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गज़लहाथ आई हयात कुछ भी नहींबात यूं है कि बात कुछ भी नहीं                          11-01-2013यू तो मेरी औक़ात कुछ भी नहींकाट लूं दिन तो रात कुछ भी नहीं                                 29-10-2018-संजय ग्रोवर29-10-2018...
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Tag :night
  October 29, 2018, 10:28 pm
ग़ज़लआओ सच बोलेंदुनिया को खोलेंझूठा हंसने सेबेहतर है रो लेंपांच बरस ये, वोइक जैसा बोलेंअपना ही चेहराक्यों ना ख़ुद धो लेंराजा की तारीफ़जो पन्ना खोलेंक्या कबीर मंटोकिस मुह से बोलें !सबको उठना है-सब राजा हो लें !वे जो थे वो थेहम भी हम हो लेंबैन करेगा क्याख़ुद क़िताब हो लें-सं...
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Tag :lie
  October 1, 2018, 7:48 pm
ग़ज़लजब खुल गई पहेली तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबेमाइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसांजो तुम तलक है पहुंचा, उन तक भी पहुंच जाएतुम बन गए...
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Tag :जागरुकता
  August 26, 2018, 7:03 pm
ग़ज़लभागते फिरते हैं वो सुंदर मकानों मेंठग कभी टिकते नहीं अपने बयानों मेंशादियों में नोंचते हैं फूल अलबत्ताप्यार की भी कुछ तड़प होगी सयानों में           भीड़ में इनका गुज़र है, भीड़ में आनंदजाने कैसा ख़ालीपन है ख़ानदानों मेंजाने क्या सिखलाया उन्ने व्याख्यानों मे...
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Tag :institutions
  August 8, 2018, 9:15 pm
photo by Sanjay Groverग़ज़लभीड़, तन्हा को जब डराती हैमेरी तो हंसी छूट जाती हैसब ग़लत हैं तो हम सही क्यों होंभीड़ को ऐसी अदा भाती हैदिन में इस फ़िक़्र में हूं जागा हुआरात में नींद नहीं आती हैभीड़, तन्हा से करती है नफ़रतऔर हक़ प्यार पे जताती हैएक मुर्दा कहीं से ले आओभीड़ तो पीछे-पीछे आती हैपूरी और...
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Tag :crowd
  June 27, 2018, 9:40 pm
ग़ज़लcreated by Sanjay Groverहिंदू कि मुसलमां, मुझे कुछ याद नहीं हैहै शुक्र कि मेरा कोई उस्ताद नहीं हैजो जीतने से पहले बेईमान हो गएमेरी थके-हारों से तो फ़रियाद नहीं हैजो चाहते हैं मैं भी बनूं हिंदू, मुसलमांवो ख़ुद ही करलें खाज, मुझपे दाद नहीं हैइंसान हूं, इंसानियत की बात करुंगाआज़ाद है ...
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Tag :harmony
  June 20, 2018, 11:54 pm
ग़ज़लदूसरों के वास्ते बेहद बड़ा हो जाऊं मैंइसकी ख़ातिर अपनी नज़रों से भी क्या गिर जाऊं मैंएक इकले आदमी की, कैसी है जद्दोजहदकौन है सुनने के क़ाबिल, किसको ये दिखलाऊं मैंजब नहीं हो कुछ भी तो मैं भी करुं तमग़े जमाबस दिखूं मसरुफ़ चाहे यूंही आऊं जाऊं मैंबहर-वहर, नुक्ते-वुक्ते, सब लग...
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Tag :history
  June 19, 2018, 11:01 pm
ग़ज़लराज खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़ुश होता हूं मैं सच्ची बात को कहकेउतना ख़ुश और किसी बात पर हुआ ही नहींकिसीने ज़ात से जोड़ा, किसीने मज़हब सेमगर मैं ख़ुदस...
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Tag :ghazal
  April 26, 2018, 4:46 pm
ग़ज़लया तो बेईमानी-भरी दुनिया से मैं कट जाऊंया कि ईमान के चक्कर में ख़ुद निपट जाऊंतुम तो चाहते हो सभी माफ़िया में शामिल होंतुम तो चाहोगे मैं अपनी बात से पलट जाऊं न मैं सौदा हूं ना दलाल न ऊपरवालालोग क्यों चाहते हैं उनसे मैं भी पट जाऊं मेरे अकेलेपन को मौक़ा मत समझ लेनाकिसी ...
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Tag :ghazal
  April 25, 2018, 4:13 am
वामपंथी बायीं तरफ़ जाएं।दक्षिणपंथी दायीं तरफ़ जाएं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({ google_ad_client: "ca-pub-9126168104576814", enable_page_level_ads: true }); अक़्लमंद अपनी अक़्ल लगाएं।-संजय ग्रोवर18-04-2018...
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Tag :inner conflict
  April 18, 2018, 6:05 pm
ग़ज़लइकबच्चेनेजबदेखलियाइकबच्चेनेसबदेखलियायेबड़ेतोबिलकुलछोटेहैं!इकबच्चेनेकबदेखलिया ?अबकिससेछुपतेफिरतेहो?इकबच्चेनेजबदेखलियाअबक्यारक्खाहैक़िस्सोंमेंइकबच्चेनेजबदेखलियाजबकरतेथेऊंचा-नीचातुम्हेबच्चेनेतबदेखलियाअबहैरांहोतोहोतेरहोइकबच्चेनेतोदेखलियाह...
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Tag :child
  April 10, 2018, 3:03 pm
ग़ज़ल                                                                                                      PHOTO by Sanjay Groverदिखाने की दुनिया, सजाने की दुनियाकई बार लगता, हो खाने की दुनियादिखाने को उठना, अकेले में गिरनाइसीको बताया है पाने की ...
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Tag :hidden world
  February 12, 2018, 8:00 pm
ग़ज़लउनकी ख़ूबी मुझे जब ख़राबी लगीउनको मेरी भी हालत शराबी लगीउम्र-भर उनके ताले यूं उलझे रहेवक़्त पड़ने पे बस मेरी चाबी लगीउनके हालात जो भी थे, अच्छे न थेउनकी हर बात मुझको क़िताबी लगीउनके पोस्टर पे गांधीजी चस्पां थे परउनके गुंडों की नीयत नवाबी लगीमिलना-जुलना मुझे उनका अ...
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Tag :ghazal
  January 24, 2018, 6:49 pm
गज़ल                                                                                                          सुबह देर तक सोने काआज का दिन था रोने का             09-05-2017मिला वक़्त जब सोने कावक़्त था सुबह होने कामाफ़िया कह ले पागल ...
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Tag :poem
  January 12, 2018, 2:54 pm
ग़ज़लआसमानों से दूर रहता हूंबेईमानों से दूर रहता हूंवो जो मिल-जुलके बेईमानी करेंख़ानदानों से दूर रहता हूंअसलियत को जो छुपाना चाहेंउन फ़सानों से दूर रहता हूंहुक़्म उदूली करुं,नहीं चाहताहुक़्मरानों से दूर रहता हूंमुझमें सच्चाईयों के कांटें हैंबाग़वानों से दूर रहता ह...
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Tag :poetry
  January 4, 2018, 9:55 pm
 ग़ज़लये शख़्स कितना पुराना है, बुहारो कोईअभी भी चांद पे बैठा है, उतारो कोईदिलो-दिमाग़ में उलझा है, उलझाता हैइसकी सच्चाई में सलवट है, सुधारो कोईपत्थरों से न करो बोर किसी पागल कोसर में सर भी है अगर थोड़ा तो मारो कोईये तेरी ज़ुल्फ़ है, ख़म है कि है मशीन कोईहो कोई रस्ता तो रस्ते मे...
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Tag :moon
  December 23, 2017, 4:44 pm
पहले वे यहूदियों के लिए आएमैं वहां नहीं मिलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वे वामपंथियों के लिए आएमैं उन्हें नहीं मिलाक्योंकि मैं वामपंथी नहीं थावे अब संघियों के लिए आएमैं नहीं मिलाक्योंकि मैं संघी नहीं थावे आए मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों मेंउन्होंने कोन...
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Tag :इंसान
  September 22, 2017, 4:17 pm
ग़ज़लें1.फिर ख़रीदी तुमने मेरी ई-क़िताबमुझको ख़ुदसे रश्क़ आया फिर जनाब06-09-2017वाह और अफ़वाह में ढूंढे है राहमुझको तो चेहरा तेरा लगता नक़ाबजिसने रट रक्खे बुज़ंुर्गोंवाले ख़्वाबउसकी समझो आसमानी हर क़िताबख़ाप ताज़ा शक़्ल में फिर आ गईजो है लाया उससे क्या पूछें हिसाबफिरसे ख़ास हाथों...
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Tag :ebook
  September 7, 2017, 1:32 pm
नया हास्य                                                                                                                                                                                          एक दिन पड़...
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Tag :Facebook
  July 14, 2017, 1:05 pm
ग़ज़लभीड़ जब ताली देती है हमारा दिल उछलता हैभीड़ जब ग़ाली देती है हमारा दम निकलता हैहमीं सब बांटते हैं भीड़ को फिर एक करते हैंकभी नफ़रत निकलती है कभी मतलब निकलता हैहमीं से भीड़ बनती है हमीं पड़ जाते हैं तन्हामगर इक भीड़ में रहकर बशर ये कब समझता हैवो इक दिन चांद की चमचम के आगे ईद-क...
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Tag :contemplation
  June 27, 2017, 1:14 pm
व्यंग्यमहापुरुषों को मैं बचपन से ही जानने लगा था। 26 जनवरी, 15 अगस्त और अन्य ऐसेे त्यौहारों पर स्कूलों में जो मुख्य या विशेष अतिथि आते थे, हमें उन्हींको महापुरुष वगैरह मानना होता था। मुश्क़िल यह थी कि स्कूल भी घर के आसपास होते थे और मुख्य अतिथि भी हमारे आसपास के लोग होते थे...
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Tag :great
  March 12, 2017, 4:47 pm
परसों जब मैं अपने ब्लॉग नास्तिक TheAtheistकी अपनी एक पोस्ट ‘मनुवाद, इलीटवाद और न्याय’ के पृष्ठ पर गया तो देखा कि उसमें पाठकों के सवालों व राजेंद्र यादव के जवाबों से संबंधित लिंक काम नहीं कर रहा। क्लिक किया तो पता लगा कि संबंधित साइट देशकाल डॉट कॉम से यह स्तंभ ही ग़ायब है, मे...
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Tag :dishonesty
  February 17, 2017, 5:39 pm
ग़ज़ल                                                                                    इस मुसीबत का क्या किया जाएबात करने न कोई आ जाएबात करने जो कोई आ जाएकुछ नई बात तो बता पाएमौत से पहले मौत क्यूं आएअपनी मर्ज़ी का कुछ किया जाएजिसको सच बोलना ...
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Tag :different
  February 4, 2017, 12:38 pm
ग़ज़ल                                                                                                                                                              मैं से हम होते जाओमांगो, मिलजुलकर खाओसुबह को उठ-उठकर ...
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Tag :formless
  January 11, 2017, 2:02 pm
लघुकथामैंने सोचा किसीसे असलियत पता लगाऊं।मगर चारों तरफ़ सामाजिक, धार्मिक, सफ़ल, महान और प्रतिष्ठित लोग रहते थे।फिर मुझे ध्यान आया कि असलियत तो मैं कबसे जानता हूं।-संजय ग्रोवर05-10-2016...
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Tag :fan
  October 5, 2016, 9:07 pm
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  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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