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'दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan)

मैं धर्म को जीने के तरीके के रूप में देखता हूँ। आप जितने सरल तरीके से हिंदुत्व को समझना चाहते हैं उतने सरल रूप में समझ सकते हैं। परहित सरिस धरम नहि भाई। परपीड़ा सम नहि अधमाई।  आपको जटिल पांडित्य में जाने की भी छूट है पर सनद रहे पंडित जी पिंडदान  तक पीछा नहीं छोड़ेंगे। ...
'दि वेस्टर्न विंड' (pachhua pawan)...
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  April 9, 2017, 1:57 pm
मैं धर्म को जीने के तरीके के रूप में देखता हूँ। आप जितने सरल तरीके से हिंदुत्व को समझना चाहते हैं उतने सरल रूप में समझ सकते हैं। परहित सरिस धरम नहि भाई। परपीड़ा सम नहि अधमाई।  आपको जटिल पांडित्य में जाने की भी छूट है पर सनद रहे पंडित जी पिंडदान  तक पीछा नहीं छोड़ेंगे। ...
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  April 9, 2017, 1:57 pm
गंगा में मिलिहें डूब कर नहइहें...अम्मा से मिलिहें त खुलकर बतिअइहें...।गोआ की राज्यपाल आदरणीय मृदुला सिन्हा जी मात्र राजनीतिक ही नही उनका मन मस्तिष्क में देसी बोली बानी  से ओत प्रोत है। उनके अनुसार सच में हिन्दी हमारी अम्मा और गंगा की श्रेणी में है। हिन्दी भले ही राष्ट...
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  April 2, 2017, 7:50 am
सामान्यत : "इतिहास "शब्द से राजनीतिक व सांस्कृतिक  इतिहास का ही बोध होता है ,किन्तु वास्तविकता यह है कि सृष्टि की कोई भी वस्तु ऐसी नहीं है जिसका इतिहास से सम्बन्ध न हो । अत : साहित्य भी इतिहास से असम्बद्ध नहीं है ।साहित्य के इतिहास में हम प्राकृतिक  घटनाओं व मानवीय क...
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  March 31, 2017, 1:39 pm
'मेरे जिक्र  का जुबां पे सुआद रखना ' गाना बजते ही बुद्धू बक्सा टुंडे कवाब की कहानी बताने लगा मैंने टीवी बन्द कर अमरीक सिंह दीप की कड़े पानी का शहर उठा लिया।बकौल अमरीक सिंह दीप आपहिंदुस्तानकीकितनीहीज...
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  March 30, 2017, 2:29 pm
"आम आदमी" एक सापेक्ष अवधारणा है जो उस व्यक्ति की  ओर संकेत करता है जो तुलनात्मक रूप से "नियंत्रक वर्ग"से नही आता है।  परिवार से लेकर समाज और राज्य में दो प्रकार के वर्ग देखने को मिलते है प्रथम वे जो किसी न किसी प्रकार नीति निर्माण प्रक्रिया में भागीदार होते है, दुसर...
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  March 29, 2017, 2:21 pm
 हमरे अंगना में आई जोन्हाई हे गोरी तनी बचि के रहू   तोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहूबगिया में लसे लसा चुवेला हो अमवाकुहुके कोयलिया कि आवा हो फगुनवारस छलके त मनवा बऊराई तोहरे.... हे गोरी तनी बचि के रहूतोहरे देहिया पे छाई फगुनाई हे गोरी तनी बचि के रहूखे...
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  March 9, 2017, 11:02 am
भभूती के दुलहिन की पहचान भभूती से १०० गुना ज्यादा है। मै आज तक भभूती को नहीं पहचान पाता हूँ पर भभूती की दुलहिन सारे गांव के दुःख सुख की साथी है। कोइ भी काम हो भभूती की दुलहिन बिना ना नुकुर किये हँसते  हुए हाजिर हो जाती थी अपनी साथिनों के साथ। आख़िरी बार उसके साथ मैंने १९९...
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  March 7, 2017, 9:46 pm
जोगीरा सा रा रा रा ढोलक बाजे तासा बाजे अरु बाजे मिरदंग।राम समुझ जी फाग सुनावे मची खूब हुडदंग। जोगीराकऊन छते पे चढ़ि के बोले कऊन गड़हिया तीरकऊन अंगनवां भीतर बोले गावे कऊन कबीर। जोगिरापापा छत पे चढ़ि के बोलें चाचा गड़ही तीरबीच अंगनवां भऊजी बोलें भईया कहे कबीर। जोगी...
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  March 6, 2017, 10:26 pm
सिपहिया के भेसे में ठोल्लाबलम तुम निकले पानी के बोल्ला।छागल लियावे के बातें कहे थेहमका सजावे के बातें कहे थे पहिनाए दिहे भंईसी के चोल्लाबलम तुम निकले पानी के बोल्ला।खाझा बताशा मिठाई की बातेंहमसे किहे रस मलाई की बातेंलेबिनचूसो न मिला बकलोल्लाबलम तुम निकले पानी क...
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  February 26, 2017, 10:22 pm
धेला भर कछु करें धरें ना कामै खाली बोलत है।इस्कूले से हस्पताल तक दामै खाली बोलत है।ठेका उठिगै मनरेगा के बालू बिकी सोन के भावनेताजी के घर मा द्याखो जामै खाली बोलत है।रोजा रखि रतजगा करावें सेकुलरई में जोड़ नहीरतिया कोकिल बोले मुरगा घामै खाली बोलत है।नाम लिखा है माननीय ...
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  February 26, 2017, 10:15 pm
तुमने कहा ये वक्त तुम्हारा हैयह वक्त है तुम्हारे द्वारा आग लगाने काआंधिया उठाने काकच्ची खड़ी फसलों को बूटों से रौंद डालने काघरों की दीवारो को ढहा देने काजो चाहे मर्जी कर दो क्योंकितुमने कहा कि ये वक्त तुम्हारा है।हमने होंठ सी लिएतुम खुश हो जाओ और धरती पलट दोहमे इन्तज...
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  February 26, 2017, 10:13 pm
उत्तर प्रदेश मैं बोल रहा हूँप्रश्न चिन्ह बन खौल रहा हूँ।अपराधों का बोझ उठायेगांठे अपनी खोल रहा हूँ।जाति धरम में बाँट बाँट करहिस्से हिस्से काट काट करमुझको कितना छला गया हैकितना मुझको जला दिया हैभूख गरीबी बेकारी बसमेरे हक में लाचारी बस।जहर बुझा गंगा का पानीजमुना है ...
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  February 5, 2017, 10:16 am
पूछती हो मुझसे क्या देखता हूँ मैं तुम मेंसुनोतुम्हारे केश जल से भरी घटाएंजो बरसती हैं सिर्फ मेरे कंधों परआँखों में तुम्हारी आईनेजिनमे दिख जाता है संसार का सौंदर्य साराहोंठ तुम्हारे रंगरेज़रंग लेते हैं अपने ही रंग मेंमेरे अधरों कोबाहें तुम्हारी कोमल लताएंजिन्ह...
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  November 25, 2016, 7:57 pm
मैंने अपने पत्रकारीय जीवन की 25 वर्षों की यात्रा में देश में कई आम चुनाव और राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव देखे ---समूचा देश घूमा --- चारों दिशाओं में --- लेकिन कहीं भी मुझे किसी भी चुनावी सभा में कोई नेता इंग्लिश में वोट मांगता नहीं दिखा --- केरल में भी नहीं और तमिलनाडु में भी ...
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  November 4, 2016, 10:06 pm
बादलों का घूँघटहौले से उतार कर चम्पई फूलों से ,रूप का सिंगार करअम्बर ने प्यार से , धरती का तन छुआ ।मखमली ठंडक लिये ,महीना अगहन हुआ ॥धूप गुनगुनाने लगीशीत मुस्कुराने लगीमौसम की ये खुमारी,मन को अकुलाने लगीगुड़ से भीना आग का जो मीठापन हुआ ।मखमली ठंडक लिये ,महीना अगहन हुआ ॥ह...
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  November 3, 2016, 3:17 pm
                                 भाषा अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है अर्थात जीवन के जितने भी दैनिक कार्य व्यापार हैं, गतिविधियाँ हैं उन्हें भाषा के माध्यम से संपन्न किया जा सकता है।भाषा ही व्यक्ति को समाज और समाज कोदेश अथवा विश्व-सूत्र में जोडती है।...
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  November 1, 2016, 12:45 pm
अभया..................... बन पाती तुम कैसे।माना मुझसे प्यार नही थामेरा कुछ अधिकार नही था,विनिमय किये भाव के मैंने लेकिन यह व्यापार नही था।निर्बंधों के सम्बन्धों में बंध पाती तुम कैसे ।अभया...................... बन पाती तुम कैसे।कहा सभी अनकहा रह गयापत्थर सा मैं पड़ा रह गया,स्पर्शों में चन्दन ...
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  October 26, 2016, 2:00 pm
इस पृथ्वी पर पैदा होने वाला कोई भी मानव बच्चा किसी ना किसी संस्कृति का अटूट हिस्सा जरुर है और चाहे बोली के स्तर पर या फिर भाषा के स्तर पर वह अपने चारों ओर बहुधा बोली जाने वाले स्वर ज्ञान को अपनाता है जिससे न सिर्फ वह मौलिक रूप से उस संस्कृति का सदस्य प्रदर्शित होता है बल्...
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  October 21, 2016, 12:45 pm
हिन्दीकेगणमान्य  लेखकों, पत्रकारोंऔरपत्रकारोंकेबीचसाहित्यिककहानीकिस्सेसुनतेहुएकभीनतोजानाऔरनहीसमझाकिहिन्दीकोलेकरकोईसमस्याहैयाहिन्दीकाहिन्दीकाअस्तित्वकिसीप्रकारकेसंकटमेंहै। लेकिन आज जब ध्यान से देखतीहूँतोएकबाततोनिश्चितलगतीहैकिस्वतन्त्रता...
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  October 7, 2016, 9:29 pm
आप आर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों से यह पूछिए कि भारत की राष्ट्रभाषा बताओ ? तो यकीन मानिए कि अधिकांश बच्चों के मुँह पर सहज ही ‘हिंदी’ आ जाएगा, जबकि वस्तुस्थिति यह है कि फ़िलहाल इस देश की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। लेकिन उस बच्चे के राष्ट्रभाषा के रूप में ‘हिंदी...
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  October 7, 2016, 8:34 am
इस समय हिन्दी दिवस या फिर हिन्दी से सम्बन्धित कोई भी सप्ताह, पखवाड़ा, माह आदि भी नहीं मनाया जा रहा है फिर भी हम हिन्दी की बात करने आगये हैं। दरअसल देखने में आ रहा है कि विगत कुछ वर्षों से हिन्दी को लेकरहिन्दी भाषियों और अहिन्दी भाषियों के द्वारा हिन्दी विकास के लिए बड़े-बड़...
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  October 6, 2016, 11:05 pm
भारत और भारतीय भाषाओं के प्रति रूस में झुकाव पन्द्रहवीं शताब्दी में ही झलकने लगा था। जब रूसी विश्वयात्री अफ़नासी निकितिन ने भारत की यात्रा की थी। रूस के प्राचीन नगर त्वेर से वे 1468में भारत के लिए रवाना हुए थे और काले सागर को पार कर अज़रबैजान और ईरान के रास्ते भारत पहुँचे थ...
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  October 2, 2016, 9:54 pm
 बकौल गोपेश्वर सिंह हिन्दी में जिस विधा की सर्वाधिक दुर्गति हुई है, वह है पुस्तक समीक्षा। फिलहाल पुस्तक समीक्षा लिखने-लिखाने का आलम प्राय: जुगाड़ उद्योग-सा है। पत्र-पत्रिकाओं के इस जरूरी हिस्से में खानापूरी-सी की जाती है। पुस्तक समीक्षा अब सीखने-सिखाने के लिए नहीं, ब...
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  September 25, 2016, 11:27 am
जिस देश में  कोस कोस पे पानी और चार कोस पे बानी की बात कही जाती है, जहां १७९ भाषाओं ५४४ बोलिया हैं बावजूद इसके देश का  राजकाज सात समंदर पार एक अदने से देश की भाषा में हो रहा है , इस तथ्य पर मंथन होना चाहिए Iभारतीय भाषायें अभी भी खुले आकाश में सांस लेने की बाट जोह रही हैं Iहि...
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Tag :अभियान की अवधारणा
  September 11, 2016, 10:56 am
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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