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ठिकाना

जब मेला उठता है तो अपनी कई यादें छोड़ जाता है। देश में संपन्न हुए आठवें थियेटर ओलंपिक्स के विषय में भी यह कहा जा सकता है। यह मेला था नाटक का, देशी-विदेशी कलाओं का, लोक कलाओं का, नुक्कड़ नाटकों का, विविध कलाओं पर चर्चा-परिचर्चा का, कुछ सीखने का और कुछ सिखाने का। पूर...
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Tag :
  April 15, 2018, 11:47 am
साल की शुरुआत महिलाओं के लिए सौगात लेकर आया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ऑनलाइन पोर्टल नारी http://www.nari.nic.in को लांच कर दिया। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता है कि सूचना या जानकारी के अभाव में सरकारी स्तर पर किसी भी योजना के बनाने से कोई लाभ जनता तक नहीं पहु...
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Tag :best hindi blogs
  January 23, 2018, 4:12 pm
‘मुखिया पति’या ‘सरपंच पति’, यह सम्बोधन उस व्यवस्था के लूप होल है, जिसे बड़ी सद्इच्छा से शुरू किया गया था। ढाई दशक पहले राजनीतिक सत्ता में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तरीय स्थानीय चुनावों में आरक्षण देकर उनके हक और हुकूक को पुख्ता किया गया था। इन प...
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Tag :महिला
  December 27, 2017, 12:48 pm
महिलाओं के स्वास्थ को लेकर हमारे समाज में हमेशा से लापरवाही, अज्ञानता, ढिलाई और अनुत्तरदायीता का माहौल रहा है। इसका बहुत बड़ा कारण गरीबी, अशिक्षा के साथ-साथ लैंगिग असमानता के चलते भेदभावपूर्ण व्यवहार, आर्थिक रूप से दूसरों पर आश्रित होना है। इसके चलते महिलाएं घर में अ...
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Tag :eanemia
  November 26, 2017, 4:10 pm
‘बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी’को यूं भी कहें कि ‘आवाज उठेगी तो दूर तक जाएगी’, तो इसके अर्थ में कोई अंतर नहीं आएगा। मौजूं सिर्फ यही है कि आवाज उठनी चाहिए। शुरूआत हुई,तो परिणाम भी निकलेगा। इधर, हैशटैग मी टू के साथ जो अभियान महिलाओं ने चलाया है, उससे समस्या का अंत हो या न हो, ...
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Tag :महिला
  November 13, 2017, 3:59 pm
शक्ति पूजन भारतीय संस्कृति और धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के एक भाग में नहीं बल्कि पूरे देश में शक्ति के रूप में स्त्री रूप का ही पूजन होता है। नवरात्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इन्हीं नवरात्र के दौरान देश के कई मंदिरों में कई वर्षो या यूं कहें कई सौ, हजार वर्ष...
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Tag :परंपरा
  October 15, 2017, 3:22 pm
एक अंग्रेजी कहावत है- नो रिस्क, नो गेम। हमने खेल में तलवारबाजी, घुड़दौड़, जल्लीकुट्टू या फिर आधुनिक समय के मौत का कुंआ,हांटेड हाउस, रेस ऐसे बहुतेरे खेल हैं, जहां एक व्यक्ति रोमांच और मनोरंजन पाने के लिए खेलता है। इन खेलों को पौरुष से भी जोड़कर देखा जाता था। इन खेलों को खे...
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Tag :खेल
  September 4, 2017, 3:26 pm
सालों-साल चला बालिका वधु टीवी सीरियल दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था। इस सीरियल ने बाल विवाह के प्रति लोगों का काफी ध्यान खींचा था। हाल ही सोनी चैनल पर पहरेदार पिया की नाम से एक सीरियल चल रहा है। इसकी थीम बाल विवाह तो नहीं कही जा सकती, पर उसमें बाल विवाह जरूर दिखाया ग...
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Tag :बालिका वधु
  August 27, 2017, 2:35 pm
मैं सुबह की मीठी नींद सो रहा था कि किसी भारी-भरकम आवाज का कानों में प्रवेश हुआ। और मैं स्वप्न लोक से इहलोक में आ गया। आंख खोलकर देखा तो मेरे सात जन्मों की संगनी भृकुटी चढ़ाये खड़ी है। मुझे अलसाते देख यथाशक्ति कोमल स्वर में बोली-‘आपकेा आपिफस नहीं जाना है?’ ‘हां! जाना है पर इ...
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Tag :लेख
  August 15, 2017, 5:55 pm
आधी रात के बाद!वह बूढ़ा चौकीदारडंडा टेकता हुआठक ठक ठक ठकसीटी बजाता हुआ,रात की रखवाली करता हैचोरों से,कि वे चुरा न ले जाएरात की कालिमारात की नीरवता,उसकी ख़ामोशीऔर हम सब का चैन!!...
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  December 18, 2016, 10:05 pm
एक समय जानीमानी साहित्कार एवं महिला मुद्दों पर बेबाक टिप्पणी करने वाली मैत्रेयी पुष्पा ने कहा था कि आज गांव-देहात में मोबाइल ने स्त्रियों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की है। लेखिका का यह कहना बिलकुल वैसे ही है जैसे कभी यूरोपियन देषों में महिला अधिकारों के समर्थकों ने क...
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Tag :वुमनिया
  September 15, 2016, 11:31 am
’इक बगल में चाँद होगा, इक बगल में रोटियाँ।इक बगल में नींद होगी, इक बगल में लोरियाँ।।हम चाँद पे, रोटी की चादर डाल के सो जाएँगे।और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे।।‘लातूर, विधर्भ की सूखे की खबरों और कवि-अभिनेता पियूष मिश्रा की इन पंक्तियांे का सबब सोचने समझने से पहल...
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Tag :बुंदेलखंड
  June 18, 2016, 5:26 pm
‘विवाह एक पवित्र संस्कार है।’ ‘षादी सात जन्मों का बंधन है।’ ‘जोड़ियां ऊपर से बन कर आती हैं।’ ‘पति-पत्नी का रिष्ता एक पवित्र बंधन है’...आदि, इत्यादि। ये कुछ ऐसी बातें हैं जो हमारे अंदर सदियों से पैंबस्त की गई हैं। और समाज इसी बने बनाएं मूल्यों पर चल रहा है। जब कोई बात इस मू...
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Tag :शादी
  June 1, 2016, 6:08 pm
 न जाने कब सफर उबाऊ बन जाए, उससे पहले  कोई पुस्तक या पत्रिका हाथ में ले लेनी चाहिए। इसलिए सफर के दौरान मैं पढने के लिए कुछ न कुछ जरूर रखती हुँ ताकि जब अपने आसपास देखते ऊब जाऊ तो पढ सकु।  इसलिए मैंने अपनी आख्ने पत्रिका में गड़ा ली। तभी सामने की सीट पर बैठी मह...
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  January 17, 2016, 10:14 pm
हमें राजनीतिक और सामाजिक रूप से किसी दिवस मनाने की आवष्यकता तब पड़ती है जब हमें पता होता है कि अमुक बात या मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचना है। इसलिए देष में महिला दिवस के माध्यम से उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पिछड़ेपन और उनसे जुड़ी समस्याओं के बारे चर्चा करते हैं...
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  March 8, 2015, 12:24 am
प्रेम यहां वहां जहां तहां उकेर दिया जाता है। प्रेम करने वालों को कहां ध्यान रहता है कि वह अपनी इन प्रेम अभिव्यक्तियों को कहाँ लिखे। वह कवि या कवयित्री नहीं होते है जो अपनी अभिव्यक्ति के लिए उचित समय और उचित स्थान के साथ कागज-कलम-दवात ढूढता घूमें । वह जहां ठहरता है ...
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Tag :प्रेम
  February 16, 2015, 11:30 pm
आज 25 दिसबंर कोदिल्ली के सबसे षानदार चर्च के सामनेघूम रहे है छोटे-छोटे ईसा मसीहकिसी सैंटा की खोज में नहींग्राहको की खोज में.......सैंटा की टोपी बेच रहे हैं वेमखमली सुर्ख लाल गोल टोपीबिलकुल उनके चेहरों की तरहदीदी, भैया, आंटी-अंकलसबसे इसरार कर रहे हैंहाथ में पकड़ी हुई टोपिय...
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Tag :टोपी
  December 25, 2014, 7:45 pm
‘अपने देश बंग्लादेश  में, मेरे अपने पश्चिम बंगाल में, मैं एक निषिद्ध नाम हूं, एक विधि बहिष्कृत औरत, एक वर्जित किताब!’ इस एक वाक्य में लेखिका ने अपना दर्द बयां कर दिया है। एक स्वीकृत हार से उपजी हताशा  की बेकायली में उनके अंर्तमन से भारत देष के बारे में यह जो शब्द निकलते...
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  October 18, 2014, 9:52 pm
बगैर सपनों की नींद नहीं होती, बगैर नींद के सपने नहीं होते। कोई कितना भी दावा करे, कि उसकी  नींद मेंसपने नहीं होते। अगर नींद है तो सपने भी निहित है। ..........................................यह इसी तरहसच है जैसे  जीवन है,तो सपने है,सपने है तो जीवन है।। ...
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Tag :नींद
  October 4, 2014, 11:24 pm
हाल ही में मेरी एक परिचिता अपने लिए कुछ नये कपड़े खरीद कर ले आयी। शाम को जब उसके पति ने कपड़े देखे तो उसकी डांट लगा दी। कारण था कि पितृपक्ष आरम्भ हो चुके है अतः खरीदारी नहीं करनी चाहिए। अब चूकिं कपड़े खरीदकर आ चुके थे और जरूरी भी था इसलिए इस समस्या का हल निकाला गया कि रस्मी...
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Tag :श्राद्ध
  September 13, 2014, 11:39 pm
एक कॉमिक्स पात्र 'नागराज'का मॉडल रूप  कंप्यूटर युग में बच्चों से किताबें पढने की उम्मीद कोई नहीं करता है। सभी यह शिकायत करते हुए मिल जाते है कि बच्चे किताबें नहीं पढ़ते हैं। बच्चों में किताबें पढ़ने की रूचि नहीं हैं पर मुझे लगता है कि हम लोग ही बच्चों को किताबों तक नही...
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Tag :दिल्ली पुस्तक मेला
  September 6, 2014, 11:05 pm
पिजड़े के अंदर कैद थी एक बुलबुल!उसकी हर फड़फड़ाहट के साथउसकी हर बेचैनी के साथउसकी हर बेताबी के साथउसकी हर कोशिश के बादटूट कर रह जाते थे उसके मजबूत परपिजड़े के अंदर।पिजड़े के अंदर कैद थी एक बुलबुल!पर पिजड़े के अंदर! नहीं कैद थी बुलबुल की उड़ने की आकांक्षा,उड़...
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Tag :बुलबुल
  August 31, 2014, 9:59 pm
एक दिनउदासीबिन बुलाएमेहमान की तरह आ धमकती है।एक मुस्कान के साथ‘हैलो‘ बोलबगल में बैठ जाती हैहम डरते हैं, आंख चुराते हैंवह हमारा हाल-चाल पूछती है।औपचारिकतावशहम भीचाय-पानी पूछ ही लेते है।वह बेशर्म की तरहघुल-मिल कर बातकरती जाती है...करती ही जाती है...।पता नहीं उसेइतना कुछ...
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Tag :कविता
  August 3, 2014, 2:52 pm
वह बहुत बीमार चल रही हैंहालत काफी गंभीर हैं!उन्होंने बताया था-तुम बात कर लेना,तुम्हें याद करती हैं।शब्दों के चुनाव मे फंसी मैंकैसे करूंगी अपनी भावनाओं को व्यक्त!!मोबाइल पर उनका नंबर डायल करने से पहलेबहुत से शब्दों को  मन ही मनरटकर मैंने कहा-हैलो!एक खनकती सी आवाज कानो...
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Tag :बीमार औरत
  July 26, 2014, 9:30 pm
उनकी  गजलें और हमारे जज्बात आपस में बातें करते हैं। इतनी नजदीकियां  शायद हम किसी से ख्वाबों में सोचा करते हैं। उनकी मखमली आवाज के दरमियां जब अल्फाज मौसिकी का दामन पकड़ती है, तब हम खुदाओं की जन्नतों से बड़ी जन्नत की सैर करते हैं। हम बात कर रहे है महरूम पर हमारे दिलों म...
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Tag :मेहदी हसन
  July 18, 2014, 9:50 pm


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