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सोचा ना था....

साल शुरू होते ही संकल्प लेने का सिलसिला शुरू हो जाता है,जो महीने- दो महीने में टूट भी जाता है,वैसे तो मैं संकल्प लेने की आदी नहीं हूँ;पर साल के शुरुवात में ही इस बार मैंने संकल्प लिया कि इस साल कम से कम २४ किताबें पढूंगी.पर जब हिंदुस्तान टाइम्स में देखा तो उन्होंने साल में ...
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Tag :क़िताबों की दुनिया
  April 7, 2015, 5:11 pm
आज बस वाले ने बीच रोड बस रोक दी,क्यूँकि एक आदमी नियम तोड़कर सामने वाले दरवाजे़ से चढ़ा था..और वो आदमी बजाय नीचे उतरकर पिछले दरवाजे़ से चढ़ने के बेशर्मों की तरह बैठा रहा और खु़द को सही साबित करता रहा..कुछ देर में कंडक्टर और कुछ यात्री ड्राइवर को ही समझाने लगे..उसने बस ये कहा...
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  August 30, 2014, 3:43 pm
अभी ‘क्वीन’फिल्म देखी मुझे बहुत अच्छी लगी...और अधिकांश लड़कियों को ये फिल्म बहुत पसंद आई...कंगना राणावत की एक्टिंग बेहद जानदार है और कहानी भी। सुबह मैंने ‘ज़िंदगी न मिलेगी दुबारा’देखी थी वो भी कई बार देख चुकी हूँ पर हर बार एक अनोखा सुख मिलता है ऐसी फिल्मों को देखकर इसका का...
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  May 26, 2014, 6:09 pm
कुछ दिन पहले मुझे एक मेल आई जिसमे लिखा था कि कोई मेरी ब्लॉग पोस्ट “क्यूँ बनें सती सावित्री जब सत्यवान कहीं नहीं”को अपना बता रहा है,उसमे दो लिंक भी दिये हुये थे...ये मेल मुझे राजीव जी(नाम बदला हुआ है) की ओर से आई थी...दोनों लिंक फेसबुक की थी और वो सिर्फ उनके मित्रों तक ही सीमि...
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  May 31, 2013, 10:44 am
कुछ दिन पहले मुझे एक मेल आई जिसमे लिखा था कि कोई मेरी ब्लॉग पोस्ट “क्यूँ बनें सती सावित्री जब सत्यवान कहीं नहीं”को अपना बता रहा है,उसमे दो लिंक भी दिये हुये थे...ये मेल मुझे राजीव जी(नाम बदला हुआ है) की ओर से आई थी...दोनों लिंक फेसबुक की थी और वो सिर्फ उनके मित्रों तक ही सीमि...
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  May 31, 2013, 10:44 am
लोग अक्सर अपने सबसे अच्छे दोस्त के बारे मे बात करते हैं...हर एक का कोई न कोई ऐसा दोस्त होता है जिसके सामने वो हर बात खुलकर कर पाते हैं...चाहे वो कैसी भी बातें हों...बिलकुल जय-वीरू जैसी दोस्ती...जहां कोई पर्दा नहीं होता न ही कोई दुराव छिपाव होता है..और लड़कियों की तो ऐसी सहेलियाँ ...
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  February 26, 2013, 12:21 am
दो दिन पहले एक खबर सुनने मिली कि दिल्ली मे चल रही एक मेडिकल परीक्षा मे फर्जी लड़के-लड़कियां शामिल थे..वो किसी और के बदले परीक्षा दे रहे थे...ये एक बहुत बड़ा रैकेट है और इसका मास्टर माइंड था एक साउथ इंडियन डाइरेक्टर....वो 40 लाख रूपए के बदले एक ऐसे फर्जी लोगों को परीक्षा मे बैठने क...
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  December 2, 2012, 6:00 pm
किसी ने सच ही कहा है इच्छा कभी खत्म नहीं होती कुछ मिलता है तो उससे ज्यादा पाने की इच्छा होती है....ऐसी ही एक इच्छा मेरे मन मे हमेशा से कुलबुलाती रहती थी...जिसे पूरी करने के लिए मैं तत्पर रहती थी....अकेले रहने की इच्छा...वैसे इंसान अकेलेपन से भागता है...लेकिन भागने के लिए अपने डर ...
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  August 25, 2012, 5:52 pm
कुछ दिन पहले एक पुस्तक पढ़ी..“गोली”...आचार्य चतुरसेन द्वारा लिखी इस पुस्तक मे राजस्थान की एक पुरानी परंपरा को दर्शाया गया है...प्राचीन समय मे ऐसा रिवाज था कि छोटी जाती की लड़कियों को राजा अपनी दासी बनाकर रखते थे...इन्हे गोली कहा जाता था...गोलियों के रहन सहन का पूरा खर्च रज़ा ही ...
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  August 24, 2012, 12:51 pm
पूरी ज़िंदगी हम लड़कियों को ये कह कर पाला जाता है कि दूसरे के घर जाना है ये करो...ये मत करो...कभी कुछ गलती हो जाए तो भी यही सुनने मिलता है...कल को दूसरे घर जाएगी तो वहाँ सब कहेंगे माँ-बाप ने नहीं सिखाया...खाना बनाना आना चाहिए,घर के काम आने चाहिए,पढ़ाई-लिखाई तो ठीक है लेकिन सिलाई-कढ़ा...
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  August 23, 2012, 2:03 pm
पगोडा...जबसेगोराईमेंपगोडाबनाहैतबसेहीकईबारहमनेयहाँजानेकाप्लानबनायालेकिनकभीजाहीनहींपाए...पिछलेसन्डेहमयहाँगए...घरसेमार्वेतकऑटोमेंऔरवहांसेपगोडातकजेट्टी(छोटाजहाज) में...कुछ२०मिनटलम्बीइससमुद्रयात्रामेंमैंनेइतनीफोटोखिंचीजितनीशायदआधेघंटेकीएलिफेंटाजाते...
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  August 23, 2012, 1:50 pm
जब आप किसी जगह बहुत दिनों तक रहते हैं तो आपको उस जगह की आदत सी पड़ जाती है और जब वहां से दूर रहना पड़ता है या उस जगह को छोड़ना  पड़ता है तो ऐसा लगता है जैसे हम अपना एक हिस्सा छोड़ रहे हैं....ये इंसान की एक अजीब-सी आदत है वो अपने आसपास की चीजों से....लोगों से...इस कदर  जुड़  जाता है क...
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  August 23, 2012, 1:45 pm
पगोडा...जब से गोराई में पगोडा बना है तब से ही कई बार हमने यहाँ जाने का प्लान बनाया लेकिन कभी जा ही नहीं पाए...पिछले सन्डे हम यहाँ गए...घर से मार्वे तक ऑटो में और वहां से पगोडा तक जेट्टी(छोटा जहाज) में...कुछ २० मिनट लम्बी इस समुद्र यात्रा में मैंने इतनी फोटो खिंची जितनी शायद आध...
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  March 6, 2012, 2:56 pm
जब आप किसी जगह बहुत दिनों तक रहते हैं तो आपको उस जगह की आदत सी पड़ जाती है और जब वहां से दूर रहना पड़ता है या उस जगह को छोड़ना पड़ता है तो ऐसा लगता है जैसे हम अपना एक हिस्सा छोड़ रहे हैं....ये इंसान की एक अजीब-सी आदत है वो अपने आसपास की चीजों से....लोगों से....इतना जुड़ जाता है की उसे...
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  January 2, 2012, 3:29 pm
कई दिनों से न्यूज़ में ये सुनने में आ रहा है कि अलग तेलंगाना राज्य की मांग हो रही है...कुछ लोग अलग खालसा भी मांग रहे हैं...कुछ १० सालों पहले ही मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ निकला....कुछ दिनों से बुंदेलखंड भी अलग बनाने की मांग चल ही रही है....ये सब देखकर ऐसा लग रहा है कि वो दिन दूर नही...
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  October 17, 2011, 5:37 pm
मुझे याद भी नहीं कि कब से मैं विविध भारती सुनती चली आई हूँ..शायद बहुत छोटी थी तभी ये आदत लग गई थी...और जब से विविध भारती और उसके प्रोग्राम के नाम याद रहने लगे...तब से ही कुछ नाम भी जाने पहचाने लगने लगे...ऐसे ही जाने पहचाने दो नाम थे...कमल शर्मा और युनुस खान...शायद ये विविध भारती का ...
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Tag :विविध भारती
  May 30, 2011, 5:53 pm
कहानी...अपनी दादी- नानी से बचपन में सुनी है,हम सबने...राजा-रानी की,अच्छे- बुरे लोगों की, सच्चाई की जीत की,मेहनत के फल की.....बचपन से ही इन कहानियों का असर हमारे दिलोदिमाग में होने लगता है और इन कहानियों के साथ ही शुरू होता है...हमारी कहानी का सफ़र...हाँ, सोचकर देखो क्या हम सबकी ज़ि...
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Tag :कहानी
  April 8, 2011, 12:51 pm
सूरज की पहली किरण और पंछियों के शोर से ये आभास हुआ कि सबेरा हो गया...वैसे खिड़की से छनकर आती किरणें सीधे मेरे मुँह पर पड़ रही थीं..लेकिन मुझे कोई परेशानी नहीं हो रही थी..बल्कि ये मुझे एक सुकून दे रहीं थीं..ऐसा लग रहा था मानो ये किरणें थककर निढाल हो चुके मेरे शरीर को अपनी ऊष्मा ...
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Tag :सुबह
  April 4, 2011, 1:45 pm
अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में हिंदी में आने वाले उर्दु लफ़्जों के सही उच्चारण के लिए मैंने कुछ ऎसी पुस्तकों को पढ़ने का सोचा..जिसमे हिंदी के साथ उर्दु लफ्ज़ शामिल हों और वो बहुत ज्यादा कठिन भी न हों...मेरे भाई ने मुझे जावेदअख्तरकी तरकशपढ़ने की सलाह दी...तरकश....जावेदसाहबकी बे...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  January 12, 2011, 3:04 pm
कुछ महीनों से अपनी ट्रेनिंग में यूँ उलझी की...लिखने से ज्यादा समय पढने में जाता है...ज़िन्दगी में आपको क्या करना है इसका निर्णय पहले कर लेना बेहतर होता है या खुद को ज़िन्दगी के हवाले कर देना...नहीं जानती,लेकिन जहाँ तक मेरा सवाल है मैंने खुद को हमेशा ज़िन्दगी के हवाले किया......
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Tag :कीमत
  January 11, 2011, 2:43 pm
बचपन...कितना अच्छा होता है..और उसकी बेफिक्री क्या होती है...ये बड़े होने के बाद ही पता चलता है...उस वक्त तो बड़े होने की बड़ी जल्दी होती है...लगता है..बड़े होकर ये करेंगे...वो करेंगे...लेकिन बड़े होकर पता चलता है...कि बड़ा होना क्या होता है...और तब बचपन की यादें....क्या ये ही हममें से अ...
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Tag :बचपन
  November 14, 2010, 8:08 pm
कला....ये शब्द मुझे इन दिनों आकर्षित कर रहा है...आखिर ये कला है क्या...?.....हर छोटे-बड़े काम को करना भी एक कला ही है...लेकिन जब हम इस शब्द की गहराई में जाते हैं,तो पाते हैं कि इस शब्द के साथ साधना और लगन जुड़े हुए हैं...किसी भी कला में माहिर होने के लिए ज़रूरी है...कि आप उसमे पूरी तरह से र...
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Tag :कला
  September 26, 2010, 1:13 pm
आज स्वतंत्रता की ६३ वीं वर्षगांठ है.....हम सभी भारतियों के लिए ये एक ख़ुशी का मौका है.....आज मैं ये सोच रही थी कि मैंने अपने जीवन के इतने सालों में देश के लिए क्या किया...?....शायद कुछ नहीं...या अगर कुछ किया भी हो तो वो उंट के मुह में जीरे के बराबर...हम सभी (ये आप के ऊपर है कि आप इसमें शाम...
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  August 15, 2010, 9:12 pm
१ महिना होने को आया और मैंने कुछ भी नहीं लिखा....ये कुछ आश्चर्य-सा है.....लेकिन करूँ भी तो क्या...?...कभी कुछ सूझता नहीं...और सूझता तो नेट पास नहीं.....वैसे इन दिनों अपनी "वॉईस-ओवर" ट्रेनिंग में थोड़ी व्यस्त-सी थी....समय तो मिलता है..पर विचार नहीं...अगर मैं कोई प्रोफेशनल लेखिका होती,तो शाय...
सोचा ना था.......
Tag :
  August 9, 2010, 4:24 pm
१ महिना होने को आया और मैंने कुछ भी नहीं लिखा....ये कुछ आश्चर्य-सा है.....लेकिन करूँ भी तो क्या...?...कभी कुछ सूझता नहीं...और सूझता तो नेट पास नहीं.....वैसे इन दिनों अपनी "वॉईस-ओवर" ट्रेनिंग में थोड़ी व्यस्त-सी थी....समय तो मिलता है..पर विचार नहीं...अगर मैं कोई प्रोफेशनल लेखिका होती,तो शाय...
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Tag :कुछ भी....
  August 9, 2010, 4:24 pm


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