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स्वप्नलोक

देवताओं के दाढ़ी और मूँछें नहीं होती थीं । वे हमसे ताकतवर थे ।उनको युद्ध में हराना मुश्किल था लेकिन असंभव नहीं । रावण के डर से वे थरथर काँपते थे ।...उनके असुरों के साथ युद्ध होते रहते थे ।हमारे ऊपर उनकी कृपा बनी रहती थी क्योंकि हम देवताओं और असुरों के बीच बफर स्टेट थे ।दे...
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  May 4, 2013, 12:12 pm
आज मूर्ख-दिवस निकल गया । सबको बड़ी बेसब्री से इसका इंतजार रहता है । इसलिए नहीं कि इंतजार करने वाले सब मूर्ख हैं बल्कि इसलिए ताकि इस सुअवसर का सदुपयोग दूसरे लोगों को मूर्ख साबित करने के लिए कर सकें । एक बार दूसरों को मूर्ख सिद्ध कर दिया फिर स्वयं को तो ऑटोमैटिकली विद्वान...
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  April 1, 2013, 10:40 pm
 कभी धूप से करे मित्रताकभी छाँव के दल में जानाबात अटपटी फिर भी हमकोलगे नवम्बर माह सुहाना हमसे दूरी लगे बढ़ानेअब ऐसे ये सूरज दादाजैसे हमसे कर्ज लिए होंकरते हों हम रोज तकादा पंखे की छिन गई नौकरीकूलर, एसी के जैसीहीटर की उम्मीद बढ़ गईयद्यपि ठण्ड नहीं ऐसी शीतल पवन मुफ़्त मिल...
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  November 8, 2012, 10:06 pm
     इस निबंध को हिन्दी दिवस के अवसर पर नगर स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के लिए लिखा गया था । जब इसे प्रथम पुरस्कार मिल गया तो जनता की भारी माँग पर इसे यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है । आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  February 21, 2012, 8:50 am
This is a temporary post that was not deleted. Please delete this manually. (64965367-7ee8-4357-a7f9-a634e4b9da11 - 3bfe001a-32de-4114-a6b4-4005b770f6d7)आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  February 21, 2012, 7:59 am
ताजगी अक्टूबर का मासदूर दूर तक नहीं कहीं परगरमी का आभासताजगी अक्टूबर का मासधरती जैसे हुई पुष्पमयनभ ने कहा शरद ऋतु की जयअब न उमस का है कोई भययत्र तत्र सर्वत्र, दिखाई देता बस उल्लासताजगी अक्टूबर का मासत्यौहारों की चहल पहल हैखेतों में धान की फसल हैलगता है ज्यों पवन नवल ह...
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  October 3, 2011, 10:44 am
शर्म मँगाओ !संसद के गलियारों में है इसकी किल्लतशर्म मँगाओ !बम फूटे हौसला न टूटे,मंत्रालय न हाथ से जाए ।चाहे पड़े झेलनी जिल्लतपर मंत्रीपद को न गँवाओशर्म मँगाओ !बिना शर्म के नहीं चलेगाकुछ उपाय कुछ बात करोकरो देश में ही वसूलया बाहर से आयात कराओशर्म मँगाओ !संसद के गलियारो...
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  September 7, 2011, 8:37 pm
धूप-छावँ का नाम सितम्बरकोई उजली शाम सितम्बरवसुधा तृप्त हुई जल पीकरहरियारी फैली धरती परधरती का गुलफ़ाम सितम्बरकोई उजली शाम सितम्बरवर्षा सारा जहाँ धो गईलेकिन अब कुछ मंद हो गईइसका अल्प विराम सितम्बरकोई उजली शाम सितम्बरबादल थककर वापस जातेबचाकुचा पानी बरसातेदेता कु...
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  September 1, 2011, 8:25 pm
आज इस टिप्पणीकार की तमाम टिप्पणियाँरह रहकर याद आ रहीं हैं । हम जहाँ डॉक्टर साहब से मौज लेने के अवसर तलाशते रहते थे वहीं उनसे थोड़ा सा डरते भी थे कि कहीं हम कुछ ऐसा न लिखें जिससे उन्हें टोकना पड़े । यहाँ काफी कुछ मन में घुमड़ रहा है लेकिन अब लिखा न जाएगा ।आज डॉक्टर अमर कुम...
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  August 24, 2011, 10:55 am
तेरा दावा है कि तू भारत का पूत है ।मुझको लगता है कि तू दुश्मन का दूत है ॥अक्ल से तू एकदम कंगाल हो गया ।माना कि तेरे पास में दौलत अकूत हैमेरी माने तो अब आबरू बचा ले तू ।पब्लिक खड़ी है देख ले हाथों में जूत है ॥खींच ली जाएगी लंगोटी तेरी ।सबको लगता है कि तू भागता भूत है ॥आपकी प्...
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  August 23, 2011, 11:59 am
आज काफी दिनों के बाद ब्लाग पर आने का समय मिला है । असल में पड़ौस के बच्चों को स्कूल के लिए मौसम पर कविता लिखकर ले जानी थी । उनकी डिमाण्ड पर एक कविता लिखी तो सोचा इसे क्यों न ब्लॉग पर भी डाल दिया जाय जिससे इसका सूखा भी समाप्त हो सके । एक बार गरमी से परेशान होकर एक कविता लिखी थ...
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  July 10, 2011, 6:29 am
सचिन को शतकों के अर्धशतक की बधाई । इस अवसर पर मैं सरकार को एक मुफ्त की सलाह देना चाहता हूँ कि वह सचिन की उम्र के बारे में बात करने को दण्डनीय अपराध घोषित करने के लिए एक कानून बनाए । इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाय । फिर देखें कौन रोकता है संसद को चलने से ?आपकी प्रतिक...
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  December 20, 2010, 9:01 am
मेहमानों का आपने, खूब किया सत्कार ।गर्दन नीची हो गई, पहन-पहनकर हार ।।पहन-पहनकर हार, फिरें कीवी इतराते ।क्लीन स्वीप कर मेजबान भी दाँत दिखाते ।।विवेक सिंह यों कहें, कर्ज यह ऐहसानों का ।चुके जल्द से जल्द, फर्ज है मेहमानों का ।।आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  December 10, 2010, 6:25 pm
जब राम जी को वनवास के दौरान यह खबर मिली कि अयोध्या में घोटाला हुआ है तो वे न तो उदास हुए और न अपनी प्रसन्नता ही उन्होंने लक्ष्मण जी को जाहिर होने दी । पर जो लोग यह दावा करते थे कि वे खत का मजमून भाँप लेते हैं लिफ़ाफ़ा देखकर, उन्होंने यह दावा किया कि राम जी को खुशी हुई थी क्यो...
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  November 10, 2010, 1:45 pm
ओ मामा कुछ देते जानासीट सुरक्षा परिषद की दोया देने का करो बहानाओ मामा कुछ देते जाना थोड़ी सी तारीफ हमारीकर दोगे यदि अबकी बारीबिगड़ेगी न तबीयत थारीफिर यूँ काहे का शरमानाओ मामा कुछ देते जाना "भ्रष्टाचार कहीं भारत मेंमिला न मुझे किसी हालत मेंहै ईमान यहाँ नीयत में"दुनिया ...
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  November 7, 2010, 5:33 pm
यूँ तो हम सभी जानते हैं कि जो आया है उसे कभी न कभी जाना ही है । फिर भी अपने प्रिय से बिछुड़ जाने पर दुख तो होता ही है ।यही दुख मुझे तब हुआ जब लगभग तीन साल तक उठते-बैठते, सोते-जागते, खाते-पीते हमेशा मेरे साथ रहने वाला मेरा प्रिय मोबाइल नोकिया 6085 मेरा साथ छोड़ गया ।उसके साथ मेरी क...
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  October 19, 2010, 3:29 pm
   ये चित्र वर्धा सम्मेलन के समय के हैं ।आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  October 14, 2010, 6:38 pm
  वर्धा ब्लॉगर सम्मलेन  के बारे में बहुत कुछ कहा और लिखा जा चुका है . हम भी कुछ आँखों देखा कानों सुना न कह लें तब यह कैसे लगेगा की हम वर्धा गए थे ?वर्धा के गलियारों से (कुछ झूठ कुछ सच ) प्रयास किया गया था की सभी विचारधाराओं के प्रतिनिधि  ब्लागरों को  बुलाया जाय . विचारधार...
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  October 13, 2010, 10:01 am
लगता है शर्मीला बगुलाहोता किन्तु हठीला बगुलाकई रंग में मिलता बगुलाश्वेत रंग अति खिलता बगुलाश्वेत रंग यदि है भी बगुलादूध-धुला नहिं वह भी बगुलाटेढ़ी गरदन वाला बगुलालम्बी टाँगों वाला बगुलापानी में न फिसलता बगुलामछली पकड़ निगलता बगुलानहीं चूककर रोता बगुलाफिर से चोंच ड...
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  October 6, 2010, 10:46 am
खाता खोला स्वर्ण का, सही निशाना मारबिन्द्रा-नारंग को कहें, बहुत बहुत आभारबहुत बहुत आभार बनाया कीर्तिमान हैअर्जुन की इस मातृभूमि की बढ़ी शान हैविवेक सिंह यों कहें खुश हुई भारत मातासही निशाना लगा स्वर्ण का खोला खाताआपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  October 5, 2010, 1:13 pm
बापू फिर से आइये, भारत में इक बार ।नीति अहिंसा की यहाँ, लागू भली प्रकार ॥लागू भली प्रकार, न दी अफ़जल को फाँसी ।फूलें हाथ-पैर यदि हो कसाब को खाँसी ॥विवेक सिंह यों कहें, उतारी हिंसा सिर से ।भारत में इक बार आइये बापू फिर से ॥आपकी प्रतिक्रियाओं का स्वागत है ....
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  October 2, 2010, 9:15 pm
राम जी ! बहुत मुबारकबाद !अब वनवास न जाना होगाबोल दो भक्तों को धन्यवादराम जी ! बहुत मुबारकबाद !अपनी जन्मभूमि पर रहनाइतनी खुशी मिली, क्या कहनाकष्ट पड़ा भक्तों को सहनासभी को देनी होगी दादराम जी ! बहुत मुबारकबाद !न्याय आपके साथ कर दियामुकुट आपके शीश धर दियाखुशियों से संसार ...
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  September 30, 2010, 5:50 pm
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