Deprecated: mysql_connect(): The mysql extension is deprecated and will be removed in the future: use mysqli or PDO instead in /home/hamariva/public_html/config/conn.php on line 13
गीत ग़ज़ल औ गीतिका : View Blog Posts
Hamarivani.com

गीत ग़ज़ल औ गीतिका

 ग़ज़ल : मिलेगा जब भी वो हमसे---मिलेगा जब भी वो हम से, बस अपनी ही सुनायेगामसाइल जो हमारे हैं  , हवा  में  वो   उड़ाएगाअभी तो उड़ रहा है आस्माँ में ,उड़ने  दे उस कोकटेगी डॊर उस की तो ,कहाँ पर और जायेगा ?सफ़र में हो गया तनहा ,तुम्हारे  साथ चल कर जोवो यादों के चरागों को  जलाये...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  October 14, 2017, 6:09 pm
एक ग़ज़ल : छुपाते ही रहे अकसर--छुपाते ही रहे अकसर ,जुदाई के दो चश्म-ए-नमजमाना पूछता गर ’क्या हुआ?’ तो क्या बताते हममज़ा ऐसे सफ़र का क्या,उठे बस मिल गई मंज़िलन पाँवों में पड़े छाले  ,न आँखों  में  ही अश्क-ए-ग़मन समझे हो न समझोगे ,  ख़ुदा की  यह इनायत हैबड़ी क़िस्मत से मिलता है ,मुहब...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  October 6, 2017, 6:32 pm
ग़ज़ल : बहुत अब हो चुकी बातें------बहुत अब हो चुकी बातें तुम्हारी ,आस्माँ कीउतर आओ ज़मीं पर बात करनी है ज़हाँ कीमसाइल और भी है ,पर तुम्हें फ़ुरसत कहाँ हैकहाँ तक हम सुनाएँ  दास्ताँ  अश्क-ए-रवाँ कीमिलाते हाथ हो लेकिन नज़र होती कहीं परकि हर रिश्ते में रहते सोचते  सूद-ओ-जियाँ कीसभ...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  October 3, 2017, 5:10 pm
एक क़ता ----खिड़कियाँ अब न खुलती किसी बात परआज इन्सानियत को ये क्या हो गयाढूँढने मैं चला वो कि शायद मिलेआदमी ही कहीं बीच में खो गयाजब कि मंजिल क़रीब आने वाली ही थीदरमियान-ए-सफ़र रहनुमा सो गयातेरे दर पे उजाला न पहुँचा भलेपर खुशी है कि तेरी गली तो गयाज़िन्दगी तुम से कोई शिकायत नह...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  September 27, 2017, 11:42 am
एक ग़ैर रवायती ग़ज़ल :---ये गुलशन तो सभी का है----ये गुलशन तो सभी का है ,तुम्हारा  है, हमारा हैलगा दे आग कोई  ये नही   हमको गवारा  हैतुम्हारा धरम है झूठा ,अधूरा है ये फिर मज़हबज़मीं को ख़ून से रँगने का गर मक़सद तुम्हारा हैयक़ीनन आँख का पानी तेरा अब मर चुका होगाजलाना घर किसी का क्यू...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  September 24, 2017, 12:46 pm
                                               एक गीत : --------तो क्या हो गयातेरी खुशियों में शामिल सभी लोग हैं ,एक मैं ही न शामिल तो क्या हो  गया !ज़िन्दगी थी गुज़रनी ,गुज़र ही गईबाक़ी जो भी बची है ,गुज़र जाएगीदो क़दम साथ देकर चली छोड़ करज़िन्दगी अब न जाने किधर जाएगी...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  August 16, 2017, 11:47 am
एक ग़ज़ल : वो जो चढ़ रहा था---- वो जो चढ़ रहा था सुरूर था  ,जो उतर रहा है ख़ुमार हैवो नवीद थी तेरे आने की  , तेरे जाने की  ये पुकार  हैइधर आते आते रुके क़दम ,मेरा सर खुशी से है झुक गयाये ज़रूर तेरा है आस्ताँ  ,ये ज़रूर   तेरा दयार   हैन ख़ता  हुई ,न सज़ा मिली , न मज़ा मिला कभी इश्क़ काभ...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  August 10, 2017, 11:41 am
दो शे’रमहफ़िल में लोग आए थे अपनी अना के साथदेखा नहीं किसी को भी ज़ौक़-ए-फ़ना  के साथनासेह ! तुम्हारी बात में नुक्ते की बात  हैदिल लग गया है  मेरा किसी  आश्ना  के साथ-आनन्द पाठक-...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 22, 2017, 12:32 pm
एक ग़ज़ल :  दिल न रोशन हुआ-----दिल न रोशन हुआ ,लौ लगी भी नही, फिर इबादत का ये सिलसिला किस लिएफिर ये चन्दन ,ये टीका,जबीं पे निशां और  तस्बीह  माला  लिया किस लिएसब को मालूम है तेरे घर का पता ,हो कि पण्डित पुजारी ,मुअल्लिम कोईतू मिला ही नहीं लापता आज तक ,ढूँढने का अलग ही मज़ा  किस...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 17, 2017, 6:03 pm
एक क़ता-----भला होते मुकम्मल कब यहाँ पे इश्क़ के किस्सेकभी अफ़सोस मत करना कि हस्ती हार जाती हैपढ़ो ’फ़रहाद’ का किस्सा ,यकीं आ जायेगा तुम कोमुहब्बत में कभी ’तेशा’ भी बन कर मौत आती हैजो अफ़साना अधूरा था विसाल-ए-यार का ’आनन’चलो बाक़ी सुना दो अब कि मुझको नीद आती है-आनन्द.पाठक-09900927181...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 15, 2017, 12:44 pm
एक  ग़ैर रवायती ग़ज़ल : कहने को कह रहा है-----कहने को कह रहा है कि वो बेकसूर हैलेकिन कहीं तो दाल में काला ज़रूर हैलाया "समाजवाद"ग़रीबो  से छीन कर बेटी -दमाद ,भाई -भतीजों  पे नूर हैकाली कमाई है नही, सब ’दान’ में मिलामज़लूम का मसीहा है साहिब हुज़ूर हैऐसा  धुँआ उठा कि कहीं कुछ नही...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 10, 2017, 11:39 am
...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 8, 2017, 7:26 pm
एक ग़ज़ल :  मिल जाओ अगर तुम---मिल जाओ अगर तुम तो ,मिल जाये खुदाई हैक्यों तुम से करूँ परदा , जब दिल में सफ़ाई हैदेखा तो नहीं अबतक . लेकिन हो ख़यालों मेंसीरत की तेरी मैने ,  तस्वीर   बनाई   हैलोगों से सुना था कुछ , कुछ जिक्र किताबों में कुछ रंग-ए-तसव्वुर से , रंगोली  सजाई  हैमान...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  July 1, 2017, 11:14 am
चन्द माहिया  :क़िस्त 42:1:दो चार क़दम चल करछोड़ तो ना दोगे ?सपना बन कर ,छल कर:2:जब तुम ही नहीं हमदमसांसे  भी कब तकअब देगी साथ ,सनम !:3:जज्बात की सच्चाईनापोगे कैसे ?इस दिल की गहराई:4;सबसे है रज़ामन्दीसबसे मिलते होबस मुझ पर पाबन्दी:5:क्या और तवाफ़ करूँइतना ही जानामन को भी साफ़ करूँ-आनन्द...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  June 24, 2017, 10:51 am
चन्द माहिया: क़िस्त 41:1:सदक़ात भुला मेराएक गुनह तुम कोबस याद रहा मेरा:2:इक चेहरा क्या भायाहर चेहरे में वोमख़्सूस नज़र आया;3:कर देता है पागल जब जब साने सेढलता है तेरा आँचल:4:उल्फ़त की यही ख़ूबीपार लगी उसकीकश्ती जिसकी  डूबी:5:इतना ही समझ लेनामै हूँ तो तुम होक्या और सनद देना-आनन्द....
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  June 11, 2017, 6:19 pm
एक ग़ज़ल : ज़िन्दगी ना हुई बावफ़ा आजतक------ज़िन्दगी   ना  हुई  बावफ़ा आज तकफिर भी शिकवा न कोई गिला आजतकएक चेहरा   जिसे  ढूँढता  मैं  रहाउम्र गुज़री ,नहीं वो मिला  आजतकदिल को कितना पढ़ाता मुअल्लिम रहाइश्क़ से कुछ न आगे पढ़ा  आजतकएक जल्वा नुमाया  कभी  ’तूर’ पेबाद उसके क...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  June 1, 2017, 8:03 pm
क़िस्त: 31:1:माना कि तमाशा हैकार-ए-जहाँ में सबफिर भी इक आशा है:2:दरपन तो दरपन हैझूट नहीं बोलेसच बोल रहा मन है:3:क्या छाई घटाएं हैंदिल है रिन्दानासन्दल सी हवायें हैं:4:जितना देखा फ़लकउतनी ही तेरीबातों में सच की झलक:5:ये कैसा नशा किस काअब तक नै देखाएह्सास है बस जिसका-आनन्द.पाठक--0880092718...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 29, 2017, 12:37 pm
एक मज़ाहिका ग़ज़ल :---ज़रा हट के ---ज़रा बच के---मेरे भी ’फ़ेसबुक’ पे कदरदान बहुत हैंख़ातून भी ,हसीन  मेहरबान  बहुत हैं"रिक्वेस्ट फ़्रेन्डशिप"पे हसीना ने ये कहा-"लटके हैं पाँव कब्र में ,अरमान बहुत हैं"’अंकल’ -न प्लीज बोलिए ऎ मेरे जान-ए-जाँ’अंकल’, जो आजकल के हैं ,शैतान बहुत हैंटकले से...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 24, 2017, 4:55 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 40:1:जीवन की निशानी हैरमता जोगी हैऔर बहता पानी है;2:मथुरा या काशी क्यामन ही नहीं चमकाघट क्या ,घटवासी क्या:3:ख़ुद को देखा होतामन के दरपन मेंक्या सच है ,पता होता:4:बेताब न हो , ऎ दिल !सोज़-ए-जिगर तो जगाफिर जा कर उन से मिल:5;ये इश्क़ इबादत हैदैर-ओ-हरम दिल मेंऔर एक ज़ियार...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 21, 2017, 5:34 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 37:1:सद ख़्वाब ,ख़यालों मेंजब तक  है परदाउलझा हूँ सवालों में ;2:शिकवा  न शिकायत हैमैं ही ग़लत ठहराये कैसी रवायत है:3:तुम ने ही बनाया है ख़ाक से जब मुझ को फिर ऎब क्यूँ आया है ?:4:सच है इनकार नहीं’तूर’ पे आए ,वोलेकिन दीदार नहीं :5;कहता है कहने दोबात ज़हादत कीज़...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 21, 2017, 5:24 pm
हौसला है ,दो हथेली है , हुनर हैकिस लिए ख़ैरात पे तेरी नज़र हैआग दिल में है बदल दे तू ज़मानातू अभी सोज़-ए-जिगर से बेख़बर हैसाजिशें हर मोड़ पर हैं राहजन केजिस तरफ़ से कारवाँ की रहगुज़र हैडूब कर गहराईयों से जब उबरतातब उसे होता कहीं हासिल गुहर हैइन्क़लाबी मुठ्ठियाँ हों ,जोश हो तोफिर न ...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 13, 2017, 12:27 pm
एक व्यंग्य गीत : मैं तेरे ’ब्लाग’ पे आऊँ------[संभावित आहत जनों से क्षमा याचना सहित]-----मैं तेरे ’ब्लाग’ पे  जाऊँ ,तू मेरे ’ब्लाग’ पे आमैं तेरी पीठ खुजाऊँ  , तू मेरी  पीठ  खुजातू क्या लिखता रहता है , ये  बात ख़ुदा ही जानेमैने तुमको माना है  , दुनिया  माने ना मानेतू इक ’अज़...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 11, 2017, 12:15 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 38:1: उनका  मैं दीवानादेख रहें ऐसेजैसे मैं  बेगाना:2:कोरी न चुनरिया हैकैसे मैं आऊँ ?खाली भी गगरिया है;3:कुछ भी तो नही लेतीख़ुशबू ,गुलशन सेफूलों का पता देती:4:दुनिया का मेला हैसब तो अपने हीदिल फिर भी अकेला है:5:मुझको अनजाने मेंलोग पढ़ेंगे कलतेरे अफ़साने में...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  May 7, 2017, 8:06 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 39 [ अहवाल-ए-कश्मीर पर]:1:वो ख़्वाब दिखाते हैंजन्नत की ख़ातिरजन्नत ही जलाते हैं:2;नफ़रत ,शोले ,फ़ित्नेबस्ती जली किस कीरोटी सेंकी ,किसने ?:3:ये कैसी सियासत है ?धुन्ध ,धुँआ केवलये किस की विरासत है?;4:रहबर बन कर आतेकलम छुड़ा तुम सेपत्थर हैं चलवाते ;5:केसर की क्यारी में...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  April 28, 2017, 11:06 am
FaceBook और  Whatsup के ज़माने में और U CHEAT.......U SHUT UP----UUUUUU SHUT UP के दौर में एक ’क्लासिकल’ युगल  शिकायती :   गीत कैसे कह दूँ कि अब तुम बदल सी गईवरना क्या  मैं समझता नहीं  बात क्या !एक पल का मिलन ,उम्र भर का सपनरंग भरने का  करने  लगा  था जतनकोई धूनी रमा , छोड़ कर चल गयालकड़ियाँ कुछ है...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
Tag :
  April 22, 2017, 6:45 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3709) कुल पोस्ट (171408)