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निज़ता

एक बार मेरे -ख़यालों के दरमियाँतेरे हुस्न का नशा एहसास नर्मियाँदेता है मुझे बांध ऐसी नाज़ुक डोर से छा जातीं हैं दिल पर अनजान बदलियाँ मेरी परिधि की सीमा छोटी या बड़ीमिलती हो तुम खड़ी उढ़की ले खिड़कियाँगलियों से गुजरना आसान ना लगे नज़रों से लोग देते हैं बेखौफ घुड़किय...
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Tag :खयाल
  June 8, 2013, 10:15 pm
मेरी व्यथा,मात्र वेदना नहीं है सत्य यह कि,कहीं चेतना नहीं है संघर्ष के जहां में,बस कमान लिए  लक्ष्य की प्रतीति,पर भेदना नहीं है तंत्र ज़िंदगी के सब,स्वतंत्र लगे हम क्या लगे कि,बस यंत्र लगे मंत्र कोई अपना असर भूल जाये नियंत्रण कहीं और देखना कहीं है क्षुब्ध है वही,जो यहाँ ...
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Tag :(सर्वाधिकार सुरक्षित )
  December 25, 2012, 12:36 pm
जीवन, जगत, जश्न भरी किलकारीसंभव वहीं जहां पुलकित है नारीव्योम सी विशालता धारा सा सहनसूरी सी प्रखरता चन्दा सी शीतल न्यारीसृष्टि की रचयिता समाज की सशक्तताप्रखरता, प्रांजलता,प्रस्फुटन की क्यारीएक गहन वृक्ष है और सघन छांवसंरक्षण, सुरक्षा, संरक्षा, सुधि सारीपरिवार, स...
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Tag :सुकुमारी
  December 25, 2012, 10:08 am
आर्य भूमि का क्यों भूले सदाचारकुंठित कायरता और बलात्कारइंडिया गेट पर आक्रोशित युवा वर्गलड़कियों ने दिखलाया शक्ति व प्रतिकारदर्द लिए हमदर्द मौसम बड़ा सर्दमशाल सा प्रज्वलित अपना अधिकारलाठी चार्ज, आँसू गैस से दमन क्योंप्रजातन्त्र देश है सुनिए यह पुकारबस के नीचे ले...
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Tag :(सर्वाधिकार सुरक्षित )
  December 23, 2012, 7:14 pm
शब्दों की पुड़िया में एहसासों की मिठाई जब मिलती दिल खिलता आसमान अंगनायी इस धरती पर कितने हैं खुशियाँ देने वाले ऐसे इन्सानों को शत-शत है बधाई शब्दों में जब दिल मुस्काकर मिलते हैं नयन भींग जाते और मिल जाती नयी रुबाई कितना सुंदर जीवन है अच्छे लोगों संग बड़े नसीब से मिलती ह...
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Tag :रुबाई
  October 23, 2012, 3:48 pm
अनहद अद्भुत अकस्मात होता है तुम हो पास तो सबकुछ होता हैवलय भावनाओं की मरीचिका बन दहन को शमित कर सघन बन मन के सीपी का, मोती सोता हैसानिध्य में, सुगंध नयी बोता है अल्प नहीं, पूर्ण नहीं बल्कि अविरामराधा के कृष्ण जैसे सीता के राम स्पंदित, आनंदित आह्लादित सोता है लगन में मन मग...
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Tag :राधा
  August 29, 2012, 1:41 pm
आप से प्यार ना हुआ है चुपके से एहसासों ने छुआ है सोचिये समझिए ना सकुचाईएसावनी घटा सी बरस जाईये प्यार होता तो होती एक पुकारमेरे एहसासों का आप हैं आधार दिग-दिगंत अपरिमित अनंत अगणित अद्भुदता आप दर्शाईएसोचिए समझिए ना सकुचाईएसावनी घटा सी बरस जाईएसृष्टि को समझने की बड़ी ...
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Tag :प्यार
  July 4, 2012, 10:53 am
स्वप्न नयनों से छलक पड़ते हैं बातें इरादों में दबजाती हैंअधूरी चाहतों की सूची है बड़ी चाहत संपूर्णता में कब आती है चुग रहे हैं हम चाहत की नमी यह नमी भी कहाँ अब्र लाती है सब्र से अब प्यार मिले ना मिले ज़िंदगी सोच यही हकलाती है इतने अरमान कि सब बेईमान लगें एहसान में भी स्व...
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Tag :प्यार
  June 23, 2012, 10:21 am
कब सुन्दर लग जाता कोई कब दिल को छू जाता है एक पल का केवल मिलना लगता जन्मों का नाता हैकहते हैं कि दृष्टि हो सुन्दर सब सुन्दर लग जाता है यदि ऐसा कहना सच है तो दिल को हर क्यों ना भाता हैदिनों साथ रहता संग कोई प्रीति अधजगी रहती सोई दिल दृष्टि ना अकुलाता है उठती कोई ना जिज्ञासा ...
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Tag :जिज्ञासा
  June 14, 2012, 10:07 am
बरखा रानी बूँद भर पानी भर देती प्रकृति में रवानी कोयल कूके,पत्ते सब गायेंधरा को मानो मिली जवानी बादल नभ में दौड़े धायें मेढक गली-गली टर्राएँचारों तरफ पानी ही पानी बरखा बरसे लगे सयानीपक्षी दुबके देख ठिकाना हरियाली का गूंजे गाना बरखा की चलती मनमानी चिड़िया ढूंढे दाना-...
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Tag :(सर्वाधिकार सुरक्षित )
  June 12, 2012, 3:12 pm
किसी उम्मीद में शब् भर रहा, जलता दिया भोर की किरणों ने, आकर जो हंगामा किया तपिश से भर गया एहसास, एक खुशबू लिएसुबह की लालिमा ने, ओ़स को जी भर पियायह क्यों होता है कैसे, लगे मौसम हो जैसे अभी बदली,अभी धूप, लुकाछिपी सी झलकियाँ इक आभा को लिए, शब् भर खिले चन्दा ना जाने क्यों छुपा...
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Tag :मोबाइल
  June 8, 2012, 3:59 pm
अब मेरी उम्मीद के जलते दिएबोलकर मुझसे यह चल दिएऔर ना प्रतीक्षा अब हो पाएगी जिंदगी भ्रष्टाचार में समा जायेगी  हर तरफ अवसर के झमेले हैं हाँथ कंधे पर अजीब यह रेले हैंघात और प्रतिघात बात बनाएगी उम्मीद की लौ जल ना पाएगी कर्म यदि प्रधान है तो विवश क्यों भाग्य यदि विधान है तो ...
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Tag :लौ
  May 29, 2012, 11:58 am
आज पलटकर जीवन ने,दिया मुझे धिक्कार है भारत भूमि भयभीत है,कितना भ्रष्टाचार हैजीवन के हर पग पर,पक रहा निरंतर निठुरसत्कर्मों की सादगी,सजल,अचल,बेकार है हर विरोध के स्वर को,लें दबोच पल भर में  निचुड़-निचुड़ कर निचुड़े,कहें यही व्यवहार हैहो विनीत सह लेने की,आदत या मजबूरी है स...
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Tag :मज़बूरी
  April 28, 2012, 11:51 am
आज तमस में फिर सुगंधित अमराई है सितारों ने जमघट आज फिर लगाई है चाँदनी ने हौले से जो छूआ चौखट आँगन तब से सिमटी, लजाई है झूम रही शाखें, पत्तियाँ करें बातें झींगुर झनक उठे, चाँद से दमक उठे हवाओं की ठंडक में निशा लिपट धाई हैआँगन के कोनों से गीत दी सुनाई है कहने को रात है पर प्...
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Tag :चाँदनी
  April 25, 2012, 12:20 am
  शब्द जब भावनाओं में ढलता है ख़्वाहिशों संग मन पिघलता है एक मिलन की ओर बढ़ता प्रवाह ज़िंदगी तो फकत समरसता हैजी भी लेने के हैं जुगत कईपसीने से ना फूल खिलता है कर्म और भाग्य की लुकाछिपी हैज़िंदगी भी लिए कई आतुरता हैशब्द ही तो समय को रंगता है शब्द में एकरसता तो विषमता है शब्द क...
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Tag :जीवन
  April 20, 2012, 6:31 am
  फिर हवाओं ने छुआ नवपल्लवित पंखुड़ियाँ नव सुगंध ने सुरभि शृंखला संव्यवहार किया अभिनव रंग में हुआ प्रतिबिम्बित प्यारफिर चाहत ने राहों से प्रीतजनक तकरार किया लगन लगी की हो रही चारों ओर बतकही प्रीत की रीत यह बेढंगी सबने तो स्वीकार कियाअलख जगी तो लगी समाधि समर्पण की दिल ...
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Tag :प्यार (सर्वाधिकार सुरक्षित)
  April 20, 2012, 6:25 am
मेरी मजबूरी है कि तुमसे बड़ी दूरी है सोचता हूँ कि दिल कैसे करीब आयें मुझे तुम याद करो इश्क़ आबाद करो और हम चाहतों का नित सलीब पाएँ किसी से जुड़ जाना ज़िंदगी का तराना मन यह मस्ताना भी नया नसीब पाये कितने हैं रंग, अनेकों हैं तरंग-उमंग आशिक़ी हो दबंग अनुभव अजीब पाएँ तुम में चतुरा...
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Tag :
  April 11, 2012, 9:05 am
मार्ग है प्रशस्त कदम सभी व्यस्त मंजिल को छूने की सब में खुमारी है सत्य और असत्य का संघर्ष चहुंओर निर्णय ना हो पाए कैसी लाचारी है सत्य को असत्य बनाने की कोशिशें असत्य की विजय रथ पर सवारी है ताम-झाम लाग-लश्कर असत्य संग फिर भी ना कैसे सत्य लगे भारी है एक तरफ हैं खड़े असत्य से ...
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Tag :सत्य-असत्य (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  April 6, 2012, 4:55 pm
एक युद्ध ज़िंदगी है, चहुं ओर है लड़ाई तुम ढाल भी हो और हो भाल के सौदाई समर की ना बेला कोई और ना विश्राम समझौता कहीं हो रहा कहीं विजय तो दुहाई स्वेद मिश्रित लहू है या लहू संग स्वेदज़िंदगी को भेद रहा फिर आत्मीय संवेद अथक परिश्रम निनाद किन्तु वही चौपाई भाग्य की विडम्बना में ...
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Tag :
  March 26, 2012, 1:53 pm
शक्ति,सामर्थ्य मिले शौर्य स्वतः आएश्रेष्ठता स्वमेव कीर्ति पताका पा जायेभस्मासुर मानिंद जब करे वह परीक्षण कारवां में अबोला हताशा छा जाये व्यक्ति की ओजस्विता सिमटी सीमित परिधि समूह की तेजस्विता बनकर हर्षाए निजता की भँवर में परिवेश को समेटनास्वयं की गति में गति हो ज...
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Tag :
  February 29, 2012, 3:11 pm
झुक गयी साँझ एक जुल्फ तलेचाँद हो मनचला इठलाने लगासितारों की महफ़िलें सजने लगी आसमान बदलियाँ बहकाने लगानीड़ के निर्वाह में जीव-जन्तु व्यस्तचूल्हों में अभाव अकुलाने लगामान-मर्यादा के उलझन में उलझमकड़जाल फिर वही सुलझाने लगा शाम का सिंदूरी आमंत्रण तमस मेंराग संग रागिनी ...
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Tag :साँझ
  November 25, 2011, 12:23 pm
स्वप्न नयनों से छलक पड़ते हैं बातें ख्वाबों में अक्सर दबजाती हैंअधूरी चाहतों की सूची है बड़ी चाहत संपूर्णता में कब आती है चुग रहे हैं हम चाहत की नमी यह नमी भी कहाँ अब्र लाती है सब्र से अब प्यार भी मिले ना मिले ज़िंदगी सोच यही हकलाती है इतने अरमान कि सब बेईमान लगें एहसान ...
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Tag :प्यार (सर्वाधिकार सुरक्षित )
  November 24, 2011, 1:23 pm
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