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कलम

आदरणीय ब्लागर मित्रो,अस्वस्थ होने के कारण शायद अंतरजाल पर  न आ  पाऊँ  ।  इसलिए कुछ समय के लिए शायद आप से भेंट न हो। स्वास्थ लाभ करके पुनः आपसे सम्पर्क स्थापित करूंगा। तब तक के लिए विदा:)...
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  February 26, 2012, 7:52 pm
कुछ उजले, कुछ अंधेरेबैकुंठ नाथ पेशे से वास्तुविद भले ही हों, पर हृदय से एक रचनाकार हैं जिनकी अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें उनके गीतों, कविताओं और कहानियों की अभिव्यक्ति हुई है।  ‘कुछ उजाले, कुछ अँधेरे’ उनका नवीनतम कथा संग्रह है जिसमें इक्कीस कहानियाँ ...
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Tag :समीक्षा
  February 22, 2012, 4:03 pm
बड़ासदियों पहले कबीरदास का कहा दोहा आज सुबह से मेरे मस्तिष्क में घूम रहा था तो सोचा कि इसे ही लेखन का विषय क्यों न बनाया जाय।  कबीर का वह दोहा था-बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड खजूरपथिक को छाया नहीं फल लागे अति दूर॥यह सही है कि बड़ा होने का मतलब होता है नम्र और विनय से भरा व्...
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Tag :लेख
  February 19, 2012, 10:00 pm
गुरुदयाल अग्रवाल के माध्यम सेकई दिनों बाद गुरुदयाल अग्रवाल जी की कविता आई... मेरा मतलब है उनके द्वारा चयनित कविता, जिसकी भूमिका भी उन्होंने लिखी है।  तो अब मैं और क्या कहूं?  मैं तो कुछ नहीं कहूंगा, हां, डॉ. ऋषभ देव शर्मा जी के विचार से आपको अवगत करा सकता हूँ।  उनका मानना है...
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Tag :कविता
  February 16, 2012, 7:01 pm
आगआज के समाचार पत्र में पढ़ा कि नगर के सितारा होटल में आग लग गई।  उसी के निकट एक मित्र का घर है, तो चिंता हुई कि हालचाल पूछ लें।  फ़ोन पर उन्होंने बताया कि उस हादसे के वे चश्मदीद गवाह रहे हैं।  भयंकर आग की लपेटें देखकर वे दूर जा खड़े हुए और वहाँ की गतिविधियों को देखते रहे।  ...
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Tag :हास्य-व्यंग्य
  February 13, 2012, 6:53 pm
हिंदी की जानकारी देती- विश्व हिंदी पत्रिका-२०११विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस हर वर्ष विशेषांक के रूप में विश्व हिंदी पत्रिका का वार्षिक अंक निकालती है जिसमें विश्व में हो रही हिंदी गतिविधियों की जानकारी मिलती है। इस वर्ष के ‘विश्व हिंदी पत्रिका-२०११’ में भी समस्त विश...
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Tag :समीक्षा
  February 8, 2012, 7:51 pm
pअतीत में झाँकते हुए...मूल : गाइ द मोपासाँअनुवाद: चंद्र मौलेश्वर प्रसाद"अच्छा बच्चो, सोने का समय हो गया है, अब जाकर सो जाओ।"राजकुमारी ने अपने दो पोतियों और एक पोते को दुलारते हुए कहा।  पादरी क्यूरे की गोद से उतरकर बच्चों ने दादी को ‘शुभरात्री’ कहा और अपने शयनकक्ष की ओर चल प...
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Tag :कहानी
  February 5, 2012, 4:43 pm
डॉ.गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ का अमृत महोत्सवकोई व्यक्ति जब ७५ वर्ष की आयु पर पहुँचता है तो उसके अपनों के लिए यह एक पर्व का अवसर बन जाता है।  ऐसा ही अवसर था वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ का अमृत महोत्सव जो जबलपुर में ४ नवम्बर २०११ को सम्पन्न हुआ।   उनका साहित...
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Tag :समाचार
  February 3, 2012, 6:45 pm
बूट पालिश [२००७] से साभारबूटपालिश वालारेल व्यवस्था मुम्बई शहर की जीवनरेखा कही जाती है।  हर अपरिचित व्यक्ति इस व्यवस्था को देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है।  इतनी तेज़ी से आती जाती रेलगाडियों के बावजूद स्टेशनों पर भीड़ जस की  तस नज़र आती है।  ऐसे में किसी ट्रेन में विंडो स...
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Tag :लेख
  January 30, 2012, 6:39 pm
लोकतंत्र - कितना सफलएक और बनता ही जा रहा था निर्माण का हिन्दुस्तानदूसरी ओर गिरता ही जा रहा था ईमान का हिंदुस्तान॥[केदारनाथ अग्रवाल]हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन के बाद भारत को जब गणतंत्र घोषित किया गया, तब जनता में एक नया उत्साह और उल्लास था कि उन्हें सच...
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Tag :मुद्दा
  January 25, 2012, 5:50 pm
लोकार्पण पिपासाडिस्क्लेमर: इस लेख के सभी पात्र काल्पनिक हैं।  यदि ऐसा कोई पात्र इस धरती पर चलता फिरता दिखाई दे तो उसकी ज़िम्मेदारी लेखक पर नहीं है :)हाल ही में तिरबेनी परसाद से रास्ते में भेंट हुई थी।  उन्होंने बताया कि वे एक पुस्तक रच रहे हैं जिसका शीर्षक है ‘महापुरुष...
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Tag :हास्य-व्यंग्य
  January 23, 2012, 5:27 pm
ये  घुटने है या बला! दिल्ली के सुप्रसिद्ध डॉ. टी.एस.. दराल- ब्लाग जगत के लिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं।  अपनी चिकित्सा के तजुर्बे से वे मानव घुटने के बारे में बताते हैं कि " इन्सान में बुढ़ापा सबसे पहले घुटनों में ही आता है । इसीलिए :* ४० + होते होते आपके घुटनों की व्यथा ...
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Tag :हास्य-व्यंग्य
  January 19, 2012, 10:51 pm
संयुक्त परिवार क्यों टूट रहे हैं?संयुक्त परिवार का यह चित्र ‘समय-live' से साभारआजकल एकल परिवार का चलन हो चला है और संयुक्त परिवार लुप्त होने के कगार पर हैं।  एक समय था जब संयुक्त परिवार भारत की जीवन पद्धति का अभिन्न अंग था।  तो फिर, अब यह बदलाव कैसा?यह सच है कि आजकल संयुक्त प...
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Tag :मुद्दा
  January 17, 2012, 4:14 pm
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  January 14, 2012, 10:27 pm
भूत प्रेत : अंधविश्वास या सत्य?भारत के कई प्रदेशों से यदा-कदा जादू-टोने के समाचार मिलते रहते हैं।  ऐस भी हुआ है कि जादू-टोना करने या करवाने के आरोप में गाँववालों ने जान भी ले ली है।  भूत-प्रेत और साया भगाने के लिए तांत्रिकों के पास जाकर टोना-टोटका भी किया जाता है।  इस अंधव...
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Tag :चर्चा
  January 13, 2012, 9:59 pm
आप लोगों को याद होगा कि कुछ अर्सा पहले मैंने एक पाठशाला के प्रश्न पत्र के माध्यम से वयोवृद्ध कवि एवं एक ज़िंदादिल इंसान से परिचय कराया था जिनका नाम है गुरूदयाल अग्रवाल।  अग्रवालजी चलता फिरता कविता संग्रह है जिनके मस्तिष्क में न जाने कितनी कविताएं भरी पडी हैं।  कविता...
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  January 6, 2012, 8:54 pm
लम्बी कैदमूल: लेव निकोलविच टॉल्सटायईवान दिमित्रिच अक्सेनोव नाम का एक व्यापारी व्लादमीर नगर में रहता था। उसकी अपनी दो दुकानें और एक निजी मकान भी था।  घुंघराले बाल, गोरा-चिट्टा रंग और गठित बदन वाला युवक अक्सेनोव एक हँसमुख और ज़िंदादिल इंसान था।  लहर में आता तो पीता, गात...
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Tag :कहानी
  January 5, 2012, 7:10 pm
ठंडक कैसी कैसीकल ही की बात है जब मैं ब्लागदर्शन कर रहा था तो ब्लागगुरू बी.एस.पाब्ला जी का ब्लाग ‘ज़िंदगी के मेले’ पर उनका सफ़रनामा मिला।  मोटर साइकल पर यात्रा करते हुए सुंदर चित्रों के साथ दिल दहलाने वाले ठंडक का वर्णन भी था।  इस लेख के अंत में वे बताते हैं- ‘गरदन घुमा क...
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Tag :हास्य-व्यंग्य
  December 31, 2011, 7:17 am
ऐतिहासिक उपन्यास- रानी लचिकाऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर कई उपन्यास लिखे गए हैं और कई उपन्यासकारों को इनसे ख्याति प्राप्त हुई है।  पृथवीवल्लभ, जय सोमनाथ, विराटा की पद्मिनी, विशाद मठ- ऐसे ही कुछ उपन्यास हैं जिन्हें आज भी बड़े चाव से पढ़ा जाता है।  अनिरुद्ध प्रसाद ‘वि...
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  December 22, 2011, 4:07 pm
सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-मैं घर में सबसे छोटा थामेरे हिस्से आई अम्मा- आलोक श्रीवास्तवइन पंक्तियों को पढ़कर कुछ पैरोड़ी लिखने को मन किया ... तो आलोक भाई से क्षमा मांगते हुए प्रस्तुत है :-देश में भ्रष्टाचार की धूम मची थीनेताओं को मिली मलाईजेल के हिस्से राजा आयाटुकड़े-टुकड़...
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Tag :पैरोड़ी
  December 19, 2011, 2:25 pm
दाढ़ी मूँछ का प्रभावहाल ही में हैदराबाद के वरिष्ठ व्यंग्यकार भाई भगवानदास जोपट जी से बुद्धिजीवियों की जानकारी के साथ-साथ मूँछ-दाढ़ी के संबंध में भी ज्ञान की श्रीवृद्धि हुई।  उनका मानना है कि "बुद्धिजीवी को अलग से पहचाना जा सकता है क्योंकि ये दूसरों से अलग होते हैं। ...
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Tag :हास्य-व्यंग्य
  December 11, 2011, 10:16 pm
महिला जीवन है एक ‘चक्की’एक संवेदनशील महिला अपने जीवन के इर्दगिर्द होते पारिवारिक घटनाओं को जब देखती है तो स्त्री पर होनेवाले प्रभावों को महसूस करती है।  इन घटनाओं में कभी भोगा हुआ यथार्थ होता है तो कभी किसी अन्य महिला से सुनी-सुनाई या फिर पत्र-पत्रिकाओं में पढ़ी घटना...
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Tag :पुस्तक
  December 9, 2011, 3:18 pm
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