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गीत ग़ज़ल औ गीतिका

FaceBook और  Whatsup के ज़माने में और U CHEAT.......U SHUT UP----UUUUUU SHUT UP के दौर में एक ’क्लासिकल’ युगल  शिकायती :   गीत कैसे कह दूँ कि अब तुम बदल सी गईवरना क्या  मैं समझता नहीं  बात क्या !एक पल का मिलन ,उम्र भर का सपनरंग भरने का  करने  लगा  था जतनकोई धूनी रमा , छोड़ कर चल गयालकड़ियाँ कुछ है...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  April 22, 2017, 6:45 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 36:1:दुनिया को दिखाना क्या !दिल से नहीं मिलनाफिर हाथ मिलाना क्या !:2:कुछ तुम को ख़बर भी हैमेरे भी दिल मेंइक ज़ौक़-ए-नज़र भी है:3:गुरबत में हो जब दिलदर्द अलग अपनाकहना भी है मुश्किल:4;जितनी  भी हो अनबनतुम पे भरोसा हैरूठो न कभी , जानम !:5:मेरी भी तो सुन लेतेमैं जो ग़लत ह...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  April 8, 2017, 11:46 am
चन्द माहिया : क़िस्त 35:1:सजदे में पड़े हैं हमलेकिन जाने क्यूँ दिल है दरहम बरहम;2;जब से है तुम्हें देखादिल ने कब मानीकोई लक्ष्मन  रेखा:3:क्या बात हुई ऐसीतेरे दिल में अबचाहत न रही वैसी:4:समझो न कि पानी है क़तरा आँसू काख़ुद एक कहानी है:5:वो शाम सुहानी हैजिसमें है शामिलकुछ याद पु...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  March 28, 2017, 7:52 pm
मंच के सभी सदस्यों /मित्रों को इस अकिंचन का होली की बहुत बहुत शुभकामनायें ---इस गीत के साथलगा दो प्रीति का चन्दन मुझे इस बार होली में महक जाए ये कोरा तन-बदन इस बार होली में ये बन्धन प्यार का है जो कभी तोड़े से ना टूटेभले ही प्राण छूटे पर न रंगत प्यार की  छूटेअकेले मन नही...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  March 12, 2017, 12:42 pm
एक गीत : जाने क्यों ऐसा लगता है....जाने क्यों ऐसा लगता हैकटी कटी सी रहती हो तुम -सोच सोच कर मन डरता है जाने क्यों ऐसा लगता है कितना भोलापन था तेरी आँखों में जब मैं था खोताबात बात में पूछा करती -"ये क्या होता? वो क्या होता?"ना जाने क्या बात हो गई,अब न रही पहली सी गरमी कहाँ गय...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  February 3, 2017, 4:41 pm
एक ग़ज़ल : यकीं होगा नहीं तुम को....यकीं होगा नहीं तुमको  मिरे तर्ज़-ए-बयाँ  सेजबीं का एक ही रिश्ता तुम्हारे आस्ताँ  सेफ़ना हो जाऊँगा जब राह-ए-उल्फ़त में तुम्हारीज़माना तुम को पहचानेगा  मेरी दास्ताँ  सेमिली मंज़िल नहीं मुझको भटकता रह गया हूंबिछुड़ कर रह गया  हूँ  ज़िन्द...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  January 22, 2017, 1:32 pm
                     दो  मुक्तक :1:बात यूँ ही  निकल गई  होगीरुख़ की रंगत बदल गई होगीनाम मेरा जो सुन लिया  होगाचौंक कर वो सँभल गई होगी:2;कौन सा है जो ग़म दिल पे गुज़रा नहींबारहा टूट कर भी  हूँ   बिखरा   नहींअब किसे है ख़बर क्या है सूद-ओ-ज़ियाँइश्क़ का ये नशा है जो  ...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  January 20, 2017, 3:33 pm
सभी मित्रों  ,शुभ चिन्तकों .हितैषियो को , इस अकिंचन का नव वर्ष की शुभकामनाएं ----यह नव वर्ष 2017 आप के जीवन में सुख और समृद्धि लाए-आनन्द.पाठक और परिवार ----नए वर्ष की प्रथम भेंट है --आप सभी  पाठक के सम्मुख........एक गीत :- नए वर्ष की नई सुबह में....................नए वर्ष की नई सुबह में ,आओ मिल कर लि...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  January 1, 2017, 12:28 pm
एक कविता :  सूरज निकल रहा है.......सूरज निकल रहा हैमेरा देश,सुना हैआगे बढ़ रहा है ,सूरज निकल रहा हैरिंग टोन से टी0वी0 तकघिसे पिटे से सुबह शाम तकवही पुराने बजते गानेसूरज निकल रहा हैलेकिन सूरज तो बबूल परटँगा हुआ हैभ्रष्ट धुन्ध से घिरा हुआ हैकुहरों की साजिश से हैंघिरी हुई प्रा...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  December 25, 2016, 7:01 pm
एक फ़र्द शे’रवो चराग़ ले के चला तो है, मगर आँधियों का ख़ौफ़ भीमैं सलामती की दुआ करूँ ,उसे हासिल-ए-महताब हो-आनन्द पाठक-...
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  November 15, 2016, 7:48 pm
जो जागे हैं मगर उठते नहीं  उनको जगाना क्याखुदी को ख़ुद जगाना है किसी के पास जाना क्यानिज़ाम-ए-दौर-ए-हाज़िर का  बदलने को चले थे तुमबिके कुर्सी की खातिर तुम तो ,फिर झ्ण्डा उठाना क्याज़माने को ख़बर है सब  तुम्हारी लन्तरानी  कीदिखे मासूम से चेहरे ,असल चेहरा छुपाना क्यान चे...
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  October 14, 2016, 6:41 pm
नहीं उतरेगा अब कोई फ़रिश्ता आसमाँ सेउसे डर लग रहा होगा यहाँ अहल-ए-ज़हाँ सेन कोह-ए-तूर पे उतरेगी कोई रोशनी अबहमी को करनी होगी रोशनी सोज़-ए-निहाँ सेज़माना लद गया जब आदमी में आदमी थाअयाँ होने लगे हैं लोग अब आतिश-ज़ुबाँ सेअभी निकला नहीं है क़ाफ़िला बस्ती से आगेगिला करने लगे हैं लोग ...
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  October 12, 2016, 10:44 am
निक़ाब-ए-रुख में शरमाना, निगाहों का झुकाना क्याख़बर हो जाती है दिल को, दबे पाँवों  से आना क्याअगर हो रूह में ख़ुशबू  तो ख़ुद ही फैल जाएगीज़माने से छुपाना क्या  ,तह-ए-दिल में  दबाना  क्याअगर दिल से नहीं मिलता है दिल तो बात क्या होगीदिखाने के लिए फिर हाथ का मिलना मिलाना क्...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  September 21, 2016, 1:56 pm
चन्द माहिया : क़िस्त 34 :1:पूछा तो कभी होतादिल से जो मेरेये, किस के लिए रोता ? :2:सोने भी नहीं देतींयादें अब तेरीरोने भी नहीं देतीं :3:क्यों मन से हारे हो ?जीते जी मर करअब किस के सहारे हो? :4:ग़ैरों की सुना करतेमेरी कब सुनतेजो तुम से गिला करते :5:मुश्किल की पहल आएसब्र न खो देनाइक राह निक...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  September 17, 2016, 8:13 pm
एक ग़ैर रवायती ग़ज़ल    सपनों में ’लोकपाल’ था  मुठ्ठी में इन्क़लाब ’दिल्ली’ में जा के ’आप’ को क्या हो गया जनाब ! वादे किए थे आप ने ,जुमलों का क्या हुआ अपने का छोड़ और का लेने लगे हिसाब  ? कुछ आँकड़ों में ’आप’ को जन्नत दिखाई दी गुफ़्तार ’आप’ की हुआ करती  है लाजवाब&nb...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  June 10, 2016, 2:03 pm
अगर सोच में तेरी पाकीज़गी हैइबादत सी तेरी  मुहब्बत लगी हैमेरी बुतपरस्ती का जो नाम दे दोमैं क़ाफ़िर नहीं ,वो मेरी बन्दगी हैकई बार गुज़रा हूँ तेरी गली से हर इक बार बढ़ती गई तिश्नगी हैअभी नीमगुफ़्ता है रूदाद मेरीअभी से मुझे नींद आने लगी हैउतर आओ दिल में तो रोशन हो दुनियातुम्...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  May 28, 2016, 11:17 am
चन्द माहिया : क़िस्त 33:1:जब तुम ने नहीं मानाटूटे रिश्तों कोफिर क्या ढोते जाना:2:मुझ को न गवारा हैख़ामोशी तेरीआ, दिल ने पुकारा है:3:तुम तोड़ गए सपनेऐसा भी होगासोचा ही नहीं हमने :4:क्या वो भी ज़माना थाआँख मिचौली थीतुम से छुप जाना था:5:इक राह अनोखी हैजाना है सब कोपर किसने देखी है-आनन...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  May 21, 2016, 12:13 pm
क़तातेरी शख़्सियत का मैं इक आईना हूँतो फिर क्यूँ अजब सी लगी ज़िन्दगी हैनहीं प्यास मेरी बुझी है अभी तकअज़ल से लबों पर वही तिश्नगी है-आनन्द.पाठक-09413395592[अज़ल से = अनादि काल से]...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  May 16, 2016, 9:14 pm
:1:माना कि तमाशा हैकार-ए-जहाँ यूँ सबफिर भी इक आशा है:2:दरपन तो दरपन हैझूट नहीं बोलेक्या बोल रहा मन है ?:3:छाई जो घटाएं होंदिल क्यूँ ना बहकेसन्दल सी हवाएं हों:4:जितना देखा है फ़लकउतना ही होगाबातों में सच की झलक:5: कैसा ये नशा ,किसका ?कब देखा उस को ?एहसास है बस जिसका-आनन्द पाठक09413395592...
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  April 14, 2016, 8:55 pm
:1:माना कि तमाशा हैकार-ए-जहाँ यूँ सबफिर भी इक आशा है:2:दरपन तो दरपन हैझूट नहीं बोलेक्या बोल रहा मन है ?:3:छाई जो घटाएं होंदिल क्यूँ ना बहकेसन्दल सी हवाएं हों:4:जितना देखा है फ़लकउतना ही होगाबातों में सच की झलक:5: कैसा ये नशा ,किसका ?कब देखा उस को ?एहसास है बस जिसका-आनन्द पाठक09413395592...
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  April 14, 2016, 8:55 pm
होली पर सब मनई के अडवान्स में बधाई ......होली पर एगो ’भोजपुरी’ गीत रऊआ लोग के सेवा में ....नीक लागी तऽ  ठीक , ना नीक लागी तऽ कवनो बात नाहीं....ई गीत के पहिले चार लाईन अऊरी सुन लेईंमाना कि गीत ई पुरान बा      हर घर कऽ इहे बयान बाहोली कऽ मस्ती बयार मे-मत पूछऽ बुढ़वो जवान बा--- कबीरा स...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  March 23, 2016, 10:57 am
समस्त पाठकों को होली की शुभकामनाओं के साथ.......चन्द माहिया : होली पे.....:1:भर दो इस झोली मेंप्यार भरे सपनेआ कर इस होली में:2:मारो ना पिचकारीकोरी है तन कीअब तक मेरी सारी:3:रंगोली आँगन कीदेख रही राहेंरह रह कर साजन की:4:मन ऐसा रँगा ,माहिया !जितना मैं धोऊँउतना ही चढ़ा ,माहिया !:5:इक रंग ही ...
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  March 21, 2016, 10:52 am
समस्त पाठकों को होली की शुभकामनाओं के साथ.......चन्द माहिया : होली पे.....35:1:भर दो इस झोली मेंप्यार भरे सपनेआ कर इस होली में:2:मारो ना पिचकारीकोरी है तन कीअब तक मेरी सारी:3:रंगोली आँगन कीदेख रही राहेंरह रह कर साजन की:4:मन ऐसा रँगा ,माहिया !जितना मैं धोऊँउतना ही चढ़ा ,माहिया !:5:इक रंग ह...
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  March 21, 2016, 10:52 am
चन्द माहिया : क़िस्त 30:1:तुम से जो जुड़ना हैइस का मतलब तोअपने से बिछुड़ना है:2:आने को तो आ जाऊँरोक रहा कोईमैं कैसे ठुकराऊँ:3:इक लफ़्ज़ मुहब्बत हैजिसकी ख़ातिर मेंदुनिया से अदावत है:4;दीदार हुआ जब सेजो भी रहा बाक़ीईमान गया तब से:5:जब तू ही मिरे दिल मेंढूँढ रहा किस कोमैं महफ़िल महफ़िल में...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  March 10, 2016, 8:50 pm
यूँ तो तेरी गली से , मैं बार  बार गुज़रालेकिन हूँ जब भी गुज़रा ,मैं सोगवार गुज़रातुमको यकीं न होगा ,गर दाग़-ए-दिल दिखाऊँराहे-ए-सफ़र में कितना ,गर्द-ओ-गुबार गुज़राआते नहीं हो अब तुम ,क्या हो गया है तुमकोक्या कह गया हूँ ऐसा ,जो नागवार  गुज़रादामन बचा बचा कर ,मेरे मकां से बच करराह-ए-...
गीत ग़ज़ल औ गीतिका...
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  March 5, 2016, 8:11 pm
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