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...कल उंगली से रेत पर तुम्हारी तस्वीर बनाई मैंने........एक लहर आई अपने साथ ले गई......फिर क्या था हर तरफ, हर जगह बस तुम ही तुम........समंदर में तुम       उमस में तुम       बादलों में तुम       बारिश की बूंदों में तुम       हर फूटती कोंपल में तुम       ताज़ी हवाओं में तुम       साँसों में तुम.............आ...
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  April 24, 2012, 9:01 am
बारिश की बूंदों में ये जिस्म घुलता जा रहा हैकहीं एक गहरा जख्म और सुलगता जा रहा है...कुछ बूँदें गुम हो गयीं, कुछ ज़मीं में जज़्ब हो गयीं मगर एक काफिला सिर्फ मुझे ढूँढता आ रहा है...रिश्तों की गहरी धुंध मेरा रास्ता रोके खड़ी हैकोई अजनबी उसे चीरता हुआ करीब आ रहा है...एक घना बदल थ...
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  April 2, 2012, 9:20 am
आप सब को मेरा प्रणाम... आप सबके बीच एक बार फिर हाज़िर हूँ... इतने लम्बे वक़्त तक गैर हाज़िर रहने के लिए माफ़ी चाहती हूँ... और अपनी वापसी की शुरुआत मैं अपनी एक पुरानी रचना के साथ करुँगी ... आशा करती हूँ की आपको पसंद आएगी ... धन्यवाद...  काश! ये ज़ख्म भी कभी सिल पाता....उधड़ा हुआ वो रिश्...
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  March 22, 2012, 11:15 pm
आप सब को मेरा प्रणाम... कुछ वक़्त से ब्लॉग्गिंग नहीं कर प् रही हूँ .. उसके लिए आप सब से माफ़ी चाहूंगी ... पहले typhiod हो गया था... अब पढाई में व्यस्त हूँ ... कुछ और समय के लिए आप सब से गैरहाज़िर रहने की इजाज़त चाहूंगी... आप सब  के सहयोग और स्नेह के लिए आभारी हूँ  ... बहुत बहुत धन्यवाद... ...
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  May 7, 2011, 3:56 pm
......सुकून ढूंढते ढूंढते आज यादों के तहखाने में जा पहुंची... सोचा एक बार यहाँ भी देख लूं...  .......बहुत साल पहले जब नए रिश्ते बनाए थे....क्या मालूम........कुछ टूटे हुए रिश्तों के साथयहाँ रख दिया हो...........वहीँ एक कोने में पड़े  पुराने दिनों पे नज़र गयी...क्या हालत थी ....उम्र हो ...
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  February 28, 2011, 9:19 am
...तुम्हारेलिए... सिर्फएकपलमेरेलिए... एकज़िन्दगी... ...जितनेपलतुमनेमेरेसाथगुज़ारेहैंउतनीज़िंदगियाँमैंनेजींहैं......नजानेकितनीबारमैंनेजन्मलियानजानेकितनीबारमैंमरीहूँ......पिछलीबारजबतुमगएथेवो आखरी बारथाजबमैंमरीथी... ...उसदिनकेबादनतुमलौटेनमैंजिंदाहुई... ...एकजिस्महैज...
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  January 28, 2011, 8:56 am
....एक खिलौना बनाने वाले नेकितने ही खिलौने बनाये हैं  .......अलग अलग रंग केअलग अलग रूप केअलग अलग कद काठी के ..........कुछ सोने केकुछ भूसे के बने हैं ...कुछ कच्चे, कुछ पक्के हैं .......कहीं कोई मखमल में लिपटा है तो कोई चीथड़ों से ढका है....किसी के हाथ में चाँद है किसी का मिट्टी से सन...
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  January 25, 2011, 9:07 am
आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं .....कुछ पल क्षितिज पर ठहर कर मानो पूछ रहा हो मुझसे -......  "कब तक तड़पता रहूँगा, जलता रहूँगा ....    अपनी ही आग में ........    क्या तुम्हारे पास भी मुझे चैन नहीं मिलेगा...    बिना बुझे.............अंगारों में लिपटे     क...
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  January 8, 2011, 8:14 am
कुछ समय के लिए बहार जा रही हूँ ... आप सब से लगभग एक महीने बाद मुलाक़ात होगी ... जाते जाते इस पुरानी रचना फिर से पोस्ट किये जा रही हूँ ... उम्मीद है आप सब को पसंद आएगी .............तुमसे मिलने के बाद,दिल की इस बंजर ज़मीन पर,मोहब्बत का एक पेड़ उग आया था,...हम अक्सर उसके साए में मिला करते थे,घंट...
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  December 1, 2010, 5:52 am
सोचा एक तस्वीर बनाऊंआँखें बंद कींकुछ लकीरें सी उभर आयींटेढ़ी, मेढ़ी, आड़ी, तिरछीफिर सोचा,इसकी अपूर्णता को संवार लूं इसमें कोई रंग उतार दूंलेकिन वो कौन सा रंग था जो इस तस्वीर की ताबीर करेगा ??इसकी कमियों, अपूर्णताओं को दूर करेगा ??हरा...??मन किया पत्तों से उधार लूंपर वो ...
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  November 28, 2010, 8:49 am
इस तरह,  हर गम से खुद को बचा रखा है एहसास को पत्थर का लिबास पहना रखा है...मेरी आँखों में अक्सर उतर आता है सैलाबकुछ तूफानों को अपने दिल में बसा रखा है....तेरी यादों की क़ैद से भाग भी जाते लेकिन ये ताला हमनें अपने हाथों से लगा रखा है.....राहे-उसूल पे कुछ न मिला एक दर्द के सिवा ...
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  November 19, 2010, 7:58 am
क्यूँ मद्धम सी हो चली हर उम्मीद की रौशनी ....................अंधेरों से लड़ता कोई चिराग़शायद, बुझ गया है कहीं.........................पहचानी सी ख़ुश्बू महका रही है मेरा 'आज' .......................माज़ी की कब्र में वो लम्हा शायद, सांस ले रहा है कहीं......................कम हो गया एक और ख़ुदा को मानने वाला ..........................किसी बे...
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  November 8, 2010, 7:12 am
रूखा रूखा सा चाँद, एक फीकी सी शब् बुझी बुझी सी मैं, एक रूठा सा रब..... मैं औरत..... वो बरगद ........तहज़ीब की मिट्टी में गडी हूँ गहरीसदियों से खोखले रिवाजों का बोझ सहती रही .......बहती हवाओं की जानिब झुकते चले गएहाल ही में जन्में लचीले बांस हैं 'सब'.....मैं औरत..... वो चट्टान ...........रवायतों की ...
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  October 25, 2010, 11:05 am
.रात की चादर जब उतरने लगी....सुबह की तरफ सरकने लगी.........तारे सारे जगमगा उठे...........और ख्वाब सारे धुंधला गए.......तो ऐसे में ये क्या बात हुई..................जो भी हुई ..........................कुछ ख़ास हुई............. .....चाँदनी अपनी तपिश में..........सर्द जज़्बात पिघला गयी.........एक दर्द कहीं सुलगने लगा.....तेरा सोया एहसास जगा गय...
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  October 23, 2010, 7:09 pm
 ख्वाबों की दुनिया बिना 'शोर' के....ज़िन्दगी का सफ़र बिना 'पड़ाव' के....एक नया सवेराबिना 'कोहरे' के...मेरा अपना घरबिना 'दीवारों' के....सुबह का अखबारबिना 'सुर्खी' के....सुहाग की सेज बिना 'जिस्मों' के....इंसान का नामबिना 'पहचान' के....आकाश, समुंदर, ज़मीनबिना 'सरहद' के....एक रिश्ता हमाराबिना 'म...
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  October 18, 2010, 9:16 am
बचपन में कभी कभीटूटे पंख घर ले आती थीअब्बू को दिखाती थी.. अब्बू यूँ ही कह देते-......    "इसे तकिये के नीचे रख दो     और सो जाओ   सुबह तक भूल जाओ   वो दस रुपये में बदल जाएगा   बाज़ार जाना   जो चाहे खरीद लाना..."मैं ऐसा ही करती ...रात में अब्बू चुपके सेपंख हटा कर दस रुप...
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  October 11, 2010, 6:34 am
...................क्षितिज तक फैलेज़िन्दगी के तनहा सेहरा को.....तेरे इश्ककी बाहों में समा लूं....तेरे  एहसास के गहरे समुन्दर सेउम्र की 'सूखी' रेत भिगो दूं..........और कहीं किनारे बैठ कर  थोड़े घरौंदे बना कर..............एक गाँव बसा दूं...................................कभी उसे हकीक़ततो कभी ...सपने का नाम दूं...तेरे साए म...
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  October 2, 2010, 12:27 pm
 कहाँ ज़िन्दगी अब तेरा ख़याल ही रहता है आज कल तो दिल खुद से बेखबर रहता है... शाम होते ही बुझा देते हैं उम्मीदों के चिराग अब कौन दीवाना तेरे इंतज़ार में रहता है ...रंज-दीदा जिस्म का लिबास पहने हुए ये किसका अक्स मेरे आईने में रहता है...सदी जैसे दिन की मिन्नतें कर पाया दो पल का चाँ...
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  September 22, 2010, 9:10 pm
एक ज़ुल्फ़  माँ की.... जिसके साए में ज़िन्दगी ने आखें खोलींएक ज़ुल्फ़बहन की.... जिसकी चोटी खीँच-खीँच के बचपन खेलाएक जुल्फ यार की.... जिसकी खुशबु से जवानी महकीएक ज़ुल्फ़बेवफा की.... जिसने मोहब्बत का गला घोंटाएक ज़ुल्फ़साकी की....जिसमें शराब से ज्यादा नशा था एक ज़ुल्फ़बीवी की....जिसने उन्ह...
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  September 15, 2010, 11:08 am
आसमान में जशन का माहौल हैआतिशबाज़ी होती दिखाई दे रही है.....मेरी किस्मत के सितारे टूट-टूट के राख हो रहे हैं..... ...
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  September 9, 2010, 12:41 pm
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