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(मैं जो कुछ लिख रहा हूँ, उसका कोई मतलब नहीं है | इन फैक्ट वह इतना बेमानी है कि वो क्यों लिखा है इसका कोई मानी नहीं | इस पर झगडा करने वाला भी उतना ही बेवकूफ है, जितना इस पर हँसने वाला या इसे लिखने वाला |)देव दानव संवाद बहुत जल्दी संवाद टेलीफिल्म्स के संवाद लेखकों की मंत्रणा से ...
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Tag :Play
  February 3, 2013, 12:00 pm
कुछ गलतियाँ हैं , जिन्हें नज़रंदाज़ कर दिया जाए, उम्मीद है । ...
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Tag :Audio
  November 3, 2012, 6:31 pm
चुप करो सब, बादशाह सलामत सो रहे हैं...[असीम त्रिवेदी का नजरिया , आभार : कबाडखाना ]मोहनदास की वसीयत के मुताबिक ये बीस बीघा जमीन जवाहर लाल को मिलनी थी | अली साहब उखड़ गए - "काहे का बापू, हमें तो कुछ मिला ही नहीं |" 'हाथ छुडावत जात हो' वल्लभ भाई पीछे पीछे भागे | वल्लभ भाई के सेक्रेटरी इ...
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Tag :Play
  September 30, 2012, 12:08 pm
हर रोज सुबह छः बजे ही उसकी आँख खुल जाती । वह आँखों को मसलता, कांच के परे दुनिया देखकर वक़्त का अंदाजा लगता और जाने अनजाने यह उम्मीद भी करता कि वक़्त कुछ तो बदला हो, सात बजे हों, पांच बजे हों .. पर छः नहीं, लेकिन सिरहाने रखी घडी के कांटे उसकी दोनों आँखों के बीच चमकते रहते । वह ड...
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Tag :ड्राफ़्ट
  September 24, 2012, 3:44 am
 (कुछ भी लिखकर उसे डायरी मान लेने में हर्ज ही क्या है , आपका मनोरंजन होने की गारंटी नहीं है , क्योंकि आपसे पैसा नहीं ले रहा ।)आधी रात तक कंप्यूटर के सामने बैठकर कुछ पढ़ते रहना, पसंदीदा फिल्मों के पसंदीदा दृश्यों को देखकर किसी पात्र जैसा ही हो जाना, अँधेरे में उठकर पानी लेन...
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Tag :सपना
  September 23, 2012, 10:45 pm
इन बीस सालों में वह अपनी बेटी से नहीं मिला था | वह नहीं चाहता था कि उसकी बेटी को पता चले कि उसका पिता कौन है | अपनी सारी हैवानियत को आज ताक पर रखकर वह अपनी बेटी को एक नजर देखना चाहता था | वह उसको क्या बताएगा कि वह कौन है, एकबारगी आंसुओं ने उसकी आँखों में घर बना लिया था | लेकिन वह ...
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Tag :kanv
  December 31, 2011, 5:23 am
जिंदगी एक अवसाद है | एक मन पर गहरा रखा हुआ दुःख, जो सिर्फ घाव करता जाता है | और जीना , जीना एक नश्तर है , डॉक्टर |ऐसा नहीं है, मेरी तरफ देखो , देखो मेरी तरफ | आँखें बंद मत करना | जीना , जीना है , जैसे मरना मरना | जब तक ये हो रहा है, इसे होने दो | इसे रोको मत |तो आप ऐसा क्यों नहीं समझ लेते कि ...
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Tag :कहानी
  December 25, 2011, 6:51 am
(अकिरा कुरोसावा की फिल्म ड्रीम्स के दृश्य में वैन गोग की पेंटिंग, साभार : गूगल)  लिखना मन की परतों को खोलने जैसा है, एक के बाद एक सतह | लिखकर आप लगातार भीतरी सतह पर प्रवेश करते जाते हैं | यह सब मैं पढ़ चुका हूँ, कई बार , कई जगह | शब्द थोड़े बहुत इधर उधर होते होंगे, मजमून नहीं बदलत...
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Tag :कहानी
  March 25, 2011, 8:08 pm
[पिछला भाग]"मणिभ! यहाँ से हमने स्पाइडर क्लब की शुरुआत की थी | याद है ? " अलग ने मुझे फ़्रोग-हिल के दूसरी तरफ की खाई दिखाई | ७०-८० फीट की खड़ी ढलान | असल में हम ऐसे ही नीलकंठ छात्रावास के पास जंगल में घूम रहे थे, जो अलग और मेरा रविवार का कार्यक्रम रहता है | उसी वक़्त हम इस चोटी क...
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Tag :कहानी
  March 25, 2011, 2:28 pm
[पिछला भाग ]काफी खूबसूरत मौसम है | बारिश के बाद सब कुछ जैसे धुल सा जाता है | प्रकृति के कैनवास पर बने चित्र और भी ज्यादा अच्छे लगने लगते हैं | जमीन गीली और चिकने भरी हो गयी है , इसलिए हम दोनों संभल संभलकर कदम रख रहे हैं |"ये आकाश और रजत हमेशा लड़कियों की बात क्यों करते रहते हैं ?" ...
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Tag :कहानी
  March 25, 2011, 2:27 pm
[पिछला भाग ]"क्या सोच रहा है तू ?" अलग सिगरेट का धुंआ मेरे मुंह पर छोड़ता है | मैं जैसे सोते से जगा , उसके बारे में सोचते सोचते मैं काफी दूर किसी और पल में आ गया हूँ |"अभी तुझे देख रहा था काफी देर से , कुछ सोच रहा था तू ?" मैं हार गया था सो आखिर पूछना पड़ा | अलग अभी भी मुस्कुरा रहा था | म...
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Tag :कहानी
  March 25, 2011, 2:25 pm
वो खिड़की के पास खड़ा है | हमेशा की तरह सिगरेट उसकी उँगलियों के बीच तिल तिल जल रही है | गैलरी के दूसरे सिरे पर खड़ा मैं उसे गौर से देख रहा हूँ, और अलग खिड़की से बाहर | अलग, हाँ ये उसका वास्तविक नाम नहीं लेकिन यही नाम है जिससे उसे हर कोई जानता है नीलकंठ में | उसने थोडा और आगे बढ़क...
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Tag :कहानी
  March 25, 2011, 2:25 pm
(कहानी कब तक पूरी होगी कह नहीं सकता , लेकिन अधूरे ड्राफ्ट पढ़कर भी हौंसला बढ़ाएंगे तो अच्छा लगेगा | जब तक पूरी न हो, शीर्षक तब तक यही समझा जाए | उर्दू का ज्ञान बहुत कच्चा है बेशक बेहद पसंदीदा भाषा है, सो गलतियों को नज़रन्दाज किया जाए | कहानी सम्राट, प्रेमचंद को मेरा प्रणाम | )य...
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Tag :कहानी
  January 23, 2011, 8:55 am
अबकी बम्बई से कमल की चिट्ठीपत्री कुछ न आयी, तो रामचरण को थोड़ी चिंता हुई | कमल हर तीन मास में एक चिट्ठी तो लिखता, कम से कम | कहीं कुछ हो तो...न न, राम राम ये पापी प्राण भी हमेशा कुछ अपशकुनी ही सोचता है | वैसे भी पिछली चिट्ठी में उसने लिखा था कि यू पी, बिहार के पुरब्यों से है बम्बई ...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 10:26 am
(कहानी किश्तों में इससे पहले कबाड़खानेमें पोस्ट की जा चुकी है)शाम का धुंधलका छाने लगा था | पगडण्डी की मोड़ों पर अँधेरा पाँव पसारने लगा था | बेतरतीब उग आई झाड़ियाँ अँधेरे को पनाह देती सी महसूस होती हैं | पहाड़ों में हरे रंग की कालिमा के बीच बीच में भूरा रंग उजला लग रहा था | प...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 12:07 am
"अभी न, मैं तुम्हारे लिए कहानी का टाइटल सोच रही थी " "अच्छा ? क्या सोचा ?""अभी मैं आ रही थी न, स्टैंड पे... तो वही कुत्ता था वहाँ पे परसों वाला, रो रहा था... उसे देख के मुझे टाइटल सूझी" "कुत्ते को देख के टाइटल ?" मैं हँसने लगा, वो भी हँसने लगी |"अरे सुनो न स्टुपिड! तुम मुझे भुला दोगे नहीं त...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 12:07 am
जमनोत्री आज सुबह से कुछ अनमनी सी थी | सर्दियों की धूप वैसे भी मन को अन्यत्र कहीं ले जाती है | इतवार का दिन सारे लोग घर पर ही थे, छत पर धूप सेंकने के लिए | जेठ जेठानी, उनके बेटे-बहुएँ, पोता  प्रतीक भी अपनी छत पर घाम ताप रहे थे | ऐसा नहीं कि अलग छत पे हों, दोनों छत मिली हुई थी | लेकिन म...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 12:07 am
(अगर इस कहानी के पात्र काल्पनिक है, तो ये वास्तविकता नहीं, बहुत बड़ा षड्यंत्र है)कैकेयी कोपभवन में थी, दशरथ आये, लाइट ऑन की, चेयर खींच के बैठ गए | लॉर्ड माउंटबेटन अभी भी नाराज बैठी थी, दशरथ की आँखों से हिन्दुस्तान की बेबसी झलक रही थी | "आपने दो वचन देने का वादा किया था, याद ह...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 12:07 am
स्थान : पौड़ी दिनांक : १-१-२००७ समय : १०:४५ पूर्वान्ह नए साल की नयी सुबह | पौड़ी की सर्दियाँ बहुत खूबसूरत होती हैं, और उससे भी ज्यादा खूबसूरत उस पहाड़ी कसबे की ओंस से भीगी सड़कें | सुबह उठते ही एकदम सामने चौखम्भा पर्वत दिखायी देता है | कौन रहता होगा वहां ? इंसान तो क्या ही पहु...
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Tag :कहानी
  January 16, 2011, 12:07 am
हम ख्वाब बेचते हैं | पता नहीं कितने सालों से, शायद जब से पैदा हुआ यही काम किया, ख्वाब बेचा |  दो आने का ख्वाब खरीदा, उसे किसी नुक्कड़ पे खालिश ख्वाब कह के किसी को बेच आये | जब कभी वो शख्स दुबारा मिला तो शिकायत करता - "जनाब पिछली बार का ख्वाब आपका अच्छा नहीं रहा |" अब अप...
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  January 16, 2011, 12:07 am
तुम वो बेनामी हो, जो मेरी कहानियाँ समझ में नहीं आने पे भी कहती हो, 'wow! wonderful story' | तुम सही में नहीं जानती हो कि तुमने मेरी कहानियों का अंत किस हद तक 'wonderful' कर दिया है | मेरे जन्मदिन पर तुमने पहली बार लिखने की कोशिश की, मुझे बर्थडे सरप्राइज़ देने के लिए | वैसे तुमने एक दिन पहले ...
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  January 15, 2011, 12:58 pm
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