पूछा ।उसने कहावो अहसास जो सिर्फ मौन रहकरमन से बन्‍द आंखों से महसू...
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  November 22, 2012, 6:30 pm
अंधेरी पाख सी जिन्‍दगी मेंथी किरण वो चांदनी की,हो रही है वो भी जुदाआज अपने चांद से।जिन अश्‍कों की बूंदों से धोएविराने खण्‍डहर जिन्‍दगी के,हो रहे हैं वे भी जुदाआज अपनी ही आंख से।पतझड़ सी जिन्‍दगी मेंआई थीं बहार बनकर सावन की,हो रही है वो भी जुदाआज अपने ही मौसम से।थी वो आत...
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  November 21, 2012, 10:45 pm
आंखों के समन्‍दर से तुमउतरती मन की गहराइयों में,छा जाते हो बनकर बादलमस्तिष्‍क के मानस पटल पर,याद तुम जब आते हो।झोंके मन्‍द मन्‍द पवन केझकझोरते हैं मुझे बार-बार,हिला जाते हैं तार-तारसोए मन की वीणा के,याद तुम जब आते हो।गम सुम सा बैठा अधीर मैंडर अपने साए से लगता है,खो न जाए ...
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  November 20, 2012, 7:49 pm
ऋतुओं पर आधारित कविताएं गर्मीदूर चले गएअपनी यादें छोड़ कर,बिछोह की तपन सेझुलस गए हो,आंधी के झोकों सेउठी धूल गगन में,तपती कहीं धूप की लपटों सेदेख, सहती धरा की ओर,देखा जिससे जाता नहीं वो तुम ही तो हो।भरी ताल कमल कुंज सेबसी खिले पाटल की गंध,शीतल जल से सुहाता।काली रात का आंच...
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  November 19, 2012, 7:21 pm
अकेले पन की राहों मेंराह के पत्‍थरों की तरह,छोड़ गए तुम।चोट सहते इन्‍तजार कीतनहाइयों के पत्‍थरहो गए हम।कितने टुकड़े और होंगे अबआह से भरी राहों मेंजीने को छोड़ गए तुम।सफ़र के दरमियांइस राह से तो गुजरोगेसम्‍भलना ऐ हमसफ़रठोकर देकर मुझे,चोट तुम खाओगे।चलने से पहले मुझे...
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  November 11, 2012, 1:57 pm
किसी और समय के लिएउठाकर रख छोडि़ए,शेष बीते पलों कोयाद करने के लिए।रूह बन रही हैयादें तुम्‍हारीछोड़ आए जो पीछेबीते पलों के सभीनिशां मिटाने के लिए।परदे सा लटकता आँचलतेरे कूचे में देखबैचेन हो जाते हैंआंखों के आंसूबहने के लिए।दे रहा हो खड़ाजैसे आंसूओं का मंदिर में अर्...
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  November 10, 2012, 6:17 pm
चले जाने के बादवो दिन चलाछोड़ अंधेरी रातें,गिनने के लिएअनगिनत तारेशेष जिन्‍दगी के।छोड़ आया जिसे उसी शाम,ले आया वहीं सेदर्द भरी यादें तुम्‍हारीदेकर खुशियां सभी।अजनबी हो यहां गया मैंपहचान खो गई यहां की,है यहां पर मेरे अपने सभीअकेला फिर भी रह क्‍यों गयातुम्‍हारे बिन।...
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  November 9, 2012, 11:07 am
दूरियां की काफी दी,एक झलक पाने के लिए।नजदीकियां तो और भीतरसा देंगी एक झलक पाने के लिए।-----आँखों के तरकश मेंअनगिनत तीर नयनों के,चढ़े पलकों की कमान पर है,झेलने वाला कोई नहींआओ इन्‍हें उतार दें।-----...
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  November 8, 2012, 10:25 am
निशा खड़ी द्वार पर,स्‍वप्‍नों की टोली लिए,निद्रा के आलिंगन में डूबीअधरों पर मन्‍द मन्‍द खिलतीकलियों की सी मुस्‍कान लिए,आने दो-आने दो स्‍वप्‍नों की सौगातइन दो नयनों समाने के लिए,कौन-कहां-क्‍या इसमें बस की मेरे बात नहींखो जाओ इसमें तुम परमानन्‍द के लिएखेलो-खेलो संग मे...
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  November 7, 2012, 11:18 am
न जाने कौनसीअनजानी सी खुशबूकशिश जिसकी खींच जाती हैतुम्‍हारे यहां।एक वक्‍त ऐसा भी आएगाचाहत के बहते समन्‍दर में तड़पता छोड़ जाओगे मझधार में,यादों की मौजों की चोट सहने के लिए।----...
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  November 3, 2012, 2:55 pm
सुबह की लालिमाबिखेरने लगी सुनहरी किरणेंबन्‍द कमरों के झरोखों से सुनहरे दिन का आगाज करती है।उठना एक अलसाई सी अलहड़ नवयोवना कासृजन करती नई आशाओं और विश्‍वास कापूजा की थाली सजाती है।शरद चांदनी की किरण सेरोशन हुआ तेरा नूरपूनम के चांद का अहसास करती है।श्‍वेत शीतल चाँदन...
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  November 2, 2012, 5:17 am
सदियों से सींचते आए जिसेआजादी के उपवन को,न ले सके जायका वेइस फलित उपवन का,उपवन जो छोटा सा बना गए।सजा भिन्‍न भिन्‍न फल-फूलों सेखुशियों की बहारों से आबाद,न जाने भेंट चढ़ा कैसे उपवनढोलते मनचले दरिंदे भंवरों के,आमादा इसका रस चूसने को हैं।अपंगता का जामा पहनेविवश्‍ता लिए क...
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  November 1, 2012, 9:18 am
बहारों की कली ने जब मना कर दिया,कि भँवरे यहां मत आया करो।तो पतझड़ की चोट सहती लता बोल उठी, कि बसंत यहां मत आया करो। गम से भरे दृग ने जब मना कर दिया,कि अश्‍कों इस तरह मत बहा करो।तो दर्द भरे दिल भी बोल उठा,इस तरह मेरे जख्‍मों को हरा मत किया करो।अंधे की लाठी भी जब बोल उठे,कब तलक ...
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  October 31, 2012, 9:18 am
तुम कौन से चिराग़ की लौ हो,जिससे जीवन में रोशनी नहीं।तुम कौन से गगन की रात हो,टि‍मटिमता तारा जिसमें एक भी नहीं।तुम कौनसे सागर की गहराई हो,जिसके बन्‍द सीप में मोती एक भी नहीं।तुम कौन सी काठ की नैया हो,जिसका मांझी है पतवार नहीं।तुम कौनसी अविरल जल की धारा हो,धरती को जो सींच ...
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  October 30, 2012, 9:25 am
बेनाम सी जिन्‍दगी हो गई अबयादों के टूटे खण्‍डहर में खो गई अब।बेबस सी भटकती रूहतलाशती नए घर खो गई अब।बेजार सी ये आंखें,अपनों के बीच खोजती स्‍वयं खो गई आंखें अब।ये कौन सी जिन्‍दगी जी रहा हूं मैं, शक के दायरों में,संकीर्णता बढ़ती इसकी जा रही है अब।साथ कोई देने वाला नहीं,मै...
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  October 29, 2012, 6:20 pm
एक आभूषण तुम और पहन लो,दुलर्भ है फिर कभी न मिलेगा।जीवन भर पछताओंगे,हाथ मलते अंधेरे में खो जाओगे,अहसास की ठंडी आग में जल राख हो जाओगे।कुछ ही लोग पहना करते हैं,किस्‍मत वाले होते हैं वो।सब के बस की बात नहीं,बहुत कुछ खोना, पाना पड़ता हैझुकना न जाने कहां कहां पड़ता है।आबाद इस...
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  October 22, 2012, 12:40 pm
सपनों का सहारा लेमेरे संग न खेलोकाम न आ पाएंअपनों का सहारा ले लोशायद फिर अपने काम न आ पाएं।-----ये कौन सी शाम हैमेरे सामने बैठ गुमसुमअपने में खोई सोई सीये आंखें कौन हैं।----...
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  October 21, 2012, 3:14 pm
भरे कांच के गिलास में,ये क्‍या श्रंगार रस मिला दिया।अधरों तक पहुंचा भी नहींश्रंगार से परिपूर्ण नजरतेरा रूप आया।प्‍यास बुझा न पाऊं,मर कहीं न जाऊंचाह कर भी पिया न गयारूपामृत भी ज़हर नज़र आया।----...
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  October 20, 2012, 9:21 am
दुनियां की भीड़ में,तलाशता मानव रत्‍न।मिला न कोई,मिला तो सिर्फ एकमानव रत्‍न।तराशा जिसे अपनी चारित्रिक अंगुलियों से।चमकाया अपनत्‍व की पालिश से जिसे।रास न दुनियां को आयाचमक बिगाड़ने पर तुलीहथियाने की कोशिश में।बन्‍द यादों की डिबियां में,मन की तिजोरी में रख्‍संभाल...
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  October 19, 2012, 9:26 am
अपनी दोनों आंखों के,सपने दे दो मुझे।खुशियां तुम जमाने भर की,जिन्‍दगी से मेरी ले लो मुझसे।न करना गिला अपनों से,सहारा अपनों का ले लो मुझसे।न देखो जमाने की तरफरफ्तार वक्‍त की बहुत है।देखो निगाहों से मेरी,दुनिया की टोक बहुत है।बनाना दुनियां को अपना है,शक का पर्दा हटा दोअप...
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  October 18, 2012, 9:27 am
यादों के साए में तमाम उम्र गुज़ार दूं,याद में तेरी आंखों के क्‍यालहू का एक एक कतरा भी लुटा दूं।भुला न सका तेरी याद का,एक एक पल सुबह शाम के नाम कामिटा दूंगा हर एक अक्षरतेरे लिए अपने नाम का।यादों के इस बोझ को लिएतय कब तक करना होगासफ़र जिन्‍दगी का लिए सहारा तेरे नाम का।सहनी ...
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  October 17, 2012, 11:25 am
एक दिन हम साथ होंगे।जिन्‍दगी को साथ निभाएंगे।।तेरे लिए हर दिन नया लाएंगे ।।।तुझे एक नज़र देखेंगे,अपनी तसल्‍ली के लिए।मालूम है देखते ही रूठ जाओगी,एक बार फिर मनाएंगेआने वाली जिन्‍दगी के लिए।।सुबह का कोहरा यूं छटने लगा,सामने चेहरा तुम्‍हारा यूं दिखने लगा।चांद दूज का ...
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  October 16, 2012, 1:13 pm
हर रात तेरे नाम से जवां हैजन्‍म देती है स्‍वप्‍नों की टोली को,खींच ले जाती है यादे तेरीजिन्‍दगी के मंच पर,जानकर भी खेल नहीं पातेनाटक खेलना सिखा दिया।सूरज की पहली किरण ला पटकती हैदुनिया की चमकीली रेत पर, करवटे बदलते बदलतेछोड़ देना पड़ा काली रात का आंचल,खो जाते है आकरदु...
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  October 15, 2012, 9:23 am
चन्‍द लम्‍हों का सफरतय तेरे साथ करते रहे।साथ देते रहे हर पल,नज़दीकियों में हम ढलते रहे।गमों का जो था,खुशियों पर छाया मातम,जनाज़ा गमों का निकालखुशियों को जन्‍म देते रहे,गमों को पैसों से तोलखुशियां प्‍यार की बटोरते रहे।हर बात, हर मिलनयादों के कागज पर हम लिखते रहे।बदचल...
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  October 14, 2012, 2:02 pm


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