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palash "पलाश"

लगभग १५ साल बाद अचानक फोन पर एक चिरपरिचित आवाज सुनाई दी। आवाज जिसे किसे परिचय की जरूरत हो ही नही सकती थी। सुगन्धा, मेरी क्लास मेट, शायद मेरे लिये उसका ये पूर्ण परिचय नही, किन्तु १५ साल पहले बाकी सारे परिचय न चाहते हुये भी मिटा दिये थे। क्या सच में कुछ मिटाया जा सकता है या ह...
palash "पलाश"...
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  October 12, 2017, 7:14 pm
बेटी हूँ मैं,है मुझे अहसासपिता के मान काघर की आबरू हूँ मैंजानती हूँ फर्क बेटे और बेटी मेंसमझती हूँ चिन्ताएक पिता की मैऔर परिचित भी हूँसमाज के चरित्र सेनही दोष नही देतीकिसी को न परिवार को न प्रथाओं को मगर करती हूँ अब इन्कारउन बन्धनों सेजो नही समझतेमेरी कोमल भावनायेंज...
palash "पलाश"...
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  September 26, 2017, 9:00 pm
हमसाया भाग १हमसाया भाग २गतांक से आगेसारी रात तरह तरह के खयालों सपनों में खोते मेरी रात बीती। कब मुझे नींद आयी ये मुझे भी नही पता, मगर नींद थी इतनी गहरी कि मै ये भी भूल गया कि मै घर पर नही ट्रेन में हूँ, ट्रेन पुने स्टेशन आ चुकी थी और राधिका मुझे आवाज दे रही थी।हडबडा कर मैं उ...
palash "पलाश"...
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  September 13, 2017, 1:56 pm
स्पर्श जिसमें निहित है  निर्मांण की कल्पनाया विनाश का षणयंत्रबराबर मात्रा मेंस्पर्शएक ऐसा इन्टरफेसजिसमें इनपुट तो एक ही होता है मगर बदलते रहते हैं आउट्पुटकभी बन जाता है भक्ति तो कभी द्या कभी भर जाता है मनस्नेह के भाव सेकभी जग जाती है सुषुप्त प्रेम की तॄष्णाऔर ...
palash "पलाश"...
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  September 11, 2017, 7:12 pm
मोहताज हों क्यूं भला किसी की पसंदगी केजीने के लिये मुझे मेरा मुरीद होना चाहियेसंवरना निखरना नहीं मेरा किसी के लियेआइने में मुझे सूरत मेरी बोलती चाहियेजीना औरो के दम मुंकिन नही मेरे लियेहौसला गिरके उठने का खुदमें मुझे चाहियेखुशियों के किले बनाये क्यों क...
palash "पलाश"...
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  September 10, 2017, 12:17 pm
गतांक १ से आगे..........सच कहूं तो अभी तक ठीक से राधिका को देखा भी नही था, इस बात का पता तब चला जब ट्रेन गाँव से बीस तीस किलोमीटर दूर निकल आने पर मैने कहा- चाहो तो ये घूंघट कम या हटा सकती हो, गाँव से हम लोग बहुत दूर निकल आये हैं, दरअसल मुझे राधिका का ख्याल आने लगा हो ऐसा नही था, बल्कि ...
palash "पलाश"...
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  September 9, 2017, 9:45 am
अम्मा, बाबू जी से कह दो न, मै शादी नही करना चाहता, मुझे अभी बहुत कुछ करना है, आपके लिये बहू लाने को दीपक और अनुराग हैं न, एक मेरे शादी न करने से क्या फरक पड जायेगा।मुझे नही पता था कि कब बाबू जी दफ्तर से लौट कर आ गये थे और मेरी बात सुन रहे थे, ऐनक उतार कर बोले- देखो बरखुरदार, ये शाद...
palash "पलाश"...
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  September 7, 2017, 11:37 am
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palash "पलाश"...
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  September 3, 2017, 12:05 am
जानती हूँ मै साधन सम्पन्न नहीन आपसी आवाज मेरी बात मेंकिन्तु सोचती शायद पहुंचेआप तक मेरी बात येसम्भव नही और न जरूरतकहूँ सभी से मन की बातपर जरूरी है कह ही दूँउठती हदय में जो बातहूँ बहुत छोटीउम्र में भी अनुभवों में भीकिन्तु सौ करोड मेंहूँ इक इकाई मै भीदेश को संचार तक...
palash "पलाश"...
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  August 31, 2017, 11:49 pm
ओ प्यारे कबूतर सुना है मैनेलोग तुम्हे कहते थेप्रेम का दूतजाने कितनेदिलों को तुमने मिलायाजाने कितने बुझे चिरागों को जलायाआज मेरा भी एक काम कर देमेरे प्रियतम को इक संदेश दे देजल रहा है मन मेरा वेदना मेंजा उन्हे सांसें मेरी शेष दे देहे! नारि विज्ञान युग मेंसाधनो की क्...
palash "पलाश"...
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  August 28, 2017, 11:20 pm
जब भी ख्याल हुआ, अब जीने में कुछ नहीजिन्दगी ने कहा, सफर ऐसे तो खतम नहीमाना मिल जाते है साँप आस्तीन के बाजारों मेंन करूं यकी हमनिवालों का, ये भी तो हल नहीसुना था कानून अन्धा होता है,सुना था धर्म आँख खोल देता है शुक्र है जमाने में अभी सब नही बिगडाजब धर्म हो अन्धा, कानून राह द...
palash "पलाश"...
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  August 27, 2017, 5:56 pm
जब भी ख्याल हुआ, अब जीने में कुछ नहीजिन्दगी ने कहा, सफर ऐसे तो खतम नहीमाना मिल जाते है साँप, आस्तीन के बाजारों मेंन करूं यकी हमनिवालों का, ये भी तो हल नहीसुना था कानून अन्धा होता है,सुना था धर्म आँख खोल देता है शुक्र है जमाने में अभी सब नही बिगडाजब धर्म हो अन्धा, कानून सच तो...
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  August 27, 2017, 5:56 pm
क्यो नही रुकता ये सिलसिलासिलसिला जिसमें चले जाते है सबधरम की आड में बिना समझेएक अन्धेरी खोखली गलीसिलसिला जिसमें दिखता है बसपागल पागलपन और जुनूनबहाने को खून की नदीसिलसिला जिसमें मिटता है सचधन बल की तलवार की परसिसकती रह जाती है जिन्दगीसिलसिला जो कर रहा है संतुष्टभूख...
palash "पलाश"...
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  August 26, 2017, 9:56 pm
जाने कितने छूटे हैं जाने कितने छूटेंगेंसोच की तंग गलियों में जाने कितने रूठेंगेंकुछ लोग गले से लगायेगेफिर खंजर दिल पे चलायेगेबन करके सबब बर्बादी काजख्मों पर मरहम लगायेगेजाल बिछा् अपनेपन का, सब हौले हौले लूटेंगेजाने कितने छूटे हैं जाने कितने छूटेंगेंबुलंदी पर जश्...
palash "पलाश"...
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  August 25, 2017, 2:22 pm
उम्र तो बस उम्र होती हैजितनी भी हो पूरी होती है चाहे कह लो इसे अच्छी बुरीचाहे समझो इसे छोटी बडीइसमें जिन्दगी की उमीद होती हैउम्र तो बस उम्र होती है.......................कोई काटता है कोई गुजारता है कोई जीता है कोई संवारता हैसप्तसुरों से सजी संगीत होती हैउम्र तो बस उम्र होती है....................
palash "पलाश"...
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  August 22, 2017, 11:10 pm
जिन्दगी हम कभी, थे तुम्हारे लियेआज कुछ भी नही, हम तुम्हारे लियेअब गिला क्या करे, कुछ भी कैसे कहेजब रहे कुछ नही, हम तुम्हारे लियेवो नसीबों से मिलना, हमारा तेरावो मुकददर की रातें, अब है कहाँसारे अल्फाज दिल, में रुके रह गयेसुनने कहने के हालात, अब हैं कहाँतेरी दुनिया से हम, नि...
palash "पलाश"...
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  August 13, 2017, 1:20 am
उस समय लोग बुद्ध को भगवान समझने लगे थे, लोग उनकी बातों को सुनते और उनके कहे अनुसार आचरण करते थे। एक गाँव में एक लकडहारा बुद्ध से ईर्ष्या रखता था, सभी से उनकी बुराई करता, और कहता सब उनकी पूजा करते हैं इसलिये वो शान्त रहते हैं मै जब चाँहू उनसे लडाई कर सकता हूँ उनको क्रोध दिला...
palash "पलाश"...
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  August 11, 2017, 12:03 pm
अल्बर्ट स्मिथ, अमेरिका की एक जानी मानी यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर थे। एक बार अपनी क्लास में वह सत्य, ज्ञान और धर्म पर अपना व्याख्यान दे रहे थे। अचानक उन्हे रोकते हुये उनके एक विघार्थी ने कहा- सर आप जो भी कह रहे हैं उसमें भाव नही आ रहा, ऐसा लग रहा है जैसे आप सि...
palash "पलाश"...
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  August 1, 2017, 4:23 pm
एक बहुत बडे वैज्ञानिक थे। एक बार उन्होने पागलो पर शोध करने का निश्चय किया। वो नियम से तीन चार घंटे एक पागलखाने जाते और चुपचाप पागलों के व्यवहार को गौर से देखा करते।वहाँ उन्होने गौर किया कि दो पागल, जो कभी गणित और अंग्रेजी के प्रोफेसर हुआ करते थे, घंटो आपस में बात किया कर...
palash "पलाश"...
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  July 31, 2017, 4:48 pm
कल सुबह उठा थाकुछ अलसाया अलसाया सा।प्रतिदिन की तरहउठ चुकी थी पत्नी शायद बनाने गयी थी चाय।तभी नजर गयीउस आइने परजो इस कमरे में एक अरसे सेसोता जागता था मेरे साथ।जिसने देखा था खामोशी सेकदम रखते मुझेजवानी की दहलीज पर,जिसने भाँपे थे सबसे पहलेमुझमें हो रहे परिवर्तन,ज...
palash "पलाश"...
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  July 29, 2017, 7:21 pm
वो गुलाबी कागज का टुकडाजो पड गया है पीलाजैसेपड गयी है फीकी मेरी गुलाबी चमकवक्त के साथरखा है आज भी सहेज कर कुरान की आयतों के साथजिसमें अल्फाज़ नहीलिख कर दिये थे तुमनेअहसासजिसमें लिखते रहेहम तुमहर लम्हाऔर बनती गयी ज़िन्दगी एक खूबसूरत ग़ज़लसचकितना आसान हो जाता हैकुछ ...
palash "पलाश"...
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  July 28, 2017, 7:19 pm
क्लास में सभी बच्चे और टीचर भी यह जानते थे कि अंजली की आर्ट बहुत खराब है। एक दिन क्लास में टीचर ने सभी बच्चों से अपने मन की कोई भी ड्रांइग बनाने को कहा। अंजली भी बहुत मन से अपनी कॉपी पर ड्रांइग बनाने लगी। अंजली बहुत मन से ड्रांइग बना रही थी, उत्सुकतावश टीचर उसकी सीट तक ये द...
palash "पलाश"...
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  July 27, 2017, 9:46 pm
क्लास में सभी बच्चे और टीचर भी यह जानते थे कि अंजली की आर्ट बहुत खराब है। एक दिन क्लास में टीचर ने सभी बच्चों से अपने मन की कोई भी ड्रांइग बनाने को कहा। अंजली भी बहुत मन से अपनी कॉपी पर ड्रांइग बनाने लगी। अंजली बहुत मन से ड्रांइग बना रही थी, उत्सुकतावश टीचर उसकी सीट तक ये द...
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  July 27, 2017, 9:46 pm
दिनो के अर्थ भी उम्र के हिसाब से बदलते रहते हैं। याद है मुझे कभी बचपन में भी इतवार का इन्तजार करता था, अपनी युवा अवस्था में भी किया और आज जब प्रौढावस्था की तरफ बढ रहा हूँ तब भी इतवार का इन्तजार करता हूँ मगर अवस्था के साथ साथ इतवार के होने के अर्थ भी बदलते रहे। बचपन में इतवा...
palash "पलाश"...
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  July 25, 2017, 9:46 pm
स्त्री को भी शायद ना पता होअपने उभार और ढलान का मापमगर गिद्ध पुरुष की दॄष्टिहमेशा नापती रहती हैअंग प्रत्यगं के बीच की दूरीउसका क्षेत्रफलऔर कभी कभी आयतनकभी चौराहों परकभी कार्यस्थल परयहाँ तक की मन्दिर भी आ जाते है चपेट मेंढके मुंदे तन में भी ढूंढता रहता है कोई खिड...
palash "पलाश"...
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  July 23, 2017, 10:58 pm
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