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अजित गुप्‍ता का कोना

#हिन्दी_ब्लागिंगमैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा  बना रहे हैं। कहाँ से आ रहे हैं ये पक्षी? मन में प्रश्न था। शायद ये कहीं दूर से आए हैं और इनने अपना ठिकाना कुछ दिनों के लिये यहाँ बसा लिया ह...
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ajit gupta
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  August 19, 2017, 10:13 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक्षा। बस इंसान भी इसी खोज में आजीवन जुटा रहता है। बचपन छूट जाता है लेकिन जहाँ जीवन मिले, जहाँ अमृत मिले और जहाँ सुरक्ष...
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ajit gupta
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  August 16, 2017, 9:40 am
#हिन्दा_ब्लागिंगआधा-आधा जीवन जीते हैं हम, आधे-आधे विकसित होते हैं हम और आधे-आधे व्यक्तित्व को लेकर जिन्दगी गुजारते हैं हम। खिलौने का एक हिस्सा एक घर में बनता है और दूसरा हिस्सा दूसरे घर में। दोनों को जोड़ते हैं, तो ही पूरा खिलौना बनता है। यदि दोनों हिस्सों में कोई भी त्र...
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ajit gupta
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  August 15, 2017, 10:43 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमन का दोगलापन देखिये, कभी मन कहता है कि अकेलापन चाहिये और कभी कहता है कि अकेलापन नहीं चाहिये। कभी कहता है कि अकेलापन तो चाहिये लेकिन केवल अपनी चाहत के साथ का अकेलापन चाहिये। हम अपनी पसन्द का साथ चाहते हैं, बस उसी के लिये सारी मारा-मारी करते हैं। दुनिया भ...
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  August 9, 2017, 10:00 am
#हिन्दी_ब्लागिंगओह! आज मित्रता दिवस है! मित्र याने मीत, अपने मन का गीत। मन रोज भर जाता है, उसे रीतना ही होता है,  लेकिन रीते कैसे? रीतने के लिये कोई मीत तो चाहिये। मन जहाँ अपने आप बिना संकोच रीत जाए वही तो मीत होता है। मन को अभिव्यक्त करने के लिये मीत का साथ चाहिये और जिसे य...
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  August 6, 2017, 9:47 am
#हिन्दी_ब्लागिंगबादल गरज रहे हैं, बरस रहे हैं। नदियां उफन रही हैं, सृष्टि की प्यास बुझा रही हैं। वृक्ष बीज दे रहे हैं और धरती उन्हें अंकुरित कर रही है। प्रकृति नवीन सृजन कर रही है। सृष्टि का गुबार शान्त हो गया है। कहीं-कहीं मनुष्य ने बाधा पहुंचाने का काम किया है, वहीं बाद...
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  July 31, 2017, 10:11 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल राजस्थान के जोधपुर में एक हादसा होते-होते बचा। हवाई-जहाज से पक्षी टकराया, विमान लड़खड़ाया लेकिन पायलेट ने अपनी सूझ-बूझ से स्थिति को सम्भाल लिया। यह खबर है सभी के लिये लेकिन इस खबर के अन्दर जो खबर है, वह हमारा गौरव और विश्वास बढ़ाती है। महिला पायलेट ने...
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  July 29, 2017, 10:19 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमसूरी में देखे थे देवदार के वृक्ष, लम्बे इतने की मानो आकाश को छूने की होड़ लगी हो और गहरे इतने की जमीन तलाशनी पड़े। पेड़ जहाँ उगते हैं, वे वहाँ तक सीमित नहीं रहते, आकाश-पाताल की तलाश करते ही रहते हैं। हम मनुष्य भी सारा जहाँ देखना चाहते हैं, सात समुद्र के पा...
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  July 25, 2017, 11:11 am
#हिन्दी_ब्लागिंगआओ आज खेल की ही  बात करें। हम भी अजीब रहे हैं, अपने आप में। कुछ हमारा डिफेक्ट और कुछ हमारी परिस्थितियों का या भाग्य का। हम बस वही करते रहे जो दुनिया में अमूमन नहीं होता था। हमारा भाग्य भी हमें उसी ओर धकेलता रहा है। हमारी लड़की बने रहने की चाहत लम्बे समय त...
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  July 24, 2017, 10:00 am
#हिन्दी_ब्लागिंग#संजयसिन्हा की एक कहानी पर बात करते हैं। वे लिखते हैं कि मैंने एक बगीचा लगाया, पत्नी बांस के पौधों को  पास-पास रखने के लिये कहती है और बताती है कि पास रखने से पौधा सूखता नहीं। वे लिखते हैं कि मुझे आश्चर्य होता है कि क्या ऐसा भी होता है?  उनकी कहानियों मे...
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  July 21, 2017, 10:35 am
#हिन्दी_ब्लागिंगएक दृश्य देखा था, बीत गये न जाने कितने ही दिन लेकिन वह दृश्य आज भी मुझे कुछ लिखने को उकसाता है। मैं दिमाग को झटक देती हूँ लेकिन फिर वह सामने आकर बिराज जाता है। उस दृश्य के क्या मायने निकालूं समझ ही नहीं पाती। किसी भूल-भुलैय्या में ले जाए बिना अपनी बात सीधे...
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  July 20, 2017, 9:24 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल iifa awards का प्रसारण  हो रहा था। उत्तर भारतीय शादी में और इस कार्यक्रम में कुछ अन्तर नहीं था। हमारे यहाँ की शादी कैसी होती है? शादी का मुख्य बिन्दु है पाणिग्रहण संस्कार। लेकिन यह सबसे अधिक गौण बन गया है, सारे नाच-कूद हो जाते हैं उसके बाद समय मिलने पर या चु...
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  July 19, 2017, 8:56 am
#हिन्दी_ब्लागिंगलड़ना क्या इतना आसान होता है? पिताजी जब डांटते थे तब बहुत देर तक भुनभुनाते रहते थे, दूसरों के कंधे का सहारा लेकर रो  भी लेते थे लेकिन हिम्मत नहीं होती थी कि पिताजी से झगड़ा कर लें या उनसे कुछ बोल दें। माँ भी कभी ऊंच-नीच बताती थी तो भी मन मानता नहीं था, माँ ...
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  July 18, 2017, 9:08 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल इराक का शहर मोसुल एक चैनल पर दिखाया जा रहा था। इस्लामिक स्टेट का कब्जा अब खाली करवा लिया गया है। लोग वहाँ वापस आ रहे हैं, धरती को चूम रहे हैं। वहाँ के लगभग 10 लाख लोगों को वापस बसाया जाएगा। एक-एक घर खण्डहर में बदल चुका है, उसे वापस खड़ा करना कितना कठिन होग...
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  July 17, 2017, 9:34 am
www.sahityakar.comअभी दो दिन पहले एक फिल्म देखी – नाम शबाना। शायद आप लोगों ने देखी होगी और हो सकता है कि नहीं  भी देखी होगी, क्योंकि इस फिल्म की चर्चा अधिक नहीं हुई थी। फिल्म बेबी की चर्चा खूब थी, यह उसी फिल्म का पहला भाग था,  लेकिन शायद बना बाद में था। खैर छोड़िये इन बातों को, मूल वि...
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  July 14, 2017, 10:27 am
www.sahityakar.comहम सबके पास एक-एक भ्रम हैं, उस भ्रम की चादर ओढ़कर हम चैन की नींद सोते हैं। जैसे ही भ्रम की चादर हम ओढ़ते हैं, हमारा सम्बन्ध शेष दुनिया से कट जाता है, तब ना हमारे लिये देश रहता है, ना समाज  रहता है और ना ही परिस्थिति। याद कीजिए जब सिकन्दर आया था, तब हमारे पास कौन सी चाद...
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  July 11, 2017, 12:31 pm
http://sahityakar.comमोदीजी! यह नहीं चलेगा। हम कितनी मेहनत करके एक कहानी बनाते हैं, चीख-चीखकर दुनिया को सुनाते हैं। लोगों में विश्वास भर देते हैं कि हम जो कह रहे हैं, ऐसा ही होने जा रहा है। अब कल की ही बात ले लीजिए, हम मीडिया के लोगों ने चीन से युद्ध तक की स्थिति बना दी थी। लगा था कि बस अब ...
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  July 9, 2017, 10:11 am
जब मैं नौकरी में थी तब का एक वाकया सुनाती हूँ। कॉपियों का बण्डल सामने था और उन्हें जाँचकर भेजना भी था। लेकिन कहीं से भी आशा की किरण दिखायी नहीं दे रही थी। अब कितनों को फैल करेंगे? आखिर बेमन से जाँच होने लगी, लेकिन यह क्या! एक कॉपी पर कुछ वाक्य पढ़े गये, वही वाक्य बार-बार दोह...
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  July 7, 2017, 11:12 am
मोदी बनना सरल नहीं है। जो लोग मोदी को राजनैतिक चश्मे से देखते हैं, वे मोदी के लिये जौहरी नहीं हो सकते। मोदी की राजनीति, अव्यवस्था पर प्रहार करती है, मोदी की राजनीति, अकर्मण्यता पर प्रहार करती है, मोदी की राजनीति, आतंक  पर प्रहार करती है। मोदी व्यवस्था को सुचारू करना चाह...
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  July 5, 2017, 10:38 am
#हिन्दी_ब्लागिंगनेकनामी और बदनामी, दोनों का चोली-दामन का साथ है। जैसे ही किसी व्यक्ति की कीर्ति फैलने लगती है, उसी के साथ उसको कलंकित करने वाले उपाय भी प्रारम्भ हो जाते हैं। दोनो में संघर्ष चलता है लेकिन जीत सत्य की ही होती है। आज 4 जुलाई को ऐसे ही सत्य का स्मरण हो रहा है। ...
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  July 4, 2017, 10:54 am
माँ हमारे बारे में हमें छोटी-छोटी कहानियां सुनाती थी, अब वही कहानियाँ हमारे अन्दर घुलमिल गयी हैं। हमारा इतिहास बन गयी हैं। जब वे सुनाती थी कि गाँव में तीन कोस पैदल जाकर पानी लाना होता था तब उस युग का इतिहास हमारे सामने होता था। माँ अंग्रेजों की बात नहीं करती थी, बस अपने प...
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  July 2, 2017, 9:13 am
अब जमींदारी नहीं रही, रतजगे नहीं होते। जमींदारों की हवेलियाँ होटलों में तब्दील हो गयी हैं। क्या दिन थे वे? हवेली में सुबह से ही चहल-पहल हो जाती, जमींदार भी चौकड़ी जमाने के लिये शतरंज बिछा देते। उनकी हवेली  पर ही सारे सेठ-साहूकार एकत्र होते। जहाँ जमींदार शतरंज की बाजी स...
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  June 29, 2017, 8:32 pm
कल एक पुत्र का संताप से भरा पत्र पढ़ने को मिला। उसके साथ ऐसी भयंकर दुर्घटना  हुई थी जिसका संताप उसे आजीवन भुगतना ही होगा। पिता आपने शहर में अकेले रहते थे, उन्हें शाम को गाड़ी पकड़नी थी पुत्र के शहर जाने के लिये। सारे ही रिश्तेदारों से लेकरआस-पड़ोस तक को सूचित कर दिया ग...
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ajit gupta
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  June 21, 2017, 10:12 am
बचपन में जब किताबों की लत लगी हो तब कोई भी किताब हो, उसे पढ़ ही लिया जाता था। किताबें ही तो सहारा थी उन दिनों, दुनिया को जानने का उन से अधिक साधन दूसरा नहीं था। एकाध किताबें ज्योतिष की भी हाथ लग गयी और हम हस्त-रेखाओं के नाम-पते जान गये। थोड़ी सी इज्जत बढ़ जाती थी, हर कोई हमार...
अजित गुप्‍ता का कोना...
ajit gupta
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  June 17, 2017, 11:04 am
कल मैंने दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक पति की लाचारी की दास्तान लिखी थी, सभी ने बेचारे पति पर तरस खाने की  बात लिखी। अब मैं अपना पक्ष लिखती हूँ। आजादी के  बाद घर में पुत्र का जन्म थाली बजाकर, ढिंढोरा पीटने का विषय  होता था और माँ-दादी पुत्र को कलेजे के टुकड़े की तरह पालती ...
अजित गुप्‍ता का कोना...
ajit gupta
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  June 16, 2017, 9:16 am
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