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प्रिय मित्रो, प्रणामआज बहुत दिनों के बाद कोई कविता बनी है कविता क्या दिल का दर्द बाहर आया है फीकी हो गयी मिठास शीर की चटपटी न लगी आज  फुलकियां हर निवाले के संग आँखों में आती, जलती दुकानो की झलकियाँ शर्मसार है आज  इंसानियत यहाँ क्या झांकते हो खोलके खिड़क...
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  July 29, 2014, 5:31 pm
पैसा तो  हाथ  का मैल  है  (पुरानी कहावत ) बड़े वी आई पी मैल  हो ?दिखाई  ही  नहीं देते,किस  हाथ  पर  कितने चढ़े हो पता भी नहीं लग पाता जो दिन रात पसीना बहाता है दो रोटी के चक्कर में नहा भी नहीं पाता है हाथ धोना तो दूर मुंह भी बस इक बार धुल पाता है उसके साथ क्या  पंगा है तुम्हा...
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  May 4, 2012, 9:20 pm
एक ही प्रभू की पूजा हम अगर करते नहीं एक ही दरगाह पर सर आप भी रखते नहीं           अपना सजदागाह  अगर देवी का स्थान  है           आपके सजदो का मरकज भी तो कब्रिस्तान है हम अपने देवताओ की गिनती अगर रखते नहीं आप भी मुश्किल कुशाओ को तो गिन सकते नहीं           ज...
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  March 25, 2012, 12:47 pm
स्मृति के पन्नो परचित्र एक अंकित  है,कई रंगो से सजाप्रेम तुम्हारा संचित है,तरंगें उठती ज्यो गर्भ सागर से,तोड देती तटो का सीना,मन मे उठती भावनायें मेरे, भेद कर धर्य का सीना,तुम मिले मुझको ज्यों प्यासी धरा को जल की धार,निर्धन मन कुबेर हो गयादिया मोती सा प्रेम अपार,सुख के ...
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  January 17, 2012, 9:49 pm
कितने ही रास्तो से,आती आज भी उड कर धूल,लग जाती मेरे सीने से,स्मॄत हो आते वो क्षण,जब चले थे उन पर थाम कर हाथ एक दूजे का,पूछ्ता है वो पेडपत्तियाँ हिलाकर,छाँव मे जिसकी कटती थीसारी दोपहरी," वो जो,पोछँती थी चुनरी से अपनी,तेरे माथे पे आयी बूंदों को,कहाँ है"ये फूल बसन्ती सरसो ...
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  November 17, 2011, 6:12 pm
बहुत दिनों से ब्लाग से दूर हूँ , कारण मैं क्या बताऊ शायद ये कविता कुछ बता दे दो बैलो की गाड़ी दोनों ही अनाड़ीएक खीचे पूरब की ओर दूजा पच्छिम को लगाये जोर समझ दोनों की अलग फिर भी बंधी दोनों की डोर एक बिना हरे के भूखा एक को सब्र देता है भूसाएक नांद  से दोनों बं...
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  November 7, 2011, 9:11 pm
आतंकी  उवाच  कायर हो तुम, और सरकार  तुम्हारी निठल्ली है इसलिए बारूदो के ढेर पर बैठी दिल्ली है                              कभी कोर्ट में हम कभी संसद में बम बिछाते है                              और तुम्हारे जांबाजो के हाथो हम पकडे भी जाते है  &nb...
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  September 28, 2011, 8:13 pm
बोल सखी मैं किस विधि जीऊँ जीवन हाला किस विधिपीऊँ प्रिय मेरे ने कदर न जानी पागल भई मैं हुई दीवानी किस विध मन के ज़ख्म को सीऊं बोल सखी मैं किस विधिजीऊँ                       मनमीत मेरे ओ प्राण प्यारे                      सपने तोड़ गए तुम सारे ...
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  September 3, 2011, 9:58 am
जिंदगी खिलती है गुलज़ार बनके तुम देखो तो इसको  प्यार करकेतुम्हारे भी नाज़ उठाएगा कोई तुम देखो तो कभी इकरार करके मुंह मोडना जिंदगी से कोई बात नही खुश रहो हर गम से दो चार करकेअपनी जिंदगी को तुमने जाना ही कब है तुमने देखा ही कहाँ कभी प्यार करके कोई शख्स है तुम्ह...
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  July 27, 2011, 1:29 pm
उन की याद आने से होती है आँख नम, तो क्या करें चलते हुए उनकी गली में रुक जाते है कदम, तो क्या करें उन को भूल जाने की सलाहे तो बहुत मिली पर ये दिल न माना बेशरम, तो क्या करे यूं तो चाहने वाले हमारे भी बहुत हैपर उनके ही दीवाने हुए हम, तो क्या करेएक नज़र वो हमें देखते भी नही उनके दी...
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  July 13, 2011, 8:02 pm
उन जख्मो को कुरेदने में मज़ा आता है जख्म जो भी तेरी याद दिला जाता है छेड़ता हूँ जख्मो को, तुम्हे भूल न जाऊ कहीं वक्त का मरहम हर जख्म सुखा जाता है बंध भी जाते किसी रिश्ते में तो क्या होता प्यार पे आ के ही हर रिश्ता टिक जाता है तुमसे अलग हो के मैं जी तो रहा हूँ नाम कृष्ण का अब भी ...
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  June 28, 2011, 9:15 am
लगभग १५ दिन से बिजली व् नेट की प्रोब्लम के कारण आप सब से न जुड पाने के लिए क्षमा के साथ एक पुरानी रचना प्रस्तुत है कब तक प्यासी धरती से, अब और हम तरसगे,जिन पर टिकी हुई हें आँखे  वो सावन कब बरसेगे,कब मिलोगे तुम हमे कब पास मेरे आओगे,कब बैठोगे संग मेरे कब मेरी प्यास बुझा...
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  June 10, 2011, 6:04 pm
अन्न माँगा, दिया हमने आबरू ना  दे पाएंगे                       रक्षक ही  जब भक्षक बने                       अन्नदाता अब कहाँ जायेंगे महंगा बीज , महंगा खाद फिर भी सस्ता है अनाज ग़ुरबत में जी लेंगे लेकिन देश को न भूखा सुलायेंगे           ...
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  May 24, 2011, 10:15 pm
कितना आसान है रिश्ते बनाना और तोड़ देना मन में बसना - बसाना  और  फिर छोड़ देना  तोड़ देना मन को या खिलोने को  सरल हैपरन्तु जोड़ना  ?क्या रिश्ते  सचमुच टूटते है ?क्या सचमुच दूर हो सकते है ?किसी अपने   से , क्या रिश्ते बनने-टूटने  के  बीच जो अंतराल है , ...
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  May 14, 2011, 1:06 pm
संग तुम्हारे है कितनी बहारे दिए तुमने  ही सपने प्यारे  मुस्कान बन छाये लबो पर आँखों में भर दिए हंसी नज़ारे साथ यूं ही तुम रहो हमेशा दूर हो के एक पल न गुजारे न किसी और की मैं आस करून कोई बसे मन में तुम्हारे तुम्हारे लिए ही धडके ये दिल हर धडकन तुमको ही पुकार...
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  May 2, 2011, 12:00 am
हम तेरी यादों में इस कदर खो जाते है याद करते है तुमको और रो जाते है लोग कहते है प्यार में नींद नहीं आती सपने में तुझे मिलने को हम शाम से सो जाते है सुबह उठ के मुंह धोने की जरूरत किसे ?मेरे आंसू ही मेरा मुंह धो जाते है किस किस लम्हे की जड़ निकालू दिल सेवो जब भी  दीखते है न...
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  April 18, 2011, 4:13 pm
भगीरथ ने की थी तपस्या संभव करने असंभव  को उनके  पुरखो कीअतृप्त आत्माओ की  प्यास बुझाने उतर आना पड़ा था गंगा को झुक जाना पड़ा था भगवान्  को एक और भगीरथ लगा है  तपस्या में लाना चाहता है लोकपाल की गंगाकरोडो अतृप्त भारतीयों के लिए जिनकी आत्मा तड़प ...
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  April 8, 2011, 4:27 pm
वो जब से पास आने लगे है मेरे जख्म मुस्कुराने लगे है जागने लगी सोई हसरते मेरी वो सपने नए दिखने लगे है भूल बैठे थे जिस मधुर गीत को गीत वो फिर हम गुनगुनाने लगे है  कभी अंधेरो कभी उजालों की तरह वो मुझसे नज़रें मिलाने लगे है होता नहीं यकीन अंपनी आँखों पे अचानक सामने वो मुस्क...
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  March 31, 2011, 6:37 pm
बातो ही बातो में जब बात आयी तेरी यादों से तेरी महकी यार तन्हाई मेरी                  रंज नहीं दिल में तू पास नहीं मेरे                  लगने लगी है प्यारी अब जुदाई तेरी बड़े प्यारे लगते हो  मिलते हो ख्वाबो में नींद से हो गयी ज...
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  March 22, 2011, 4:04 pm
प्रेम की परिभाषान समझ सका आजतक ये तृप्ती है या पिपासाआशा है या निराशान समझ सका आजतक प्रेम वो है जो दिखता है प्रिया की आँखो मेकोई प्यारा सा उपहार पाकर या प्रेम वो है जो सुकून मिलता है आफिस से आकर तुम्हारी मुस्कान पाकर प्रेम वो है जो चाँद पर जाने की बात करता है केशो को घटा, ...
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  March 6, 2011, 9:58 pm
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