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Blog: Nayekavi

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हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ।घोर घटा में, कड़क रहीं थी, दामिनियाँ।हाथ हाथ को, भी नहिं सूझे, तम गहरा।दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।।यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी।विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी।मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया।कारा-गृह में, जन्म लिया था, मझ रति... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   3:13am 12 Jan 2022 #रास छंद
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बह्र:- 2122  1212  22राह-ए-उल्फ़त में डट गये होते,खुद ब खुद ख़ार हट गये होते।ज़ीस्त से भागते न मुँह को चुरा,सब नतीज़े उलट गये होते।प्यार की इक नज़र ही काफी थी,पास हम उनके झट गये होते।इश्क़ में खुश नसीब होते हम,सारे पासे पलट गये होते।सब्र का बाँध तोड़ देते गर,अब्र अश्कों के फट गये होते,ब... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   5:24am 8 Jan 2022 #बासुदेव अग्रवाल
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छा गये ऋतुराज बसंत बड़े मन-भावने।दृश्य आज लगे अति मोहक नैन सुहावने।आम्र-कुंज हरे चित, बौर लदी हर डाल है।कोयली मधु राग सुने मन होत रसाल है।।रक्त-पुष्प लदी टहनी सब आज पलास की।सूचना जिमि देवत आवन की मधुमास की।।चाव से परिपूर्ण छटा मनमोहक फाग की।चंग थाप कहीं पर, गूँज कहीं रस ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   3:33am 5 Jan 2022 #बासुदेव अग्रवाल
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प्रथम जनवरी क्या लगी, काम दिये सब छोड़।शुभ सन्देशों की मची, चिपकाने की होड़।।पराधीनता की हमें, जिनने दी कटु पाश।उनके इस नव वर्ष में, हम ढूँढें नव आश।।सात दशक से ले रहे, आज़ादी में साँस।पर अब भी हम जी रहे, डाल गुलामी फाँस।।व्याह पराया हो रहा, मची यहाँ पर धूम।अब्दुल्ला इस देश ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   6:53am 1 Jan 2022 #बासुदेव अग्रवाल
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राम की महिमा निराली, राख मन में ठान।अन्य रस का स्वाद फीका, भक्ति रस की खान।जागती यदि भक्ति मन में, कृपा बरसी जान।नाम साँचो राम को है, लो हृदय में मान।।राम को भज मन निरन्तर, भक्ति मन में राख।इष्ट पे रख पूर्ण आश्रय, मत बढ़ाओ शाख।शांत करके मन-भ्रमर को, एक का कर जाप।राम-रस को घोल ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:01am 28 Dec 2021 #रूपमाला छंद
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नारी की पीड़ादहेज रूपी कीड़ाकौन ले बीड़ा?**दहेज तुलाएक पल्ले समाजदूजे अबला।**पंचाली नारपुरुष धर्मराजचढ़ाते दाव।**बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया26-07-19... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   3:27am 25 Dec 2021 #हाइकु
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शक्ति छंद फकीरी हमारे हृदय में खिली।बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।वृषभ से पड़ें हम रहें हर कहीं।जहाँ मन, बसेरा जमा लें वहीं।।बना हाथ तकिया टिका माथ लें।उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।मिले जो उसीमें गुजारा करें।... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:25am 12 Dec 2021 #शक्ति छंद
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मेरे तो हैं बस राम एक स्वामी।अंतर्यामी करतार पूर्णकामी।।भक्तों के वत्सल राम चन्द्र न्यारे।दासों के हैं प्रभु एक ही सहारे।।माया से आप अतीत शोक हारी।हाथों में दिव्य प्रचंड चाप धारी।संधानो तो खलु घोर दैत्य मारो।बाढ़े भू पे जब पाप आप तारो।।पित्राज्ञा से वनवास में सिध... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   3:09am 7 Dec 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र:- 2122  1212  22मौत का कुछ तो इंतज़ाम करें,नेकियाँ थोड़ी अपने नाम करें।कुछ सलीका दिखा मिलें पहले,बात लोगों से फिर तमाम करें।सर पे औलाद को न इतना चढ़ा,खाना पीना तलक हराम करें।दिल में सच्ची रखें मुहब्बत जो,महफिलों में न इश्क़ आम करें।वक़्त फिर लौट के न आये कभी,चाहे जितना भी ताम... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   2:41am 4 Dec 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(1)हाँ सेवा,कलेवायुक्त मेवा,परम तुष्टिजीवन की पुष्टिवृष्टि-मय ये सृष्टि।***(2)दो सेवा?प्रथमदीन-हितकर्म में रत,शरीर विक्षत?सेवा-भाव सतत।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया16-07-19... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   4:08am 27 Nov 2021 #वर्ण पिरामिड
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नवम तिथि सुहानी, चैत्र मासा।अवधपति करेंगे, ताप नासा।।सकल गुण निधाना, दुःख हारे।चरण सर नवाएँ, आज सारे।।मुदित मन अयोध्या, आज सारी।दशरथ नृप में भी, मोद भारी।।हरषित मन तीनों, माइयों का।जनम दिवस चारों, भाइयों का।।नवल नगर न्यारा, आज लागे।इस प्रभु-पुर के तो, भाग्य जागे।।घर घ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   4:28am 21 Nov 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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(दिवाली)दिवाली की बधाई है मेरी साहित्य बन्धुन को,सभी बहनें सभी भाई करें स्वीकार वन्दन को,भरे भण्डार लक्ष्मी माँ सभी के प्रार्थना मेरी,रखें सौहार्द्र नित धारण करें साहित्य चन्दन को।(1222×4)दीपोत्सव के, जगमग करें, दीप यूँ ही उरों में।सारे वैभव, हरदम रहें, आप सब के घरों में।म... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   11:52am 18 Nov 2021 #समसामयिक मुक्तक
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भगवन भी पछताये,शक्तिमान रच मानव,सृष्टि नष्ट करता दानव।***ओस कणों सा है मानव,संघर्षों की धूप,अब अस्तित्व करे तांडव।***धैर्य धीर धर के निर्लिप्त,कुटिल हृदय झुँझलाएँ,कमल पंक में इठलाएँ।***बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया26-07-20... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   10:14am 14 Nov 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य गीत गौ रँभा रँभा कहे।कोकिला मयूर कीर कूक गान गा रहे।।श्याम पैर गूँथ के कदंब के तले खड़े।नील आभ रत्न बाहु-बंद में कई जड़े।।काछनी मृगेन्द्र लंक में लगे लुभावनी।श्वेत पुष्प माल कंठ में बड़ी सुहा... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:17am 12 Nov 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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 द्रुतविलम्बित छंद "गोपी विरह"मन बसी जब से छवि श्याम की।रह गई नहिँ मैं कछु काम की।लगत वेणु निरन्तर बाजती।श्रवण में धुन ये बस गाजती।।मदन मोहन मूरत साँवरी।लख हुई जिसको अति बाँवरी।हृदय व्याकुल हो कर रो रहा।विरह और न जावत ये सहा।।विकल हो तकती हर राह को।समझते नहिँ क्य... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   11:01am 28 Oct 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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 ग़ज़ल (बोझ लगने लगी जवानी है)बह्र:- 2122  1212  22एक मज़ाहिया मुसलसलबोझ लगने लगी जवानी है,व्याह करने की मन में ठानी है।सेहरा बाँध जिस पे आ जाऊँ,पास में बस वो घोड़ी कानी है।देख के शक़्ल दूर सब भागें,फिर भी दुल्हन कोई मनानी है।कैसी भी छोकरी दिला दे रब,कितनी ज़हमत अब_और_उठानी है।एक बस... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   11:37am 22 Oct 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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 मत्तगयंद सवैया छंदमत्तगयंद सवैया छंद 23 वर्ण प्रति चरण का एक सम वर्ण वृत्त है। अन्य सभी सवैया छंदों की तरह इसकी रचना भी चार चरण में होती है और सभी चारों चरण एक ही तुकांतता के होने आवश्यक हैं।यह भगण (211) पर आश्रित है, जिसकी 7 आवृत्ति और अंत में दो गुरु वर्ण प्रति चरण में रहत... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:04am 14 Oct 2021 #सवैया विधान
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(1)करें सामना कोरोना का, जरा न हमको रोना है,बीमारी ये व्यापक भारी, चैन न मन का खोना है,संयम तन मन का हम रख कर, दूर रहें अफवाहों से, दृढ़ संकल्प सभी का ये हो, रोग पूर्ण ये धोना है।(ताटंक छंद आधारित)*********(2)यही प्रश्न है अब तो आगे, भूख बड़ी या कोरोना,करो पेट की चिंता पहले, छोड़ो सब रोना ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:39am 4 Oct 2021 #समसामयिक मुक्तक
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(दोहा छंद)सद्गुण सरस सुगन्ध से, महकायें जग आप।जो आयें संपर्क में, उनके हर लें ताप।।अंकुश रहे विवेक का, यह सद्गुण सिरमौर।मन-मतंग वश में रहे, क्या बाकी फिर और।।विनय धार हरदम रखें, यह सद्गुण की खान।कायम कुल की यह रखे, आन, बान अरु शान।।सद्गुण कुछ पाला नहीं, पर भीषण आकार।थोथा ख... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   5:12am 18 Sep 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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जलते रहेजीवन के आले मेंस्मृति दीपक।**जीवन चाहेहर हाल में ढ़लबने रहना।**जो ढ़ल गयासतत-जीवन सावो ही जी गया।**जीवन-गतिकोष बद्ध स्पन्दितशाश्वत शक्ति****बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22-05-19... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   4:15am 24 Aug 2021 #हाइकु
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"नरक चतुर्दशी"नरकासुर मार श्याम जब आये।घर घर मंगल दीप जले तब, नरकचतुर्दश ये कहलाये।।भूप प्रागज्योतिषपुर का वह, चुरा अदिति के कुण्डल लाया,सौलह दश-शत नार रूपमति, कारागृह में लाय बिठाया,साथ सत्यभामा को ले हरि, दुष्ट असुर के वध को धाये।नरकासुर मार श्याम जब आये।।पक्षी राज ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   11:27am 20 Aug 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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बह्र :- 2122 2122 2122 212देश की ख़ातिर सभी को जाँ लुटाने की कहो,दुश्मनों को खून के आँसू रुलाने की कहो।देश की चोड़ी हो छाती और ऊँचा शीश हो,भाव ऐसे नौजवानों में जगाने की कहो।ज्ञान की जिस रोशनी में हम नहा जग गुरु बने,फिर उसी गौरव को भारत भू पे लाने की कहो।बेसुरे अलगाव के जो गीत गायें अब उन... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   12:09pm 4 Aug 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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आरोही अवरोही पिरामिड(1-11 और 11-1)को नहींजानतजग में तुदूत राम को।महिमा दी तूनेसालासर ग्राम को।राम लखन को लाएपावन किष्किंधा धाम को।सागर लांघा  लंकिनी  मारीलंका में छेड़ दिया संग्राम को।सौंप मुद्रिका, उजाड़ी  वाटिकाजारे तब लंका ललाम को।स्वीकार   करो  बजरंगीतुम ... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   2:47am 21 Jun 2021 #वर्ण पिरामिड
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पहचान ले नारी तू ताकत जो छिपी तुझ में,कारीगरी उसकी जो सब ही तो सजी तुझ में,मंजिल न कोई ऐसी तू पा न सके जिसको,भगवान दिखे उसमें ममता जो बसी तुझ में।(221  1222)*2***********बदी के बदले भलाई सदा न पाओगे,सितम ढहाओगे, तुम भी वफ़ा न पाओगे,सदा ही जुल्म किया औरतों पे मर्दों ने,डरो ख़ुदा से नहीं तो प... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:25am 15 Jun 2021 #शब्द विशेष मुक्तक
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(दोहा छंद)पंकज जैसा मन रखो, चहुँ दिशि चाहे कीच।पाप कभी छू नहिं सके, जितने रहलो बीच।।कमल खिले सब पंक में, फिर भी पूजे जाय।गुण तो छिप सकते नहीं, अवगुण बाहर आय।।जग काजल की कोठरी, मन ज्यों धवल कपास।ज्यों बूड़े त्यों श्याम हो, बूड़े नहीं उजास।।जब उमंग मन में रहे, बनते बिगड़े काम।ग... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:29am 10 Jun 2021 #बासुदेव अग्रवाल
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