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बिखरे मोती

त्रिनेत्रधारी त्रिनेत्र  बंद करो राहत मिले नाथों के नाथ क्यों प्रलय मचाई मूक बन के । त्राहि त्राहि है हैरान परेशान हैं तीर्थ यात्रीआपदा में भी सक्रिय हैं लुटेरे जन हैरान । खामोश नेता रोटियाँ सेंकते हैं ढेर लाशों के । वीर जवान लगा दें सारी जान उन्हें नमन हवाई दौ...
Tag :हाइकु / प्रलय / केदारनाथ / सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 23, 2013, 12:50 pm
विशाल वृक्ष जैसे देता है छाया पिता ही तो हैं । पिता की गोदी आश्रय संबल का डर भला क्यों ? पिता का डर रखे    अनुशासित चढ़े सोपान । सुदृढ़ बाहें आशवस्त है  मन पिता  तो हैं ही । पिता का साया हर बच्चे को मिले यही है दुआ । पिता का हाथ विशाल बरगद सुकून मिले । ...
Tag :हाइकु / पितृदिवस पर / सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 16, 2013, 6:00 am
कड़वी यादें   चीर देती हैं  सीना      मैं हुयी मौन  ।************पीड़ित यादें   झटक ही तो दीं थीं    पीले पत्ते सी । ******************विष से बुझा   याद है  व्यंग्य  बाण     मरा मेरा   'मैं' ।*****************तल्ख स्मृतियाँ    जेहन में घूमतीं       चैन न आए । *****************खुद से जंग   जंगरहित यादें      निज़ात नही...
Tag :यादें -2/ हाइकु
  May 14, 2013, 1:12 pm
सफर के दौरान खिड़की से सिर टिकाये ठिठकी सी निगाहें लगता है कि देख रही हैं फुटपाथ और झाड़ियाँ पर निगाहें होती हैं स्थिर चलता रहता है  संवाद मन ही मन उतर आता है पानी खारा खुद से बतियाते हुये खिड़की से झाँकती आंखे लगता है कि ठिठक गयी हैं । ...
Tag :छोटी नज़्म ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  February 21, 2013, 8:00 am
मेरे मन के समंदर मेंतुमने उछाल दिये बस यूं ही कुछ शब्दों के पत्थर और देखते रहे उनसे बने घेरे जो भावनाओं की लहरों पर बन औ  बिगड़ रहे थे शायद  तुम्हारा तो मात्र यह शगल रहा था पर वो पत्थर समंदर में कहीं गहरा गड़ा  था । ...
Tag :छोटी नज़्म
  February 1, 2013, 12:08 pm
प्रिय शिखा के जन्मदिन पर .... कुछ हाइकु रचनाएँ जन्मदिन का नन्हा सा  है  तोहफा मेरी ओर से सालगिरह खुशियाँ ही खुशियाँ सहेजो तुम स्नेह से भरी रहे झोली तुम्हारी मिले आशीष । कर्मयोगी सा बीते जीवन सारा यही कामना । हंसी चाँदनी चंचल चितवन देती सुकून । तेरा नेह ही देता मुझे ...
Tag :जन्मदिन / शिखा / 20-12-2012 /हाइकु
  December 20, 2012, 12:09 am
यादों की झड़ी खुशी - गम  का साया आँखों से झरी ।       सुकून मिला तेरी यादों का टेसू गमक गया । यादों के घेरे तुम जैसे सम्मुख बंद थीं आँखें । अमलतास  सा खिला तेरा चेहरा यादों में बसा ।कब भूली मैं पल -पल बिताया साथ सँजोया । ...
Tag :यादें / हाइकु / सर्वाधिकार सुरक्षित
  December 12, 2012, 2:50 pm
मन का दीप रोशन कर देखो खुशी ही खुशी माटी का दिया एक रात की उम्र ज्योति से भरा ।आम आदमी लगा रहा हिसाब कैसे हो पर्व ? लगाएँ बाज़ी परंपरा के नाम पत्तों का खेल । बम - पटाखे क्षण भर की खुशी धुआँ ही धुआँ ।दीयों की बाती उजियारा  फैलाती स्वयं  जलती । दीपावली की  सभी को हार्दिक ...
Tag :हाइकु / दीपावली
  November 12, 2012, 8:00 am
चौथ का चाँद आँखों में  उतरता प्रेम दर्शाये । देखा जो चाँद धरती के चाँद ने मन हर्षाया । उठी निगाहें चाँद की प्रतीक्षा में करें अर्चना । नेह बंधन स्वीकारें  मन से चाँद है साक्षी । बिना प्रेम के परंपरा के लिए न करो व्रत । मन की आस्था चाँद  में निहारती उम्र पति की ....
Tag :हाइकु / करवाचौथ / सर्वाधिकार सुरक्षित
  November 2, 2012, 8:30 am
कन्या पूजन?  दोहरा मापदंड हत्या भ्रूण की ।नवरात्रि  में किया माँ का आह्वान माँ को पूछा क्या ?शैल पुत्री को शिला ही बना डाला पूजें पत्थर । माँ की अर्चना लाउडस्पीकर पे शोर ही शोर । कैसी है भक्ति नमन पाहन को माँ तरसती । ...
Tag :हाइकु / भक्ति माँ की / सर्वाधिकार सुरक्षित
  October 16, 2012, 11:11 am
झरते पत्ते देते यह संदेश जाना तो है ही । ये मेरा मन झर झर जाता है पीले पत्तों सा । ऋतु दबंग हर लेती है पत्ते सूनी  शाखाएँ । पत्रविहीन कर रहा प्रतीक्षा नए पत्तों की । उदास मन टूटता है नि:शब्द पतझर सा । बेखौफ पत्ते छोड़ गए शाखाएँ पल्लव  आयें सूखे जो पत्ते टपक ही तो गए श...
Tag :पतझर / हाइकु
  September 27, 2012, 4:00 pm
नन्ही बिटिया महकता आँगन खुशी के पल । पलाश खिले घर गुलज़ार है बेटी जो आई ।प्यारी सी धुन बिटिया की मुस्कान गूँजे संगीत .बेटी का आना सावन की फुहार ज़िंदगी मिली .बेटी  मुस्कायी खिल गयी बगियाफूल ही फूल .मेरी है छाया मन हुलसित है प्रभु की माया .दिया जो तूने आँचल में  बेटी क...
Tag :हाइकु । बेटियाँ
  August 24, 2012, 10:37 am
अब नम नहीं होतीं मेरी आँखें ज़िंदगी की तपिश ने कर दिया है खुश्क उनको अब तो जब भी झपकती हूँ पलक तो होता है बस एक एहसास चुभन का । ( आँखों में कुछ दिनों से जलन का एहसास हो रहा था  , आज डॉक्टर  को दिखाईं तो उन्होने बताया कि नमी सूख गयी है इसीलिए इरिटेशन होता है )...
Tag :छोटी नज़्म ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  July 17, 2012, 3:31 pm
कुछ होते हैंख़्वाबों के आँचल ऐसे भी जिन्हें ना गुल और ना ही कांटे की दरकार होती है..बस बढते हैं जंगली बेल की तरह इनसे भी जिंदगी खुशगवार होती है  . ...
Tag :छोटी कविता / सर्वाधिकार सुरक्षित
  July 5, 2012, 10:27 am
तुम्हारे बोलझुलसा ही तो गएमन आँगन रोने वालों कोमिल जाते हैं कंधेतभी रोते हैंमन के छालेरिसते रहे यूं हीनासूर हुये आँखों की सुर्खीझरते रहे आँसूखुश्क हुयी मैं धुआँ  है उठासुलगता है मनराख़ हुयी मैं इंतज़ार क्यों ?तोड़ा है विश्वासहतप्रभ मैं तुम्हारी राहेंअलग थलग थीं...
Tag :हाइकु / दोस्ती / संवेदनाएँ
  June 21, 2012, 3:05 pm
चाँद ने आज कोई साजिश की है चाँदनी भी आज कहीं दिखती नहीं है मन की झील पर जो अक्स बना थाउसकी रंगत भी अब खिलती नहीं है ,कर रही हूँ इंतज़ार नन्ही सी किरण का ये भोर भला अब क्यों होती नहीं है आसमां की रंगत कुछ धूमिल सी है बादलों की स्याही कुछ कहती नहीं है कहाँ से लाऊं  मैं वो ...
Tag :छोटी नज़्म ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
  June 14, 2012, 8:00 am
लहरें तो आती जाती हैं दुख सुख का भी हाल यही फिर हम इतना क्यों सोचें  बस मन समंदर करना है , मोती सीपों में मिल जाते पर गोता खुद लगाना है श्रम से फिर क्यों भागें हम बस तन अर्पण  करना है  पैसा तो आना जाना है  इसके पीछे हैं पागल लोग क्यों हम पागल हो जाएँ बस मन मंदिर करना है । ...
Tag :छोटी कविता / सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 24, 2012, 12:04 pm
माँ का आँचल आज भी लहराता सुखद यादें ।******************मीठी निबौरी माँ  की  फटकार गुणी औषध ।**************माँ का लगाया काजल का दिठौनायाद है मुझे *****************राह तकतेकरती  इंतज़ार माँ की नज़र ।***************माँ का  आशीष महसूस करूँ मैं यही चाहना ।*******************...
Tag :माँ / हाइकु
  May 13, 2012, 8:20 pm
घना सन्नाटा मौन की चादर  में दोनों लिपटे न तुम कुछ  बोले न ही मैं कुछ  बोली लब खुलते गिरह ढीली होती मन मिलते कुछ मोती झरते कुछ दंश हरते ।गहन घन छंट जाते पल में उजली रेखा भर देती  मन में अनुपम उल्लास । तांका  में  पाँच पंक्तियाँ होती हैं ..... जिनमें वर्णो  की संख्या ..... 5-7-5-7-...
Tag :तांका / जापानी विधा ...सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 7, 2012, 3:02 pm
एकउदास शाम कोमन की झील मेंडूबते - उतरतेनज़रें गीलीहो गयीं थींऔरझील परजमी बर्फ पिघलने लगी थी ........
Tag :छोटी कविता / सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 26, 2012, 7:00 am
मानव मन के उच्छ्वास कोशब्दों में पिरो विचारों को साध कर अनुभव के हलाहल को पी अश्रु की स्याही से उकेर देता है अपनी भावनाओं को और हो जाता है सृजन कविता का फिर भावनाएं निजत्व से निकल विश्वत्व की ओर कर जाती हैं प्रस्थान ....
Tag :छोटी कविता / सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 13, 2012, 6:30 am
 रिश्ते हैं यहाँ अपेक्षाओं से भरे दम तोड़ते************* भावुक मन संवेदना से भरा बरस गया ।**************** रेत ही रेत पलकों  में समाई खुश्क हैं आँखें ................ मौन उवाच है ज्यादा कष्टकारी कुछ कहो ना ! ...
Tag :हाइकु / रिश्ते / मन
  March 23, 2012, 1:07 pm
 छत्तीस साल किया समायोजन बीत ही गए |सोचती हूँ मैं छत्तीस का आंकड़ा फिराए पीठ |बीता समय तिरसठ की चाह मुक्कमल हो |आगे का वक्त समन्वय करते गुजारें हम |...
Tag :हाईकू /जिंदगी
  February 5, 2012, 6:00 am
पीत वसन उल्लसित  है मन बसंत आया *************************श्रीहीन मुख गरीब का बसंत रोटी की चाह .*******************फूली सरसों खेतों में हरियाली खिला  बसंत **********************भूखे किसान करते आत्महत्या बसंत कहाँ ? **********************आम आदमी रोज़ी-रोटी की फ़िक्र भूला  बसंत .****************...
Tag :हाईकू / बसंत
  January 28, 2012, 1:28 pm
घना कोहरा धूप चांदनी लगे ढूंढें तपिश सर्द रात में फुटपाथ आबाद जिंदा हैं लाशें ....
Tag :हाईकू /सर्दी
  January 20, 2012, 6:53 pm
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