Hamarivani.com

Kashish - My Poetry

                                 मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:                  तेरहवां अध्याय (क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग-योग-१३.१९-२६)प्रकृति और पुरुष दोनों कोतुम अर्जुन अनादि ही जानो.लेकिन विकार और गुणों कोतुम उत्पन्न प्रकृति से जानो.  (१३.१९)का...
Kashish - My Poetry...
Tag :क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग
  June 29, 2013, 2:44 pm
आये बड़ी उम्मीद से, ख़ुदा खैर करे, तेरे दर मौत मिली, ख़ुदा खैर करे.दिल दहल जाता है देख कर मंज़र,       क्या गुज़री उन पर, ख़ुदा खैर करे.उभर आती मुसीबत में असली सीरत,लूटते हैं लाशों को भी, ख़ुदा खैर करे.मुसीबतज़दा को कभी हाथ बढ़ा करते थे,  भूखे से भी करें व्यापार, ख़ुदा खैर करे.इ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 24, 2013, 2:47 pm
अंतराल जीवन और मृत्यु का क्यों होता कभी सुख दायक कभी पीड़ा से भरा, क्यों मिलता है कभी दुःखकरने पर सत्कर्म भी और जो लीन पाप कर्म मेंक्यों पाते वे सुख समृद्धि.मानता हूँ प्रभु, कर्म पर ही है मेरा अधिकार और मेरे ही कर्म होकर लिप्त आत्मा मेंकरते प्रवेश नव शरीर में पुनर्जन्म ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 20, 2013, 2:31 pm
छोटी छोटी उंगलियों से पकड़ कर हाथ चलना सीखा पिता के साथ,नहीं दे पाते थे छोटे छोटे पैरपिता के क़दमों का साथ,कर लेते अपने क़दम धीमेदेने बेटे के कदमों का साथ, थक जाने पर उठा लेते गोदी मेंनहीं महसूस हुआ कभी बेटे का भार.आज पिता के पैरहो गए अशक्तनहीं दे पाते साथबेटे के तेज़ क़...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 16, 2013, 12:58 pm
सारा जीवन गंवा दिया हैप्रश्नों के उत्तर देने में,बैठें भूल सभी बंधन को,कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहने दें.सूरज पाने की चाहत में,शीतलता शशि की बिसरायी,टूटे तारों से अब क्या मांगें,अब आस यहीं पर थमने दें.रिश्ते बने कभी ज़ंजीरें,यादें बनीं कभी अंगारे,बंद करें मुट्ठी में कुछ प...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 13, 2013, 1:39 pm
                                   मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        तेरहवां अध्याय (क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग-योग-१३.१२-१८)जो भी ज्ञेय तुम्हें बतलाता,जिसे प्राप्त जन मोक्ष है पाता.परम ब्रह्म अनादि है होता सत् या असत् न वह कहलाता.  (१३.१२)हाथ ...
Kashish - My Poetry...
Tag :क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग योग
  June 10, 2013, 1:49 pm
इन हथेली की लकीरों से, कहाँ तक़दीर बनती है,मुसाफ़िर ही सदा चलते, कभी मंज़िल न चलती है.चलो अब घर चलें, सुनसान कोने राह तकते हैं,सुबह ढूंढेंगे फ़िर सपने, अभी तो शाम ढलती है.यकीं है आख़िरी पल तक, वो इक बार आयेंगे,रुको कुछ देर तो यारो, अभी तो साँस चलती है.उठे न उंगलियां तुम पर, यही...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  June 4, 2013, 3:41 pm
जो भी मिला जीवन में चढ़ाये था एक मुखौटा अपने चेहरे पर, हो गया मज़बूर मैं भीसमय के साथ चलने,चढ़ा लिए मुखौटेअपने चेहरे पर.तंग आ गया हूँ बदलते हर पल एक नया मुखौटाहर सम्बन्ध, हर रिश्ते को.रात्रि को जब टांग देता सभी मुखौटे खूंटी पर, दिखाई देता आईने मेंएक अज़नबी चेहराऔर ढूँढता ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 29, 2013, 1:44 pm
                                  मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        तेरहवां अध्याय (क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग-योग-१३.१ -११)इस शरीर को सुनो धनञ्जय क्षेत्र रूप में जाना जाता.क्षेत्रज्ञ उसे तत्वविद हैं कहते जो मनुष्य है इसे जानता.  (१३.१)क्षेत्...
Kashish - My Poetry...
Tag :क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभाग
  May 20, 2013, 2:33 pm
एक बार तेरे शहर में आकर जो बस गया,      ता-उम्र फड़फडाता, किस पिंज़रे में फ़स गया.नज़रें नहीं मिलाता, कोई यहाँ किसी से,एक अज़नबी हूँ भीड़ में, यह दर्द डस गया.रिश्तों की हर गली से गुज़रा मैं शहर में,स्वारथ का मकडजाल, मुझे और क़स गया.साये में उनकी ज़ुल्फ़ के ढूंढा किये सुकून,वह ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 14, 2013, 2:46 pm
अहसासों के सूने जंगल में ढूंढ रहा वे अहसास जो हो गये गुम जीवन मेंजाने किस मोड़ पर.हर क़दम पर चुभती हैं किरचें टूटे अहसासों की, सहेज कर जिनको उठा लेता,शायद कभी मिल जायेंसभी टूटे टुकड़े और जुड़ जाये फिर सेटूटे अहसासों का आईना.बेशक़ होंगे निशान हरेक जोड़ परऔर न होगी वह गर्...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 9, 2013, 1:17 pm
                                 मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        बारहवाँ अध्याय (भक्ति-योग-१२.१२-२०)श्रेष्ठ ज्ञान अभ्यास से होता ध्यान ज्ञान से श्रेष्ठ कहाता.उससे श्रेष्ठ कर्म फल तजना,जिससे परम शान्ति है पाता.  (१२.१२)द्वेषहीन, मित्र है स...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  May 2, 2013, 1:02 pm
                                  (चित्र गूगल से साभार)दहशतज़दा है हर चेहरा मेरे शहर में,इंसान नज़र आते न अब मेरे शहर में.अहसास मर गए हैं, इंसां हैं मुर्दों जैसे, इक बू अज़ब सी आती है मेरे शहर में.हर नज़र है कर जाती चीर हरण मेरा, महफूज़ नहीं गलियां अब मेरे शहर में.घर हो गए मीनारें, इंसान ह...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 24, 2013, 1:28 pm
                                     (चित्र गूगल से साभार)क्यों पसरती जा रही हैवानियत इंसानों में,क्यों घटता जा रहा अंतरमानव और दानव में,क्यों हो गया मानवघृणित दानव से भी?भूल गया सभी रिश्ते और उम्रदिखाई देती केवल एक देह,बेमानी हो गए शब्द प्रेम, वात्सल्य और स्नेह,आँखों में है केवल भूख ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 20, 2013, 7:08 pm
                                 मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        बारहवाँ अध्याय (भक्ति-योग-१२.१-११)अर्जुन :जो भक्त निरंतर मनोयोग से सगुण रूप की पूजा करते.कुछ अविनाशी निराकार की हो एकाग्र उपासना करते.इन दोनों में कौन हे भगवन!सबसे श्रेष्ठ योग...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 19, 2013, 2:00 pm
आ जाए जब  जीना और मरना जीवन के प्रत्येक पल में,हर आती जाती श्वास दे अहसास मृत्यु और पुनर्जन्म का,पहचान लें अपनी कमियाँनिरपेक्ष भाव सेजो मिटा दे कलुष अंतर्मन का,देखें केवल द्रष्टा भाव सेसभी अच्छे और बुरे कर्मों को,बिना किसी पूर्वाग्रह के झांकें दूसरों के अंतर्मन में औ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 12, 2013, 1:14 pm
रमी का खेल रोके रखते कुछ पत्ते इंतजार में आने के बीच या साथी पत्ते के,नहीं आता वह और फेंक देते हाथ के पत्ते को.लेकिन अगला पत्ता होता वही जिसकी थी ज़रुरतहाथ का पत्ता फेंकने से पहले.होता है अफ़सोसकुछ पल को, लेकिन आ जाती मुस्कान कुछ पल बाद इच्छित पत्ता आने पर. यह अनिश्चितता ...
Kashish - My Poetry...
Tag :
  April 9, 2013, 1:59 pm
मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:         ग्यारहवाँ अध्याय (विश्वरूपदर्शन-योग-११.४७-५५) श्री भगवान:तुम पर प्रसन्न होकर के अर्जुन यह परमोत्तम रूप दिखाया.तेजोमय, अनंत, विश्वरूप यह,इससे पहले न कभी दिखाया.  (११.४७)न वेदाध्यन स्वाध्याय यज्ञ ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  April 2, 2013, 2:21 pm
   अपनी शुभ्र चांदनी से प्रेमियों के मन को आह्लादितकरता, चमकते तारों से घिरा उजला चाँद भी अपने अंतस में कितना दर्द छुपाये रहता है इसका अहसास विजय कुमार सप्पत्ति जी ने अपने प्रथम काव्य-संग्रह "उजले चाँद की बेचैनी"में बहुत शिद्दत से कराया है. प्रेम के विभिन्न आयामों को अ...
Kashish - My Poetry...
Tag :विजय कुमार सप्पत्ति
  March 30, 2013, 10:09 pm
नहीं फाग के स्वर आते हैं,ढोलक ढप हैं मौन हो गए,अब उत्साह नहीं है मन में अब होली में रंग नहीं है.न मिठास बाक़ी रिश्तों में, मिलते हैं गले अज़नबी जैसे,रंग गुलाल हैं पहले ही जैसे प्रेम पगे पर रंग नहीं हैं.महंगाई सुरसा सी बढ़ती,है गरीब की थाली खाली,कैसे ख़ुमार छाये होली का जब ग...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  March 25, 2013, 1:48 pm
मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        ग्यारहवाँ अध्याय (विश्वरूपदर्शन-योग-११.३५-४६) संजय: राजन, केशव वचनों को सुनकरकिया प्रणाम था कंपित कर से।नमस्कार पूर्वक था अर्जुन बोला भय और हर्ष से रुधित गले से.  (११.३५)अर्जुन:सुनकर कीर्ति आपकी ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  March 19, 2013, 2:42 pm
                                                         (चित्र गूगल से साभार) शब्द थे खो जाते भाव के बवंडर में और रह जाता खड़ा बन के मौन पुतला तुम्हारे सामने.सोचा बाँध कर रख दूं एक पोटली में उन शब्दों को जो कह न पाया,और सौंप दूँ तुम्हें तुम्हारे आने पर.तुम्हारी मंज़िल की राह नहीं जाती अब इस गली ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  March 15, 2013, 12:51 pm
  (१)स्त्री का सम्मानपुरुषत्व की शानकब जानोगे?    (२)नारी दिवसतब बने सार्थकरोज़ दो मान.      (३)न होती जो माँ कहाँ होता अस्तित्व,वह भी है स्त्री.   (४)नहीं अबला आज की यह नारी,कल से डरो.  (५)नारी का मान बनाता घर स्वर्ग आज़मा देखो.     (६)आने दो बेटीकरोगे महसूस क्या होता प्यार.  (७)न हो ...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  March 8, 2013, 10:22 am
मेरी प्रकाशित पुस्तक 'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' के कुछ अंश:        ग्यारहवाँ अध्याय (विश्वरूपदर्शन-योग-११.२६-३४) सब धृतराष्ट्र पुत्र व राजाभीष्म द्रोण कर्ण परमेश्वर!साथ हमारे पक्ष के योद्धाकरते प्रवेश आप मुख अंदर. विकराल आपके मुख मेंशीघ्र दौड़ प्रवेश कर रहे....
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  March 6, 2013, 2:55 pm
मिल जाताचंद लम्हों का अहसास तुम्हारे साथ होने का,गुनगुनाता तुम्हारे गीत मेरा आशियाँ आज भी.******ख्वाबों का आशियाँअब भी है बेताब रात की तन्हाई में सुनने को एक आहटतुम्हारे कदमों की.******अश्क़ भी हैं भूल गए नयनों से गिरना,रह गयीं सूखी लक़ीरेंतप्त कपोलों परतुम्हारे इंतज़ार म...
Kashish - My Poetry...
Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  February 26, 2013, 1:38 pm
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163613)