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ग़ज़ल                                                                                                      PHOTO by Sanjay Groverदिखाने की दुनिया, सजाने की दुनियाकई बार लगता, हो खाने की दुनियादिखाने को उठना, अकेले में गिरनाइसीको बताया है पाने की ...
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Tag :hidden world
  February 12, 2018, 8:00 pm
ग़ज़लउनकी ख़ूबी मुझे जब ख़राबी लगीउनको मेरी भी हालत शराबी लगीउम्र-भर उनके ताले यूं उलझे रहेवक़्त पड़ने पे बस मेरी चाबी लगीउनके हालात जो भी थे, अच्छे न थेउनकी हर बात मुझको क़िताबी लगीउनके पोस्टर पे गांधीजी चस्पां थे परउनके गुंडों की नीयत नवाबी लगीमिलना-जुलना मुझे उनका अ...
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Tag :ghazal
  January 24, 2018, 6:49 pm
गज़ल                                                                                                          सुबह देर तक सोने काआज का दिन था रोने का             09-05-2017मिला वक़्त जब सोने कावक़्त था सुबह होने कामाफ़िया कह ले पागल ...
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Tag :poem
  January 12, 2018, 2:54 pm
ग़ज़लआसमानों से दूर रहता हूंबेईमानों से दूर रहता हूंवो जो मिल-जुलके बेईमानी करेंख़ानदानों से दूर रहता हूंअसलियत को जो छुपाना चाहेंउन फ़सानों से दूर रहता हूंहुक़्म उदूली करुं,नहीं चाहताहुक़्मरानों से दूर रहता हूंमुझमें सच्चाईयों के कांटें हैंबाग़वानों से दूर रहता ह...
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Tag :poetry
  January 4, 2018, 9:55 pm
 ग़ज़लये शख़्स कितना पुराना है, बुहारो कोईअभी भी चांद पे बैठा है, उतारो कोईदिलो-दिमाग़ में उलझा है, उलझाता हैइसकी सच्चाई में सलवट है, सुधारो कोईपत्थरों से न करो बोर किसी पागल कोसर में सर भी है अगर थोड़ा तो मारो कोईये तेरी ज़ुल्फ़ है, ख़म है कि है मशीन कोईहो कोई रस्ता तो रस्ते मे...
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Tag :moon
  December 23, 2017, 4:44 pm
पहले वे यहूदियों के लिए आएमैं वहां नहीं मिलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वे वामपंथियों के लिए आएमैं उन्हें नहीं मिलाक्योंकि मैं वामपंथी नहीं थावे अब संघियों के लिए आएमैं नहीं मिलाक्योंकि मैं संघी नहीं थावे आए मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों मेंउन्होंने कोन...
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Tag :इंसान
  September 22, 2017, 4:17 pm
ग़ज़लें1.फिर ख़रीदी तुमने मेरी ई-क़िताबमुझको ख़ुदसे रश्क़ आया फिर जनाब06-09-2017वाह और अफ़वाह में ढूंढे है राहमुझको तो चेहरा तेरा लगता नक़ाबजिसने रट रक्खे बुज़ंुर्गोंवाले ख़्वाबउसकी समझो आसमानी हर क़िताबख़ाप ताज़ा शक़्ल में फिर आ गईजो है लाया उससे क्या पूछें हिसाबफिरसे ख़ास हाथों...
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Tag :ebook
  September 7, 2017, 1:32 pm
नया हास्य                                                                                                                                                                                          एक दिन पड़...
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Tag :Facebook
  July 14, 2017, 1:05 pm
ग़ज़लभीड़ जब ताली देती है हमारा दिल उछलता हैभीड़ जब ग़ाली देती है हमारा दम निकलता हैहमीं सब बांटते हैं भीड़ को फिर एक करते हैंकभी नफ़रत निकलती है कभी मतलब निकलता हैहमीं से भीड़ बनती है हमीं पड़ जाते हैं तन्हामगर इक भीड़ में रहकर बशर ये कब समझता हैवो इक दिन चांद की चमचम के आगे ईद-क...
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Tag :contemplation
  June 27, 2017, 1:14 pm
व्यंग्यमहापुरुषों को मैं बचपन से ही जानने लगा था। 26 जनवरी, 15 अगस्त और अन्य ऐसेे त्यौहारों पर स्कूलों में जो मुख्य या विशेष अतिथि आते थे, हमें उन्हींको महापुरुष वगैरह मानना होता था। मुश्क़िल यह थी कि स्कूल भी घर के आसपास होते थे और मुख्य अतिथि भी हमारे आसपास के लोग होते थे...
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Tag :great
  March 12, 2017, 4:47 pm
परसों जब मैं अपने ब्लॉग नास्तिक TheAtheistकी अपनी एक पोस्ट ‘मनुवाद, इलीटवाद और न्याय’ के पृष्ठ पर गया तो देखा कि उसमें पाठकों के सवालों व राजेंद्र यादव के जवाबों से संबंधित लिंक काम नहीं कर रहा। क्लिक किया तो पता लगा कि संबंधित साइट देशकाल डॉट कॉम से यह स्तंभ ही ग़ायब है, मे...
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Tag :dishonesty
  February 17, 2017, 5:39 pm
ग़ज़ल                                                                                    इस मुसीबत का क्या किया जाएबात करने न कोई आ जाएबात करने जो कोई आ जाएकुछ नई बात तो बता पाएमौत से पहले मौत क्यूं आएअपनी मर्ज़ी का कुछ किया जाएजिसको सच बोलना ...
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Tag :different
  February 4, 2017, 12:38 pm
ग़ज़ल                                                                                                                                                              मैं से हम होते जाओमांगो, मिलजुलकर खाओसुबह को उठ-उठकर ...
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Tag :formless
  January 11, 2017, 2:02 pm
लघुकथामैंने सोचा किसीसे असलियत पता लगाऊं।मगर चारों तरफ़ सामाजिक, धार्मिक, सफ़ल, महान और प्रतिष्ठित लोग रहते थे।फिर मुझे ध्यान आया कि असलियत तो मैं कबसे जानता हूं।-संजय ग्रोवर05-10-2016...
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Tag :fan
  October 5, 2016, 9:07 pm
ग़ज़लय़क़ीं होता नहीं थाकभी सोचा नहीं था19-08-2016सफ़र अच्छा ही ग़ुज़राकहीं जाना नहीं था25-08-2016लगी तन्हाई बेहतरकोई परदा नहीं था26-08-2016बड़ा या छोटा, कुछ भी-मुझे ‘बनना’ नहीं था27-08-2016न अब डर है न चिंता,क्यूं तब सूझा नहीं था07-09-2016-संजय ग्रोवर...
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Tag :literature
  September 7, 2016, 2:25 pm
कवितामैंने उन्हें दुनिया के बारे में बतायावे सोचने लगेदुनिया ने उन्हें मेरे बारे में बतायावे मान गए-संजय ग्रोवर17-07-2016...
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Tag :friends
  July 17, 2016, 7:54 pm
मुर्दाघर की रौशन दुनिया कर देंगेतुम जागे तो मुर्दे हत्या कर देंगेलाशें, मोहरे, कठपुतली या भाषणबाज़बड़ा बनाकर तुमको क्या-क्या कर देंगेठगों के झगड़ों में क्या सच क्या झूठ भलाये तो बस हर रंग को मैला कर देंगेतुम सोचोगे तुम्हे प्रकाशित कर डालाचारों जांनिब घुप्प अंधेरा कर दे...
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Tag :hypocritical
  March 28, 2016, 4:09 pm
व्यंग्यविश्वगुरु बनने का एक ही तरीक़ा है- दूसरे सभी देशों को अपने देश से भी बुरी स्थिति में ले आओ।इसके लिए आवश्यक है कि-दुनिया में ज़्यादातर देश खाने-पीने में मिलावट शुरु कर दें।किसी भी देश में बिना दहेज के लड़कियों की शादी न हो पाए।सभी देशों के लोग अच्छे काम करना बंद कर ...
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Tag :movements
  March 9, 2016, 2:53 pm
मालिक़ के जैसा होने में उसको आराम है अब पता चला ग़ुलाम क्यों ग़ुलाम हैमुर्दों के जैसी ज़िंदगी चुनते हैं बार-बारफिर पूछते हैं क्यों यहां जीना हराम हैऊंचाईओं की चाह को मरना ही एक राहअब मर ही गए हो तो देखो कितना नाम है10-02-2016जब काम नहीं था तो मैं बारोज़गार थाफिर छोड़ दिया उसको मुझ...
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Tag :ghazal
  February 16, 2016, 2:20 pm
‘हम तुम्हे मंदिर में नहीं घुसने देंगे’ वे बोले मैं हंसाकुछ वक़्त ग़ुज़राकई लोग हंसने लगेवे फ़िर आए और बोले-‘हम तुम्हे मंदिर पर हंसनेवालों में शामिल नहीं करेंगे’मैं हंसाकुछ वक़्त और ग़ुज़राऔर कई लोग हंसेवे फिर चले आएअबके बोले ‘हमसे घृणा मत करो’मैं हंसाबोले-‘घृणा पर ह...
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Tag :funny
  January 23, 2016, 2:10 pm
व्यंग्यकई लोग, बहुत सारे लोग कहते हैं कि हम तो भई दिल से जीते हैं।मेरा मन होता है कि इन्हें ले जाकर सड़क पर छोड़ दूं कि भैय्या, लेफ़्ट-राइट देखे बिना, दिमाग़ का इस्तेमाल किए बिना, ज़रा दिल से चलकर दिखाओ तो।क्या ये लोग महीने के आखि़री दिन अपनी तनख़्वाह बिना गिने ही ले आते होंगे !? क...
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Tag :senseless
  January 5, 2016, 6:13 pm
ग़ज़लवो महज़ इक आदमी है बसऔर उसमें क्या कमी है बसउम्रे-दरिया के तजुर्बों परअब तो काई-सी जमी है बसआंसुओं का बह चुका दरियाआंख में थोड़ी नमी है बसहर बरस आता है इक तूफ़ांजोश सारा मौसमी है बसइन डरे लोगों के हिस्से मेंइक मरी-सी ज़िंदगी है बस-संजय ग्रोवर...
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Tag :music
  December 23, 2015, 9:08 am
ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी लगे, तू वो ग...
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Tag :ghazal
  December 17, 2015, 7:24 pm
ग़ज़लख़ुदको फिर से खंगालते हैं चलो,आज क़ाग़ज़ संभालते हैं चलोगर लगे, हो गए पुराने-सेख़ुदको रद्दी में डालते हैं चलोक्यूं अंधेरों को अंधेरा न कहारौशनी इसपे डालते हैं चलोज़हन जाना तो मार डालोगेबात को कल पे टालते हैं चलोसुन न पाओगे, कह न पाएंगेएक फ़ोटो निकालते हैं चलोआदमी जैसी ...
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Tag :paper
  December 2, 2015, 9:35 pm
पुरस्कार क्यों लिए-दिए जाते हैं, इसपर किसीने भी सवाल नहीं उठाया, कोई उठाएगा इसकी उम्मीद भी न के बराबर ही है।इस देश में लेखकों की रचनाएं, संपादक और प्रकाशक, चाहे वे वामपंथीं हों या संघी, किस आधार पर छापते हैं, इसपर भी सवाल कम ही उठते हैं, कम ही उठेंगे।यह सवाल भी नहीं उठा कि ए...
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Tag :hypocrisy
  October 19, 2015, 7:15 pm
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