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खामोश दिल की सुगबुगाहट...

इस शहर में बरसों से कोई नहीं आया...बस एक सुराख़ रख छोड़ा था आसमान में जहाँ से धूप आती है सवेरे-सवेरे,और कभी कभी बरसात भी वहां ठहर कर जाती है...  याद है तुम्हें, उस आसमान में जो एक सुराख छोड़ा था कुछ साल पहले, उसके नीचे अब बहुत बड़ा जंगल उग आया है.... अलग-अलग तरह के दरख़्त है उसमे, कुछ फू...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  August 30, 2015, 7:48 pm
ज़िंदगी एक मिथ्या है,ज़िंदगी में खुश रहना एक मृगतृष्णा...खुशियाँ चिराग है एक रोशनी का,और उसके ठीक नीचे छुपा है गमों का अंधेरा...************तुम्हारी आखें एक झूला है,जिसमे मैं ज़ोर ज़ोर से उड़ान भरता हूँ,पर तुम्हारे हर एक आँसू के साथपलट कर ज़मीन पर गिर जाता हूँ...************ये तन्हाई की खरोंचदि...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  July 22, 2015, 10:56 pm
अपने देश से हर किसी को प्यार होता है... पर भारत के लोगों का प्यार थोड़ा अलग है, उन्हें साफ-सुथरा देश चाहिए लेकिन सफाई नहीं करना चाहते, रिश्वत से उन्हें सख्त नफरत है लेकिन कुछ रुपये देकर काम बन रहा हो तो ज़रा भी पीछे नहीं हटते, बचपन में जाति-प्रथा, दहेज-प्रथा पर निबंध किसने नहीं...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  July 20, 2015, 9:57 pm
जाने इस सोहबत का असर कहाँ तक पहुंचेगा,इस बज़्म में मेरी नज़मों का सफर कहाँ तक पहुंचेगा,गर गुमनाम हो गयी हों इन आँखों में खामोशियाँ मेरी,तो उन लबों में उलझे एक बोसे का असर कहाँ तक पहुंचेगा,तेरी हर ज़िद पर नींद के बुलबुले हवा मे घुल से जाते हैं,जाने मेरी हकीकत में तेरे ख्वाबों...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  July 11, 2015, 7:22 pm
साहब- गाय हिंदुओं की माता होती है इसलिए हमें उसका सम्मान करना चाहिए, उसकी पूजा करनी चाहिए...मैं-अच्छा साहब गाय कब से हमारी माता है, मतलब किसी वेद में किसी ग्रंथ में, कहीं ऐसा उद्धरण जहां से पता चले कि अगर हम गाय को माता न माने तो हम हिन्दू ही नहीं हैं... साहब- सब कुछ उद्धरित ...
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Tag :सामजिक दृश्य
  June 2, 2015, 10:52 am
दो दिन जो समानांतर हैं,आपस में कभी मिल नहीं सकते,लेकिन दिखते नहीं है ऐसे,टेढ़ी-मेढ़ी सरंचनाएँ हैं इनकी,मैं मिलता हूँ दोनों से अलग अलग वक़्त पर... सब कुछ वही रहता है,  लेकिन मैं वो नहीं हूँ जो मैं था आज के पहलेमैं बदलता रहता हूँ गिरगिट के रंग की तरह...फिर भी मुझे शंका होती हैमैं ...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  May 27, 2015, 7:24 pm
मैं अंगारे सी धधकती नज़्में लिखना चाहता हूँ कि कोई छूए भी तो हाथ झुलस जाएँ,मेरे लफ़्ज़ों के कोयले सेआग को विशालतर करइस मतलबी दुनिया कोजला देना चाहता हूँ  और बन जाना चाहता हूँ इस ब्रह्मांड का आखिरी हिटलर...************इंसान किसी और के गम में या क्षोभ में नहीं रोता, न ही रोना कमजोरी ...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  May 5, 2015, 7:10 pm
एक वैबसाइट है JustEat, उनका स्लोगन है... Don't Cook, Just Eat... भई हमें तो बड़ी आपत्ति है इस स्लोगन से, क्यूँ न पकाएँ साहब !! जनाब ने स्लोगन तो रख दिया लेकिन खुदई को जब भूख लगती होगी तो अपने किचन की ही याद आती होगी... खुद के बनाए घर के खाने से भी स्वादिष्ट होती है कोई चीज भला, साफ-सुथरी जगह पर कम पैसो...
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  April 19, 2015, 9:11 pm
आज की तारीख देख रही हो न.... तुम मानो या न मानो ये तारीख़ तो महज एक छलावा भर है... किसने कहा कि तुम्हें इसी दिन मुझसे प्यार हुआ था... क्या पता एक हफ्ते पहले हुआ हो, या एक महीने पहले या फिर सात जन्म पहले ही... हाँ बस ये तारीख ही है जो हमें याद है सलीके से, बाकी के जज़्बातों को तो तारीखों ...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  April 14, 2015, 10:56 pm
आकाश में कुछ रंग बिरंगे फूल रोप दूँ तो,तुम्हारी हर उदासी के ऊपर फूलों की खुशबू गिरेगी .... उस खुशबू से तुम खुश तो हो जाओगी न.... ****************आसमां की झूलती खिड़कियों पे आईना है,ठीक वैसे ही जैसे मेरी खिड़की पे लगा है...तुम्हारी शक्ल आधी दिखे तोतुम आईना नीचे कर लगा लिया करती हो,कह दो तो आस...
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Tag :नज़्म मोहब्बत की
  March 29, 2015, 10:23 pm
कभी अचानक से सुबह जल्दी नींद खुल जाये तो मैं चौंक कर इधर-उधर देखने लग जाता हूँ.... तुम्हारे होने की हल्की सी खुशबू फैली होती है चारो तरफ..... जैसे चुपके से आकर मेरे ख्वाबों को चूमकर चली गयी हो.... आधी -चौथाई या फिर रत्ती भर भी, अब तो जो भी ज़िंदगी महफूज बची है बस यूं ही गुज़रेगी तुम...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :नज़्म मोहब्बत की
  December 25, 2014, 12:30 am
दिसंबर आ गया है, हर साल आता है कोई नयी बात तो नहीं... दिसंबर से जुड़ी ऐसी कोई खास याद भी नहीं... वैसे भी इन सर्दियों में याद्दास्त थोड़ी कम हो ही जाती है, सिवाय रजाईयों में दुबके रहने के और कुछ याद नहीं रहता... कैसा लगे अगर इन सर्दियों में अचानक से तेज़ धूप निकल आए या खूब तेज़ बारिश ह...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :कहानियां ज़िन्दगी की
  December 7, 2014, 12:56 am
चाहे जेठ की दुपहरी होया फिर पूस की रातसावन की बारिश में भीगते हुये भीइंतज़ार बैठा रहता थाओसारे पर, दरख्तों पर ,एक झलक माँ की,लौटा देती थी हलक में जान फिर से... कई त्योहार आते हैं-बीत जाते हैं,कुछ पल देते हैं याद रखने कोऔर दिये जाते है साल भर का इंतज़ार.... तुमसे मिलना भीअब बस एक ...
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  October 14, 2014, 9:51 pm
इन पेचीदा दिनों के बीच,आजकल बिना खबर किए ही अचानक से सूरज ढल जाता है,नारंगी आसमां भी बेरंग पड़ा है इन दिनों... इन पतली पगडंडी सी शामों में जब भी छू जाती है तुम्हारी याद मैं दूर छिटक कर खड़ा हो जाता हूँ...क्या करूँतुम्हारे यहाँ न होने का एहसासऐसा ही है जैसे,खुल गयी हो नींदकेवल ब...
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Tag :तुम सिर्फ तुम
  October 13, 2014, 9:38 pm
कागज़ के उस मुड़े-तुड़े पन्ने पर याद तुम्हारी रुकी हुयी है.... न तुमसे मोहब्बत है,न ही कोई गिला रहा अब,फिर भी न जाने क्यूँनमी तुम्हारे नाम की अब भी मेरी आखों में रुकी हुयी है.... कुछ दरका, कुछ टूटा जैसे  दिल का जैसे सुकून गया था,माज़ी की उस मैली चादर पेखुशबू उस शाम की अब भी इन साँसो...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :यादें
  October 12, 2014, 8:25 pm
आज करवाचौथ पर फेसबुक पर तरह-तरह के स्टेटस देखे, कुछ बेहद कड़वे कुछ प्यार में पूरी तरह से डूबे हुये, किसी भी इस तरह के स्टेटस पर अपनी राय देने से बचा... जब भी इस तरह का कोई भी पर्व आता है अजीब तरह की कशमकश होती है... इस बाजारवाद को अगर एक किनारे कर भी दें लेकिन एक बात तय है कि अगर क...
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Tag :बकवास
  October 11, 2014, 10:44 pm
© SILENT PIXELSये आसमां इतना विशाल है बिल्कुल अनंत,लेकिन उसमे,मुझे बस शून्य दिखता है बहुत बड़ा शून्य जैसे किसी ने एक बहुत बड़े घूमते कटोरे को पलट कर रख दिया हो...  बस ऊपर सब चक्कर खाते हुये दिखाई देते हैं, कभी सूरज, कभी चाँद तो कभी बादल,कोई नहीं रुकता मेरे लिए जैसे सब ढूँढते रहते हैं ...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :नज़्म मोहब्बत की
  June 24, 2014, 10:44 pm
मैं अब कोरे कागज को,कोरा ही छोड़ देता हूँतुम्हारी फिक्र और कुछ खयालड्राफ्ट में सेव कर छोड़े हैं... *******मैंने देखा था उसके आखिरी समय में उसे उसकी आवाज़ उसका शरीर छोड़ दे रही थी...आज सुबह उसकी रूह ने, आवाज़ लगाई है मेरे सपनों में रूह से भला उसकी आवाज़ को कौन जुदा कर पाया है आज तक..*******ज़ि...
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  June 22, 2014, 4:34 pm
मुद्दतों बाद ज़िंदगी की किताब के कुछ पन्ने तिलमिला से रहे हैं... कहते हैं आप अपने दर्द को कितना भी जला दें उसका धुआँ साथ ही चलता रहता है, कभी भी घुटन पैदा कर सकता है... ज्यादा वक़्त नहीं गुज़रा है जब गाढ़ी रूमानियत में डूबे कुछ लफ्ज रोपता रहता था सूखी पड़ी अलमारियों पे... यूं डूब कर...
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Tag :आत्मकथा
  May 3, 2014, 10:20 pm
अच्छा लिखने की पहचान शायद यही होती होगी कि किस तरह छोटे छोटे पहलुओं को एक धागे में पिरो कर सामने रखा जाये... मैं पिछले कई दिनों से कितना कुछ लिखता हूँ, जब भी मौका मिलता है शब्दों की एक छोटी सी गांठ बना कर रख देता हूँ,लेकिन इन गाठों को फिर एक साथ बुन नहीं पाता, दिमाग और दिल के च...
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Tag :ज़िन्दगी
  January 28, 2014, 8:30 pm
हो जाने दो तितर-बितर इन आढ़े-तिरछे दिनों को,चाहे कितनी भी आँधी आ जाये,आज भी तुम्हारी मुस्कान का मौसममैं अपने दिल में लिए फिरता हूँ... तुम्हारे शब्द छलकते क्यूँ नहीं अगर तुम यूं ही रही तो तुम्हारी खामोशी के टुकड़ों को अपनी बातों के कटोरे में भर के ज़ोर से खनखना देना है एक बार... ...
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Tag :प्यार-मोहब्बत सा कुछ
  January 24, 2014, 10:31 am
छत पे पड़े कुछ सूखे पत्तों के ढेर की तरहकुछ यादों को भी फैला देना है इस बार बीते साल की बारिश में सील गए है... कुरमुरे सपनों को उड़ा देने का मज़ा ही कुछ और होता है...******भले ही वो सुंदर हों लेकिन,कोई अपनी पहुँच का दायराआजमाता नहीं उनपर,उस हरे रंग के कंटीले झाड के ऊपर वो प्यारे से दि...
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Tag :रद्दी
  January 14, 2014, 8:25 am
हथेलियों पर धान की कुछ अधपकी बालियाँ उभर आई हैं,जब पलटता हूँ उन्हें तो वो बालियाँ अलफाज बन उतर आती हैं... *******एक गुलाबी सा शहर है उसकी उल्टी-पुल्टी सड़कों पर सपनों मे बेवजह की रेत लिखता हूँ और उड़ा देता हूँ हर सुबह... *******आड़े-तिरछे खयालों में ज़िंदगी के झरोखों से कुछ नीली धूप आ जा...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :मेरे अजीब से सपने
  January 12, 2014, 9:19 pm
आपका यहाँ यूं होना और मेरा लिखा पढ़ना किसी संयोग से कम नहीं... इस 7 अरब की दुनिया में आप मुझे ही  क्यूँ पढ़ना चाहते हैं, ऐसा क्या है यहाँ... यहाँ तो सबकी ज़िंदगी ही एक कहानी है, अपनी कहानियों से इतर दूसरों की कहानियों में इतनी दिलचस्पी क्यूँ भला... 50 करोड़ स्क्वायर किलोमीटर की इस ध...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
Tag :आत्मकथा
  January 6, 2014, 1:18 am
मेरे कमरे की खिड़की को बंद हुए सालों गुज़र गए... अक्सर हवाएं उस खिड़की से टकराती रहती हैं, जैसे पूछ रही हों ... ऐसा क्या हुआ.... ऐसा क्यूँ हुआ... उन गुज़रे लम्हों को यादो की किताब में कैद कर एक अलमारी में बंद कर दिया है, जब भी आओ वो किताब ले जाना... "वक्त की दीमक" धीरे धीरे उन्हें "खत्...
खामोश दिल की सुगबुगाहट......
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  November 17, 2013, 11:20 am
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