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वेबजह घर से यूँ जाया नहीं करतेमां को अपनी रुलाया नहीं करते।उदास है, चिंतित है सब यहां रिश्तों को यूं पराया नहीं करते ।बहने देखे रंगों और राखी को एकटकबिन अपनो के उत्सव भाया नहीं करते। भर जाती है रौनके तुम्हारी  मुस्कराहटों से लुकाछिपी से अपनों को सताया नहीं करते ।बदर...
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  February 28, 2018, 10:22 pm
वेबजह घर से यूँ जाया नहीं करतेमां को अपनी रुलाया नहीं करते।उदास है, चिंतित है सब यहां रिश्तों को यूं पराया नहीं करते ।बहने देखे रंगों और राखी को एकटकबिन अपनो के उत्सव भाया नहीं करते। भर जाती है रौनके तुम्हारी  मुस्कराहटों से लुकाछिपी से अपनों को सताया नहीं करते ।...
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  February 28, 2018, 10:06 pm
जात अब जात नहीं रही गाली हो गई गरीब की जोरू सबकी साली हो गई है।जिसे भी देखिए उगल देता है बहुत कुछ रिश्‍ते नाते जिन्‍दगी सवाली हो गई है।आप क्‍या सोचते हो भला कर रहे होसेवाभाव मदद की बातें मवाली हो गई है।रूतबा पद सम्‍मान सब बेकार की हैं बातें पल पल अब सांसो की रखवाली हो गई ...
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  February 22, 2018, 9:26 pm
महिला दुकान से सामान ले कर धीरे धीरे घर की तरफ चल ही रही थी कि सामने से बिल्ली आ गई। दोनो ही रुक गए। बिल्ली ने रुकी हुई महिला को देखा और अपने रास्ते निकल गई। महिला अब भी रुकी हुई थी प्रतीक्षा कर रही थी कोई उससे पहले निकले तो तब वह भी जाये। और बिल्ली  को मैं काफी दूर मस्त चाल...
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  January 24, 2018, 8:29 am
कैसी लोहड़ी कैसा उत्सव गुम अपने और चुप है सब लोहड़ी गाना और मांगना लोहड़ी किस्से कहानियों की बात है अब अपने अपने दड़बों में दुबके हैं अपनी बात अपनी सौगात है अब...
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  January 13, 2018, 10:25 pm
पूछते हो अब कहां रहता हूँ मैं जहां कोई नहीं वहीं रहता हूँ मैं ।भीड़ है, लोग हैं सब ही तो हैं यहां, एकाकी हूँ खामोशी से बहता हूँ मैं ।पुष्प पसन्द है सबको, लेते है सुंगधबंजर हूँ, वेदना कांटों की सहता हूँ मैं ।खूब सजाए है महल तुमने कैसे कैसे,किराए के मकां को घर कहता हूं मैं।...
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  January 12, 2018, 10:09 pm
ये तो इक न इकदिन होना है,खेत नऐ रिश्‍तों का अब बोना है।नियम कायदे सब, है मेरे लिए,बाहरी आदमी हॅू मुझे बस कोना है।देख के हाथों की आड़ी तिरछी लकीरे,कहा उसने, इससे भी बूरा होना है।आंखों के कोनों से बहता रहता है पानी, यही सरमाया है, यही तो मेरा सोना है।छल गया जो अपना बन कर, कह कर,...
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  December 29, 2017, 9:35 pm
तस्‍वीरेंमूक नहीं होती कह देती हैअनगिनत शब्‍दबेहद खामोशी से,तस्‍वीरेंखुश भी होती है तस्‍वीरेंंगमगीन भी होती हैसह लेती है सब, सभी कुछ बेहद खामोशी से, तस्वीरेंमांगती कुछ भी नहीं,सदैव देती है अल्हाद, अवसाद, प्रेम, बेहद खामोशी से, तस्वीरेंज़िंदा रहती है सदैवऔर कहती रह...
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  December 10, 2017, 5:29 pm
#अधूरे_पन्नेबेहद प्रसन्‍नता होती है जब कोई ऐसा मित्र मिलता जिसने अपने कार्य से प्रेरणादायक काम किया हो। पिछले कल दूसरा...
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  November 12, 2017, 8:34 pm
दबे पांवकुछ स्मृतियांआएगी सामनेछम से रौशनी लिए ,ढूंढेंगे शब्द, अर्थ और शब्दावली,फिर हो जाएगी गुमरौशनी स्मृतियां तुरंत कहीं अंधकार में प्रश्न अनेक छोड़ ......
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  October 19, 2017, 6:17 am

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  October 17, 2017, 11:35 am
- दस और पचास का स्टाम्प पेपर तो दीजिये।- दस और पचास के तो नहीं है बीस और सौ के ही आ रहे है।- जरूरत तो दस और बीस की ही थी। इसमें तो रुपये ज्यादा लग जाएंगे।- जनाब यही है। इस बाहने दो पैसे हमारे भी बन जाएंगे। - अरे शर्मा जी, "ईश्वर से तो डरिये अगले जन्म में लंगड़ी खच्चर बनोंगे"।आ...
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  October 17, 2017, 6:43 am
गांव,नहीं रहा है गाँव अब,गांव बन गया हैषड्यंत्रकारियों, चोरों और उच्चकों का गढ़,संवेदना खत्म हो गई हैभर गई कड़वाहटरिश्तों में है शून्यता,सुरक्षित नहीं रहा हैगाँव अब रास्ते , पगडंडियां और गालियांहो गई है असुरक्षित,ना जाने कहाँ से निकल आये कोई औरकत्ल कर दे सम्मान, संवेदन...
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  October 16, 2017, 9:23 pm
गधे घोड़े में अंतर ज़रा समझाइये जनाब, नियम उप नियम क्या है बताइये जनाब।बन्द कमरों में योजनाएं बनानी है आसान ,कभी यथार्थ के...
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  September 5, 2017, 8:11 pm
उसकी बातें उसकी सुंदरता की तरह ही आकर्षक होती थी। कोई भी उससे मिलता तो उसका मुरीद हो जाता। मैं भी उसकी उसकी बातों से बेहद &#...
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  February 2, 2017, 10:58 pm
छोड़िये कटुता मीत बन जाइए                                                           पराजित  की  जीत बन जाइए            ...
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  January 31, 2017, 8:24 am
यूँ तो उससे कोई पुराना परिचय नहीं था, मात्र इतना कि वो दूकानदार था और मैं उसका ग्राहक। रोज उससे दूध की थैली ले जाता और दुआ स...
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  January 28, 2017, 1:19 pm
संसार तब तक ही सुन्दर है जब इसे देखते है माँ की आँखों सेसंसारभयानक हैडरावना हैअवसरवादी है जब भी देखाअपनी आखों सेसंसार म...
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  January 23, 2017, 8:45 pm
ऊनऔर सिलाइयों के बीचअंगुलियांबुन डालती थीजुराबें सर्दियों के लिए,टीवी पर निरतन्तर देखते धारावाहिक के बीच हीदेख लेत...
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  January 20, 2017, 11:08 am
शब्‍दकुछ अपनेकुछ पराये,शब्‍द कुछ छोटेकुछ बड़े,शब्‍दकुछ साथकुछ अकेले,शब्‍दकुछ थुलथुलेकुछ बुलबुले,शब्‍द ही तोमात्र शब्‍दनि:शब्‍द ।।...
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  October 12, 2016, 9:21 pm
मच्छरछोटे बड़े मंझलें करते हैं बहुत तंगनहीं देते सोनेछोटे बड़े मंझलेंमच्छर।...
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  July 6, 2016, 6:57 am
छोटे छोटे सपनेकुछ कुछ बेगानेथोड़े थोड़े अपने।...
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  July 4, 2016, 7:29 am
ना कोई शिकायत ना कोई गिला,एकाकी था, हूँ आज भी अकेला ।होना,घटना, है सब प्रभु इच्‍छा,आना जाना दुनिया इक मेला।...
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  June 26, 2016, 10:28 pm
‪#‎अधूरे_पन्ने‬(जीवन यात्रा पर प्रकाशनाधीन पुस्तक से)वैसे मैं ओझा डाउ तंत्र मंत्र की बातों पर विश्वास कम ही करता। लेकिन पिछले वर्ष अस्वस्थ होने के कारण दवा और दुआ का दौर निरंतर चलता रहा है । वर्ष अप्रैल 2014 में गंभीर रूप से अस्वस्थ हुआ था दुसरे शब्दों में कहूँ तो मैंने म...
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  June 26, 2016, 10:20 pm
‪#‎अधूरे_पन्ने‬(जीवन यात्रा पर प्रकाशनाधीन पुस्तक से)सुबह उठते ही गुनगुना पानी और टहलने, योगा करने का आदेश ये मीरा के दैनिक कामों में शामिल है। पानी पिया और एक दो चक्‍कर इधर उधर लगाए। फिर व्‍टस एप्‍प पर नमस्‍कार का दौर शुरू । फेसबुक पर अपडेट देखना । समय बीत जाता है तुरन...
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  June 26, 2016, 10:19 pm
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