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palash "पलाश"

मै तो मुसाफिर हूँ, रास्ते घर हैं घर मेरामुझे बसने के लिये, दीवार नही उठानी हैमेरे दोस्त कुछ फूल भी है, कुछ कांटे भी मेरी जिन्दगी अखबार नही, बहता पानी हैरात से दिन कब हुआ है, चांद के जाने सेयहाँ अंधेरा भी, कुछ महलो की निशानी हैबहुत हो रहे हैं चर्चे, गांव में तरक्कियों के  फ...
palash "पलाश"...
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  June 22, 2017, 9:40 am
उडते पक्षी को देखा तो, याद मुझे भी आ गयामेरी खातिर भी है, ये नील गगन ये हरा चमनभूल बैठा था खुद को, दुनिया के इस मेले मेंजीने की राह बता गया, इक नन्हा रोता बच्चा बुरी सबसे लगती थी किस्मत अपनी मुझे सदा, हर शिकवा मिट गया जब निर्भया को याद कियाकीमत न समझी कभी, हजार, दो हजार कीवक...
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  June 15, 2017, 11:16 pm
बडा हसीं था वो एक मजंरकि कोई नजरों में बस रहा थाहमारी खातिर ही तुम बने थेये जर्रा जर्रा भी कह रहा था…………………………..बडी अनोखी सी बात है येबडा ही मुश्किल है ये फसानाकि जिससे हमने बनायी दूरीवो मेरी धडकन में बस रहा थाहमारी खातिर ही तुम बने थेये जर्रा जर्रा भी कह रहा था……………………...
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  June 1, 2017, 12:17 am
ममी रोजी ने देखो आज फिर मेरी फेवरेट डॉल तोड दी कहते हुये रीना ने किचन में अपनी गोद में रोजी को लेते हुये आयी। रीना की बातों में शिकायत कम प्यार ज्यादा था। तभी बाहर से कुछ टूटने की आवाज आयी- रीना रोजी के साथ बाहर कमरे की तरफ आयी, जहाँ घर की नौकरानी की तीन वर्षीय लडकी कजरी ने ...
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  May 20, 2017, 11:06 pm
यू एस. ए. से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक पत्र हमहिन्दुस्तानीयूएसए मे ११ मई को प्रकाशित लेख को आप सबके साथ साझा करते हुये हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूँ। मेरी इस रचना को प्रकाशित करने के लिये प्रकाशन के संपादक श्री जय सिंह का हार्दिक धन्यवाद।हम हिन्दुस्तानी य...
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  May 17, 2017, 11:50 pm
पिछलेतीनमहीनेसेदोचीजोंकीमारझेलरहाथा-  बीमारी, और पैसा, एकऔरभीचीजहै गर्मीमगरशायदउसकोगिनानाउचितनहीलग रहा, वरनाआपलोगसमझेगेंकीनाहकहीअपनीपरेशानियांबढाचढाकरलिखरहाहूँ। मौसम की सबसे ज्यादा मार गरीब पर ही पडती है और इसे एक गरीब ही बेहतर समझ सकता है। एकतरफजहाँदुन...
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  May 14, 2017, 12:46 am
जो दिख रहा वो सच नही फिर अनदिखे को क्या कहिये हस रहे जख्म महफिलो मेंगुमसुम खुशी को क्या कहियेहर किसी ने हर किसी कीकिस्मतों पर रश्क खायाफिर भी आसूं हर आँख में तो नजरिये को क्या कहियेदिल लगाया इसलिए किदिल को तो कुछ सुकून होदिल लगा चैन काफुर हुआ तो दिल्लगी को क्या ...
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  May 12, 2017, 1:43 am
उसे ना बहुत गोरी ही कहा जा सकता था ना ही सांवली। हाँ कद काठी ऐसी थी कि एक बार मुड कर देखे बिना रुका ना सके, और सबसे बडा उसका आकर्षण थे उसके नागिन से लम्बे सुर्ख काले बाल, जो लडकों के तो क्या लड्कियों तक के मुंह से उफ्फ निकलवा देते।पिछले दिनों ही मेरे पडोस में रहने आयी और चंद ...
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  May 10, 2017, 7:29 pm
ये मेरे जीवन में पहला अवसर नही था जब मैं इस प्रश्न का उत्तर दे रही थी। अब तक तो मुझे इस प्रश्न की आदत सी हो गयी थी, कुछ लोग मेरे कार्य की प्रसंशा करने के बाद य्ह प्रश्न पूंछते थे, कुछ की बातों का आरम्भ ही इस प्रश्न से होता था। आप भी सोच रहे होंगे कि प्रश्न पूंछने की चर्चा तो इ...
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  April 1, 2017, 12:47 am
अम्बे मइया के दरबार, लगी भक्तो की कतारकोई लाया लाल चुनरिया॒॑sss - 2, कोई करे जयकारशेरोवाली के दरबार, लगी भक्तो की कतारदुष्ट जनों का नाश किया, दुर्बल के कष्ट मिटायेजो भी पुकारे भक्तिभाव से, मइया के दर्शन पायेखाली हाथ ना लौटा वो जोss - 2 आया माँ के द्वारअम्बे मइया के दरबार, लगी भ...
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  March 28, 2017, 9:53 pm
मम्मी पापा तो समझते ही नही कि अब हम बच्चे नही रहे अब हम स्कूल नही कॉलेज जाते हैं, और वहाँ लोग नोटिस करते हैं कि हमने क्या पहना है, रोज रोज वही कपडे पहन कर जाने से मेरा मजाक बनता है। मम्मी आप ही कह दो ना पापा से मुझे सिर्फ दो जींस दिला दे, प्लीज मम्मी कह दोगी ना। हाँ हाँ कह दूंग...
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  March 26, 2017, 3:12 pm
पग डगमग कितने कर लो पथ भ्रष्ट नही कर पाओगेभले बिछा लो शूल मार्ग में पर अनिष्ट नही कर पाओगे…………………..कठिनताओं से हाथ मिलानाप्रिय खेल रहा है बचपन कादुष्कर को ही लक्ष्य बनानाइक ध्येय रहा है जीवन कातन पर प्रहार कितने कर लोमन क्लांत नही कर पाओगेपग डगमग कितने कर लो पथ भ्रष्ट ...
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  March 18, 2017, 11:21 pm
साथी तुम मेरी नींद बनोमै स्वप्न में तेरे आउंगी।इक बार तो मेरे कदम बनोहर राह में साथ निभाउंगीसृष्टि में कुछ भी पूर्ण नहीबिन गंध है पुष्प अधूरा सादीप प्रज्जव्लित हुआ तभीजब साथ मिला है बाती कातुम देखो तो बन बिन्दु मेरामै आकार तेरा बन जाउंगीइक बार तो मेरे कदम बनोहर र...
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  March 9, 2017, 11:30 pm
आदमी- काश मेरे पास एक दोस्त होताजिससे कह पाता अपने मन की बातजो समझ सकता मेरी परेशानीसब छोडकर देता मेरा साथतभी बोला मन- एक के लिये आप अभी भी रोते जाते है फिर क्या सोचकर रोज फेसबुक पर मित्र बनाते जाते है *******************************************आदमी- आप बहुत अच्छा लिखती है, लेखनी में आपकी सौम्यता छ...
palash "पलाश"...
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  March 5, 2017, 8:02 pm
आदमी- काश मेरे पास एक दोस्त होताजिससे कह पाता अपने मन की बातजो समझ सकता मेरी परेशानीसब छोडकर देता मेरा साथतभी बोला मन- एक के लिये आप अभी भी रोते जाते है फिर क्या सोचकर रोज फेसबुक पर मित्र बनाये जाते है *******************************************आदमी- आप बहुत अच्छा लिखती है, लेखनी में आपकी सौम्यता छ...
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  March 5, 2017, 8:02 pm
सत्कर्मोकीअग्निमे,जबतपतीमानुषदेह |कामक्रोधहोतेभस्म,  मिलतीप्रभुकीनेह ||सच्चाधनबसप्रेमहै,बाकीसबजगमेझूठ |खर्चहोयसेबढतजाय,नाखर्चसेजायछूट ||साथीवहीजोसाथदे,भलेरहेकभीनसाथ |साथसेएकलाभला,नाभलाबाँहकानाग ||वृद्धजनोंका आशीष है,सत्कर्मोकापरिणाम |श्रमबिनजा...
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  February 27, 2017, 10:28 pm
जाने कितनी रातें इस उधेड बुन में काट दी कि अपनी आज की स्थिति को अपनी नियति मान ही लूँ और परिस्थितियों से समझौता कर लूं   या फिर जिन्दगी को कम से कम उस स्थिति में तो लेकर आऊँ जहां पर उसे जिन्दगी तो कहा जा सके। लोगो के घरों के बर्तन घिसते घिसते शायद मेरे हाथो की लकीर भी घि...
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  February 24, 2017, 8:30 pm
मातृभाषा को समझने से पहले समझना होगा भाषा को, भाषा किसे कहते हैं? विचारों और भावनाओं को आदान प्रदान करने का माध्यम है भाषा। विचारों की अभिव्यक्ति कभी शब्दों के द्वारा की जा सकती है कभी सांकेतिक। इस प्रकार से भाषा को दो रूपों मे समझा जा सकता है। प्रकृति में भाषा का प्रयो...
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  February 21, 2017, 12:57 am
* Image is referred from google. माँ मै अब और एक भी दिन यहाँ नही रह सकती, हम कल ही यहाँ से चल देंगें है, इससे तो बहुत भला है अपना इंडिया। हम आ रहे हैं माँ। कहते हुये राधिका का फोन कट चुका था। मगर अनुसुइया जी के सामने तीन महीने पहले का दृश्य एक बार फिर से घूम गया।राधिका अनुसुइया जी की एक मात्र स...
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  February 14, 2017, 10:31 pm
क्या होगा कुरेदने से, स्मृतियों के पलकुछ दबी आंधियां, तूफान बन जायेंगीजितना भी तय करेंगें, वो बीता सफर वापसी में अवश्य, कडवाहटें संग आयेंगीयाद ना कर उसे, जो दर्द का कारन थाआप उम्र भर उसे, माफ न कर पायेंगीकुछ कदमों की आहटें हैं, प्रतीक्षा से परेहर राह के लौटने की, राहें न ब...
palash "पलाश"...
Tag :memories
  February 11, 2017, 10:28 am
नही चाहत मुझे, किसी तारीफ के पुलिन्दों कीहम वो सोना हैं जो, तपती आग में निखरता हैक्या मिटाओगे उसे, जो खुद को मिटा बैठा हैहम वो मिट्टी हैं जो, बीज को फसल करता हैकठिन नही समझना मुझे, कोशिश तो करियेहम वो पन्ना हैं जो, तेरा ही कहा लिखता हैनही लगता साथ टूटने में, पलभर का समयहम वो ...
palash "पलाश"...
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  February 7, 2017, 11:00 pm
मन कहता इस नववर्ष पर आज कोई नवगीत लिखूँभूल के सारे द्वेष सभी से, अपने मन का राग लिखूँबीते समय की सात तहों में, कुछ खट्टे कुछ मीठे पल हैंजिन लम्हों में रोये हँसे, चाहे अनचाहे स्मरणीय कल हैंसोच रही यादों के वन से, चुनचुन कर उल्लास लिखूँभूल के सारे द्वेष सभी से, अपने मन का राग...
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Tag :year 2017
  December 31, 2016, 10:33 am
घर आंगन छोड के जाना, कब अच्छा लगता हैआँखों से आँसू छलकाना, कब अच्छा लगता हैरोटी की मजबूरी, अक्सर छुडवा देती अपना देशपराये देश में व्यापार फैलाना कब अच्छा लगता हैमाँ के हाथों की खाये बिना, बस पेट ही भरता हैऑडर देकर सीमित खाना, कब अच्छा लगता हैबेजान रंगी्न शहरों में, फ्रैं...
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  December 6, 2016, 10:32 am
मेरी मुस्कान, कब बन गयी मौन स्वीकृतिवो स्वीकृति जो मैने कभी दी ही नहीवो स्वीकृति जो चाहता था पुरुषकभी अनजानी लडकी से, कभी अपनी सहकर्मी सेकभी अपनी शिष्या से, कभी जीवनसंगिनी सेखुद से ही गढ लेता है पुरुष वो परिभाषायें जैसा वो चाहता हैऔर परिभाषित कर देता है स्त्री का पहना...
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  September 24, 2016, 10:41 am
रोहित का आज आठवीं कक्षा का परिणाम घोषित होना था। पिछले वर्ष वह प्रथम आया था, इस वर्ष भी उसे यही उम्मीद थी। विघालय में प्रतिवर्ष परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिये एक बडा आयोजन होता था। जिसमें सभी बच्चों के अभिभावक आमन्त्रित किये जाते थे। किसी कारणवश रोहित के पिता जी आज ...
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  September 17, 2016, 1:56 pm
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