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अजित गुप्‍ता का कोना

बचपन में रेत के टीले हमारे खेल के मैदान हुआ करते थे, चारों तरफ रेत ही रेत थी जीवन में। हम सोते भी थे तो सुबह रेत हमें जगा रही होती थी, खाते भी थे तो रेत अपना वजूद बता देती थी, पैर में छाले ना  पड़ जाएं तो दौड़ाती भी थी और रात को ठण्डी चादर की तरह सहलाती भी थी। लेकिन समय बीतता ...
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ajit gupta
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  November 15, 2018, 10:46 am
जब बच्चे थे तब भी दीवाली की सफाई करते थे और अब, जब हम बूढ़े हो रहे हैं तब भी सफाई कर रहे हैं। 50 साल में क्या बदला? पहले हम ढेर सारा सामान निकालते थे, कुछ खुद ही वापस ले लेते थे, कुछ भाई लोग ले जाते थे और जब थोड़ा बचता था तो वह कचरे के डिब्बे में जाता था। जैसे ही पिताजी की नजर कचरे...
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  October 26, 2018, 10:03 am
यह जो श्रद्धा होती है ना वह सबकी अपनी-अपनी होती है, जैसे सत्य सबके अपने-अपने होते हैं। अब आप कहेंगे कि सत्य कैसे अलग-अलग हो सकते हैं? जिसे मैंने देखा और जिसे मैंने अनुभूत किया वह मेरा सत्य होता है और जिसे आपने देखा और आपने अनुभूत किया वह आपका सत्य होता है उसी प्रकार श्रद्ध...
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  October 25, 2018, 10:19 am
अभी शनिवार को माउण्ट आबू जाना हुआ, जैसे ही पहाड़ पर चढ़ने लगे, वन विभाग के बोर्ड दिखायी देने लगे। "वन्य प्राणियों को खाद्य सामग्री डालने पर तीन साल की सजा", जंगल के जीव की आदत नहीं बिगड़नी चाहिये, यदि आदत बिगड़ गयी तो ये सभी के लिये हानिकारक सिद्ध होंगे। आश्चर्य तब होता है ...
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  October 23, 2018, 9:52 am
हमारा  भारत है ना, यह 565 रियासतों से मिलकर बना है। अंग्रेजों ने इन्हें स्वतंत्र भी कर दिया था लेकिन सरदार पटेल ने इन्हें एकता के सूत्र में बांध दिया। ये शरीर से तो एक हो गये लेकिन मन से कभी एक नहीं हो पाए। हर रियासतवासी स्वयं को श्रेष्ठ मानता है और दूसरे को निकृष्ठ। हजार...
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  October 9, 2018, 10:07 am
मेरे अन्दर मेरी अनूभूति को समेटने का छोटा सा स्थान है, वह शीघ्र ही भर जाता है और मुझे बेचैन कर देता है कि इसे रिक्त करो। दूध की भगोनी जैसा ही है शायद यह स्थान, जैसे ही मन की आंच पाता है, उफन जाता है और बाहर निकलकर बिखर जाता है। मैं कोशिश करती हूँ कि यह बिखरे नहीं और यथा समय मै...
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  October 8, 2018, 9:22 am
आज सुबह मैं वेन्टीलेटर पर जाते-जाते बची! अभी ढंग से मुँह धोया भी नहीं था कि आदतन अखबार तलाशने के लिये निकल पड़ी, अखबार को हाथ में लेते ही लगा कि अब साँस रूकी और अब साँस रूकी। अखबार के हर पन्ने में हाहाकार था, कहीं रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ थी तो कहीं केमिकल युद्ध की तै...
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  October 1, 2018, 9:58 am
कल एक और फैसला आया लेकिन पुरुषों ने इसपर ज्यादा तूफान नहीं मचाया। क्यों नहीं मचाया? क्योंकि इन्हें लगा कि यह मामला केवल सबरीमाला मन्दिर में महिलाओं के प्रवेश का है तो हमें क्या? लेकिन यह मामला केवल मन्दिर में प्रवेश का नहीं है। यह मामला है महिला की पवित्रता का। ना जा...
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  September 30, 2018, 9:15 am
हाय रे हाय, कल मुझसे मेरा मालिक छिन गया! कितना अच्छा तो मालिक था, अब मैं बिना मालिक के कैसे गुजरा करूंगी? मेरी आदत मालिक के पैरों में लौटने की हो गयी थी, उसकी जंजीर से बंधे रहने की आदत हो गयी थी। मैं किताब हाथ में लेती तो मालिक से पूछना होता, यदि कलम हाथ में लेती तो मालिक से पू...
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  September 28, 2018, 10:16 am
अभी एशिया कप क्रिकेट हो रहा है, स्थान है संयुक्त अरब अमीरात। दुबई के प्रसिद्ध स्टेडियम पर मैच चल रहा है, कैमरामैन रह-रहकर पाकिस्तानी सुन्दर लड़कियों पर सभी का ध्यान खींचता है। लोग सी-सी कर उठते हैं, कोई कह रहा है कि ये हमारे मुल्क में क्यों नहीं हुई, कोई कह रहा है कि काश दे...
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  September 24, 2018, 10:25 am
मोगली की कहानी तो आपको याद ही होगी, क्या कहा, ध्यान नहीं है! जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है, याद आ गयी ना। तो एक कहानी थी कि एक मनुष्य परिवार का बच्चा जंगल में गुम हो गया। भेड़ियों के झुण्ड को वह बच्चा मिलता है और वे उसे पालने का निश्यच करते हैं। बच्चा भेड़ियों...
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  September 22, 2018, 9:02 am
एक युग पहले हम सुना करते थे कि आचार्य रजनीश ने स्वयं को भगवान माना। सदी बदल गयी तो हमारे लिये युग बदल गया। फिर भगवान घोषित होने और करने का सिलसिला शुरू हो गया। कहीं खुद भगवान बन जाते तो कहीं शिष्य भगवान घोषित कर देते। आखिर भगवान क्यों बनना? हमने सर्व गुण सम्पन्न भगवान को ...
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  September 20, 2018, 9:55 am
वाह रे लोकतंत्र! तू कहने को तो जनता के मन में बसता है लेकिन आज भी जनता तुझे अपना नहीं मानती! उसके दिल में तो आज भी रह-रहकर राजतंत्र हिलोरे मारता है। मेरे सामने एक विद्वान खड़े हैं, उनके बचपन को मैंने देखा है, मेरे मुँह से तत्काल निकलेगा कि अरे तू! तू कैसे बन गया बे विद्वान! त...
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  September 18, 2018, 10:28 am
साँप-छछून्दर की दशा, मुहावरा तो आपने सुना ही होगा। एक साँप ने छछून्दर पकड़ लिया, अब यदि साँप छछून्दर को निगल लेता है तो वह अंधा हो जाता है और उगलना उसके वश में नहीं। मैंने इस मुहावरे का उल्लेख क्यों किया है, यह बताती हूँ। परसो मोदी जी अपने कार्यकर्ताओं से बात कर रहे थे। एक ...
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  September 15, 2018, 10:40 am
पहले गाँवों में एक अखाड़ा होता था, वहाँ पहलवान आते थे और लड़ते थे। जब दंगल होते थे तो गाँव वाले भी देखने आ जाते थे नहीं तो पहलवान तो रोज ही कुश्ती करते थे। जैसे ही पहलवान अखाड़े से बाहर आया वह अपनी दुनिया में रम जाता था। वह हर जगह को अखाड़ा नहीं बनाता था। लेकिन आज राजनीति क...
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  September 14, 2018, 10:13 am
कंटीले तारों से बनी सीमा, इस पार सैनिक तो दूसरी पार महिलाएं। महिलाएं हाथों में किसी पुरुष की फोटो लिये हैं और वे मौन फरियाद कर रही हैं सैनिकों से कि हमारे घर का यह शख्स कहीं खो गया है, आपने देखा है क्या? सैनिक फोटो हाथ में लेते हैं और ना मैं सर हिला देते हैं। महिलाओं की आशा ...
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  September 13, 2018, 9:31 am
घर में  पिताजी सख्त हों और माताजी नरम तो पिताजी नापसन्द और माताजी पसन्द। स्कूल में जो भी अध्यापक सख्त हो वह नापसन्द और जो नरम हो वह पसन्द। ऑफिस में जो बॉस सख्त हो वह नापसन्द और जो हो नरम वह पसन्द। जो राजनेता सख्त हो वह नापसन्द और जो नरम हो वह पसन्द। जीवन के हर क्षेत्र मे...
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  September 11, 2018, 10:25 am
मेरा मन कर रहा है कि मैं भी अपनी डायनिंग टेबल पर एक फीड-बैक रजिस्टर रख लूं। जब भी कोई मेहमान आए,झट मैं उसे आगे कर दूँ,कहूँ – फीड बैक प्लीज। दुनिया में सबसे बड़ी सेवा क्या है?किसी का पेट भरना ही ना! हम तो रोज भरते हैं अपनों का भी और कभी परायों का भी। इस बेशकामती सेवा के लिये कभ...
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  September 8, 2018, 10:14 am
रोज खबरें आती है कि फलाना चल बसा और ढिकाना चल बसा,कम आयु का भी चल बसा और ज्यादा आयु वाले को तो जाना ही था! हमें भी एक दिन फुर्र होना ही है। लेकिन हम जो यहाँ फेसबुक पर दाने डाल रहे हैं,अपनी वेबसाइट पर बगीचा उगा रहे हैं और ब्लाग पर खेत लगा रहे हैं,उस बगीचे और उस फसल का मालिक कौन ...
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  September 3, 2018, 10:27 am
आजकल टीवी के लिये फिल्म बनाने की कवायद जोर-शोर से चल रही है इनमें से अधिकतर फिल्म आधुनिक सोच को लिये होती है। वे युवा मानसिकता को हवा देती हैं और एक सुगम और सरस मार्ग दिखाती हैं। हर कोई इनसे प्रभावित होता है। क्यों प्रभावित होता है? क्योंकि ऐसे जीवन में अनुशासन नहीं होत...
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  September 2, 2018, 9:28 am
हमने पिताजी और माँ के जीवन को देखा था, वे क्या करते थे, वह सब हमारे जीवन में संस्कार बनकर उतरता चला गया। लेकिन जिन बातों के लिये वे हमें टोकते थे वह प्रतिक्रिया बनकर हमारे जीवन में टंग गया। प्रतिक्रिया भी भांत-भांत की, कोई एकदम नकारात्मक और कोई प्रश्नचिह्न लगी हुई। जब हव...
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  September 1, 2018, 11:14 am
कभी आपने जंगल में खिलते पलाश को देखा है? मध्यम आकार का वृक्ष अपने हाथों को पसारकर खड़ा है और उसकी हथेलियों पर पलाश के फूल गुच्छे के आकार में खिले हैं। गहरे गुलाबी-बैंगनी फूल दप-दप करते वृक्ष की हथेली को सुगन्ध से भर देते हैं। एक मदमाती गन्ध वातावरण में फैल जाती है। जंगल क...
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  August 30, 2018, 9:25 am
कई बार आज का जमाना अचानक आपको धक्का मारता है और आप गुजरे हुए जमाने में खुद को खड़ा पाते हैं,कल भी मेरे साथ यही हुआ। बहने सज-धज कर प्रेम का धागा लिये भाई के घर जाने लगी लेकिन भाई कहने लगे कि आज तो बहनों को कुछ देना पड़ेगा! कुछ यहाँ लिखने भी लगे कि बहनों की तो कमाई का दिन है आज। ...
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ajit gupta
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  August 27, 2018, 10:24 am
एक सुन्दर सी पेन्टिंग मेंरे सामने थी, लेकिन मुझे उसमें कुछ कमी लग रही थी। तभी दूसरी पेन्टिंग पर दृष्टि पड़ी और मन प्रफुल्लित हो गया। एक छोटा सा अन्तर था लेकिन उस छोटे से बदलाव ने पेन्टिंग में जीवन्तता भर दी थी। खूबसूरत मंजर था, हवेली थी, पहाड़ था, बादल था, सभी कुछ था लेकिन ...
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ajit gupta
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  August 24, 2018, 9:01 am
अमेरिका में मैंने देखा कि वहाँ पर हर प्राणी के लिये नियत स्थान है,मनुष्य कहाँ रहेंगे और वनचर कहाँ रहेंगे,स्थान निश्चित है। पालतू जानवर कहाँ रहेंगे यह भी तय है। मनुष्यों में भी युवा कहाँ रहेंगे और वृद्ध कहाँ रहेंगे,स्थान तय है। भारत में सड़क के बीचोंबीच बैठी गाय और सड़...
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ajit gupta
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  August 22, 2018, 10:44 am
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