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MY-VIEWS : View Blog Posts
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मौत के हर कदम और करीब आ रहा हूँ,मैं जीवन के सच से ही घबरा रहा रहा हूँ।नहीं चाहिए ये ज़हाँ इसकी दौलत,नहीं माँगता हूँ ज़माने की शौहरत।मैं दुनियाँ के डर से सहम सा गया हूँ,बिना ज़ल का दरिया मेरे सामने है।उसी में कहीं डूबता जा रहा हूँ,मौत के हर कदम…. .............।।यहाँ कोई न अपना सभी हैं प...
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  March 23, 2013, 4:12 pm
मैंने सुना नारियों की लाज होती अंखियों में,इसलिए शर्म से वो पलकें झुकाती थीं।पतिव्रत धर्म आन बान शान रखने को,गोरी परदे में अपने आप को छुपाती थी। ऋषियों के देश भारत-वर्ष में ज़माने से वो,गुरुकुल प्रथा की कैसी रीति निराली थी।कन्याओं को शिक्षा देने कन्यां-पाठशालाओं में,न...
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  March 22, 2013, 10:54 pm
पहली ही मुलाकात में वो मन में रह गया,इंसानियत की सारी दास्तान कह गया।मिलता रहा हूँ यूँ  तो हज़ारों से उम्र भर,वो सख्स था जो दिल को दिलनशींन कर गया।वाणी थी मधुर और चतुर सी जुबान थी,चहरे पै दिल की बात कहती सी वो शान थी।चुपचाप सा चेहरा मनो-गुलज़ार कर गया,मैं भी अदा का उसकी कद्र...
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  March 19, 2013, 9:48 am
                               हानि-लाभ, जीवन-मृत्यू, औरयश-अपयश विधि के हाथों में.फिर क्यों प्राणी गँवा रहा तू,जीवन इनकी तह पाने में। कब किस से मिलना होगा,कब किस से होगा विरह यहाँ.सब-कुछ निश्चित पर अनजाना,क्यों ढूंड रहा तू जल पानी में। कौन कहाँ तक साथ रहेगा,कौन कहाँ हमको छोड़ेगा....
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  January 11, 2013, 8:45 pm
कैसे कहूँ मन की व्यथा, जज्वा दफ़न सा हो गया,आज फिर मन से मेरे, शब्दों का दरिया बह गया।माँ  की आँखों में हैं आंसू, मेरा मन भी रो रहा,बाप के मन का वो डर, फिर से प्रबल सा हो गया।।भाई का सिर भी झुक गया, मानो शरम के बोझ से,बहना की सुनकर चीख, उसका भी कलेजा फट गया।भगवान् भी शरमा गया, अपने...
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  January 9, 2013, 5:14 pm
गली-गली में आन्दोलन और,जन - जन में आक्रोश है।बापू तेरे देश की हालत,फिर  से  डांवा - डोल  है।।भ्रष्टाचार चरम सीमा पर,पाप  बढ़ा  घनघोर  है।धर्म  की कोई बात न करता,अधरम का ही जोर है।। रक्षक ही भक्षक बन बैठे,रखवाला ही  चोर  है।पैसों से कानून बिक रहा,बात  बड़ी  दिल-तोड़  है।। मानव की...
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  January 4, 2013, 12:33 pm
नया वर्ष सुखमय हो सबको,जन-जीवन उत्कर्ष भरा हो।गरिमा, गौरव और प्रतिष्ठा,गगन चूमते शिखर सद्रश हो।पुरुषारथ - उत्साह - पराक्रम,पर्वत के सम अचल-अडिग हो।दुःख, शंका और गम हर मन से,कोसों दूर नदारद - सम  हो।हमले - दंगे - दुष्कर्मों के,डर से मुक्त हर-एक जन-मन हो।करुणा - दया - मदद के सुर स...
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  January 3, 2013, 9:35 am
लुप्त हो गयी है जो दुनिया के पटल से,वही इंसानियत एक बार फिर जगाई जाये।खुशियों की इन दीपमालाओं में,एक लौ इंसानियत की भी जलाई जाये।जला दो फुलझड़ी से नफरतों को यारो,कि प्यार ही प्यार बस नज़र आये,शरहदों को सजा दो मुहब्बत के चिरागों से ,उस तरफ हो अमन इस तरफ भी बहार आये।आइये दिवा...
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  November 11, 2012, 12:45 pm
न  देतीं  अगर  तेरी  यादें  सहारा,खुदा जाने क्या हश्र होता हमारा।रहा सोचता तेरे आँचल के नीचे,बिगाड़ेंगे  तूफ़ान अब क्या हमारा।मेरी राहें थीं जिससे रोशन हमेशा,न जाने कहाँ खो गया वो सितारा।तूफान  में  है  घिरी  मेरी  कश्ती,नज़र भी नहीं आ रहा है किनारा।कभी तुमने जिसको दिया थ...
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  November 7, 2012, 2:17 pm
 तीन  रंग  से  बना  तिरंगा, अविरल  लहरायेगा |दुनिया का कोई दुश्मन ना, इसको छू भी पायेगा ||मेरे देश की शान तिरंगा, हर दिल में बसा रहेगा |स्वाभिमान की भाषा यह, दुनियां को सिखलायेगा ||दुश्मन का दुस्साहस ना अब, यहाँ ठहर पायेगा |भगत सिंह की वीर कथा, "आज़ाद" सदा गायेगा ||खुशियाँ ही खुशि...
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  March 19, 2012, 9:10 pm
एक नयी सी ज़िन्दगी की राह पर,अनजान सी पहचान लेकर चल पड़ा हूँ |पहले सहमा कुछ मग़र अब,स्वछन्द हूँ की मैं रिटायर हो रहा हूँ ||आज तक दुनियां की भागम-भाग में,ज़िन्दगी के गीत जो भूला हुआ था |एक नयी धुन में सजाऊंगा उन्हें,सोच करके में बहुत खुश हो रहा हूँ ||पेढ़ पौधे फूल पंछी ये फिजाय...
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  March 18, 2012, 10:44 am
छब्बीस दिसंबर का दिन था, थी रज़नी शांत सुहानी |रविवार  सवेरा  होते  ही,  ले  आयी  क़हर  सुनामी ||अपनों से अपने छूट गए, घर-बार ज़ानवर डूब गए,भीषण तूफानी सागर में, भारत के हिस्से सिमट गए |नहीं किसी की चली, लहर ने ऐसी की मनमानी ||रविवार सवेरा होते ही.........................................||दिन लगता रात भया...
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  December 26, 2011, 9:49 am
ईश्वर से भी बड़ा है, गुरुजन का स्थान,ऐसे मानवश्रेष्ठ को, शत-शत बार प्रणाम|माटी का पुतला बना, करता श्वांस प्रदान,गुरुजन के ह़ी यतन से, बनता वह इन्शान|कोरा तन-मन भेजकर, देता उसे जहान,पढ़ा-लिखा दें प्रेरणा, गुरुजन का है काम|मानव को घेरे खड़ा, चहुँ तरफ अज्ञान,स्वयं सुपुर्द-ऐ-ख़ाक ह...
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  December 22, 2011, 4:44 pm
यह श्रमिक प्रशिक्षण केंद्र यहाँ व्यक्तित्व संवारे जाते हैं |यहाँ देश - धर्म - मानवता के सब पाठ पढाये जाते हैं ||श्रमिकों की शिक्षा क्या है हम कैसे इसका उपयोग करें,क्यों इसकी जरूरत पड़ती है कैसे हम इसको ग्रहण करें?सब  प्रश्नों  के  उत्तर  सबको  बे-वाक्  बताये  जाते  हैं ||यह श...
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  September 14, 2011, 5:53 pm
MY-VIEWS: अन्ना की हुंकार...
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  August 21, 2011, 6:36 pm
अन्ना  की  हुंकार  से  डर  गयी  है   सरकार,ज़नता का जन-लोकपाल ही इसका अब उपचार |कल तक जो बाग़ी विकट दिखते थे खूंख्वार,आज सभी वो दिख रहे दुबकी* पूंछ सियार ||हम सबने अब तक सहा दिन-दिन भ्रष्टाचार,इस  पापी  सरकार  का  निर्मम  अत्याचार |मग़र आज सब ज़न खड़े लिए साथ हथियार,बापू  ने  जो  द...
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  August 21, 2011, 6:36 pm
उसको देख-देख मन में ये ख़याल आता है,जान भी गर वार दूँ तो नहीं कुछ ज्यादा है|बुरा  कोई  बोले  बोल खून खौल जाता है,अच्छी  बातें करे  तो गुरूर  बढ़  जाता है|खुशहाली और शांति शौर्य कि ये महामाया है,हरा,  श्वेत,   केसरिया  रँग  ये  बताता  है|तीन रँग के आँचल में सबको रखा संभाल,नहीं कोई ...
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  August 15, 2011, 11:16 am
अंग्रेजों के शोषण से, जन जीवन त्रस्त हुआ था,तब श्रम संघ आन्दोलन का, भारत में उदय हुआ था |काम अधिक और कम वेतन, असुरक्षित था जन-जीवन |पिछड़ापन और अनपढ़ता से, उदासीन था हर मन ||औरत  बूढों  बच्चों  से  भी  काम  लिया  जाता था |तब श्रम संघ................................................||१||शिक्षा की थी कमी, श्रमिक ...
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  June 16, 2011, 10:50 am
गाँधी तेरे देश में ये कैसा राज आया है,जालिमों ने आज फिर से खूब ज़ुल्म ढाया है |आत्मा भी कांपती है उनकी दरिंदगी से,तुमने जिनके हाथों में इस देश को थमाया है ||राम श्याम नानक रहीम के इस देश में,नेताओं के वेशधारी राक्षसों कि माया है |रक्षकों ने मज़लूमों पर चाबुक चलाया देखो,जालि...
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  June 10, 2011, 8:05 am
मैंने हर मोड़ पर तेरे होने को चाहा,पर हर बार तेरे न होने को पाया|कितनी मासूम है ये चाहत.......जो दिन के आखिरी पहर के ढलने तक,तेरा इंतज़ार करने को तैयार है||बेकरारी करार में गुज़रे,ज़िन्दगी सिर्फ प्यार में गुज़रे||मेरे हिस्से में सिर्फ खार आ जाएँ,उनका हर दिन बहार में गुज़रे||क्य...
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  April 19, 2011, 8:18 pm
ऐ दुनियां के हिन्दू जागो,अब वक्त नहीं है सोने का |हम बहुत सह चुके ज़ुल्मो-सितम,अब समय नहीं चुप रहने का||इस देश का हिन्दू ह़ी हर-पल,था जीता रहा औरों के लिए|इतिहास गवाही देता है,वह क्षमाशील था सबके लिए||मुस्लिम और सिख, ईसाई को,रखा हमने भाई की तरह|वो आस्तीन के सांप हमें,डसते ह़ी ...
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  April 16, 2011, 8:25 am
भूतों का दल पहुँच गया नेताजी के द्वार|नेता जी सो रहे थे बे-सुध पाँव पसार||एक ने कहा ले चलो इसे "भूत-संसार"|देखें इसका असर क्या होता हमपर यार||तुरत दुसरे ने कहा ये तो है ग़द्दार|इसको अपने लोक में ले जाना बेकार||यह सुनकर कहने लगा भूतों का सरदार|अगर जगा तो करेगा तुम पर अत्याचार||य...
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  November 15, 2010, 8:36 am
लहर का खेल रहता है, किनारे टूट जाते हैं,समय करवट बदलता है, सहारे छूट जाते हैं| अनोखी चीज़ है होनी, न कोई जोर चलता है,न जाने वक्त का रुख किस घडी, किस ओर होता है| अचानक आसमाँ का रँग, बादल लूट लेते हैं,नज़र प्यासी भटकती है, नज़ारे रूंठ जाते हैं| अचानक मिल गया कोई, कि मंजिल मिल गयी जै...
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  November 14, 2010, 6:19 am
ये दुनिया बड़ी ज़ालिम, मज़हब नहीं समझती,उन्माद की फिजां को, मज़हब का नाम देती|पैदा हमें किया है, ईश्वर ने सिर्फ इंशां,ये रंग भर बदलकर, मज़हब में बाँट देती|'मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना,एक वक्त में सुना था, मैंने भी ये तराना|पर आज क्या हुआ है, दुनिया का वो फ़साना,उन्मत्त हो गय...
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  October 28, 2010, 5:26 pm
"जीवन को अपने पावन बना लो-२ॐ सांई गाओ सांई नाम गुनगुना लो..अनमोल जीवन को यूँ न खपाओ-२बची हैं जो श्वासें उनको व्यर्थ ना गंवाओ...हर श्वांस में-२ सांई नाम को बसा लो...ॐ सांई गाओ..........................मिला है ये मानव जन्म खुद को संभालो-२ह्रदय लौ को अपनी पारब्रह्म में लगालो...एक दिन मिलेंगे सां...
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  October 17, 2010, 10:18 am
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