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अजित गुप्‍ता का कोना

हम घर में दोनों पति-पत्नी रहते हैं, गाड़ी एक ही धुरी पर चलती है। दोनों ही एक-दूसरे को समझते हैं इसलिये कुछ नया नहीं होता है। लेकिन जैसे ही हमारे घर में कोई भी अतिथि आता है, हमारे स्वर बदल जाते हैं, हम खुद को अभिव्यक्त करने में जुट जाते हैं। आप सभी ने इस बात पर गौर किया होगा क...
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ajit gupta
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  October 11, 2017, 10:53 am
कल घर में गहमागहमी थी, करवा चौथ जो थी। लेकिन करवा चौथ में नहीं मनाती, कारण यह नहीं है कि मैं प्रगतिशील हूँ इसलिये नहीं मनाती, लेकिन हमारे यहाँ रिवाज नहीं था तो नहीं मनाया, बस। जब विवाह हुआ था तो सास से पूछा कि करवा चौथ करनी है क्या? वे बोलीं कि अपने यहाँ रिवाज नहीं है, करना च...
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  October 9, 2017, 10:21 am
मैंने कई बार न्यूसेंस वेल्यू के लिये लिखा है। आज फिर लिखती हूँ। यह जो राज ठाकरे है, उसका अस्तित्व किस पर टिका है? कहते हैं कि मुम्बई में वही शान से रह सकता है जिसकी न्यूसेंस वेल्यू हो। फिल्मों का डॉन यहीं रहता है। चम्बल के डाकू बीहड़ों में रहते हैं, इसलिये उनका आतंक या न्...
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  October 1, 2017, 10:34 am
जब भी किसी महिला को खिलखिलाकर हँसते देखती हूँ तो मन करता है, बस उसे देखती ही रहूँ। बच्चे की पावन हँसी से भी ज्यादा आकर्षक लगती है मुझे किसी महिला की हँसी। क्योंकि बच्चा तो मासूम है, उसके पास दर्द नहीं है, वह अपनी स्वाभाविक हँसी हँसता ही है लेकिन महिला यदि हँसती हैं तो वह म...
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  September 23, 2017, 10:18 am
कुछ लोग अलग मिट्टी से बने होते हैं, उनकी एक छोटी सी सोच उन्हें सबसे अलग बना देती है। कल केबीसी के सेट पर खिलाड़ी थी – अनुराधा,  लेकिन मैं आज बात अनुराधा की नहीं कर रही हूँ। मेरी बात का नायक है अनुराधा का पति – दिनेश। कुछ लोग जीवन में एक उद्देश्य लेकर आगे बढ़ते हैं, स्वयं क...
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  September 22, 2017, 9:58 am
हम बनिये-ब्राह्मण उस सुन्दर लड़की की तरह हैं जिसे हर घर अपनी दुल्हन बनाना चाहता है। पहले का जमाना याद कीजिए, सुन्दर राजकुमारियों के दरवाजे दो-दो बारातें खड़ी हो जाती थी और तलवार के जोर पर ही फैसला होता था कि कौन दुल्हन को ले जाएगा? तभी से तो तोरण मारने का रिवाज पैदा हुआ थ...
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  September 15, 2017, 9:24 am
#हिन्दी_ब्लागिंगविवेकानन्द के पास क्या था? उनके पास थे मानवीय मूल्य। इन्हीं मानवीय मूल्यों ( human vallues) के आधार पर उन्होंने दुनिया को अपना बना लिया था। लेकिन एक होती है nuisance value (उपद्रव मूल्य) जो अपराधियों के पास होती है, उस काल में डाकुओं के पास उपद्रव मूल्य था। सत्ता के पास दोन...
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  September 11, 2017, 11:24 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमुझे आज तक समझ नहीं आया कि – a2 + b2 = 2ab इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है?यह फार्मूला हमने रट लिया था, पता नहीं अब ठीक से लिखा गया भी है या नहीं। बीजगणित हमारे जागतिक संसार में कभी काम नहीं आयी। लेकिन खूब पढ़ी और मनोयोग से पढ़ी। ऐसी ही न जाने कितनी शिक्षा हमपर थ...
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  September 5, 2017, 9:53 am
#हिन्दी_ब्लागिंगहम अपने-अपने सांचों में कैद हैं, हमारी सोच भी एक सांचे में बन्द है, उस सांचे को हम तोड़कर बाहर ही नहीं आना चाहते। कितना ही नुकसान हो जाए लेकिन हमारी सोच में परिवर्तन नहीं होता, कभी हमें पता भी होता है कि हम गलत तर्क के साथ खड़े हैं तब भी हम वहीं खड़े होते है...
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  September 1, 2017, 9:39 am
#हिन्दी_ब्लागिंगएक प्रसंग जो कभी भूलता नहीं और बार-बार उदाहरण बनकर कलम की पकड़ में आ जाता है। मेरी मित्र #sushmakumawat ने कामकाजी महिलाओं की एक कार्यशाला की, उसमें मुझे आमंत्रित किया। कार्यशाला में 100 मुस्लिम महिलाएं थी। मुझे वहाँ कुछ बोलना था, मैं समझ नहीं पा रही थी कि मैं क्या ...
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  August 24, 2017, 9:26 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा  बना रहे हैं। कहाँ से आ रहे हैं ये पक्षी? मन में प्रश्न था। शायद ये कहीं दूर से आए हैं और इनने अपना ठिकाना कुछ दिनों के लिये यहाँ बसा लिया ह...
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  August 19, 2017, 10:13 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता है और मिलती है सुरक्षा। बस इंसान भी इसी खोज में आजीवन जुटा रहता है। बचपन छूट जाता है लेकिन जहाँ जीवन मिले, जहाँ अमृत मिले और जहाँ सुरक्ष...
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  August 16, 2017, 9:40 am
#हिन्दा_ब्लागिंगआधा-आधा जीवन जीते हैं हम, आधे-आधे विकसित होते हैं हम और आधे-आधे व्यक्तित्व को लेकर जिन्दगी गुजारते हैं हम। खिलौने का एक हिस्सा एक घर में बनता है और दूसरा हिस्सा दूसरे घर में। दोनों को जोड़ते हैं, तो ही पूरा खिलौना बनता है। यदि दोनों हिस्सों में कोई भी त्र...
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  August 15, 2017, 10:43 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमन का दोगलापन देखिये, कभी मन कहता है कि अकेलापन चाहिये और कभी कहता है कि अकेलापन नहीं चाहिये। कभी कहता है कि अकेलापन तो चाहिये लेकिन केवल अपनी चाहत के साथ का अकेलापन चाहिये। हम अपनी पसन्द का साथ चाहते हैं, बस उसी के लिये सारी मारा-मारी करते हैं। दुनिया भ...
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  August 9, 2017, 10:00 am
#हिन्दी_ब्लागिंगओह! आज मित्रता दिवस है! मित्र याने मीत, अपने मन का गीत। मन रोज भर जाता है, उसे रीतना ही होता है,  लेकिन रीते कैसे? रीतने के लिये कोई मीत तो चाहिये। मन जहाँ अपने आप बिना संकोच रीत जाए वही तो मीत होता है। मन को अभिव्यक्त करने के लिये मीत का साथ चाहिये और जिसे य...
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  August 6, 2017, 9:47 am
#हिन्दी_ब्लागिंगबादल गरज रहे हैं, बरस रहे हैं। नदियां उफन रही हैं, सृष्टि की प्यास बुझा रही हैं। वृक्ष बीज दे रहे हैं और धरती उन्हें अंकुरित कर रही है। प्रकृति नवीन सृजन कर रही है। सृष्टि का गुबार शान्त हो गया है। कहीं-कहीं मनुष्य ने बाधा पहुंचाने का काम किया है, वहीं बाद...
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  July 31, 2017, 10:11 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल राजस्थान के जोधपुर में एक हादसा होते-होते बचा। हवाई-जहाज से पक्षी टकराया, विमान लड़खड़ाया लेकिन पायलेट ने अपनी सूझ-बूझ से स्थिति को सम्भाल लिया। यह खबर है सभी के लिये लेकिन इस खबर के अन्दर जो खबर है, वह हमारा गौरव और विश्वास बढ़ाती है। महिला पायलेट ने...
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  July 29, 2017, 10:19 am
#हिन्दी_ब्लागिंगमसूरी में देखे थे देवदार के वृक्ष, लम्बे इतने की मानो आकाश को छूने की होड़ लगी हो और गहरे इतने की जमीन तलाशनी पड़े। पेड़ जहाँ उगते हैं, वे वहाँ तक सीमित नहीं रहते, आकाश-पाताल की तलाश करते ही रहते हैं। हम मनुष्य भी सारा जहाँ देखना चाहते हैं, सात समुद्र के पा...
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  July 25, 2017, 11:11 am
#हिन्दी_ब्लागिंगआओ आज खेल की ही  बात करें। हम भी अजीब रहे हैं, अपने आप में। कुछ हमारा डिफेक्ट और कुछ हमारी परिस्थितियों का या भाग्य का। हम बस वही करते रहे जो दुनिया में अमूमन नहीं होता था। हमारा भाग्य भी हमें उसी ओर धकेलता रहा है। हमारी लड़की बने रहने की चाहत लम्बे समय त...
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  July 24, 2017, 10:00 am
#हिन्दी_ब्लागिंग#संजयसिन्हा की एक कहानी पर बात करते हैं। वे लिखते हैं कि मैंने एक बगीचा लगाया, पत्नी बांस के पौधों को  पास-पास रखने के लिये कहती है और बताती है कि पास रखने से पौधा सूखता नहीं। वे लिखते हैं कि मुझे आश्चर्य होता है कि क्या ऐसा भी होता है?  उनकी कहानियों मे...
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  July 21, 2017, 10:35 am
#हिन्दी_ब्लागिंगएक दृश्य देखा था, बीत गये न जाने कितने ही दिन लेकिन वह दृश्य आज भी मुझे कुछ लिखने को उकसाता है। मैं दिमाग को झटक देती हूँ लेकिन फिर वह सामने आकर बिराज जाता है। उस दृश्य के क्या मायने निकालूं समझ ही नहीं पाती। किसी भूल-भुलैय्या में ले जाए बिना अपनी बात सीधे...
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  July 20, 2017, 9:24 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल iifa awards का प्रसारण  हो रहा था। उत्तर भारतीय शादी में और इस कार्यक्रम में कुछ अन्तर नहीं था। हमारे यहाँ की शादी कैसी होती है? शादी का मुख्य बिन्दु है पाणिग्रहण संस्कार। लेकिन यह सबसे अधिक गौण बन गया है, सारे नाच-कूद हो जाते हैं उसके बाद समय मिलने पर या चु...
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  July 19, 2017, 8:56 am
#हिन्दी_ब्लागिंगलड़ना क्या इतना आसान होता है? पिताजी जब डांटते थे तब बहुत देर तक भुनभुनाते रहते थे, दूसरों के कंधे का सहारा लेकर रो  भी लेते थे लेकिन हिम्मत नहीं होती थी कि पिताजी से झगड़ा कर लें या उनसे कुछ बोल दें। माँ भी कभी ऊंच-नीच बताती थी तो भी मन मानता नहीं था, माँ ...
अजित गुप्‍ता का कोना...
ajit gupta
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  July 18, 2017, 9:08 am
#हिन्दी_ब्लागिंगकल इराक का शहर मोसुल एक चैनल पर दिखाया जा रहा था। इस्लामिक स्टेट का कब्जा अब खाली करवा लिया गया है। लोग वहाँ वापस आ रहे हैं, धरती को चूम रहे हैं। वहाँ के लगभग 10 लाख लोगों को वापस बसाया जाएगा। एक-एक घर खण्डहर में बदल चुका है, उसे वापस खड़ा करना कितना कठिन होग...
अजित गुप्‍ता का कोना...
ajit gupta
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  July 17, 2017, 9:34 am
www.sahityakar.comअभी दो दिन पहले एक फिल्म देखी – नाम शबाना। शायद आप लोगों ने देखी होगी और हो सकता है कि नहीं  भी देखी होगी, क्योंकि इस फिल्म की चर्चा अधिक नहीं हुई थी। फिल्म बेबी की चर्चा खूब थी, यह उसी फिल्म का पहला भाग था,  लेकिन शायद बना बाद में था। खैर छोड़िये इन बातों को, मूल वि...
अजित गुप्‍ता का कोना...
ajit gupta
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  July 14, 2017, 10:27 am
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