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Aawaara Raahi

गुस्सा, तू मेरा पीरमैं तेरा मुरीद IIकरना न तू कोई मोल-तोल या कोई समझौतान तू बिकना, न झुकना, न मरना न कुटिल या मलिन ही होना, कि कभी तेरे आने का पश्चाताप हो IIजहाँ भी हो अन्याय, उठ खड़े होना बेबाक और बेख़ौफ़ अलबत्ताऔर दे जाना कोई सीख, की उस खीझ की वजह को मौत दी जा सके IIगुस्सा, तेरा पाक-...
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  November 3, 2014, 3:29 pm
क्यों एक सरकारी नौकर, किसी सरकारी नौकर का बस नौकर बन जाता है जो उसका काम नहीं उसे  खामोश रह कर जाता है जिंदगी की कौन सी मुश्किलात उसे ऐसा बनने को मजबूर कर देती हैं झुकने से  पहले वह उठना तो जरूर चाहा होगा अपने वजूद को तो ऐसे ही ना ठुकराया होगापहली बार जब सब्जी लाने या  ...
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  June 22, 2014, 10:21 am
हों कोई भी हम, कहीं भी हम करें कुछ भी, मगर यह सोचकर एक नेकी का सबब कई अंजानों को नेक बनाती है I...
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  June 13, 2014, 7:52 pm
कियाऐलानललकारकरबादशाहनिकलाशिकारपरशाही गज पर सवार होचलाबड़ीताव  से वोशाहचलाशिकारपरशाहीजंगलमेंपड़ापड़ावढोलबजे,नगाड़ेबजे,प्रजाडरीऔउत्साहितसीशाहकापूरासाथदियाशाहचलाशिकारपररोजनगाड़ाबजतारहाशाह कई जाल बुनता गया सैनिकयहाँ-वहाँफैलायेगएचारायहाँ-वहाँबिखरायागय...
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  May 19, 2014, 1:16 pm
गंगा के तीरे उसका गाँव देखा पेड़ पौधे, चिड़ियाँ, तितलियाँ तमाम देखा पानी का फैला विस्तार देखा, रेतीले तट पर बहार देखा, आज उसका घर खुले आम देखा फूंस का घर, न दरवाज़े न ताला ना ही भीतर दिखा कोइ सामान निराला मिट्टी की दिखी चूल्ह, कुछ बर्तन दिखे आला और दिखी कोनों मे मकड़ियों कि लटक...
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  May 7, 2014, 12:55 pm
सियासत के सियासी तरीकों को देखोबेईमानी औ  मक्कारी के छियासी तरकीबों को देखोऔ देखो लोकतँत्र के सरपरस्तों को देखोइंसानी महफ़िल मे फैली शैतानी फितरत को देखोबिकते खरीदते इरादों को देखोउसूलों को सूली पर चढ़...
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  April 29, 2014, 3:45 pm
बड़े लोगों का जत्था फिर निकला फरेब करने नवाबों का, अफसरशाहों का, जमींदारों का, मालिकों का चोरों का, मक्कारों का, चापलूसों का, गद्दारों का, बेईमानों का देखो, ये फिर लामबंद हुए काली कमाई से शान्ति कमाने को फिर इन्हे आवाज आई मर चुके दिल के कोनों से ये फिर ठण्ड में अपना नाम करने...
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  November 28, 2013, 1:24 pm
वो तोड़ता है पत्थर तो दिल भी टूटता है बदन झंकार मारता है कुछ बोल निकलता है हथौड़े कि मार से कुछ गीत फूटता हैकुछ खून सूखता है वो फौलाद टूटता है यूँ झुककर धान बोने में हाय जान निकलती है कीचड सने बदन पर कई जोंक चिपकते हैंदर्द को बहलाने कुछ गीत निकलते हैं कुछ के खेत देखो खिलते, क...
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  November 26, 2013, 3:42 pm
आजमैंनेउसेइसमुल्ककाबनाहीदियाउसमासूमसेहिन्दू-मुसलमांकाजिक्रकियाऔरजात-पातकाफर्कभीसिखाहीदियाकिमैंनेभीअपनारंगदिखाहीदियाआजउसेअपनोंसाबनाहीदिया...
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  November 12, 2013, 4:42 pm
साहबोंकिऔलादोंकोबापसाहीबनतेदेखाकितनेहाथोंसेहमनेकामकोछिनतेदेखाअमीरोंकीऐशगाह, गरीबोंकीकब्र इसदेशकोबनतेदेखाऔरबहुतकुछलुटतेऔरलूटतेदेखालोकतंत्रकेसारेतंत्रोंकोअपंगहोतेदेखावोटकोबिकते, सचकोसिसकतेदेखाहमनेलोकतंत्रकोघुटनोंबलमुर्दादेखा ...
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  November 12, 2013, 4:39 pm
लोगोंमेंभूखहै,अनाजकीलूटहैभूखबनाभूतहैकुछपैसोंसेअभिभूतहैसरकार तो सरकार है, दशकों बाद भीनहीं हुआ लोगों का भूख से उद्धार है खेतोंकामजदूरऔरमजबूरहै, येराजबड़ागूढ़हैअनाजहीअनाजहै, क्यूँसड़रहाअनाजहैभूखहीभूखहै, क्यूँसड़रहासमाजहैपिचकामुंहदिखेअगरनंगधडंगदिखेअगर...
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  October 17, 2013, 10:32 am
अमीरीकीकोखमेंबेईमानीनज़रआतीहैइसकी कमाईमेंईमानदारीनज़रआतीहैपरकहनाक्याइसदुनियाका, येतोअमीरीकोहीपालनेमेंखिलातीहैसपनेअपने बेचबड़ाहुआवोअपनेदमपरखड़ाहुआवोज्यादा कुछ है पास नउसके,मेहनत अपार पर इज्ज़त देखो साथ न उसके उसे लोगोंकोढोतेदेखारिक्शेपरहीसोतेदेखा,...
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  September 17, 2013, 3:54 pm
हम भी गुलाम न बनते इस दुनिया में हम भी गुमनाम न होते इस दुनिया में कुछ न कुछ तो खैर कर गुजर जाते गर बेचे न होते ख्वाब अपने दिल के हम भी खुश होते औरों को खुश पाके क्या बिगड़ जाता जो रह जाते फांके खाके फ़क़ीर कहलाते औ अमीर दिल से हो जाते जो काश, खुद की  ख्वाहिशों पर काबू रख प...
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  August 19, 2013, 11:26 pm
आजबताताहूँएकराजकी बात कैसेकोईबनताहैसेठ साहूकार कुछपैसेफ़ेंक, औरपैसेबना कुछसाजिशकर,औरगुलामबनागरीबीकीमिट्टीमेंअबचलअमीरीकातूएकपेड़लगा खुदमालिकबन,ऐयाशीकर मेहनतकोचल,तूबेवाबनाकुछदानधरमकाढोंगदिखा इज्जतभीकमा,शोहरतभोकमा  मिट्टीतोतुझको ...
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  July 12, 2013, 11:08 pm
गरीबोंकीबस्तीमें आग लगी मस्तीमें पसीनेसेलथपथसब जलरहाधक्-धक्घर पेटदेखोखालीहै दिवालाकीयहाँ दिवालीहै यहदुनियानिरालीहै भूखहै, यहाँप्यासहै यमकायहाँवासहै नइलाजहैनअस्पतालहै बिजली औ पानीकाबुराहालहैशिक्षाकायहाँ अकालहै सब अमीरोंकी...
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  July 12, 2013, 10:24 pm
है अचानक ताप इस धरती की यूँ बढ़ने लगी चिलचिलाती धूप से हिम्मत यूँ पस्त होने लगी सड़क पर पहुँचा तो काला नाग पिघला लग रहा था एक भी बूटा नहीं, शहर सारा टूटा लग रहा था आदमी तो आदमी है कुछ तरीका ढूँढ लेगा उन परिंदों की तो सोचो, जो बेजुबाँ सब सह ही लेगा हम तो प्यासे न मरेंगे, हम ...
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  May 12, 2013, 11:00 am
अमीरी और गरीबी में बस फर्क है इतनाअमीरी में ताकत है,शान है, अम्बार है धन का गरीबी में दफ़न हैआदमी की इज्ज़त, और  हाथ न चले तो नसीब में फाक न उस दिन का जो जोड़ता है सडकें, उसे कारें नहीं नसीब मेहनत को न कमाई, न तारीफ़ है नसीब इस मुल्क में हैं जुल्म के,अब सौदागर कई खड़े चल यार कहीं और ...
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  May 2, 2013, 8:31 am
पी.एम.वी.* की टीचर स्कूल छोड़ घर भागी अपने बच्चे के प्रति उनकी जिम्मेदारी जागी IIउन्हें याद हुआ की उनके बच्चे का कल इम्तेहान है, भूल गईं की कल, पी.एम.वी. के बच्चों का भी तो इम्तिहान है IIसी.एम.एस** का इम्तेहान तो पी.एम.वी. पर भारी पड़ता ही है और सरकारी तंत्र बखूबी इस अंतर को बनाए रख...
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  April 25, 2013, 10:37 am
तेरे इंतकाम की घड़ी करीब आ गई तेरे इंतेहा की शब् कल कहीं गुज़र गई  तू बेहिचक तू बेझिझक दमन का काल बन के देख,तू ही आजाद तू ही भगत, तू इन्कलाब तो कह के देख तेरे शौर्य के समां नहीं कोई प्रताप है तू आग है, तू बाघ है, तू जीत की मिसाल है इरादे तेरे नेक हैं तू चाहता बस न्याय है पर चाह...
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  April 18, 2013, 9:23 am
तेरी इबादत सब कोई करता काम नेक तू बड़ा है करता तू कुशल बड़ा, तू ज्ञानी बड़ा हम सबकी जान बचाता तू आशा का दूजा नाम तु ही तुझ पर कईयों की आस बड़ी इश्वर सी तुझमे आस्था है जीवन दाता कहलाता तू तू जादूगर, तू मायावी तू चमत्कार करता बड़े तू आज का नया वैज्ञानिक है तू धर्म जात से है पर...
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  April 8, 2013, 10:00 am
मजदूर के ग़मों के हम पास न भटकते करता है काम दिन भर खैरियत न उसकी लेते करता अरमाँ हमारे पूरे, हम अहसान भी ना मानते वो है हमारी जरूरत, हमउसकी पहचान भी न जानते क्या ख़ाक उसको मिलता बस फाक पर वो चलता दिन भर है आखिर खटता शब् शराब में पिघलता नींद भी तो आखिर, जालिम मजदूर को सतात...
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  March 17, 2013, 12:03 pm
अब तक जो हुआ, वो हुआसो हुआ, अब और न होने पायेगा शिक्षा से खिलवाड़, तू और न कर नहीं तो, बेशक तू जुल्मी कहलायेगा शातिर तू है, चालाक बड़ा सरकार तू कहता खुद को चला पर फ़र्ज़ निभाया एक नहीं, और तेरी वादा खिलाफी का अंजाम हुआ की सरकारी शाला तो ठप्प पड़ा है हिम्मत तो एक क्रांति ला,...
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  January 25, 2013, 10:36 am
चाय का कोई वक्त नहीं चाय तो बस मस्त कर देती है सख्त दिमाग को खुशनुमा कर देती है कई दर्द भाप बन उड़ जाते हैं चाय संग कई बात बन जाते हैं चाय पर कई जज़्बात खिल जाते हैं बन चुकी है अब ये आदत कि चाय हमारी मेहमान-नवाजी और हमारे तहजीब में आती कि बातों बातों में बन जाती है चाय और बा...
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  December 9, 2012, 6:38 pm
चलो आज कुछ हटकर बातें करते हैं की आओ आज फिर छानबीन कुछ करते हैं की आज गाँव को हम रोमानी चश्मे से न देखेंगे न ही उडती तितलियों में जीवन के रंग हम ढूँढेंगेआओ आज खुली आखों से अपने गाँव को देखते हैं अन्धकार में जीते, भूख से लड़ते लोगों से कुछ देर के लिए तो मिलते हैं, की आओ आज, ...
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  September 17, 2012, 11:15 pm
हो देखा….भागत बालइके उ नईकी कम्पनिया, हमरी गढ़की  कमईया, निक्की जमिनिया, मेहनत की फसलिया, उबैमनकी कंपनिया रे की आइल बा फिर से लाट्साहेबन कै जमाना अब त कार्पोरेट्स कै कहना तू मानाकी देशवा गुलाम भइल, अमीरन क काम भइल हमरे पचन कै ना कौनो ठिकाना कि जोर जुलुम कै इ होखे जमाना...
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  August 28, 2012, 10:53 pm
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