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वृद्धग्राम

कहानियां ज़िन्दगी से शुरू होकर ज़िन्दगी पर ख़त्म होती हैं.खुशी के तारों की छांव में जिंदगी दो पल बदल रही,हवाओं की तरह मचलते हुए सितार सी बह रही,शांत, हिलौरे मारती हुई भी,उम्र की दास्तान जो सच है,अपने में सिमटी हुई और मुस्कान से भर रही,झुर्रियों का रौब नहीं, बेहिचक बढ़ रही,सुन...
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Tag :kavita
  June 6, 2017, 8:55 am
पापा, प्यार और बेटी काफी जुड़े हुये हैं। पिता को सबसे प्यारी अपनी बेटी होती है। सबसे छोटी बेटी कलेजे का टुकड़ा होती है उनकी नजर में। यह आमतौर पर देखने में आया है कि एक बाप अपनी बेटी को हद तक चाहता है। डोली विदा होती है, तो उसकी आंखें ज्यादा नम होती है। वह भीतर तक रोता है।मा...
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Tag :fathers day
  May 30, 2017, 7:43 pm
काकी का जीवन धीमा बह रहा है, लेकिन वह जीवन की सुन्दरता को मन से नहीं जाने दे रही.‘हमें क्या बनना है? हमारी आकांक्षायें क्या हैं? क्या हम महान बन सकते हैं? हमेरे जीवन का लक्ष्य क्या है? ऐसे तमाम विचार हमारे मन में आते हैं। उन सवालों का उत्तर तलाशने की हम कोशिश भी करते हैं। उत...
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Tag :old age
  May 27, 2017, 7:50 pm
सपने सुन्दर होते हैं. जानती थी वह कि सपने हर बार सच नहीं होते, फिर भी वह सपने देखती थी.‘जिंदगी के महीन धागों की बनावट को देखकर वह हैरान थी। उसने खुद को उनसे जोड़ लिया था। वह खुद भी प्रेम की बहारों की ओर जाने को बेताब थी। मैंने उससे एक शब्द भी नहीं कहा और वह चली गयी।’ अमित के ...
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Tag :hal girlfriend
  April 22, 2017, 12:31 pm
उम्र बीत रही है धीरे-धीरे. जिंदगी से आस है जाने कितनी, और मुसाफ़िर भी अभी थका नहीं.ख़ामोशी से जीवन के पड़ाव पार कर गया,उतरता हुआ, लहरों की परतों को छूते हुए,उम्रदराजी है तो क्या हुआ?जिंदगी अब भी वैसे ही सांस ले रही है.उगते सूरज की पहली किरण का एहसास,कुछ कम नहीं, कुछ ज्यादा नहीं ...
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Tag :old age
  April 8, 2017, 6:24 pm
एक ऐसी दुनिया जहां हर कोई नौजवानों की बातें करता है, वहां एक नौजवान बूढ़ों की बात कर रहा है.गूगल के गुड़गांव ऑफिस पहुंचने के बाद एक अलग तरह की संस्कृति का पता चला। कार्यस्थल और उससे जुड़े लोगों की सोच जो मेरे जैसे व्यक्ति के लिए शोध का विषय हो सकती है। एक दशक से अधिक समय बीत ग...
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Tag :talks
  April 5, 2017, 7:27 pm
वह उमंग और बूढ़ों में भी उपजने वाली तरंग आज के मशीनी युग में कहां गुम हो गयी.दीपावली और होली दो ऐसे पर्व हैं जो भारतीय संस्कृति के रोम-रोम में रच बस गये हैं और अनंतकाल से परंपरागत और उत्साह के साथ मनाये जाते हैं। होली के बारे में भी देश में कई मान्यतायें और रुढ़ियां प्रचलित...
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Tag :talks
  March 13, 2017, 4:32 pm
बच्चों की कहानियां इस दुनिया से बाहर की दुनिया में भी घटती हैं.ब्रह्मांड की कहानियां अकसर हमें हैरान करती हैं। बचपन से ही बढ़े-बूढ़ों से ऐसे किस्से सुने और यकीनन मैं भी उस दौरान ग्रहों के बीच कहीं गुम हो जाता था। नन्हें इशांत ने कुछ समय पहले मुझे ऐसी ही एक कहानी सुनायी ...
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Tag :
  March 12, 2017, 7:34 pm
बच्चों की कहानियां इस दुनिया से बाहर की दुनिया में भी घटती हैं.ब्रह्मांड की कहानियां अकसर हमें हैरान करती हैं। बचपन से ही बढ़े-बूढ़ों से ऐसे किस्से सुने और यकीनन मैं भी उस दौरान ग्रहों के बीच कहीं गुम हो जाता था। नन्हें इशांत ने कुछ समय पहले मुझे ऐसी ही एक कहानी सुनायी ...
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Tag :
  March 12, 2017, 7:34 pm
धुंधले शब्द जोड़-तोड़कर अपने बल पर किस्मत की रचना करना उम्रदराजों के लिए कोई नया नहीं.‘उम्र का फासला हमारी जिंदादिली को बयां नहीं करता।’ बूढ़े काका ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। वे दूर कहीं किसी खोज में लगे हुए थे। ऐसा उनकी आंखें बता रही थीं। चेहरे पर एक अधूरी मुस्कान से अनगि...
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Tag :budhapa
  March 1, 2017, 6:32 pm
जिंदगी तो रोज छपती है,कभी इस पड़ाव, कभी उस पड़ाव,जिंदगी सवाल करती है,कभी सीधे, कभी आड़े-तिरछे,जिंदगी मचलती बड़ी है,कभी फिसलकर, कभी इठलाकर,देखता हूं, कभी-कभार मैं भी,ऐसा क्यों नहीं कि मैं हंसता रहूं हर पल,मुमकिन जो भी है, पर पूरा नहीं,यही खासियत है जिंदगी की,उधड़ती-सिलती-चलत...
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Tag :
  January 25, 2017, 2:29 pm
‘तुम मेरी प्रेरणा हो। तुम्हारी वजह से मेरा जीवन बदल गया। मैंने महसूस किया कि अगर तुम न होतीं तो मेरा क्या होता? –ऐसा उसने कहा था।’ इतना कहकर काकी चुप हो गई।‘उसने कहा था कि मैं उसके जीवन की अभिलाषा हूं, जीने की आशा हूं। जबसे वह मुझसे मिली उसके अनुसार उसका संसार सुन्दर हो ग...
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  November 1, 2016, 9:47 pm
‘‘मुझे आज तक समझ नहीं आया कि हम प्यार क्यों करते हैं? इतना जरुर जानते हैं कि कोई रिश्ता ऐसा है जो हमें दिख नहीं पाता और हम प्यार करते हैं।कई लोग ऐसे होते हैं जिनके साथ हम अलग-अलग तरह से प्रेम करते हैं। माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त, आदि प्यार के बंधन में जकड़े हैं और हम उनके। यह प...
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Tag :
  October 11, 2016, 2:09 pm
जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली,बिना बताये कि जाना कहां है,उड़ रही हैं बातें, शब्द भी,तैरती यादों को किनारे लगा आये,बात बने तो क्या बने,पीछे छूट गया कोई,जिंदगी मुस्कान के साथ उड़ चली,खुशी के पलों को जीते हुए,मगर कुछ कतरे गम के समेटकर,नहीं आना, नहीं आना यहां,दोबारा लौटना मुमकिन न...
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Tag :
  August 21, 2016, 1:41 pm
हर कोई उड़ना चाहता है। सभी को लगता है, जैसे जिंदगी वे ऐसे बितायेंगे या उन्हें वह सब हासिल होगा, जो उन्होंने कभी चाहा था या चाहते हैं। लेकिन जिंदगी भी कमाल की है, कुछ के पंख आसमान में इतने फैल जाते हैं कि उनके लिए जिंदगी छोटी पड़ जाती है, जबकि कुछ पंख फैलाने में ही जिंदगी बिता ...
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Tag :talks
  August 19, 2016, 7:49 pm
'पल भर में क्या से क्या हो जाता है। जिंदगी की कुंठायें हमें जीने कोई देती हैं। उजड़ा सा लगता है सब कुछ। मानो संसार में कुछ शेष न रह गया हो। लुट ही तो जाता है सब। सूनेपन में मिठास भला कहां से आ सकती है।'काकी ने मुझसे कहा।'खुद जीवन को समाप्त करना आसान भी तो नहीं।'मैंने काकी से क...
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Tag :
  August 8, 2016, 6:43 pm
बूंदों का सरपट दौड़ना,बादलों का गड़गड़ाना,उम्रदराजी में भी जीवन का ताल है,याद आता है, जैसेजिंदगी फिर जाग उठी हो।बरसता पानी,बहती धार,धुंधली तस्वीर निहारता कोई,आंखें अब ऐसी ही हैं,सच है यह,इसके सिवा कुछ नहीं।उसने मुझे पुकरा था कभी,तब खुशी बही थी, मैं भी,आज गीलापन आंखों में नह...
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Tag :
  July 16, 2016, 12:42 pm
बूढ़े काका ने सुबह चार बजे मुझे झिंझोड़ कर उठाया। सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि रात में समय पर उठने का वादा करने के बाद भी मैं उठ नहीं पाया था। एक बुजुर्ग जो मुझसे कई गुना कमजोर था, वह जवानों की तरह फुर्तिला और जस्बे से भरपूर था। मुझे खुद पर दया और हंसी साथ-साथ आ गयी।कभी-क...
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Tag :budhapa
  June 23, 2016, 10:55 am
हमारी तैयारी पूरी थी। मैं, मेरा भाई और पिताजी ही दिल्ली घूमने जाने वाले थे। मां वैसे भी घूमने का शौक नहीं रखतीं। वे वे कहती भी थीं कि दिल्ली तो महज सौ किलोमीटर है, घूमना है तो राजस्थान चलो, पंजाब चलो। मैंने कहा कि देश की राजधानी में लाल किला, कुतुब मीनार, जामा मस्जिद, संसद ...
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  May 31, 2016, 2:04 pm
उतरे हैं, ढंग अजीब,मगर शातिर बड़े हैं,पैनापन लिये, औरउतावले भी,चलो आज कुछकमाल करते हैं,लड़ते हैं किसी से,या खुद से उलझते हैं,हां, शब्द हैं,शब्दों की आदत जो है,चुप नहीं हैं,इतरायेंगे,जलेंगे, बुझेंगे,बुझकर जलेंगे,जलते जायेंगे,रोशनी होगी,सवेरा भी,क्या करें शब्द हैं,हम भी बुन...
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  May 31, 2016, 9:43 am
मैं उसे शुरुआत कह सकता हूं जिस वजह से मैंने नौकरीपेशा जीवन के अहम पहलुओं को करीब से देखा। ऐसे मौके प्रायः कम होते हैं जब आप नये दौर के लिए तैयार हो रहे होते हैं। मैं उस दिन दुविधा में भी था, और दूसरी तरफ खुश भी, क्योंकि मेरा एक मित्र मनीष भी उसी जगह अपने करियर का प्रारंभ कर ...
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Tag :talks
  April 29, 2016, 3:12 pm
मोगली को दूरदर्शन पर देखने को मैं और मेरा भाई बेताब रहते थे। पड़ोस के कई दोस्त भी उस रोमांच में शरीक हो जाते थे। मनू और विनू तो पागल थे। टीवी देखते हुए अकसर सीढ़ियां चढ़ते हुए विनू फिसल जाता था। पता नहीं वह ऐन वक्त पर ही क्यों पहुंचता था। इसलिए उसे घर से तेज दौड़कर आना पड़ता था...
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Tag :talks
  April 2, 2016, 9:27 pm
प्रिय तनु,यादों को बहुत संजोने की कोशिश की है। समझ नहीं आता उन्हें कहां रखूं। ऐसी कोई संदूक नहीं जहां वे बंद की जा सकें। ऐसा मुझे क्यों कहना पड़ रहा है, मैं नहीं जानता। जानता हूं बस कि जो मन में है, कह रहा हूं। ओर या छोर की बात मैं नहीं करना चाहता क्योंकि जिंदगी बदल-बदल कर चल...
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Tag :
  February 26, 2016, 6:18 pm
सुबह का मौसम सर्द भरा बिल्कुल नहीं था, जबकि नवंबर के महीने में मौसम बदलने लगता है। मेरी तैयारी कोई खास नहीं थी। मैं गजरौला के इंदिरा चौक तक पहुंचा। वहां से फाटक की तरफ पैदल चल पड़ा। ओवरब्रिज का काम पूरा साल के आखिरी तक होने की बात कही जा रही है। उसी कारण चौपला तक जाने वाला ...
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Tag :safarnama
  November 18, 2015, 1:04 pm
किताबों को खरीदने की सोच रहा हूं. बहुत समय से कोई उपन्यास नहीं पढ़ा. किताबें पढ़ने के बाद आप खुलापन महसूस कर सकते हैं. मैं नहीं जानता कि हर किसी के साथ ऐसा होता होगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा ही है. किताबों की एक नई शेल्फ बनवाने की मैंने सोच रखी है. उसका डिजाइन मेरे दिमाग में घूम रहा...
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Tag :talks
  October 22, 2015, 7:30 pm
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