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Blog: काव्यान्जलि

Blogger: धीरेन्द्र सिंह
                         कुसुम-काय कामिनी दृगों में.                    कुसुम-काय कामिनी दृगों में जब मदिरा भर आती है  खोल अधर पल्लव अपने, मधुमत्त धरा कर जाती है, कंचन  वदन  षोडसी जब, कटि पर  वेणी  लहराती है  पौरु... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:26pm 12 Jan 2014
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आ कुछ दूर चलें,फिर सोचें आ कुछ दूर चलें,फिर सोचेंअमराई  की  घनी  छाँव में नदी  किनारे  बधीं  नाव में,  बैठ निशा के इस दो पल में,बीते लम्हों की हम सोचें !आ  कुछ दूर  चलें,फिर  सोचेंमन आंगन  उपवन जैसा था प्रणय स्वप्न से भरा हुआ था,तरुणाई के उन गीतों से,आ अप... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:37pm 6 Jan 2014
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
नये साल का पहला दिन,नये साल का पहला दिन,पहली किरण बिहान की, खाते कसम बदलेगें हम,किस्मत हिन्दुस्तान की!  नव वर्ष में  हम नया गढ़ेगें ,मन में यह विश्वास है, आज धरा भी मांग रही  कुछ रचने को इतिहास है!    नई सदी की  युवा  पीढी ,दिल में  लिए अरमान है,  शांत  नही  बै... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:36pm 1 Jan 2014
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
सूनापन कितना खलता हैआँखों से दर्द टपकता हैहोंठों से हँसना पड़ता हैदोनों की बाहें थाम यहाँ,जीवन भर चलना पड़ता हैसूनापन कितना खलता हैमझधार में मांझी  रोता हैलहरों के बोल समझता है है वेग तेरा भारी मुझपर,पतवार वार को सहता हैसूनापन कितना खलता है दिन धीरे-धीरे ढलता है... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   3:02pm 25 Dec 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
हम पंछी थे एक डाल के.हवा चली और छूट गए मेरे सपने टूट गए ........अपना मुझे बताने वाले ,हँस-हंसकर अपनाने वाले !यादों की खुशबू-सा बनकर, प्राणों में बस जाने वाले !जीवन के किस पथ पर जाने-मुझसे,मुझको लूट गए  ! मेरे सपने टूट गए .....रोज समय की सही समीक्षा ,मगर प्राण में पली प्रतीक्षा !सं... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:41pm 20 Dec 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
एकबूँद ओस की......सुबह सुबह पत्तों पर दूर से,कुछ चमकते देखा-?ऐसे लगा जैसे पत्तों में कोई मोती उग आया, कौतूहल बस पास गया मुझे लगा शायद ये पत्तों के आँसू है, समझ के मेरी बातों को वो मुझसे कुछ कहने लगी,तम्हे भ्रम हुआ है | न मै आँसू हूँ, न मै मोतीप्रकृति द्वारा बनाई गयी मै तो एक बूँद ... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   1:49pm 15 Dec 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
मजबूरी गाती है.पलकों  पर आँसू  की  डोली सहज  उठाती है ,ऐसा भी  होता है, तब  जब  मजबूरी गाती है |छोटे  कदम  बड़ी मंजिल  का  पता  बताते है ,लेकिन  छोटे  को सुविधा -सम्पन्न दबाते है |छोटी  सी  बाती  में  दुनिया आग  लगाती  है ,पर यह  छोटी  बाती जग रौशन ... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   1:12pm 12 Dec 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
वोट से पहले न  हिन्दू  थे  न  मुस्लिम  थे, विस्फोट  से पहले!  क्यूँ  हमने  बेच दी  इंसानियत,थीवोट से पहले!!हमारे  मुन्ने  ने  जो  'ब'  से  पढ़, बारूद  बताया!मै गोया हो गया जख्मी, किसी भी चोट से पहले!! हमारे  देश  में  जीवन , धरम  से  साँस  लेता ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:45pm 4 Dec 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
चुनाव आया   चुनाव आया  आरोप प्रत्यारोप  का दौर लाया    पिछले पाँच  दस वर्षो में जनता ने क्या पाया,   पक्ष-विपक्ष  एक दुसरे  को इल्जाम  लगाते है     अपने  को स्वच्छ  दुसरे  को गलत  ठहराते है,   इस भ्रम की स्थिति में मतदाता हो गया मौन  सही ये है  गल... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   3:24pm 29 Nov 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
कामयाबी...रोने     से     तकदीर     बदलती      नहीवक्त     से     पहले   रात   ढलती    नहीदूसरों की कामयाबी लगती आसान मगरकामयाबी   रास्ते  में   पडी  मिलती  नहीमिल  जाए  कामयाबी अगर इत्तेफाक सेयह   भी  सच   है  कि   वह   ... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   2:49pm 9 Nov 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
 दीप जलायें खेतों में  दीप जलाये  कृषकों  ने  नई फसल के !  दरिद्रता का घना अन्धेरा मिटा इसी के बल से !! चारो ओर धरा है जगमग ,आज सुहानी लगती !  खुशहाली  के गीत गूँजते, नई आशाऐ  जगती !! हरवाहे  किसान महिलाएं, श्रम की माल पिरोती !  दीपपर्व पर  कर न्योछावर,आज खुश... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   2:19pm 3 Nov 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
तुलसी  बिन  सून  लगे  अंगना( सवैया छंद )किस लायक जीवन प्यार बिना,किस लायक प्रीत बिना सजना ,ममता किस लायक  पूत बिना, तुलसी  बिन  सून  लगे अंगना !किस लायक जीवन धेय बिना, किस लायक साजन के  सजना , सरिता किस  लायक नीर  बिना, बिन भाव लिये कविता पढना ! अलगाव  रहा अप... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   9:00am 27 Oct 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
हमने कितना प्यार किया था.    अर्ध्द- रात्रि  में  तुम  थीं  मैं  था, मदमाता  तेरा  यौवन  था ,    चिर - भूखे  भुजपाशो  में  बंध, अधरों का रसपान किया था !  हमने कितना प्यार किया था !! ध्येय  प्रणय-संसर्ग  मेरा था, हृदय तुम्हारा कुछ सकुचा था , फिर भी कर ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   3:12pm 20 Oct 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
एक जबाब माँगा था  मैंने  तुमसे  कब, प्यार  का  हिसाब  माँगा  था ,सारे  सवालों  का, सिर्फ  एक  जबाब  माँगा था iजिन्दगी  की  एक तमन्ना  तो  पूरी  की  होती ,दीदार  माँगा  था ,  कब  ये  नकाब   माँगा  था iअपने  हुजूर  में, कुछ कहने  की इजाजत&n... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   3:58pm 13 Oct 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
अपनी  राम  कहानी  में  टूटे  फूटे  कुछ  अक्षर  है, अपनी  राम  कहानी  में,    जलते  प्रश्नों के  उत्तर  है, अपनी राम  कहानी में i प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों  के मेले,   ऐसे ही  कुछ  हस्ताक्षर  है, अपनी राम  कहानी में i   आँसू क... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   1:44pm 8 Oct 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
  पाँच दोहे  आज व्यवस्था  ने रची,कुछ ऐसी पहचान i गन्धर्वो  के  देश  में , सर्पो   का  सम्मान iio o oऊपर  से  हम  जी  रहे, गाँधी- गौतम  बुद्ध i भीतर-भीतर  लड़  रहे, जाने  कितने  युद्ध ii    o o o     कैसे  फहरेंगे  भला , वहाँ  क्रान्ति  के  के... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   6:01am 4 Oct 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
मर्ज जो अच्छा  नहीं  होता.    जहाँ पर  प्यार से  बढ़कर कोई  तमगा  नही होता,     वहाँ पर  भाई का  फिर भाई से  झगड़ा नही  होता |           सहा  नुकसान पर  हम  बच  गए  मगरूर  होने से,       मुनाफो  का  हारिक सौदा भी तो अच्छा नही होता | &n... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   7:02am 29 Sep 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
सुधि नहि आवत.  कैसे   है   निर्मोही   सजन   हमारे   प्रीत  लगाई  के   बैठे   है   किनारे, असाढ़   मास   जब   मयूरा   बोले  सुनकर   मोरा   तन  -  मन   डोले,सावन    में    जब    बदरा    छाये  देख   के   मो... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   4:03pm 24 Sep 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
हल निकलेगा आज  नही  तो  कल  निकलेगा  बातों  का  कुछ  हल  निकलेगा,0-0-0-0 बेईमानी   की   हाट - बजारों  में  खोटा   सिक्का   चल  निकलेगा,0-0-0-0मंथन    में    सागर   के ,  पहले  अमरित   नही   गरल  निकलेगा,0-0-0-0 रस्सी   जलकर   राख   हो ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:48pm 19 Sep 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
टू टे  प र |बिखरे  स्वर |             नीड  जला,              घर - बेघर |नभ कितना ?आँखों  भर  |             तेरी  छवि ,              जा दू ग र  |एक गजल ,तेरे   पर  |              तू  ह... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:47pm 12 Sep 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
समझ  में आया  बापू 1बापू  आसाराम  ने  ,  खेला   कैसा  खेल | करनी- भरनी के लिये ,पँहुच गये हैं जेल |पँहुच  गये  हैं जेल ,खेल ने  पलटा खाया |नखरे बहुत  दिखाय,चली ना  बापू माया |क्या होता क़ानून,सभल जाओ सब साधू |तेरी  क्या औकात,समझ  में आया  बापू | 2     ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   3:05pm 7 Sep 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
"सवैया छंद"फूल बिछा न सको  1  पथ में यदि फूल बिछा न सको,तुम कंटक जाल बिछाव नही |यदि नेह  नहीं दिखला  सकते , कटु बैन  सुना  दुतराव  नही | तुम राह सही  बतला  न सको, भटके  मन को  भटकाव नही |  मृदुहास  न बाँट सको  यदि तो , हँसते मन को  भरमाव नही |2  मिलता  सबको ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   6:58pm 30 Aug 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
पाँच ( दोहे )जहां  कहीं  सूरज  थका,दिया "दिये" ने  साथ|   उस पर भी  कुछ कम नही, जुगनू की औकात||  जब तक साँसें साथ में , केवल  तब  तक साथ|  वरना जीवन  अंत  में , बस  मुटठी  भर  राख||पाक  साफ़ हो दुश्मनी , तो फिर  भी स्वीकार| दुविधा  वाली   दोस्ती , बार - बार&nbs... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   12:43pm 25 Aug 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
सुलझाया नही जाता.तुमसे  बढ़कर  दयालु  कोई  पाया  नही  जाता  तुम्हारी शरण में आकर कहीं जाया नही जाता,पाप  की गठरी  हमारी  बहुत  भारी हुई  प्रभु जी  सिर  पर  उठाकर  उसे  यहाँ  लाया  नही  जाता,   बुलावे  पर  तुम्हारे   ही  हुए  दरबार  म... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   2:40pm 18 Aug 2013
Blogger: धीरेन्द्र सिंह
आज़ादी की वर्षगांठ  गली  गली  में बजते  देखे  आज़ादी  के  गीत रे |   जगह  जगह झंडे  फहराते  यही पर्व  की रीत रे ||   सभी पर्व मनाते देश का आज़ादी की वर्षगांठ है |    वक्त है बीता  धीरे  धीरे  छै साल  और  साठ है ||बहे पवन परचम लहराता याद जिलाता जीत रे |... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:29pm 14 Aug 2013


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