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Blog: Madhushaalaa: The Nectar House

Blogger: Madhuresh
नियमों को बदलने से क्या होगा,जब नियत ही न बदल पाई हो?बात आसमां में उड़ने की क्या हो,जब ज़मीं पर ही न संभल पाई हो!बड़ी बड़ी बातों में नहीं रखा है, जवाब हमारी आजादी का कहीं। इज्ज़त-ओ-कद्र के दो लफ्ज़ ही पर जब ज़ुबां हमारी न अमल कर पायी हो!बात न क़ानून की रह गयी है कहीं,और न कि... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:55pm 27 Dec 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
यह दीन दशा अब देख देश की,रोती  प्याला, रोती हाला। चहु ओर व्यथा है, औ' विषाद है,थर-थर काँपे मन-साक़ी बाला।कैसी मादकता छा गयी समाज में!किसने ढारी यह कलुषित हाला!निःशब्द खड़ी, नियति पे रोती,बस शोक मनाती मधुशाला। कुछ पुष्प ईश-अर्पण के तुम,श्रद्धा से परे हटा देना,विनती उस बाला ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:41pm 24 Dec 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
I don't feel like updating my facebook status or sharing anything there or writing any poem on my blog. I am just distressed and disappointed. Whether it is about merciless killing of innocent school going children or a woman being raped and brutally beaten in a moving bus, I feel like I shouldn't have any reason to laugh, smile or celebrate until we live in such a demoniac society. I pity myself for being helpless, for not doing anything that could have a real impact over this. And here I resolve, I wouldn't celebrate my life, until I really do something. There is no 'merry' in my Christmas, and no 'happy' in my 'new year' if I cannot contribute to curb o... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   4:24pm 18 Dec 2012 #
Blogger: Madhuresh
सलिल अंकल हमको परचूर भरमा दिए हैं,एतना बढ़िया बिहारी का परसार किये हैं,कि हमको भी लगा एगो कबिता लिखा जाय,पूरा नहीं त कमसे एक-दू बित्ता लिखा जाए।दूर-दराज काम-काज में तल्लीन बचवा जब सांझी को अपने घरे बात करता है,तब माँ-बाबूजी से बतिया के अपने भासा मेंउसको ई बात का पता चलता ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   10:37pm 2 Dec 2012 #भोजपुरी
Blogger: Madhuresh
नदियों का प्रेम समर्पण का,उनका तो प्रेम प्रवाह है बस।  आग़ोश में लेता जाता फिर भी,सागर की है कुछ कशमकश! अथाह प्रेम समर्पण कानदियाँ अपने संग लाती हैं,पर पत्थर राहों में घिसकर थोड़ी नमक भी घोल आती हैं।ये चुटकी भर नमक नहींनदियों का मीठापन हरता है,लेकिन यूँही बूँद-बूँद कर सा... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   3:39am 25 Nov 2012 #आत्म-मंथन
Blogger: Madhuresh
मन सुरभित, जीवन सुरभित,ये हर्ष, प्रमोद की वाहिनी, करतीं मृदुल मुस्कान लिए हैं अठखेलियाँ मनभावनी।जो लेता इनको गोदी में, खुद ही इतराता फिरता है,खिंचवा इनके संग-संग फोटोक्या ही इठलाता फिरता है!इनकी ममता पूजा जैसी,वात्सल्य स्वयं सौरभ जैसा,महके घर-आँगन नित इनसे,चहकें तो स... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   12:42am 22 Nov 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
'इक बूँद इश्क़िया डाल कोई तू,मेरे सातों समंदर जाएं रंग !!'... कितना गहरा होता होगा इश्क का रंग, कि एक ही बूँद काफी होता है सातों समंदर रंगने के लिए !आजकल का modern इश्क़ जाने इन एहसासों से परे क्यों लगता है ... ग़ालिब कहते हैं कि'इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है ये वो आतिश ग़ालिब,जो लगाये न लगे, ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   11:00pm 16 Nov 2012 #प्रेम
Blogger: Madhuresh
'इक बूँद इश्क़िया डाल कोई तू,मेरे सातों समंदर जाएं रंग !!'... कितना गहरा होता होगा इश्क का रंग, कि एक ही बूँद काफी होता है सातों समंदर रंगने के लिए !आजकल का modern इश्क़ जाने इन एहसासों से परे क्यों लगता है ... ग़ालिब कहते हैं कि'इश्क़ पर ज़ोर नहीं, है ये वो आतिश ग़ालिब,जो लगाये न लगे, और बुझ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:00pm 16 Nov 2012 #प्रेम
Blogger: Madhuresh
तेरी हर वो आहट जो मुझे उतरन-सी लगी,तूने मुझे उसमेऊँचाई ही बख्शी है !ये कैसा दरिया है कि जहाँ डूबा,वहीं पार भी हुआ,क्या ही ज़िन्दगी बख्शी है !कभी तो ऐसा था  कि सब्रो-करार न था,अब इन थमी साँसों में भीबन्दगी ही बख्शी है !इक अँधेरा ही तो था,ये जो उजाला है अभी,दीप जो मन का जला है,क्... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   3:46am 13 Nov 2012 #आत्म-मंथन
Blogger: Madhuresh
कोमल कुसुम ये मन-प्रसून,और कठोर सा काल-पटल,टकराया, गिरा, औ' फिर उठा,है वज्र बना ये पिस-पिस कर.अपनी कमज़ोरी से मैंनेताकतवर बनना सीखा है.हाँ, कुछ यूँ जीना सीखा है.जिसने पीड़ा को अपनाया,है जिसने रुद्न-गीत गाया,उसने ही खुशियों का दामनआजीवन मन में है पाया.मैंने दुःख में भी दमभर कर... Read more
clicks 225 View   Vote 0 Like   8:59pm 3 Nov 2012 #वीर
Blogger: Madhuresh
कभी-कभी सोचता हूँकि क्या ही मंज़र है!लहरें दो हैं यहाँ,औ' एक समंदर है!इक लहर इस समंदर की जो साहिल से टकराती है, औ' वापस चली जाती है।और  दूसरी इन ज़ुल्फों की,जो दिल-ओ-दीवार से टकराती है,औ' वापस ही नहीं जाती!बस वहीं थम सी जाती है!Picture Courtesy: http://www.carmenguedez.com/abstract-art-paintings/along-the-shore... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   9:56am 3 Nov 2012 #श्रृंगार
Blogger: Madhuresh
यह पूनम भी अमानिशा सीअँधियारा लिपटाती जाती.औ' बैरन-सी भयी बयार भीकुटिल शीत कड़काती जाती.उजियारा बस कहने को है,अंतर तम का घोर कहर है.बाहर के चकमक में उर येअंतस लौ झुठलाती जाती.तज दे झूठी राग चमक की,तज दे अब ना और बहक री,चल रे अब तू भीतर चल री,क्यूँ खुद को भरमाती जाती! O my conscience,hold me t... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   10:54pm 26 Oct 2012 #आत्म-मंथन
Blogger: Madhuresh
तुम देवी थी-ममता और वात्सल्य की,अगाध सहनशीलता की,कर्त्तव्य-परायणता की.तुम्हारा आँचल-स्नेह का अथाह सागर था,हम सभी जिसके साये तले पुष्पित हुए, पल्लवित हुए...जानता हूँ कि जाना है तुम्हे,फिर भी मेरे मन में न कोई दुःख है, न विषाद..क्योंकि प्रथा यही है कि विसर्जन धूम-धाम से करते... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   2:10am 18 Oct 2012 #करुणा
Blogger: Madhuresh
कल की बात है  कुरुक्षेत्र - रक्त-रंजित था आज फिर से रक्त-रंजित है. वो रक्तजिसका स्राव भी ततक्षणवहशी पी जाते हैं.मानवता अब प्रतिदिनबे-आबरू होती हैऔर अब कृष्ण भी कोई नहीं है.हो भी क्यों?कृष्ण तो उनका था ही नहींकभी भी नहींक्योंकि आज का कृष्णदेखता हैकौन आम है, कौन खास हैउसका ... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   8:15pm 14 Oct 2012 #करुणा
Blogger: Madhuresh
ओ अंधियारे के चाँद तेरी चमक फीकी पड़ती जाए... काले से पखवाड़े में क्यों काला तू पड़ता जाए ?..  कोई देखे, कोई ना देखेअब किसे कौन समझाए...इस ओर से काला होकर भी उस ओर तू चमका जाए.. तू है धरा के पास-पास,चमके, कभी तू धुंधलाए... क्यों पूनम की चमक तुझे इक दिन से ज़्यादा न भाए..देख तो सूरज चमके ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   7:42pm 3 Oct 2012 #आत्म-मंथन
Blogger: Madhuresh
The moon is waning this fortnight'n there will be 'no moon' some night'tis just that we can't see the other side,where the 'no moon' has a 'full moon light'!The moon reflects and revolves aroundThe moon retracts when close 'n boundIs the full moon light way too intense?Isn't being steady quite safe 'n sound?The sun is steady, but is so far!The moon is so close, but at no par!O! the waning moon, you'll wax again,and light up the night, you're no star!... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:44am 2 Oct 2012 #
Blogger: Madhuresh
क्या खाली, क्या भरा यहाँ पे,सबके हाथों में है प्याला.सबका एक नशा निश्चित है,सबकी अपनी-अपनी हाला.कुछ पी-पी कर जीते हैं और कुछ जी-जी कर पीते हैं,नशा नहीं लेकिन सम सबका,एक नही सबकी मधुशाला.असमंजस का डेरा जमता,कितने प्याले! कितनी हाला!कौन नशा उत्तम है करता,किसकी हाला, अव्वल हाल... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:50am 23 Sep 2012 #आत्म-मंथन
Blogger: Madhuresh
पंख ले पसार पंछी!इक गगन है स्याह-श्यामल,इक गगन है पाक-निर्मल,इस गगन से उस गगन तकउड़ने को तैयार पंछी!पंख ले पसार पंछी!आकाश ये सीमाविहीन है,और धरा पे तू परीन है,थाम मत अब ज़ोर दे करबाँध मन के तार पंछी!पंख ले पसार पंछी!रुक गया जो तू विलय को,तो रहेगा हीन जय को,है ऋतु बहते मलय कीकर ल... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:41am 14 Sep 2012 #वीर
Blogger: Madhuresh
दो नयना भरे-भरे से हैंस्नेह से, आशाओं से...जाने क्यूँ परे-परे से हैंअनदेखी परिभाषाओं से...मुख पे मद्धिम मुस्कान कहींइक स्वप्न कोई पुलकित करतीं...कुछ डूबे से, कुछ उबरे सेमीठे ख़याल अंकित करतीं...हाँ दूर कहीं उन स्वपनों मेंनव-जीवन की आवृत्ति है...जो था सुषुप्त, अब है जगामन नवल-... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   10:24am 24 Aug 2012 #श्रृंगार
Blogger: Madhuresh
*************************** गंगा, पतित-पावनी गंगा-तुम धरा पे अब कहाँ हो?धुलेंगे क्या अब कर्म मेरे, विषादज बन गए हैं जो?श्वेताम्बरा- ये मलिन जलतो मलयज भी रासता नहीं.कह दो, कह दो, भरके हुंकारकि इससे तुम्हारा वास्ता नहीं.अब देवों की नदी कहाँ तुम?दैत्यों के नगर जो बहती हो.अमृत-सम थी, अब विषक्त ह... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   12:54pm 18 Aug 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
हशल-बशल सी लाईफ मेंमर्द, तुम कितना पिसते हो!ज़िन्दगी की जुगाड़ मेंखुद को कितना घिसते हो!भागम-भाग भरी ज़िंदगी मेंकभी सुकून की भी सोची है?क्या खाते हो, क्या पीते हो,कभी सेहत की भी सोची है?उड़ गए बाल आधे से ज़्यादाबे-उम्र ही पड़ गयी झुर्रियां.क्या कभी तुम्हारे भी चेहरे परसनस्क... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   5:11pm 24 Jun 2012 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: Madhuresh
जब एकांत में प्रशांति न हो,और चित्त में विश्रांति न हो,जब सपन-सलोने नयनों मेंकौतूहल हो और कान्ति न हो,जब ठिठके मुझसे मेरी छायायूँ जैसे कि पहचानती न होजब रूठे मुझसे मेरी तन्हाई,मैं लाख मनाऊँ, वो मानती न हो,तुम धीरे से पास बुलाना मुझे,ख़ुद का एहसास दिलाना मुझे,ताकि ये लगे कि... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   3:09am 21 Jun 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
मत रोको, बहने दो अश्रुधारहै अंतर-निहित आत्म-उद्धारये विरह विलय की आगत हैकरो स्वागत ले उर प्रेम अपार.मत रोको, बहने दो अश्रुधारक्षोभ नहीं, अभिनन्दन काक्षण है ये जीवन-वंदन कासम-भाव हो खोने-पाने मेंयही है समुचित श्रेष्ठ विचारमत रोको, बहने दो अश्रुधारदेखो जो बहे- बस पानी हो... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   1:33am 16 Jun 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
वनवास कठिन होता है.और होता है कुछ ज़्यादा हीजब स्वनिर्णित होता है.क्योंकि किसी ने कहा अगरवनवास पे जाने को,तो तुम चले भी जाओगे.धर्म की, कर्त्तव्य कीमजबूरियों पर तोहमत लगाओगे.लेकिन जब बिना किसी आग्रह स्वयं ही जाना हो,तो मन में कैकेयी, मंथराया फिर कौरव, शकुनीकहाँ से लाओगे?क... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   2:46am 9 Jun 2012 #विशेष
Blogger: Madhuresh
सहगामिनी हो जीवन-पथ की,सहभागी एक-से स्वप्नों की,हाँ, उसके सुरमयी स्वप्नों कीसंचयिका बनना चाहता हूँ. वो कहे तो मैं सजदे कर लूँ,या खुद के घुटनों पे हो लूँ,मगर जहाँ वो सिर रख सके,वो कन्धा देना चाहता हूँ. सिर झुका कर बातें कर लूँ,नेह उसका पलकों पे धर लूँ,पर उसे सदा मैं आसमान की ब... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   12:24am 29 May 2012 #प्रेम

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