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Blog: मन के पाखी

Blogger: Sweta sinha
हर अभिव्यक्ति के बादबची हुई अभिव्यक्ति मेंभावों की गहराई में छुपीअव्यक्तता की अनुभूतिसदैव जताती हैअभिव्यक्ति केअधूरेपन के समुच्चय कोअपूर्ण शब्दों के समास कोजिन्हें पूर्ण करने की चेष्टा मेंअक्सर ख़ाली पन्ने परफडफड़़ाती हैं बेचैनियाँ...।बेचैनियों को छुपाने के ल... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   1:10pm 19 Jan 2022 #
Blogger: Sweta sinha
गर जीना है स्वाभिमान सेमनोबल अपना विशाल करोन मौन धरो ओ तेजपुंजअब गरज उठो हुंकार भरो।बाधाओं से घबराना कैसा?बिन लड़े ही मर जाना कैसा?तुम मोम नहीं फौलाद बनोजो भस्म करे वो आग बनोअपने अधिकारों की रक्षा काउद्धोष करो प्रतिकार करो।विचार नभ पर कल्पनाओं केइंद्रधनुष टाँकना ही ... Read more
Blogger: Sweta sinha
प्रेम कहानियाँ पढ़ते हुएस्वयं एक पात्र हो जातीप्रेम की अलौकिककहानियों में खोकर उसेपात्रों की अनुभूति महसूसना पसंद था।मन के समुंदर पर नमक की स्याही सेप्रेम लिखकर बंदकर शीशियों में भावनाओं की लहरों के बीचछोड़ देती अक्सर वह स्वतंत्र,बंधहीन बहने के लिए।प्रेम पात्रो... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   6:08pm 5 Jan 2022 #
Blogger: Sweta sinha
अंधपरंपराओं पर लिखी गयीप्रसिद्ध पुस्तकें,घिसी-पिटी रीति-रिवाज़ों पर आधारितदैनंदिन जीवन के आडंबर परप्रस्तुत  शोधपत्रलेख,कहानियां, कविताओं मेंचित्रित मर्मस्पर्शी उद्धरणइन्हीं सराहनीय कर्मों के अनुसारराष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय स्तर परविश्व पटल पर पुरस्कृत, सम... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   6:44am 19 Dec 2021 #
Blogger: Sweta sinha
शरद में अनगिनत फूलों का रंग निचोड़करबदन पर नरम शॉल की तरह लपेटकरओस में भीगी भोर की नशीली धूप सेकती वसुधा,अपने तन पर फूटीतीसी की नाजुक नीले फूल पर बैठने कीकोशिश करती तितलियों को देख-देखकर गुनगुनातेभँवरों की मस्ती परबलाएँ उतारती है...खेतों की पगडंडियों परअधखिले ति... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   5:45pm 16 Dec 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 सुनो सैनिकतुम्हारे रक्त का चंदनलगाकर मातृभूमिशृंगार करती है।कहानी शौर्य कीअविश्वसनीय वीरता कीगाथाएँ अचंभित,सुनकर, पढ़कर, गर्वित होकर  श्रद्धानत वंदनभीरू मन को भीधधकता अंगार करती है।सुनो सैनिक...!हृदय में अपनेतिरंगा टाँकना,रगो को देशभक्ति केनमक से पाटनामाटी ... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   5:52pm 8 Dec 2021 #
Blogger: Sweta sinha
बेतरतीब उगी हुईघनी जंगली घास-सा दुखजिसके नीरस अंतहीन छोर केउस पार कहीं दूर सेकिसी हरे पेड़ की डाल परबोलती सुख की चिड़िया का मद्धिम स्वर उम्मीद की नरम दूब-साथके पाँव के छालों कोसहलाकर कहती है-ज़िंदगी के सफ़र का खूबसूरत पड़ाव तुम्हारी प्रतीक्षा में है। बहुत पास से ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:27pm 2 Dec 2021 #
Blogger: Sweta sinha
साँसों की लय परचल रही हूँ ज़िंदगी की रगो मेंपर किसी की साँसें न हो सकी।किसी के मन की ख़्वाहिशों की ढेर में शामिलअपनी बारी की प्रतीक्षा में ख़ुद से बिछड़ गयी।समय की डाल पर खिलीकिसी पल पर मर मिटने को बेताब कलीमौसम की रूखाई से दरख़्त पर ही सूख गयी।जिसकी गज़ल कादिलकश रुमानी मि... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   11:49am 25 Nov 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 माँ इस सृष्टि का सबसे कोमल,स्नेहिल, पवित्र, शक्तिशाली ,सकारात्मक एवं ऊर्जावान भाव,विचार या स्वरूप है।सूर्य,चंद्र,अग्नि,वायु,वरूण,यम इत्यादि देवताओं जो प्रकृति में स्थित जीवनी तत्वों के अधिष्ठाता हैं, के अंश से उत्पन्न देवी का आह्वान करने से तात्पर्य  मात्र विध... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   3:27am 8 Oct 2021 #
Blogger: Sweta sinha
संवेदना से भरीसाधारण स्त्रियाँ   अपनी भावनाओं को ज्ञानेंद्रियोंसे ज्यादा महसूसती हैस्नेहिल रिश्तों कोनाजुक डोर कीपक्की गाँठ से बाँधकरस्वजनों के अहित,उनसे बिछोह कीकल्पनाओं के भय कोव्रत,उपवास के तप में गलाकरअपनी आत्मा के शुद्ध स्पर्श से नियति को विनम्रता से... Read more
Blogger: Sweta sinha
(१)--------------------भोर की पहली किरण फूटने पर छलकी थी तुम्हारी मासूम मुस्कान कीशीतल बूँदेंजो अटकी हैं अब भीमेरी पलकों के भीतरी तह मेंबड़े जतन सेरख दिया है साँसों के समुंदर मेंतुम्हारे जाने के बाद जब-जब भावों की लहरें छूती है मन के किनारों कोजीवन के गर्म रेत परबिखरकर इ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:28am 22 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
नामचीन औरतों कीलुभावनी कहानियाँक्या सचमुचबदल सकती हैंहाशिये में पड़ीस्त्री का भविष्य...?उंगलियों परगिनी जा सकने वालीप्रसिद्ध स्त्रियों कोनहीं जानतीपड़ोस की भाभी,चाची,ताई,बस्ती की चम्पा,सोमवारीलिट्टीपाड़ा के बीहड़में रहनेवालीमंगली,गुरूवारीस्पोर्ट्स शू पहनेमंगला ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   11:11am 19 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
आज भी याद है मुझेतुम्हारे एहसास की वोपहली छुअनदिल की घबरायी धड़कनसरककर पेट में तितलियां बनकरउड़ने लगी थी,देह की थरथराती धमनियों मेंवेग से उछलतीधुकधुकी के स्थान परआ बैठी थी नन्ही-सी बुलबुलबेघर कर संयत धड़कनों कोअपना घोंसलाअधिकारपूर्वक बनाकरतुम्हारे मन का प्रेम ग... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   7:14am 16 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
शिक्षक मेरे लिए मात्र एक वंदनीय शब्द नहीं है, न ही मेरे पूजनीय शिक्षकों की मधुर स्मृतियाँ भर ही।मैंने स्वयं शिक्षक के दायित्व को जीया है।मेरी माँ सरकारी शिक्षिका रही हैं,मुझसे छोटी मेरी दोनों बहनें भी वर्तमान में सरकारी शिक्षिका हैं। उनके शिक्षक बनने के सपनों से य... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   3:05pm 5 Sep 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 अवतारों की प्रतीक्षा मेंस्व पर विश्वास न कम होतेरी कर्मठता की ज्योतिसूर्यांश,तारों के सम हो।सतीत्व की रक्षा के लिएचमत्कारों की कथा रहने दो,धारण करो कृपाण,कटारआँसुओं को व्यर्थ न बहने दो। व्याभिचारियों पर प्रहार प्रचंडउष्मा ज्वालामुखी सम हो।अवतारों की प्रतीक्... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   4:47pm 30 Aug 2021 #
Blogger: Sweta sinha
 बर्बरता के शिकाररक्तरंजित,क्षत-विक्षत देह,गिरते-पडते,भागते-कूदतेदहशत के मारेआत्महत्या करने को आमादालोगों कीतस्वीरों के भीतर कीसच की कल्पनाभीतर तक झकझोर रही है।पुरातात्विक विश्लेषकों के साथसभ्यताओं की अंतिम सीढ़ी पर लटके जिज्ञासुओं की भाँतिदेखकर अनुमान क... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:59pm 18 Aug 2021 #
Blogger: Sweta sinha
करती हूँ प्रणाम उनको,शीश नत सम्मान में है,प्राण दे,इतिहास के पृष्ठों में अंकित हो गयेजिनकी लहू की बूँद से माँ धरा पावन हुईमाटी बिछौना ओढ़ जो तारों में टंकित हो गये।चित्रलिखित चित्त लिए चिता सजाते पुत्र की क्षीर, नीर, रिक्त आँचल स्मृतियाँ टटोले सूत्र की,मौली,रोली राखी ... Read more
Blogger: Sweta sinha
मुंडेर परदाना चुगने आतीचिडियों के टूटे पंखइकट्ठा करती,नभ में उड़ते देखउनके कलरव परआनंदित होतीमैं चिड़िया हो जानाचाहती हूँ,मुझे चिड़िया पसंद हैक्योंकि अबूझ भाषा मेंमुझसे बिना कोई प्रश्न कियेवो करती हैं मुझसे संवाद।मखमली,कोमल,खिलती कलियों, फूलों कीपंखुड़ियों को छूकर ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   2:46pm 28 Jul 2021 #
Blogger: Sweta sinha
आत्मा को ललकारतीचीत्कारों को अनसुनाकरना आसान नहीं होता ...इन दिनों सोचने लगी हूँएक दिन मेरे कर्मों काहिसाब करतीप्रकृति ने पूछा कि-महामारी के भयावह समय मेंतुम्हें बचाये रखा मैंनेतुमने हृदयविदारक, करूण पुकारों,साँसों के लिए तड़प-तड़पकर मरतेबेबसों जरूरतमंदों की क्या... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:23am 24 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
वक़्त के अजायबघर मेंअतीत और वर्तमान प्रदर्शनी में साथ लगाये गये हैं-ऐसे वक़्त मेंजब नब्ज़ ज़िंदगी कीटटोलने पर मिलती नहीं,साँसें डरी-सहमीहादसों की तमाशबीन-सीदर्शक दीर्घा में टिकती नहीं,ज़िंदगी का हर स्वादखारेपन में तबदील होने लगामुस्कान होंठो पर दिखती नहीं,नींद के इं... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   3:21am 18 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
निर्लज्ज निमग्न होकर मनदेता है तुम्हें मूक निमंत्रणऔर तुम निर्विकार,शब्द प्रहारकरझटक जाते हो प्रेम अनदेखा करजब तुम्हारा मन नहीं होता...।घनीभूत आसक्ति में डूबाअपनी मर्यादा भूलप्रणय निवेदन करता मन तुम्हारे  दर्शन बखान परअपनी दुर्बलताओं के भान परलजाकर सोचता हैत... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   3:52pm 9 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
१)बिना जाने-सोचे उंगलियाँ उठा देते हैं लोगबातों से बात की चिंगारियाँ उड़ा देते हैं लोगअख़बार कोई पढ़ता नहीं चाय में डालकरकिसी के दर्द को सुर्खियाँ बना देते हैं लोग२)चलन से बाहर हो गयी चवन्नियों की तरह,समान पर लिपटी बेरंग पन्नियों की तरह,कुछ यादें ज़ेहन में फड़फड़ाती हैं अक्... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   8:23am 3 Apr 2021 #
Blogger: Sweta sinha
कली केसरी पिचकारी मन अबीर लपटायो,सखि रे! गंध मतायो भीनीराग फाग का छायो। चटख कटोरी इंद्रधनुषीवसन वसुधा रंगवायो,सरसों पीली,नीली नदियाँसुमनों ने माँग सजायो।कचनारी रतनारी डाली  लचक मटक इतरायो, सारंग सुगंध सुधहीन भ्रमर बाट बटोही बिसरायो।सखि रे! गंध मतायो भीन... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:23pm 27 Mar 2021 #
Blogger: Sweta sinha
मुझे ठहरी हुई हवाएँबेचैन करती हैंबर्फीली पहाड़ की कठिनाइयाँअसहज करती हैतीख़ी धूप की झुलसन सेरेत पर पड़ी मछलियों की भाँतिछटपटाने लगती हूँकिसानों की तरह जीवट नहींऋतुओं की तीक्ष्णता सह नहीं पातीमैं बीज भी तो नहींजो अंकुरित होकरधान की बालियाँ बनेऔर किसी का पेट भर सकेमै... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:05am 3 Mar 2021 #
Blogger: Sweta sinha
गुन-गुन छेड़े पवन बसंतीधूप की झींसी हुलसाये रे, वसन हीन वन कानन मेंजोगिया टेसू मुस्काये रे।ऋतु फाग के स्वागत में धरणी झूमी पहन महावर, अधर हुए सेमल के रक्तिमसखुआ पाकड़ हो गये झांवर,फुनगी आम्र हिंडोले बैठीकोयलिया बिरहा गाये रे,निर्जन पठार की छाती परजोगिया टेसू मुस्... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   5:20am 25 Feb 2021 #
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