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गीत ग़ज़ल औ गीतिका

चन्द माहिया  :क़िस्त 42:1:दो चार क़दम चल करछोड़ तो ना दोगे ?सपना बन कर ,छल कर:2:जब तुम ही नहीं हमदमसांसे  भी कब तकअब देगी साथ ,सनम !:3:जज्बात की सच्चाईनापोगे कैसे ?इस दिल की गहराई:4;सबसे है रज़ामन्दीसबसे मिलते होबस मुझ पर पाबन्दी:5:क्या और तवाफ़ करूँइतना ही जानामन को भी साफ़ करूँ-आनन्द...
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  June 24, 2017, 10:51 am
चन्द माहिया: क़िस्त 41:1:सदक़ात भुला मेराएक गुनह तुम कोबस याद रहा मेरा:2:इक चेहरा क्या भायाहर चेहरे में वोमख़्सूस नज़र आया;3:कर देता है पागल जब जब साने सेढलता है तेरा आँचल:4:उल्फ़त की यही ख़ूबीपार लगी उसकीकश्ती जिसकी  डूबी:5:इतना ही समझ लेनामै हूँ तो तुम होक्या और सनद देना-आनन्द....
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  June 11, 2017, 6:19 pm
एक ग़ज़ल : ज़िन्दगी ना हुई बावफ़ा आजतक------ज़िन्दगी   ना  हुई  बावफ़ा आज तकफिर भी शिकवा न कोई गिला आजतकएक चेहरा   जिसे  ढूँढता  मैं  रहाउम्र गुज़री ,नहीं वो मिला  आजतकदिल को कितना पढ़ाता मुअल्लिम रहाइश्क़ से कुछ न आगे पढ़ा  आजतकएक जल्वा नुमाया  कभी  ’तूर’ पेबाद उसके क...
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  June 1, 2017, 8:03 pm
क़िस्त: 31:1:माना कि तमाशा हैकार-ए-जहाँ में सबफिर भी इक आशा है:2:दरपन तो दरपन हैझूट नहीं बोलेसच बोल रहा मन है:3:क्या छाई घटाएं हैंदिल है रिन्दानासन्दल सी हवायें हैं:4:जितना देखा फ़लकउतनी ही तेरीबातों में सच की झलक:5:ये कैसा नशा किस काअब तक नै देखाएह्सास है बस जिसका-आनन्द.पाठक--0880092718...
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  May 29, 2017, 12:37 pm
एक मज़ाहिका ग़ज़ल :---ज़रा हट के ---ज़रा बच के---मेरे भी ’फ़ेसबुक’ पे कदरदान बहुत हैंख़ातून भी ,हसीन  मेहरबान  बहुत हैं"रिक्वेस्ट फ़्रेन्डशिप"पे हसीना ने ये कहा-"लटके हैं पाँव कब्र में ,अरमान बहुत हैं"’अंकल’ -न प्लीज बोलिए ऎ मेरे जान-ए-जाँ’अंकल’, जो आजकल के हैं ,शैतान बहुत हैंटकले से...
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  May 24, 2017, 4:55 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 40:1:जीवन की निशानी हैरमता जोगी हैऔर बहता पानी है;2:मथुरा या काशी क्यामन ही नहीं चमकाघट क्या ,घटवासी क्या:3:ख़ुद को देखा होतामन के दरपन मेंक्या सच है ,पता होता:4:बेताब न हो , ऎ दिल !सोज़-ए-जिगर तो जगाफिर जा कर उन से मिल:5;ये इश्क़ इबादत हैदैर-ओ-हरम दिल मेंऔर एक ज़ियार...
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  May 21, 2017, 5:34 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 37:1:सद ख़्वाब ,ख़यालों मेंजब तक  है परदाउलझा हूँ सवालों में ;2:शिकवा  न शिकायत हैमैं ही ग़लत ठहराये कैसी रवायत है:3:तुम ने ही बनाया है ख़ाक से जब मुझ को फिर ऎब क्यूँ आया है ?:4:सच है इनकार नहीं’तूर’ पे आए ,वोलेकिन दीदार नहीं :5;कहता है कहने दोबात ज़हादत कीज़...
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  May 21, 2017, 5:24 pm
हौसला है ,दो हथेली है , हुनर हैकिस लिए ख़ैरात पे तेरी नज़र हैआग दिल में है बदल दे तू ज़मानातू अभी सोज़-ए-जिगर से बेख़बर हैसाजिशें हर मोड़ पर हैं राहजन केजिस तरफ़ से कारवाँ की रहगुज़र हैडूब कर गहराईयों से जब उबरतातब उसे होता कहीं हासिल गुहर हैइन्क़लाबी मुठ्ठियाँ हों ,जोश हो तोफिर न ...
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  May 13, 2017, 12:27 pm
एक व्यंग्य गीत : मैं तेरे ’ब्लाग’ पे आऊँ------[संभावित आहत जनों से क्षमा याचना सहित]-----मैं तेरे ’ब्लाग’ पे  जाऊँ ,तू मेरे ’ब्लाग’ पे आमैं तेरी पीठ खुजाऊँ  , तू मेरी  पीठ  खुजातू क्या लिखता रहता है , ये  बात ख़ुदा ही जानेमैने तुमको माना है  , दुनिया  माने ना मानेतू इक ’अज़...
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  May 11, 2017, 12:15 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 38:1: उनका  मैं दीवानादेख रहें ऐसेजैसे मैं  बेगाना:2:कोरी न चुनरिया हैकैसे मैं आऊँ ?खाली भी गगरिया है;3:कुछ भी तो नही लेतीख़ुशबू ,गुलशन सेफूलों का पता देती:4:दुनिया का मेला हैसब तो अपने हीदिल फिर भी अकेला है:5:मुझको अनजाने मेंलोग पढ़ेंगे कलतेरे अफ़साने में...
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  May 7, 2017, 8:06 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 39 [ अहवाल-ए-कश्मीर पर]:1:वो ख़्वाब दिखाते हैंजन्नत की ख़ातिरजन्नत ही जलाते हैं:2;नफ़रत ,शोले ,फ़ित्नेबस्ती जली किस कीरोटी सेंकी ,किसने ?:3:ये कैसी सियासत है ?धुन्ध ,धुँआ केवलये किस की विरासत है?;4:रहबर बन कर आतेकलम छुड़ा तुम सेपत्थर हैं चलवाते ;5:केसर की क्यारी में...
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  April 28, 2017, 11:06 am
FaceBook और  Whatsup के ज़माने में और U CHEAT.......U SHUT UP----UUUUUU SHUT UP के दौर में एक ’क्लासिकल’ युगल  शिकायती :   गीत कैसे कह दूँ कि अब तुम बदल सी गईवरना क्या  मैं समझता नहीं  बात क्या !एक पल का मिलन ,उम्र भर का सपनरंग भरने का  करने  लगा  था जतनकोई धूनी रमा , छोड़ कर चल गयालकड़ियाँ कुछ है...
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  April 22, 2017, 6:45 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 36:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल से नहीं मिलनाफिर हाथ मिलाना क्या !:2:कुछ तुम को ख़बर भी हैमेरे भी दिल मेंइक ज़ौक़-ए-नज़र भी है:3:गुरबत में हो जब दिलदर्द अलग अपनाकहना भी है मुश्किल:4;जितनी  भी हो अनबनतुम पे भरोसा हैरूठो न कभी , जानम !:5:मेरी भी तो सुन लेतेमैं जो ग़लत ह...
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  April 8, 2017, 11:46 am
चन्द माहिया : क़िस्त 35:1:सजदे में पड़े हैं हमलेकिन जाने क्यूँ दिल है दरहम बरहम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लक्ष्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीतेरे दिल में अबचाहत न रही वैसी:4:समझो न कि पानी है क़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है:5:वो शाम सुहानी हैजिसमें है शामिलकुछ याद पु...
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  March 28, 2017, 7:52 pm
मंच के सभी सदस्यों /मित्रों को इस अकिंचन का होली की बहुत बहुत शुभकामनायें ---इस गीत के साथलगा दो प्रीति का चन्दन मुझे इस बार होली में महक जाए ये कोरा तन-बदन इस बार होली में ये बन्धन प्यार का है जो कभी तोड़े से ना टूटेभले ही प्राण छूटे पर न रंगत प्यार की  छूटेअकेले मन नही...
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  March 12, 2017, 12:42 pm
एक गीत : जाने क्यों ऐसा लगता है....जाने क्यों ऐसा लगता हैकटी कटी सी रहती हो तुम -सोच सोच कर मन डरता है जाने क्यों ऐसा लगता है कितना भोलापन था तेरी आँखों में जब मैं था खोताबात बात में पूछा करती -"ये क्या होता? वो क्या होता?"ना जाने क्या बात हो गई,अब न रही पहली सी गरमी कहाँ गय...
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  February 3, 2017, 4:41 pm
एक ग़ज़ल : यकीं होगा नहीं तुम को....यकीं होगा नहीं तुमको  मिरे तर्ज़-ए-बयाँ  सेजबीं का एक ही रिश्ता तुम्हारे आस्ताँ  सेफ़ना हो जाऊँगा जब राह-ए-उल्फ़त में तुम्हारीज़माना तुम को पहचानेगा  मेरी दास्ताँ  सेमिली मंज़िल नहीं मुझको भटकता रह गया हूंबिछुड़ कर रह गया  हूँ  ज़िन्द...
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  January 22, 2017, 1:32 pm
                     दो  मुक्तक :1:बात यूँ ही  निकल गई  होगीरुख़ की रंगत बदल गई होगीनाम मेरा जो सुन लिया  होगाचौंक कर वो सँभल गई होगी:2;कौन सा है जो ग़म दिल पे गुज़रा नहींबारहा टूट कर भी  हूँ   बिखरा   नहींअब किसे है ख़बर क्या है सूद-ओ-ज़ियाँइश्क़ का ये नशा है जो  ...
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  January 20, 2017, 3:33 pm
सभी मित्रों  ,शुभ चिन्तकों .हितैषियो को , इस अकिंचन का नव वर्ष की शुभकामनाएं ----यह नव वर्ष 2017 आप के जीवन में सुख और समृद्धि लाए-आनन्द.पाठक और परिवार ----नए वर्ष की प्रथम भेंट है --आप सभी  पाठक के सम्मुख........एक गीत :- नए वर्ष की नई सुबह में....................नए वर्ष की नई सुबह में ,आओ मिल कर लि...
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  January 1, 2017, 12:28 pm
एक कविता :  सूरज निकल रहा है.......सूरज निकल रहा हैमेरा देश,सुना हैआगे बढ़ रहा है ,सूरज निकल रहा हैरिंग टोन से टी0वी0 तकघिसे पिटे से सुबह शाम तकवही पुराने बजते गानेसूरज निकल रहा हैलेकिन सूरज तो बबूल परटँगा हुआ हैभ्रष्ट धुन्ध से घिरा हुआ हैकुहरों की साजिश से हैंघिरी हुई प्रा...
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  December 25, 2016, 7:01 pm
एक फ़र्द शे’रवो चराग़ ले के चला तो है, मगर आँधियों का ख़ौफ़ भीमैं सलामती की दुआ करूँ ,उसे हासिल-ए-महताब हो-आनन्द पाठक-...
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  November 15, 2016, 7:48 pm
जो जागे हैं मगर उठते नहीं  उनको जगाना क्याखुदी को ख़ुद जगाना है किसी के पास जाना क्यानिज़ाम-ए-दौर-ए-हाज़िर का  बदलने को चले थे तुमबिके कुर्सी की खातिर तुम तो ,फिर झ्ण्डा उठाना क्याज़माने को ख़बर है सब  तुम्हारी लन्तरानी  कीदिखे मासूम से चेहरे ,असल चेहरा छुपाना क्यान चे...
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  October 14, 2016, 6:41 pm
नहीं उतरेगा अब कोई फ़रिश्ता आसमाँ सेउसे डर लग रहा होगा यहाँ अहल-ए-ज़हाँ सेन कोह-ए-तूर पे उतरेगी कोई रोशनी अबहमी को करनी होगी रोशनी सोज़-ए-निहाँ सेज़माना लद गया जब आदमी में आदमी थाअयाँ होने लगे हैं लोग अब आतिश-ज़ुबाँ सेअभी निकला नहीं है क़ाफ़िला बस्ती से आगेगिला करने लगे हैं लोग ...
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  October 12, 2016, 10:44 am
निक़ाब-ए-रुख में शरमाना, निगाहों का झुकाना क्याख़बर हो जाती है दिल को, दबे पाँवों  से आना क्याअगर हो रूह में ख़ुशबू  तो ख़ुद ही फैल जाएगीज़माने से छुपाना क्या  ,तह-ए-दिल में  दबाना  क्याअगर दिल से नहीं मिलता है दिल तो बात क्या होगीदिखाने के लिए फिर हाथ का मिलना मिलाना क्...
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  September 21, 2016, 1:56 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 34 :1:पूछा तो कभी होतादिल से जो मेरेये, किस के लिए रोता ? :2:सोने भी नहीं देतींयादें अब तेरीरोने भी नहीं देतीं :3:क्यों मन से हारे हो ?जीते जी मर करअब किस के सहारे हो? :4:ग़ैरों की सुना करतेमेरी कब सुनतेजो तुम से गिला करते :5:मुश्किल की पहल आएसब्र न खो देनाइक राह निक...
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  September 17, 2016, 8:13 pm
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