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जीवन सन्दर्भ : View Blog Posts
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जीवन सन्दर्भ

गीत मेरी चीख सुनेगा कौन?मैं तो बादल सा आवारा ,गाँव शहर की गलियों गलियों ,फिरता हूँ पागल ,नाकारा ,मुझको लेकर उम्मीदों के सुंदर स्वप्न बुनेगा  कौन?इस जीवन के चन्दन वन में ,कदम कदम पर सर्प मिले,अपनों को ही डंसने वाले ,अपनों के ही दर्प मिले ,अंधियारों को उजियारों का नेता रोज च...
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  June 25, 2013, 12:52 pm
टूटता है मन,मनोबल टूटता है/कोई अपना जब अचानक रूठता है //दर्द का सागर सुनामी पालता है /अभिव्यक्ति का ज्वालामुखी जब फूटता है //दूर तक देखें कहाँ है ताब किसकी/आजकल रहबर ही घर को लूटता है//\रेल के पहियों सरीखी ज़िंदगी है /प्लेट फोर्म पर सिफ़र ही छूटता है//यह अज़ब अनुभूति है अपनी ...
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  January 29, 2013, 11:07 pm
बात की बात में ............................................बात की बात में कहानी लिख /उम्र को दर्द की जवानी लिख //मां  ने पाला  जिसे तपस्या से /उसी बचपन को अब जवानी लिख//आग से कैसे बचे अब बस्ती?ऐसी कुछधूल ,रेत  ,पानी लिख//लोग खंजर लिए हुए हैं मन में/उन्ही के रहमोकरम लिख ,तू राजधानी लिख //जो पैर पेट में दे सोत...
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  January 29, 2013, 10:46 pm
ग़ज़ल टूटे मन से और बहुत भी टूटा हूँ/औरों को क्या कहूं जो खुद ही झूठा हूँ//जग में कितने अपनों को दी पीडाएं /औरों से ठोकर खाई तो रूठा हूँ//संगम की रेती पर पर चल जीवन काटा /पर अब लगता है बगलोलों  का फूफा हूँ//इतना हम से कभी पूछ तो लेते तुम/इतना लूटी दुनिया फिर क्यों भूखा हूँ ?सबके ...
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  January 29, 2013, 10:31 pm
हवाओं  के  उलटे ही हम बोलते हैं /उडने के पहले ही पर तौलते हैं//रही जंगलों में है रहने की आदत/मगर  मन में इसको ही घर बोलते हैं//अंधेरों में काफी है नन्हा   दिया भी /वे अंधों को रोशन नज़र बोलते हैं//दरवाज़े  दिल के हैं  बन्द इसलिए बस /मेरे  हमसफ़र इस  कदर बोलते हैं//...
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  October 4, 2012, 10:45 pm
तेरी  इक निगाह के  कमाल से,मेरा मन ये सावन हो गया ,तेरी मीठी-मीठी छुवन भली , कि ये दर्द पावन  हो गया //कहाँ रोशनी की मज़ाल थी,जो वो छू सके तम के शिखर ,तेरी जुस्तजू का  असर हुआ ,कि जो धूप सा मन हो गया //चले हम हज़ार कदम यहाँ ,तेरी इक हंसी लिये साथ में ,वही याद भर को  नमी भी है,,वही मन भ...
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  July 18, 2012, 12:40 pm
कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है कि हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने लग...
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  June 20, 2012, 7:35 pm
012कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है की हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने ल...
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  June 20, 2012, 7:35 pm
कई दिनों से मन में एक विचार बार बार आ रहा है की हम वास्तव में कितने सुविधा भोगी हो गए हैं/अब हम किताबें पढने का सुख (यदि आज के लोग ऐसा मान सकें)भी नहीं उठाना चाहते,कौन खरीदें पुस्तकें,फिर पढ़े,इतना वक़्त ही कहाँ है आज/अपनी जगह से उठ कर टी.वी.चलाना ,चैनल बदलना भी भारी होने लगा ...
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  April 3, 2012, 9:36 am
आप फिर याद आने लगे हैं/जख्म फिर मुस्कुराने लगें हैं //धुप की बढ़ रही है तपिश /फूल फिर गुनगुनाने लगें हैं //उम्र ज्यों होगई आइना /अक्स खुद को डराने लगे हैं//जान बक्शी की किस से अरज ?दोस्त छूरे चलाने लगे हैं//मुद्दतों बाद देखा है घर /पर नयन डबदबाने लगे हैं //किस से मन की कहें दास्त...
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  February 2, 2012, 4:12 pm
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Tag :संपर्क
  January 7, 2012, 7:38 am
दीवाली के जगमग दिए ,जीवन को रोशन कर जाएँ ,जो कुछ भी अब तक मिला नहीं ,वह सबकुछ अब जीवन में पायें ,निर्मल हो मन ,तन स्वस्थ रहे ,हरपग पर नए उजाले हों ,कितने तूफ़ान चलें फिर भीसौ दीप जलाने वाले हों //दीवाली मंगलमय हो बंधु जन सपरिवार आप सभी कोसस्नेह !...
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  November 10, 2011, 11:22 am
मन खो गया है यह तन  खो गया है ,तुमको दिया हर वचन खो गया है //     उदासी की शामों में खोई हैं रातें ,ज़माने की सरगोशियों  की हैं बातें ,ज़वानी का सब जोश भी खो गया है //उलझे सितारों की उलझी कहानी ,हँसे जा रहीं हैं ये किरणों की रानी ,मुस्कराहट भरा हर नयन खो गया है //उम्मीदों से कितने ...
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  October 25, 2011, 5:47 pm
-पहचान ले जो जिंदगी ,वो नजर कहाँ से  लाऊं ?                                   ये है आंसुओं की मंडी,यहाँ कैसे मुस्कराऊँ ?ये दबी -दबी सी आहें ,उफ़ ,ये नजर का कुहासा ,जहाँ ग़म के सिलसिले हैं वहां कैसे गुनगुनाऊँ ,यहाँ भूख का सफ़र है ,वहां रोशनी का जलवा ,जहाँ इत्र उड़  रहा हो वहां प्यास क्या बुझाऊ...
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  September 15, 2011, 11:06 pm
अन्ना जी के लिए ............जब जुल्म की ताकत टूटेगी ,जब ताज धरा पर आएगा ,जब सच का सूरज चमकेगा ,जब हर जर्रा मुस्काएगा ,जब कोटि-कोटि जन सड़कों पर खुद ही आकर छा जायेंगे ,तब तुम्हे नमन करने को जग के सब मस्तक झुक जायेंगेजब इन रोशन दीवारों पर सच नयी इबारत लिक्खेगा ,तब ताप समय के सूरज का सच...
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  August 28, 2011, 9:17 pm
जब जुल्म की ताकत टूटेगी ,जब ताज धरा पर आएगा ,जब सच का सूरज चमकेगा ,जब हर जर्रा मुस्काएगा ,जब कोटि-कोटि जन सड़कों पर खुद ही आकर छा जायेंगे ,तब तुम्हे नमन करने को जग के सब मस्तक झुक जायेंगेजब इन रोशन दीवारों पर सच नयी इबारत लिक्खेगा ,तब ताप समय के सूरज का सच्चाई जैसा दिक्खेगा ,...
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  August 25, 2011, 11:47 pm
होश में आगया हूँ इधर/खुद की करने लगा हूँ कदर //मिल गयी इतनी ज्यादा ख़ुशी /डबदबाने लगी है नज़र//रात तकियों ही तकियों कटी /बज रहा है सुबह का गज़र //जिनको पूजा था बुत मान कर /उनसे ही लग रहा आज डर//रण में कूदे ही जिनके लिए /शास्त्र लेकर भगे वे ही घर //उम्र भर जिनपे चलते रहे/अजनबी क्यों...
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  June 12, 2011, 10:34 pm
आज फिर नभ में खिला है एक पूरा चाँद ,पर तुम्हारे बिन लगा मुझको अधूरा चाँद,बादलों के बीच करता है चहलकदमी ,नापता है जिंदगी की ढेर सी दूरी ,उम्र जिस आइने में देखती चेहरा ,बस उसी आइने सा लगने लगा है चाँद//मुश्किलें हैं ढेर सी पर प्यार भी तो है ,कोई माने या न माने,फर्क क्या पड़ना ?र...
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  May 18, 2011, 11:49 pm
लिखता हूँ मैं ,दिखता हूँ मैं ,टुकड़ों -टुकड़ों बिकता हूँ मैं ,फिर भी छोड़ कहाँ जाऊं सब ?इस माटी की सिकता हूँ मैं //ओढ़ भ्रमों का चोला-बाना,खुद-खुद से रह गया अजाना ,भले रहा नन्हा सा तिनका ,तूफानों में टिकता हूँ मैं //ऊब गया पर जूझ रहा हूँ ,कठिन पहेली बूझ रहा हूँ ,बार-बार अपने अंधि...
जीवन सन्दर्भ...
Tag :
  April 28, 2011, 11:27 pm
  ...
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  March 11, 2011, 8:04 pm
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