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शाश्वत शिल्प

14 जुलाई, 1930 को, अल्बर्ट आइंस्टीन ने भारतीय दार्शनिक, संगीतकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का बर्लिन के अपने घर में स्वागत किया। दोनों की बातचीत इतिहास में सबसे उत्तेजक, बौद्धिक और दिलचस्प विषय पर हुई, और वह विषय है - विज्ञान और धर्म के बीच पुराना संघर्ष -आइ...
शाश्वत शिल्प...
Tag :ईश्वर
  August 31, 2018, 3:47 pm
14 जुलाई, 1930 को, अल्बर्ट आइंस्टीन ने भारतीय दार्शनिक, संगीतकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर का बर्लिन के अपने घर में स्वागत किया। दोनों की बातचीत इतिहास में सबसे उत्तेजक, बौद्धिक और दिलचस्प विषय पर हुई, और वह विषय है - विज्ञान और धर्म के बीच पुराना संघर्ष -आइ...
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Tag :ईश्वर
  August 31, 2018, 3:47 pm
नीरज - श्रद्धांजलि विनम्र श्रद्धांजलि4 जनवरी, 1925 - 19 जुलाई, 2018हिंदी के श्रेष्ठ कवियों के स्वर्णयुग का अंतिम सूरज अस्त हो गया ।सर्वप्रिय गीतकार नीरज ने ग़ज़लें भी कहीं । उनके समय के हिंदी के बहुत से प्रतिष्ठित कवियों ने ग़ज़लें लिखीं । नीरज ने अपनी इस तरह की रचनाओं को ग़ज़ल न कह...
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Tag :नीरज
  July 21, 2018, 12:52 pm
‘शिवसिंह सरोज’, एक ग्रंथका नाम है, जिसकी रचना आज से 143 वर्ष पूर्व जिला उन्नाव, ग्राम कांथा निवासी शिवसिंह सेंगर नाम के एक साहित्यानुरागी ने की थी । इस ग्रंथ में पंद्रहवीं शताब्दी से लेकर सन् 1875 ई. तक के 1003 हिंदी कवियों का संक्षिप्त आलोचनात्मक विवरण और उनकी कुछ रचनाएं सम्म...
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Tag :शिवसिंह सेंगर
  June 27, 2018, 12:53 pm
परंपरागत जनजातीय गीतों की कुछ अपनी विशिष्टताएं होती हैं । पहली, इनमें 3, 4 या कहीं-कहीं 5 स्वरों का ही उपयोग होता है । आधुनिक संगीत में कुल 12 स्वर होते हैं । कर्नाटक संगीत में 22 स्वर या श्रुतियां होती हैं । लेकिन जनजातीय गीत-संगीत में और कुछ मैदानी लोक गीतों में भी केवल 3 से 5 ...
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Tag :janjaateey Sanskriti
  May 31, 2018, 2:59 pm
1.तुम्हारा झूठउसके लिएसच हैमेरा सचकिसी और के लिएझूठ हैऐसा तो होना ही थाक्योंकिसच और झूठ कोतौलने वाला तराजूअलग-अलग हैहम सबका  !2.जो नासमझ हैउसे समझाने से क्या फ़ायदाऔर जो समझदार हैउसेसमझाने की क्या ज़रूरत क्या इसकाये अर्थ निकाला जाए किजो समझदारकिसी नासमझ कोसमझाने क...
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Tag :
  April 24, 2018, 11:27 am
मेरा काव्य संग्रह ‘‘श्वासों का अनुप्रास’’का विमोचन देश के सुपरिचित व्यंग्यकार, कवि और पत्रकार श्री गिरीश पंकज और प्रसिद्ध भाषाविद्, गीतकार और संगीतज्ञ डॉ. चित्तरंजन कर के करकमलों से दिनांक 11 मार्च, 2018 को बेमेतरा में संपन्न हुआ । इस काव्य संग्रह में ‘‘शाश्वत शिल्प’’ म...
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Tag :बेमेतरा
  March 13, 2018, 1:13 pm
 देहरी पर आहट हुई, फागुन पूछे कौनमैं बसंत तेरा सखा, तू क्यों अब तक मौन।निरखत बासंती छटा, फागुन हुआ निहालइतराता सा वह चला, लेकर रंग गुलाल।कलियों के संकोच से, फागुन हुआ अधीर वन-उपवन के भाल पर, मलता गया अबीर।फागुन आता देखकर, उपवन हुआ निहाल,अपने तन पर लेपता, केसर और गुलाल।तन ...
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Tag :फागुन
  February 28, 2018, 1:56 pm
दर रहे या ना रहे छाजन रहे,फूल हों ख़ुशबू रहे आँगन रहे ।फ़िक्र ग़म की क्यों, ख़ुशी से यूँ अगर,आँसुओं से भीगता दामन रहे ।झाँक लो भीतर कहीं ऐसा न हो,आप ही ख़ुद आप का दुश्मन रहे ।ज़िंदगी में लुत्फ़ आता है तभी,जब ज़रा-सी बेवजह उलझन रहे ।कल सुबह सूरज उगे तो ये दिखे,।बीज मिट्टी और कुछ सा...
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Tag :ख़ुशबू
  January 29, 2018, 7:15 pm
                     तिथि, माह और वर्ष की गणना के लिए ईस्वी सन् वाले कैलेण्डर का प्रयोग आज पूरे विश्व में हो रहा है। यह कैलेण्डर आज से 2700 वर्ष पूर्व प्रचलित रोमन कैलेण्डर का ही क्रमशः संशोधित रूप है। 46 ई. पूर्व में इसका नाम जूलियन कैलेण्डर हुआ और 1752 ई. से इसे ग्रेग...
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Tag :जूलियन कैलेण्डर
  December 31, 2017, 2:39 pm
                 जाने -पहचाने  बरसों के  फिर  भी   वे अनजान लगे,                 महफ़िल सजी हुई है लेकिन सहरा सा सुनसान लगे ।                इक दिन मैंने अपने ‘मैं’ को अलग कर दिया था ख़ुद से,             ...
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Tag :आँगन
  November 25, 2017, 11:47 am
प्यार का, अहसास का, ख़ामोशियों का ज़िक्र हो,महफ़िलों में अब ज़रा तन्हाइयों का ज़िक्र हो।मीर, ग़ालिब की ग़ज़ल या, जिगर के कुछ शे‘र हों,जो कबीरा ने कही, उन साखियों का ज़िक्र हो।रास्ते तो और भी हैं, वक़्त भी, उम्मीद भी,क्या ज़रूरत है भला, मायूसियों का ज़िक्र हो।फिर बहारें आ रही ह...
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Tag :गीतिका
  October 31, 2017, 8:21 pm
भीड़ में अस्तित्व अपना खोजते देखे गए,मौन थे जो आज तक वे चीखते देखे गए।आधुनिकता के नशे में रात दिन जो चूर थे,ऊब कर फिर ज़िंदगी से भागते देखे गए।हाथ में खंजर लिए कुछ लोग आए शहर में,सुना हे मेरा ठिकाना पूछते देखे गए।रूठने का सिलसिला कुछ इस तरह आगे बढ़ा, लोग जो आए मनाने रूठते द...
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Tag :आधुनिकता
  September 30, 2017, 7:59 pm
             हिंदुस्तानी संगीत में तालवाद्यों में तबला सबसे अधिक प्रतिष्ठित वाद्ययंत्र है । शास्त्रीय संगीत हो या सुगम, गायन-वादन हो या नृत्य, एकल वादन हो या संगत, लोकगीत हो या सिनेगीत, सभी में तबले की श्रेष्ठ भूमिका सदैव रही है । सदियों से इस तालवाद्य प...
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Tag :तबला
  August 31, 2017, 5:57 pm
             हिंदुस्तानी संगीत में तालवाद्यों में तबला सबसे अधिक प्रतिष्ठित वाद्ययंत्र है । शास्त्रीय संगीत हो या सुगम, गायन-वादन हो या नृत्य, एकल वादन हो या संगत, लोकगीत हो या सिनेगीत, सभी में तबले की श्रेष्ठ भूमिका सदैव रही है । सदियों से इस तालवाद्य प...
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Tag :तबलावादन
  August 31, 2017, 5:57 pm
जो  भी   होगा  अच्छा   होगा,फिर क्यूँ सोचें कल क्या होगा ।भले  राह  में  धूप  तपेगी,मंज़िल पर तो साया होगा ।दिन को ठोकर खाने वाले,तेरा  सूरज  काला  होगा ।पाँव  सफ़र  मंज़िल सब ही है,क़दम-दर-क़दम चलना होगा ।कभी बात ख़ुद से भी कर ले,तेरे   घर   आईना   होगा ...
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Tag :धूप
  July 31, 2017, 5:15 pm
समर भूमि संसार है, विजयी होते वीर,मारे जाते हैं सदा, निर्बल-कायर-भीर।मुँह पर ढकना दीजिए, वक्ता होए शांत,मन के मुँह को ढाँकना, कारज कठिन नितांत।दुख के भीतर ही छुपा, सुख का सुमधुर स्वाद,लगता है फल, फूल के, मुरझाने के बाद।भाँति-भाँति के सर्प हैं, मन जाता है काँप,सबसे जहरीला मग...
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Tag :दोहे
  June 30, 2017, 11:04 pm
मेरा कहना था कुछ और,उसने समझा था कुछ और ।धुँधला-सा है शाम का  सफ़र,सुबह उजाला था कुछ और ।गाँव जला तो बरगद रोया,उसका दुखड़ा था कुछ और ।अजीब नीयत धूप की हुई,साथ न साया, था कुछ और ।जीवन-पोथी में लिखने को,शेष रह गया था कुछ और । -महेन्द्र वर्मा...
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Tag :गाँव
  May 30, 2017, 7:25 pm
सूरज सोया रात भर, सुबह गया वह जाग,बस्ती-बस्ती घूमकर, घर-घर बाँटे आग।भरी दुपहरी सूर्य ने, खेला ऐसा दाँव,पानी प्यासा हो गया, बरगद माँगे छाँव। सूरज बोला  सुन जरा, धरती मेरी बात,मैं ना उगलूँ आग तो, ना होगी बरसात।सूरज है मुखिया भला, वही कमाता रोज,जल-थल-नभचर पालता, देता उनको ओज...
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Tag :धरती
  April 30, 2017, 6:36 pm
स्व. भवानी प्रसाद मिश्र................एक छोटा-सा किस्सा सुनाता हूँ,  आज के माता-पिता के लिए वो ज़रा चौंकाने वाला होगा । आज हम यह देखते हैं कि बच्चे कैसे अच्छे-से पढ़ें और पढ़-लिख कर कैसे अच्छी नौकरियों में चले जाएँ , कितना बड़ा उनको पैकेज मिले । पिताजी का दौर उस समय के माता-पिता जैसा र...
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Tag :बेमेतरा
  March 29, 2017, 12:19 am
तूफ़ाँ बनकर वक़्त उमड़ उठता है अक्सर,खोना ही है जो कुछ भी मिलता है अक्सर ।उसके माथे पर कुछ शिकनें-सी दिखती हैं,मेरी  साँसों  का  हिसाब रखता है अक्सर ।वक़्त ने गहरे हर्फ़ उकेरे जिस किताब पर,उस के सफ़्हे वो छू कर पढ़ता है अक्सर ।सहरा  हो  या  शहर  तपन  है  राहों में...
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Tag :दरिया
  February 28, 2017, 8:12 pm
सुरभित मंद समीर ले                                                  आया है मधुमास।पुष्प रँगीले हो गएकिसलय करें किलोल,माघ करे जादूगरीअपनी गठरी खोल।गंध पचीसों तिर रहेपवन हुए उनचास ।अमराई में कूकतीकोयल मी...
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Tag :बसंत
  January 31, 2017, 9:05 pm
कुछ दाने, कुछ मिट्टी किंचितसावन शेष रहे ।सूरज अवसादित हो बैठाऋतुओं में अनबन,नदिया-पर्वत-सागर रूठेपवनों में जकड़न,जो हो, बस आशा-ऊर्जा कादामन शेष रहे ।मौन हुए सब पंख-पखेरूझरनों का कलकल,नीरवता को भंग कर रहाकोई कोलाहल,जो हो, संवादी सुर में अबगायन शेष रहे ।-महेन्द्र वर्मा...
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Tag :दामन
  November 26, 2016, 9:59 pm
कुछ दाने, कुछ मिट्टी किंचितसावन शेष रहे ।सूरज अवसादित हो बैठाऋतुओं में अनबन,नदिया-पर्वत-सागर रूठेपवनों में जकड़न,जो हो, बस आशा-ऊर्जा कादामन शेष रहे ।मौन हुए सब पंख-पखेरूझरनों का कलकल,नीरवता को भंग कर रहाकोई कोलाहल,जो हो, संवादी सुर में अबगायन शेष रहे ।-महेन्द्र वर्मा...
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Tag :दामन
  November 26, 2016, 9:59 pm
तिमिर तिरोहित होगा निश्चितदीये का संकल्प अटल है।सत् के सम्मुख कब टिक पायाघोर तमस की कुत्सित चाल,ज्ञान रश्मियों से बिंध कर हीहत होता अज्ञान कराल,झंझावातों के झोंकों से लौ का ऊर्ध्वगतित्व अचल है।कितनी विपदाओं से निखरादीपक बन मिट्टी का कण-कण,महत् सृष्टि का उत्स यही है...
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Tag :geet
  October 28, 2016, 9:15 am
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