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बेचैन आत्मा

लोहे के घर मेंखिड़की के पास ड्रम के ऊपर बैठी बच्चीकभी इस खिड़की सेकभी उस खिड़की सेझाँक रही है बाहरगोधुली बेला हैतेजी से बदल रहे हैं दृश्यचर रही हैं बकरियाँलड़के खेल रहे हैं क्रिकेटआ/जा रही हैं झुग्गी-झोपड़ीएक झोपड़ी के बाहर आंगन बुहार रही हैएक लड़कीबच्ची के दुधमुँहे भाई को ...
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Tag :ट्रेन
  May 25, 2017, 7:05 am
बच्चों की चाँद-चाँदनी लहर-लहर संसार हाथों के गट्टे सहलाते माझी के पतवार....
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Tag :गोमती
  April 14, 2017, 11:19 am
घने वृक्ष की छाँव क्या करे?मन बैसाखी धूप!सूखी रोटी कैसे खायें?चाँद पी गया दूध!...
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Tag :सारनाथ
  April 14, 2017, 11:14 am
मंदिर के दरवाजों में लिखे दोहे भावनाएं हैं जिन्हें पढ़ना और समझना आनन्द दायक है.अनित्य भावना राजा राणा छत्रपति, हाथिन के असबार.मरना सबको एक दिन, अपनी-अपनी बार.. अनित्य यानि अस्थिर, चंचल, छणिक, परिवर्तनशील, विनाशी, संसार की हर वस्तु, हर नाता रिश्ता, हमारा शरीर, आयु, रूप-ल...
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Tag :जैन धर्म
  April 4, 2017, 10:01 am
यूँ तो मॉर्निंग रोज ही गुड होती है लेकिन नौकर की मॉर्निंग तभी गुड होती है जब नौकरी से छुट्टी का दिन हो और लगे आज तो हम अपने मर्जी के मालिक हैं। कैमरा लेकर, मोबाइल छोड़ कर सुबह ही घर से निकलने के बाद हरे-भरे निछद्द्म वातावरण में अकेले घूमते हुए एहसास होता है कि हम भी इसी स्वत...
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Tag :सुबह की बातें
  February 19, 2017, 9:04 pm
नींद से जाग कर/करवट बदल फिर सो गया/ लोहे के घर में/ खर्राटे भरता आदमी. भीड़ नहीं है ट्रेन में/ जौनपुर पहुँचने वाली है / किसान. मजे-मजे में सुन रहे थे सभी रोज के यात्री उसके खर्राटे. तास खेलने वाले खर्राटे के सुर से सुर मिलाकर जोर से पटकते हैं अपने पत्...
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Tag :यात्रा
  February 19, 2017, 8:50 pm
न आम में बौर आया, न गेहूँ की बालियों ने बसन्ती हवा में चुम्मा-चुम्मी शुरू करी, न धूल उड़े शोखी से और न पत्ते ही झरे शाख से! अभी तो कोहरा टपकता है पात से। सुबह जब उठ कर ताला खोलने जाता हूँ गेट का तो टप-टप टपकते ओस को सुन लगता है कहीं बारिश तो नहीं हो रही! कहाँ है बसन्त? कवियों के ब...
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Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  February 19, 2017, 8:20 pm
वरिष्ठ नागरिक होनेऔररिटायर्ड होने कीनिर्धारित उम्रसाठ साल होती हैसाठ सेपाँच ही कम होता हैपचपन साल का आदमीसमा जाते हैंहाथ की पाँच उँगलियों मेंख़ास होते हैंये पाँच सालफैले तो जिंदगीरेत की तरह फिसलती,भिखारी-सी लगेजुड़े तोमुठ्ठी बन जाय!कभीअँगूठा या तर्जनी मत दिखाना!पच...
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Tag :
  February 3, 2017, 8:05 am
बच्चों बताओ! बजट कौन बनाता है? कक्षा के सभी बच्चों ने उत्तर दिया-वित्त मंत्री । मगर एक ने हाथ उठा कर कहा-गृह मंत्री! उत्तर सुनते ही गुरूजी म्यान से बाहर! गृह मंत्री वाला जवाब उनकी कुंजी में नहीं था जिससे वो पढ़ाते थे और न उस तंत्र के पास था जिसने उन्हें गुरूजी बनाया था। सजा ...
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Tag :व्यंग्य की जुगलबंदी
  January 29, 2017, 12:35 pm
बीहड़ में किसी डाकू का दिल बड़े गिरोह पर आ जाय और वह लूट में अधिक हिस्से के लोभ में अपना दल बदल कर बड़े गिरोह में शामिल हो जाय तो किसी को कोई अचरज नहीं होता। जंगल का अपना क़ानून होता है। ताकत की सत्ता होती है। अस्तित्व का संघर्ष होता है। सत्ता की छाया में अधिक माल लूटने या जान ...
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Tag :व्यंग्य
  January 22, 2017, 7:39 pm
क्या पाण्डे जी! विश्व पुस्तक मेला लगा था दिल्ली में, गये नहीं?हाँ मिर्जा, नहीं गये। टिकट नहीं था।आप कहते तो टिकट कटा देता आपका। दिल्ली कौन दूर है?ट्रेन के टिकट की बात नहीं कर रहा मिर्जा, मैं पुस्तक मेला के टिकट की बात कर रहा हूँ! पुस्तक मेले में वही लेखक जाता है जिसकी एका...
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Tag :व्यंग्य
  January 19, 2017, 10:35 pm
देखो! सुनो! समझो! तब बोलो।बोलो तो..जोर-जोर से बोलोपूरे आत्मविश्वास से बोलोदो चार और सुनें कि तुमनेक्या देखा? क्या सुना? और क्या समझा?विचलित मत होनाजब वे बोलेंचिल्लाने मत लगना..झूठ! झूठ!तुम गलत! तुम गलत!मैं सही! मैं सही!ध्यान से सुननाउन्होंने क्या बोलाऔर समझनाकि यहउनका देख...
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Tag :दर्शन
  January 15, 2017, 11:00 am
'हाय! ललमुँही, आज तो बड़ी रफ्तार से चल रही हो!' 40 मिनट में जौनपुर से खालिसपुर आ गई!!!'..हवा ने ट्रेन को छेड़ा।दून ने लम्बी सीटी बजाई और खालिसपुर से भी चल दी। 'चुप री पगली हवा! बहुत लेट हो चुकी हूँ पहले से ही। कुछ तो समय कवर करने दे। मुझे जौनपुर दिन में 2 बजे ही पहुँचना था, शाम हो ...
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Tag :
  January 8, 2017, 9:30 pm
कोहरा घना है। सड़क पर चमक रही हैं वाहनों की आँखें। छोटे कस्बे में रुकती है बस। दिखते हैं शाल, स्वेटर, मफ़लर या कम्बल ओढ़े आम आदमी। सुनाई पड़ती है आग तापते, चाय की चुस्की लेते या खैनी रगड़ते लोगों की हँसी-ठिठोली। एक बैल वाली 5-6 गाड़ियों का काफिला देखा। बोरा या कथरी ओढ़े ग्रामीण हा...
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Tag :यात्रा
  January 8, 2017, 9:15 pm
"चुनाव और दंगल"विषय सुनते ही #मिर्जा की ऑंखें भर आईं। मुश्किल से मुँह खोल पाया और भर्राई आवाज में बोल पड़ा-सब आपस में गड्डमगड्ड हौ पाण्डे! पहिले दंगा भयल रहल फिन चुनाव। एहर चुनाव क घोषणा भयल ओहर दँगा शुरू। कब्बो चुनाव के बादो दँगा भयल। अउर कब्बो-कब्बो त वोटिंग अउर दंगा...
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Tag :
  January 8, 2017, 9:01 pm
शाम के शोर से भोर का मौन अच्छा है शाम महबूबा है मेरी,भोर एक मासूम बच्चा हैशब्दों का खजाना था शाम के पास एक भी याद नहीं रात के बाद भोर बोलता कुछ नहीं मगर सुनता हूँ खुद ब खुद अभिव्यक्त होता है चहक लूँ मन ही मन पंछियों के जगने से पहले अभी अँधेरा है,&...
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Tag :सुबह की बातें
  January 8, 2017, 12:03 am
लोहे के घर की खिड़की से झाँक रहा हूँ मैं और घर में घुसने का प्रयास कर रहा है #कोहरा। आजकल रोज के यात्रियों के समय से नहीं आती #ट्रेन, ट्रेन के समय से चलना पड़ता है यात्रियों को। लेट है अपनी #फोट्टीडाउन, दस बजे के बाद आयेगी। भोर में आने वाली #किसान सुबह 7 बजे के आस-पास चल...
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Tag :फेसबुक स्टेटस
  January 7, 2017, 11:34 pm
सोंचता हूँक्या करेंगे अँधेरा देखने वालेअगर सत्ता उन्हीं की हो?फाँसी चढ़ा देंगे जिन्होंने छपाई की नहीं पक्कीया बाँट देंगे घरों में मशीनेछाप लो नोटें अपने मन मर्जीक्या करेंगे?कोंच देंगे कलम को बायें गाल पर चाँद केया तोड़ देंगे नोकसो रहेंगे चैन से अंधेरी गुफा में!क्या क...
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Tag :नोट बंदी
  November 27, 2016, 8:40 pm
धमेख स्तुप के ऊपर कौए अधिक थेकबूतर कमतोतेकर रहे थे टांय-टांयकर रहे थे भगवान से प्रार्थनाकह रहे थे...कौए बढ़ रहे हैं, कबूतर उड़ रहे हैंकुछ करो!यह अच्छी बात नहीं!हंसने लगाउगता सूरजबुद्ध नहीं,यह लड़ाईकबूतरों को ही लड़नी हैतुम भगवान से प्राथना मत करोआलोचना मत करोउत्साहित कर...
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Tag :सारनाथ
  November 27, 2016, 8:26 pm
अबखुशी नहीं होतीजबतेज रफ़्तार से चलती है ट्रेनडर लगता हैएक पुलआया था अभीथरथराया वोऔर..डर गयालोहे का घर!सुनी थी चीखेंइसके यात्रियों नेकल देर रात तकटी.वी. परदिखाये थे रिपोर्टर नेएक के ऊपर एकचढ़ी हुई बोगियाँहस्पताल जातेघायल यात्रीजमा किये गयेलावारिश झोले,शादी के कार्ड,...
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Tag :कविता
  November 21, 2016, 10:21 pm
उजला काला हो गया, बंद हुआ जब नोट.झटके में जाहिर हुआ, सबके मन का खोट..चलते-चलते रुक गया, अचल हुआ धन खान.हाय! अचल धन पर गड़ा, मोदी जी का ध्यान..जोर-जोर से हो रहा, चोर-चोर का शोर.कोई काजल चोर है, कोई अँखिए चोर..लोभ लपक बच्चा बढ़े, बूढ़ा पकड़े मोह।निरवंशी घातक बड़ा, व्यापे लोभ न मोह।।दो पैग ...
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Tag :नोट बंदी
  November 20, 2016, 11:05 am
नोट बंदी के फैसले के बाद लोहे के घर में बदहवास 500 के पुराने नोट लिये यात्री अब नहीं दिखते। 8 तारीख के बाद तो यह स्थिति थी कि लालच देकर यात्री भिखारी/वेंडरों से छुट्टा मांग रहे थे। एक भिखारी ने तो झटक ही दिया था-हमको बेवकूफ समझे हो क्या?अब लोग सिर्फ तारीफ करते हुए ही मिलते है...
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Tag :ट्रेन
  November 20, 2016, 10:49 am
दिन भर लाइन में खड़े होने वाले रात भर दिवाली मनाते है!हम बनारसी हैंतम का मातम नहीं, अपने अंदाज से अँधेरा दूर भगाते हैं।आज निकला थाथोड़ा बड़ा होकरहुई थी आहट उसके आने कीदिखे थेगंगा की लहरों मेंचाँदनी के पद चिन्ह!इतने दीप जले थे गंगा के घाटों परकि शरमा कर चला गयापून...
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Tag :कार्तिक पूर्णिमा
  November 15, 2016, 10:37 pm
टी. वी. के समाचार चैनलों से एक निर्धारित समय में सत्य का ज्ञान क्या, देश-विदेश के सभी प्रमुख समाचारों का ज्ञान भी नहीं होता। भले ही ये चैनल निष्पक्ष होने का कितना ही दावा करें लेकिन चैनल खुलने से पहले ही हमारे दिमाग में उसके पक्ष का भान रहता है। हमें पता रहता है कि यह दक्ष...
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Tag :भक्त
  November 6, 2016, 1:35 pm
पाण्डे के प्रश्न....वेतन मिली त हो जाई खर्चा नाहीं त लागी मिर्ची के मर्चाकपारे पे आयल हौ फिन से दिवारी देश कइसे चली अब बतावा तिवारी ?लक्ष्मी के पाले लक्ष्मी जी गइलिन उल्लू के पीठी पे बोझा धरउलिनकपारे पे आयल हौ फिन से दिवारी देश कइसे चली अब बतावा तिवारी ?उल्लू उठाई ...
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Tag :हास्य-व्यंग्य।
  October 29, 2016, 1:35 pm
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