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Blog: ठिकाना

Blogger: pratibha kushwaha
बारह हजार करोड़ की रेमंड ग्रुप के मालिक 78 वर्षीय विजयपत सिंघानिया एक-एक पैसों के लिए मोहताज हो गए। उनके बेटे गौतम ने उन्हें न केवल घर से बेदखल कर दिया बल्कि गाड़ी व उनका ड्राइवर तक छीन लिया। मजबूर होकर विजयपत को बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मुंबई स्थित एक घर का पज... Read more
clicks 287 View   Vote 0 Like   12:27pm 15 Jul 2018 #15 जून डे
Blogger: pratibha kushwaha
कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा। तीसरे विश्व युद्ध का इंतजार किए बिना देश की अधिसंख्य महिलाएं रोज ही पानी के लिए युद्धस्तर का प्रयास करती हैं। यह प्रयास त्रासदी में तब बदल जाता है, जब उनका पति पानी के लिए दूसरी नहीं,तीसरी शादी तक कर लेता है। एक पत्नी के रह... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   12:38pm 17 Jun 2018 #current affairs blog
Blogger: pratibha kushwaha
‘समुद्रसेयदिटकरानाहै, तोतुमयहभूलजाओंकितुमकौनहो।समुद्रयहनहींदेखताकितुममहिलाहोयापुरुष।’ अपनेप्रशिक्षकदिलीपडोंडेकीइसबातकोमूलमंत्रबनाकरसमुद्रकीअथाहगहराइयोंमेंजबमहिलानेवीकीजांबाजअधिकारीउतरीहोंगी, तोउनकेमनमेंइसमहत्वपूर्णयात्राकोलेकरज्यादासंशय... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   6:54am 29 May 2018 #कमांडर वर्तिका जोशी
Blogger: pratibha kushwaha
यूं तो 2015 में दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन, भोपाल में ही निश्चित हो गया था कि ग्यारहवां विश्व हिन्दी सम्मेलन मॉरीशस में 18 से 20 अगस्त तकआयोजितकियाजाएगा।अबइसकीआधिकारिकघोषणापिछलेदिनोंकरदीगई।इससम्मेलनकेविषयमेंजानकारीदेनेकेलिएमॉरीशससेएकविशेषप्रतिनिधिदलभारतआया... Read more
Blogger: pratibha kushwaha
जब मेला उठता है तो अपनी कई यादें छोड़ जाता है। देश में संपन्न हुए आठवें थियेटर ओलंपिक्स के विषय में भी यह कहा जा सकता है। यह मेला था नाटक का, देशी-विदेशी कलाओं का, लोक कलाओं का, नुक्कड़ नाटकों का, विविध कलाओं पर चर्चा-परिचर्चा का, कुछ सीखने का और कुछ सिखाने का। पूर... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   6:17am 15 Apr 2018 #
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साल की शुरुआत महिलाओं के लिए सौगात लेकर आया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन पोर्टल नारी http://www.nari.nic.in को लांच कर दिया। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सूचना या जानकारी के अभाव में सरकारी स्तर पर किसी भी योजना के बनाने से कोई लाभ जनता तक नहीं पहु... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   10:42am 23 Jan 2018 #best hindi blogs
Blogger: pratibha kushwaha
‘मुखिया पति’या ‘सरपंच पति’, यह सम्बोधन उस व्यवस्था के लूप होल है, जिसे बड़ी सद्इच्छा से शुरू किया गया था। ढाई दशक पहले राजनीतिक सत्ता में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तरीय स्थानीय चुनावों में आरक्षण देकर उनके हक और हुकूक को पुख्ता किया गया था। इन प... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   7:18am 27 Dec 2017 #महिला
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महिलाओं के स्वास्थ को लेकर हमारे समाज में हमेशा से लापरवाही, अज्ञानता, ढिलाई और अनुत्तरदायीता का माहौल रहा है। इसका बहुत बड़ा कारण गरीबी, अशिक्षा के साथ-साथ लैंगिग असमानता के चलते भेदभावपूर्ण व्यवहार, आर्थिक रूप से दूसरों पर आश्रित होना है। इसके चलते महिलाएं घर में अ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   10:40am 26 Nov 2017 #eanemia
Blogger: pratibha kushwaha
‘बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी’को यूं भी कहें कि ‘आवाज उठेगी तो दूर तक जाएगी’, तो इसके अर्थ में कोई अंतर नहीं आएगा। मौजूं सिर्फ यही है कि आवाज उठनी चाहिए। शुरूआत हुई,तो परिणाम भी निकलेगा। इधर, हैशटैग मी टू के साथ जो अभियान महिलाओं ने चलाया है, उससे समस्या का अंत हो या न हो, ... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   10:29am 13 Nov 2017 #महिला
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शक्ति पूजन भारतीय संस्कृति और धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के एक भाग में नहीं बल्कि पूरे देश में शक्ति के रूप में स्त्री रूप का ही पूजन होता है। नवरात्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इन्हीं नवरात्र के दौरान देश के कई मंदिरों में कई वर्षो या यूं कहें कई सौ, हजार वर्ष... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   9:52am 15 Oct 2017 #परंपरा
Blogger: pratibha kushwaha
एक अंग्रेजी कहावत है- नो रिस्क, नो गेम। हमने खेल में तलवारबाजी, घुड़दौड़, जल्लीकुट्टू या फिर आधुनिक समय के मौत का कुंआ,हांटेड हाउस, रेस ऐसे बहुतेरे खेल हैं, जहां एक व्यक्ति रोमांच और मनोरंजन पाने के लिए खेलता है। इन खेलों को पौरुष से भी जोड़कर देखा जाता था। इन खेलों को खे... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   9:56am 4 Sep 2017 #खेल
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सालों-साल चला बालिका वधु टीवी सीरियल दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने बाल विवाह के प्रति लोगों का काफी ध्यान खींचा था। हाल ही सोनी चैनल पर पहरेदार पिया की नाम से एक सीरियल चल रहा है। इसकी थीम बाल विवाह तो नहीं कही जा सकती, पर उसमें बाल विवाह जरूर दिखाया ग... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   9:05am 27 Aug 2017 #बालिका वधु
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मैं सुबह की मीठी नींद सो रहा था कि किसी भारी-भरकम आवाज का कानों में प्रवेश हुआ। और मैं स्वप्न लोक से इहलोक में आ गया। आंख खोलकर देखा तो मेरे सात जन्मों की संगनी भृकुटी चढ़ाये खड़ी है। मुझे अलसाते देख यथाशक्ति कोमल स्वर में बोली-‘आपकेा आपिफस नहीं जाना है?’ ‘हां! जाना है पर इ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:25pm 15 Aug 2017 #लेख
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आधी रात के बाद!वह बूढ़ा चौकीदारडंडा टेकता हुआठक ठक ठक ठकसीटी बजाता हुआ,रात की रखवाली करता हैचोरों से,कि वे चुरा न ले जाएरात की कालिमारात की नीरवता,उसकी ख़ामोशीऔर हम सब का चैन!!... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   4:35pm 18 Dec 2016 #
Blogger: pratibha kushwaha
एक समय जानीमानी साहित्कार एवं महिला मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करने वाली मैत्रेयी पुष्पा ने कहा था कि आज गांव-देहात में मोबाइल ने स्त्रियों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की है। लेखिका का यह कहना बिलकुल वैसे ही है जैसे कभी यूरोपियन देषों में महिला अधिकारों के समर्थकों ने क... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:01am 15 Sep 2016 #वुमनिया
Blogger: pratibha kushwaha
’इक बगल में चाँद होगा, इक बगल में रोटियाँ।इक बगल में नींद होगी, इक बगल में लोरियाँ।।हम चाँद पे, रोटी की चादर डाल के सो जाएँगे।और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे।।‘लातूर, विधर्भ की सूखे की खबरों और कवि-अभिनेता पियूष मिश्रा की इन पंक्तियांे का सबब सोचने समझने से पहल... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   11:56am 18 Jun 2016 #बुंदेलखंड
Blogger: pratibha kushwaha
‘विवाह एक पवित्र संस्कार है।’ ‘षादी सात जन्मों का बंधन है।’ ‘जोड़ियां ऊपर से बन कर आती हैं।’ ‘पति-पत्नी का रिष्ता एक पवित्र बंधन है’...आदि, इत्यादि। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो हमारे अंदर सदियों से पैंबस्त की गई हैं। और समाज इसी बने बनाएं मूल्यों पर चल रहा है। जब कोई बात इस मू... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   12:38pm 1 Jun 2016 #शादी
Blogger: pratibha kushwaha
 न जाने कब सफर उबाऊ बन जाए, उससे पहले  कोई पुस्तक या पत्रिका हाथ में ले लेनी चाहिए। इसलिए सफर के दौरान मैं पढने के लिए कुछ न कुछ जरूर रखती हुँ ताकि जब अपने आसपास देखते ऊब जाऊ तो पढ सकु।  इसलिए मैंने अपनी आख्ने पत्रिका में गड़ा ली। तभी सामने की सीट पर बैठी मह... Read more
clicks 262 View   Vote 0 Like   4:44pm 17 Jan 2016 #
Blogger: pratibha kushwaha
हमें राजनीतिक और सामाजिक रूप से किसी दिवस मनाने की आवष्यकता तब पड़ती है जब हमें पता होता है कि अमुक बात या मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचना है। इसलिए देष में महिला दिवस के माध्यम से उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पिछड़ेपन और उनसे जुड़ी समस्याओं के बारे चर्चा करते हैं... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:54pm 7 Mar 2015 #
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प्रेम यहां वहां जहां तहां उकेर दिया जाता है। प्रेम करने वालों को कहां ध्यान रहता है कि वह अपनी इन प्रेम अभिव्यक्तियों को कहाँ लिखे। वह कवि या कवयित्री नहीं होते है जो अपनी अभिव्यक्ति के लिए उचित समय और उचित स्थान के साथ कागज-कलम-दवात ढूढता घूमें । वह जहां ठहरता है ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   6:00pm 16 Feb 2015 #प्रेम
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आज 25 दिसबंर कोदिल्ली के सबसे षानदार चर्च के सामनेघूम रहे है छोटे-छोटे ईसा मसीहकिसी सैंटा की खोज में नहींग्राहको की खोज में.......सैंटा की टोपी बेच रहे हैं वेमखमली सुर्ख लाल गोल टोपीबिलकुल उनके चेहरों की तरहदीदी, भैया, आंटी-अंकलसबसे इसरार कर रहे हैंहाथ में पकड़ी हुई टोपिय... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:15pm 25 Dec 2014 #टोपी
Blogger: pratibha kushwaha
‘अपने देश बंग्लादेश  में, मेरे अपने पश्चिम बंगाल में, मैं एक निषिद्ध नाम हूं, एक विधि बहिष्कृत औरत, एक वर्जित किताब!’ इस एक वाक्य में लेखिका ने अपना दर्द बयां कर दिया है। एक स्वीकृत हार से उपजी हताशा  की बेकायली में उनके अंर्तमन से भारत देष के बारे में यह जो शब्द निकलते... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:22pm 18 Oct 2014 #
Blogger: pratibha kushwaha
बगैर सपनों की नींद नहीं होती, बगैर नींद के सपने नहीं होते। कोई कितना भी दावा करे, कि उसकी  नींद मेंसपने नहीं होते। अगर नींद है तो सपने भी निहित है। ..........................................यह इसी तरहसच है जैसे  जीवन है,तो सपने है,सपने है तो जीवन है।। ... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   5:54pm 4 Oct 2014 #नींद
Blogger: pratibha kushwaha
हाल ही में मेरी एक परिचिता अपने लिए कुछ नये कपड़े खरीद कर ले आयी। शाम को जब उसके पति ने कपड़े देखे तो उसकी डांट लगा दी। कारण था कि पितृपक्ष आरम्भ हो चुके है अतः खरीदारी नहीं करनी चाहिए। अब चूकिं कपड़े खरीदकर आ चुके थे और जरूरी भी था इसलिए इस समस्या का हल निकाला गया कि रस्मी... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   6:09pm 13 Sep 2014 #श्राद्ध
Blogger: pratibha kushwaha
एक कॉमिक्स पात्र 'नागराज'का मॉडल रूप  कंप्यूटर युग में बच्चों से किताबें पढने की उम्मीद कोई नहीं करता है। सभी यह शिकायत करते हुए मिल जाते है कि बच्चे किताबें नहीं पढ़ते हैं। बच्चों में किताबें पढ़ने की रूचि नहीं हैं पर मुझे लगता है कि हम लोग ही बच्चों को किताबों तक नही... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   5:35pm 6 Sep 2014 #दिल्ली पुस्तक मेला


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