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Kalam Ka Sipahi / a blog by Rajesh Tripathi कलम का सिपाही/ राजेश त्रिपाठी का ब्लाग

और हमसे छिन गया अभिभावक का साया   राजेश त्रिपाठी   पहले तो आप सबसे इस जीवनगाथा को एक साल से अधिक समय तक न लिख    पाने के लिए क्षमा मांग लूं। इसकी निरंतरता में आये व्यवधान के कई कारण थे। पहले तो शारीरिक अस्वस्थता व अन्य परेशानियां दूसरी बात ये कि जाने क्यों इस क...
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  June 3, 2018, 11:30 pm
भाग-4मानव – कृत्यसृष्टि-विनाशक ताप अब बढ़ता जाता नित्य।नहीं प्रकृति की देन यह, मानव का है कृत्य।।मानव  का  है  कृत्य  प्रदूषण  जो फैलाता।पिघल रहे  हिमखंड,  प्रलय वह स्वयं बुलाता।कहें रुक्म कविराय जलधि की वक्र देखते दृष्टि।जलप्लावन से जलमग्न करके नष्ट करेग...
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  June 1, 2018, 9:52 pm
,भाग-3क्यों?आज सभी यह सोचा करते,आगे जाने क्या होना है।महंगाई यों उछल पड़ी क्यों,बहुतों का बस यह रोना है।।पहले ऐसा कभी न होता,गुजर-बसर हो जाया करता।पर गरीब आहें भर कर अब,आजादी को कोसा करता।।सोच रहा पहले अच्छे थे,लोग नहीं भूखे मरते थे।अन्न, दाल, चीनी सस्ती थी,लोग प्रशासन से ...
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  May 29, 2018, 10:31 pm
भाग-2एक फूल की कामनात्रेता  से   द्वापर  तक  मैंने,  पाया  था  सम्मान।किंतु आज कलियुग में मेरा, होता है अपमान।।तब देवों के मस्तक पर चढ़, फूला नहीं समाता।सबसे बड़ा मान अपने को, झूम-झूम इतराता।।मेरा   हृदय   चीर  कर  माली,  गूंथे जब-जब हार।तब-तब वब बलात ...
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  May 28, 2018, 9:08 pm
महामानव!मानवता के शत्रु अनेकों,ईर्ष्या, द्वेष, जलन परनिंदा।ये ऐसा धीमा विष होते,रहने दें ना सुख से जिंदा।।पर की घी से चुपड़ी लख कर,सूखी रोटी खाने वाले।ईर्ष्या से जल भुन जाते हैं,कोस-कोस खा रहे निवाले।।ऐसा यत्न नहीं करते वे,जिससे मालपुआ खुद खायें।नहीं दूसरों को कोसें फ...
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  May 23, 2018, 12:13 pm
वक्त कुछ इस कदर हम बिताते रहे ।दर्द  दिल  में  छिपा मुसकराते रहे ।।      जिसपे भरोसा किया उसने हमको छला।     परोपकार करके हमें क्या मिला।।     पंख हम बन गये जिनके परवाज के।     आज बदले हैं रंग उनके अंदाज के।।  मुंह फेरते हैं वही गुन हमारे जो गाते र...
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  March 7, 2018, 11:23 am
राजेश त्रिपाठीअपने पूर्वजों की वस्तुओं को सहेज, संभाल कर रखना अपने आप अपने पूर्वजों की वस्तुओं को सहेज, संभाल कर रखना अपने आप में एक सुखद और गौरवपूर्ण एहसास होता है। उन वस्तुओं को देखते ही आपका पुरानी यादों में खो जाना, उन क्षणों को महसूस करना जो बहुत-बहुत पीछे छूट चु...
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  December 16, 2017, 1:49 pm
क्या सचमुच भारत महाशक्ति है?हालांकि यह आतंकवादियों से भी नहीं जीत पायावे आते हैं और निर्दोषों का शिकार कर चले जाते हैंकश्मीर में रह कर महीनों रेकी करते हैंस्थानीय लोगों की मदद के बिना ऐसा मुमकिन है क्या?इजरायल जैसा छोटा देश आतंकवाद को कुचलने में सक्षमहम सिर्फ ‘बख्शे...
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  July 11, 2017, 10:53 am
सुनिए मेरा गीत- प्यारा सा वह गांव                     ...
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  June 21, 2017, 12:19 pm
तत्कालीन ग्रह स्थितियों से हुआ प्रमाणितराजेश त्रिपाठीकुछ लोग ऐसे हैं जो हर उस चीज को सिरे से नकारते हैं जिसे इतिहास की कसौटी पर खरा न पाया जाये। इसमें कुछ भी अनुचित नहीं लेकिन मेरे विचार से ऐसे भावों का स्तर व्यापक होना चाहिए और किसी काल विशेष या धर्म या पात्र विशेष क...
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  April 10, 2017, 8:48 pm
  पत्नी नीरू को खोने के बाद वे हमेशा उदास रहने लगे थे भाभी के निधन के बाद से भैया पहले जैसे नहीं रहे। रोतों को हंसानेवाला आदमी हमेशा खोया-खोया और उदास लगने लगा। हमारी हमेशा कोशिश होती कि उनको ढांढस बंधायें और उन्हें गम के उस दर्द से बाहर लायें जिसमें शायद वे तिल-तिल ...
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  January 28, 2017, 9:37 pm
कितने आंसू पिये अभी तक, कितनी बार पड़ा था रोना।कितने दिन तक फांका काटे, बिन खाये पड़ा था सोना।।कितने अधिकार गये हैं छीने, कब-कब खायी थी मात।राजनीति के छल-प्रपंच में, कितने ठगे गये हो तात।।           मत की कीमत को पहचानो, मत देने अवश्य ही जाना।       &...
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  January 13, 2017, 12:09 pm
सीरत कुछ की काली देखी           राजेश त्रिपाठीहमने  इस जग की हरदम रीत निराली देखी।सूरत देखी साफ, मगर सीरत* कुछ की काली देखी।।     कुछ खाये-अघाये इतने  खा-खा कर  जो बने हैं रोगी।     शील, सौम्यता खो  गयी  बने आज ज्यादातर भोगी।।     परम...
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  December 17, 2016, 11:15 am
बस, अब और नहींकुर्बानीराजेश त्रिपाठी·       हम अपने वीर जवानों को इस तरह कुरबान नहीं कर सकते·       सशक्त राष्ट्र इस तरह लुंज-पुंज, असहाय नहीं हुआ करते·       दंभ और हुंकार बहुत देखी, अब कुछ कर दिखाने की बारी ·       देश आक्रोश में है, देश के...
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  September 19, 2016, 7:13 pm
वह रात हम सब पर पहाड़-सी बीतीराजेश त्रिपाठी हम सबका भरा-पूरा परिवार सुख-शांति से चल रहा था। बेटी अनामिका की शादी हो गयी थी। मझला बेटा अनुराग और छोटा बेटा अवधेश भी ब्याह गये थे और अच्छी जगह नौकरी करने लगे थे। छोटे बेटे अवधेश के एक बेटी हुई जिसका नाम लोगों ने बड़े प्यार स...
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  September 12, 2016, 11:52 pm
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  September 5, 2016, 11:37 am
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  September 5, 2016, 11:35 am
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  August 25, 2016, 11:05 am
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  August 18, 2016, 11:35 am
राजेश त्रिपाठीनहीं झुके हैं नहीं झुकेंगे हम वीर बलिदानीहम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी।।   वीर शहीदों के बलिदानों से हमने पायी थी आजादी।  दिल बोझिल है, आंखें नम, देश की लख बरबादी।।   केसर क्यारी सिसक रही धधक रहा कश्मीर है।   भू-स्वर्ग दोजख बन ...
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  August 16, 2016, 10:32 am
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  August 15, 2016, 11:31 am
धरा धाम में अपनी भूमिका संपन्न कर चली गयीं महाश्वेता देवीइस अदने-से कलम के सिपाही का साहित्य की इस यथार्थ योद्धा को प्रणामराजेश त्रिपाठीमहाश्वेता देवी साहित्य की दुनिया का ऐसा नाम जिसके साथ जुड़े हैं ना जाने कितने कीर्तिमान, कितने सम्मान और कितने ही आख्यान। सच और सा...
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  July 29, 2016, 12:34 pm
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  July 19, 2016, 11:34 am
नीरू भाभी को बहुत चाहते थे भैयाराजेश त्रिपाठी इस जीवनगाथा को एक बार फिर बांदा वापस ले चलते हैं। वहीं मेरी भाभी निरुपमा देवी त्रिपाठी से भैया रुक्म की भेंट हुई। परिचय बढ़ा जो बाद में प्रेम में बदल गया। भैया उन दिनों बांदा शहर की प्रसिद्ध रामलीला में लक्ष्मण की भूमिक...
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  June 27, 2016, 8:55 pm
वेकभीपुरस्कारोंकेपीछेनहींभागेसम्मानउनतकचलकरआयेराजेशत्रिपाठी डॉ. रुक्मत्रिपाठीकट्टरसिद्धांतवादीथे।उन्हेंकोईकिसीप्रलोभनयाकिसीभीकीमतपरउनकेसिद्धांतऔरउद्देश्यसेडिगानहींसकताथा।जोबातउन्हेंपसंदनहींवेकिसीसेभीबेधड़ककहनेमेंनझिझकतेथेनासकुचातेथे।...
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  June 8, 2016, 12:00 pm
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