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अनंत अपार असीम आकाश

चाहतो, ख्वाहिसों, हसरतो के महल में , लोभ, लिप्सा,वासना ही सदा पलती रही । काम, क्रोध, मद, लोभ ही , इस महल के शहंशाह । चौपड़ की बिसात बिछाकर , वो बुलाते सबको यहाँ । चाहतो, ख्वाहिसों, हसरतो...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्...
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Tag :राग-रंग
  June 19, 2013, 11:25 pm
क्या लिखू क्या ना लिखूँ  , कुछ समझ पाता नहीं ।  भाव हैं मन में बहुत , पर  उन्हें समेट पाता नहीं । कुछ भाव हैं बस प्यार के , कुछ है तेरे अहंकार के । कुछ भाव तुझसे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिया...
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Tag :राग-रंग
  June 17, 2013, 12:37 am
सिलसिले जो आपने , शुरू बेबफाई के किये । बनकर वो काँटे नुकीले , राहों में मुझको मिले । आपने सोंचा भी है , हम क्यों वफ़ा करते रहे ? यार भले नाखुश रहे , याराना तो चलता रहे । आप भले नाराज...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तु...
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Tag :राग-रंग
  June 14, 2013, 8:50 pm
मानव जीवन नदी का पानी , गुजरे घाट ना ठहरे पानी । घाट घाट का रूप निहारे , न बँधे किसी बंधन में पानी । माँ की कोख है इसका उदगम , किलकारे बचपन का पानी । मदमाती लहरे यौवन की , ना सहे किसी का...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्त...
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Tag :मेरी कविताएँ
  June 11, 2013, 2:20 pm
आचरण का अर्थ तो , आ-चरण में ही छिपा । आ-चरण सीखे बिना , आचरण किससे सधा ।  आचार्य है वो लोग जो , आ-चरण को जानते । आ-चरण को साध कर , आचरण को बाँटते । आचरण को जानना ,  है...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष...
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Tag :मेरी कविताएँ
  June 11, 2013, 1:17 pm
क्यों जिद करते मुझसे आप, असली चेहरा दिखलाने को । है नहीं सामर्थ अभी तुममे , मेरा असली रूप पचाने को । तुम अभी कमल के आदी हो , कीचड़ में करते वास अभी । तुम क्या...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिया...
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Tag :राग-रंग
  June 6, 2013, 9:24 pm
सदियों पहले आदिवासी इलाको में , चलन था कुछ कुरूप से मुखौटो का। ज्यादातर ख़ुशी में और कुछ दुखो में , पहनते थे लोग मुखौटो को चहरे पर। पहनकर उसे ख़ुशी से नाचते थे अक्सर , या फिर दुखो में...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस...
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Tag :मेरी कविताएँ
  June 1, 2013, 12:02 pm
यूँ तो जिंदगी में ऐसे  बहुत से अवसर होते है ,  जब हम किसी कथाकार की तरह जीने का अवसर पाते है। और जब जब ऐसा  होता है , हम अपनी कल्पनाओ को मूर्त रूप देते है। और हम खींचने...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रवि...
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Tag :राग-रंग
  May 28, 2013, 1:30 pm
"औरंगजेब"  कल झेल़ा इसे, एकदम थर्ड क्लास बकवास मूवी , सिवाय सिर्फ एक बेहतरीन डायलाग के - "सपनों से ज्यादा अपनो की कीमत होती है" , बात तो सच है पर क्या ये बात नहीं अधूरी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताज...
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Tag :मेरी कविताएँ
  May 20, 2013, 11:57 am
कहे कबीर बुलाकर मुझको , एक अजूबा होए । धरती बरसे अम्बर भींजे , बूझे बिरला कोय । मैंने कहा सुना है गुरूजी , ये गजब अजूबा होय । एक अजूबा मैं भी देखा , अब बूझे उसको कोय । प्यासा बैठे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत ह...
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Tag :राग-रंग
  May 19, 2013, 6:36 pm
( एक दशक पुरानी रचना है ये...पर शायद नही है बदले हालत अभी..) नशा शराब का होता उतर जाता कब का ।  नशा चढ़ा है मुझ पर मेरी रवानी का ।             ...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ...
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Tag :राग-रंग
  May 19, 2013, 5:25 pm
जब बेईमान व्यक्ति सफल होता है तो यह उसकी बेईमानी की सफलता नहीं वरन यह उसमे पाए जाने वाले अच्छे  गुणों की सफलता होती है । यह जरूरी नहीं है की एक ईमानदार आदमी सभी योग्यताओं से युक्त हो । हो...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। ...
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Tag :निन्यान्वे का फेर
  May 12, 2013, 8:16 pm
तन प्यासा है मन प्यासा है ,                       जीवन को पाने की आशा है । अब तक जो कुछ पाया है ,         ...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ...
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Tag :मेरी कविताएँ
  May 10, 2013, 12:55 pm
रिश्तो की डोर कोई , उलझ गयी ऐसी , ना तोडे से टूटे , ना सुलझाई जाए ही.. रिश्ता भी ऐसा , जिसे दिल ही निभाए , ना छोड़े से छूटे , ना अपनाया जाए ही..  सांप और छछुंदर सी ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टिय...
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Tag :बस तेरे लिये
  May 7, 2013, 2:44 pm
ये नहीं है जगत वो , जिसको चाहा था मैंने । वो सपनों का महल था , ये है खण्डहर विराना । सोंचा था मैंने कुछ , हरे भरे बाग़ होंगे । फूलो की खुशबू और , फलो की मिठास होगी । सुबह शाम ठंडी-ठंडी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत ...
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Tag :मेरी कविताएँ
  May 7, 2013, 1:50 pm
धरती प्यासी, नदिया प्यासी , प्यासा सारा अम्बर है । तन प्यासा है , मन प्यासा है , प्यासा सारा जीवन है । प्यास लगे जब धरती को तो , नदियाँ उसकी प्यास बुझाये । प्यास लगे जब नदियों को तो , अम्बर उसकी...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा.....
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Tag :राग-रंग
  May 5, 2013, 4:53 pm
जीवन में कभी कभी , कुछ पल ऐसे आते है । जहाँ हम प्रायः: अपनी , मर्यादाओ को भूल जाते है । और भुलाकर मर्यादाओ को , जो कुछ भी हम करते है । आज नहीं तो कल हम , कही न कही उसकी भरपाई करते है...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है त...
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Tag :प्रबंधन
  May 5, 2013, 4:07 pm
जब कभी होगी जरूरत , फिर नए विशवास  की । जिन्दगी को उलझनों के , जाल में हम डाल देंगे । उलझनों के जाल से , जब निकल कर आयेंगे । एक नए विशवास का , आधार लेकर आयेंगे...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्रविष्टियाँ...
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Tag :मेरी कविताएँ
  May 3, 2013, 2:00 pm
जीवन के उन क्षणों को , चाहूँगा बार बार । तुझको अपने दिल में , बुलाऊँगा बार बार । तेरे ओंठो की तपिश , जगाऊँगा बार बार । तुझसे मिलने के लिए , आऊँगा बार बार । जीवन के उन क्षणों को ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ता...
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Tag :राग-रंग
  April 29, 2013, 3:01 pm
वो स्वपन ही था जो वर्षो पहले , खुली आँख से देखा था । जब वही हकीकत में बदला , तो नींद नहीं अब आती है । खाना पीना छूट  गया और , काम भी सारे भूल गया । यादो के मँझधार में अब , जीवन...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प...
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Tag :राग-रंग
  April 26, 2013, 2:56 pm
बस कर्म है अधिकार तुम्हारा ,  पीछे ना हटो कर्त्तव्य से । होकर अधीर ना रुक जाना, निष्फल होते किसी कर्म से । ज्यों बूँद बूँद से सागर बनता , संचित होते कर्म सभी । यदि आज नहीं निश्चय कल ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्त...
अनंत अपार असीम आकाश...
Tag :मेरी कविताएँ
  April 25, 2013, 2:01 pm
खोल दो तुम द्वार सारे ,जीवन के अभी जो बंद हैं । राह दो तुम पवन को , साँसे अभी कुछ तंग है । उठने दो तुम ज्वार को , भावना के सागर में । तोड़ दो बंधन सभी , मन ना रहे एक गागर में । संसार क्या सन्यास...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प...
अनंत अपार असीम आकाश...
Tag :मेरी कविताएँ
  April 20, 2013, 2:45 pm
अब चलते चलते पाँव थके , तलुओ में पड़  गए छाले है । हम इतनी दूर निकल आये , अब नहीं पास घर वाले है । सोंचा था यूँ चलते चलते , पहचान स्वयं को जायेंगे । चाह रहा क्या मन बौरा , यह...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्...
अनंत अपार असीम आकाश...
Tag :मेरी कविताएँ
  April 14, 2013, 2:45 pm
क्या करे क्या ना करे... कुछ समझ आता नहीं... नींद भी आती नहीं , चैन भी आता नहीं । सोंचता था सब निबटाकर , चैन से मै सो सकूँगा । जो था होना हो चुका , अब चैन से मै जी सकूँगा । पर...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी प्र...
अनंत अपार असीम आकाश...
Tag :राग-रंग
  April 14, 2013, 1:54 pm
एक जाम तो पीने दो मुझको , मन मेरा खाली-खाली है । बेगानों सा लगता ये जग , यह रोज मनाता दिवाली है । मेरी समाधि मिटाकर के , वो चाह रहे हैं भवन बनाना । तुम उन्हें बता दो जाकर के ,...जाने कितने बादल आये,गरजे बरसे चले गए, मै भी एक छोटा सा बादल,बिन बरसे ही मै भटक रहा..। प्रस्तुत है ताजी ...
अनंत अपार असीम आकाश...
Tag :मेरी कविताएँ
  April 9, 2013, 2:35 pm
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