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Blog: मंथन

Blogger: Meena Bhardwaj
मुझे अच्छे लगते हैं पहाड़….,इनके अनन्य सखाचीड़ -चिनार और देवदारअठखेलियां करते हुएदेते हैं मौन आमन्त्रणअपने पास आने का  भोर के धुंधलके मेंपहाड़ों से झांकती ऊषा का सौन्दर्यशीशी में बंद इत्र की महक सा मुझे बाँधता है अपने सम्मोहक आकर्षण मेंसुदूर घाटी में जब ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   9:01am 24 Jan 2022 #
Blogger: Meena Bhardwaj
बच्चन जी की कविता "साथी सांझ लगी होने"पढ़ते हुए स्वत: ही मन में उठे भावों को रुप देने का प्रयास एक कविता के रुप में ... गोताखोर बनी शफरियांखेल रहीं दरिया जल मेंमन्थर लहरें डोल रही हैं ढलते सूरज के संग मेंअब रात लगी होनेनेह के तिनके जोड़ गूंथ करनीड़ बसाया खग वृन्दों नेएक - ए... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   2:34am 15 Jan 2022 #
Blogger: Meena Bhardwaj
आज किस यक्ष कासंदेशा ले आए बादल !शीत ऋतु कीखिली-खिली भोर मेंबड़े इधर-उधर मंडरा रहे हो रात भर जाग करलैपटॉप पर काम करतीकोई विरहिणीअभी अभी सोयी होगी बंद खिड़की परतुम्हारी दस्तक…,मुझे नहीं लगताउसके कानों तक गई होगी वैसे तुम चाहो तोअपनी उपस्थिति के चिन्ह उसकी खिड़... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   2:57am 1 Jan 2022 #
Blogger: Meena Bhardwaj
रोज ही मिलती थी वह...बोरे सा कंधे पर डालेस्कूल वाला बैगएक अबूझ प्रतीक्षा में रतजैसे अनजान डोर बंधी हो हमारे दरमियान...मुझे देखते ही उसकी दंत पंक्ति चांदनी फूल सी खिल जाती और हम दोनों साथ-साथचल पड़ती अलग-अलगगंतव्य की ओर...एक दिन राह मेंअपनी मुठ्ठी से उसने भर दी म... Read more
clicks 17 View   Vote 0 Like   4:19am 26 Dec 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
गुलेरी जी की तरह-"उसने भी कहा था"यूं ही रहना ,एक अदृश्य डोर में बंधे अच्छे लगते हो ।डोर के हिलते ही ,प्राणों का स्पदंनयूं झलकता है ..,जैसे ठहरे पानी के ताल मेंकंकड़ी फेंकने से , लहरें उठीं हों ।मगर अब …,समय बदल गया है ,डोर के तन्तुजीर्ण-शीर्ण से दिखते हैं ।और ठहरे पानी में भ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   2:48am 14 Dec 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
कल कल बहते भावों को ,शब्दों की माला में बांधूं ।झील सतह पर हंस का जोड़ा ,सैकत तीर शिकारा बांधूं ।।ऊषा रश्मियाँ लेकर आती ,पूर्व दिशा से सुन्दर सूरज ।स्वागत में खग कलरव करते ,ठगी ठगी सी लागे कुदरत।।मंजुल मुकुर प्रत्युष मनोहर ,कैसे मैं शब्दों में बांधूं ।।झील सतह पर हंस का ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   7:59am 6 Dec 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                  मेघों में छुपकर सोया है सूरज ,या घन ने उसको ढका हुआ ।भोर भी अब सांझ जैसी ,भ्रम दृग पटल पर, पड़ा हुआ ।चलने लगी सीली हवाएं ,दिशाएं सभी गीली सी हुईं  ।बदला बदला सा सृष्टि आंगन ,न जाने कैसी बात हुई ।भीगे हुए हैं पुष्प दल सारे .अलि पुंज भी सुप्त सा लग रह... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   3:53am 2 Dec 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
 कांटें हैं पथ में फूल नहींचलना इतना आसान नहींयही सोच कर मन मेरा संभल संभल पग धरता हैमन खुद ही खुद से डरता है तू पेंडुलम सा  झूल रहाबस मृगतृष्णा में डूब रहाकल आज कभी भी हुआ नहीफिर क्यों इतनी जिद्द करता हैमन खुद से क्यों छल करता हैकल हो जाएंगे पीत पातनश्वर तन की कै... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   9:22am 22 Nov 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
कुछ दिनों सेखुद ही हारने लगी हूँअपने आप सेदर्द है कि घर बना बैठातन में…,घिरते बादलों और डूबते सूरजको देखते-देखतेठंड बाँध देती है मेरे इर्दगिर्द दर्द और थकन की चादरज्यों ज्यों गोधूलि की चादरलिपटती है धरा की देह परमन छूने लगता हैझील की अतल गहराई  भोर के इन्तज़ार ... Read more
clicks 89 View   Vote 0 Like   3:09pm 16 Oct 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
                     अभी-अभी तो राह मिली थीएक-दूजे को जानें कितनाएक जन्म छोटा लगता है नेह गहरा सागर के जितनाअनुमानों की राह पकड़ केपर्वत पार करेंगे कैसेचंद दिनों के संग साथ सेहमराही हम होंगे कैसेघर- आंगन के हर कोने से स्मृतियों के तो तार जुड़े हैकौन तार गठरी ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   1:54am 26 Sep 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
                     कभी गाढ़ी नहीं छनीइन आँखों की नींद सेबहाना होता है इनके पास जागने काकभी थकान का तो कभी काम काखुली छत पर..तब भी तुम आया करते थेहॉस्टल के अनुशासित वार्डन सरीखेऔर आज भी..बिलकुल नहीं बदले तुममगर वक्त के साथकितना बदल गई मैं***... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:04am 18 Sep 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
                       ताकती परवाज़े भरती चील को..बोझिल,तन्द्रिल दृग पटल मूंदलेटकर…, धूप खाती रजाईयों पर शून्य की गहराईयों में उतरना  चाहती हूँलिख छोड़ी है एक पाती तुम्हारे नाम  पढ़ ही लोगे मेरे मन की बातजे़हन में ताजा है मेरीकितनी याद..तुम्हार... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   5:06am 7 Sep 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
गर्मजोशी से लबरेज़ तुम्हारा स्टेटस...  पुराने सन्दूक में छिपाये उपन्यास जैसा लगा मुझे वो भी प्रिय था और तुम भीतुम से जुदाई के वक्तअपने नेह परयकीन की खातिरएक बार कहा था-तुम ऑक्सीजन होहमारे खातिरहमारी प्राणवायु….आज तुम्हें देख करलगता है तुम तो किसी और आंग... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:10pm 26 Aug 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।     शहीदों को याद करें ,     मान से शीश झुकायें ।।     फहरायें तिरंगा शान से ,     गर्व से जन गण मन गायें ।।     आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।     सीखें समानता बन्धुता का पाठ ,&n... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   6:35pm 14 Aug 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
                           हे गोविंद.. हे कृष्ण मुरारी…मंदिर की घंटियों सीकानों मे  गूंजतीमीठी सी आवाज सेखुलती थी नींद..चाय की भाप की ओट से उजला सा चेहरायूं लगता जैसेधीमे से सुलगते लोबान के पीछे हो कोई मन्दिर की मूरत ... बहुत सी बातें चाँद -सितारों की... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   4:05am 9 Aug 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
पल-पल के हिसाब से तय करती  हैअपना सफ़र…समय ही कहाँ  है इसके पासचोटी या जूड़ा बनाने का...  बाल कटने के बाद  पोनी टेल भी अच्छी ही लगती हैखंजन-नयन देखने दिखाने कीफुर्सत किसके पास है'अकॉर्डिंग टू फेस'गॉगल्सकाफी है खूबसूरती में चार चाँद की खातिर…नन्हे गुड्... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   2:52am 3 Aug 2021 #कहानियाँ
Blogger: Meena Bhardwaj
तुम्हारा नेह भीहवा-पानी सरीखा  हैचाहने पर  भी पल्लू के छोर सेबंधता नहींबस…,खुल खुल जाता है कभी-कभी…,चुभ जाता हैकुछ भी अबोला सा बोलाजैसे कोई टूटा काँच…,कुछ समय की खींचतान...और फिर कुछ ही पल मेंएक सूखी सी मुस्कुराहट…,फर्स्ट एड का रुप धरबुहार देती है मार्ग के... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   4:59pm 17 Jun 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                         शुक्ल पक्ष की चाँदनी में भीगी रातें..,जब होती हैंअपने पूरे निखार परतब... रात की रानी मिलकर रजनीगंधा के साथटांक दिया करती हैं उनकी खूबसूरती औरमादकता मेंचार चाँद ..उन पलों के आगेकुदरत का सारा का सारासौन्दर्यठगा ठगाऔरफीका फीक... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   5:18pm 10 Jun 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
बादल!सावन में अब की बरसो तो…लाना कुछ ऐसाजिससे हो इम्यूनिटी बूस्टजरूरत है उसकीमनु संतानों कोजो रख सकेउनके श्वसन को मजबूतचन्द्र देव!बड़े इठला रहे होयह ठसककिस काम की ?जब...सदियों से तुम्हारी प्रशंसा में  कसीदे पढ़ने वालों की  नींव... दरक रही है धीरे-धीरेसुनो ! ... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   8:45am 21 May 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                 लबों को रहने दो खामोशकाफी है, आँखों की मुस्कुराहट ।बर्फ ही तो हैइस आँच से ,बह निकलेगी ।**हौंसला और जिजिविषा देन है तुम्हारी । विश्वास की डोर का छोर भी ,तुम्हीं से बंधा है ।जानती हूँ रात के आँचल के छोर से,यूं ही तो बंधी होती है ।उजली भोर के,स... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:28pm 2 May 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                      लीक पर चलती पिपीलिका..एकता-अनुशासन औरसंगठन की प्रतीक हैआज हो या कल बुद्धिजीवी उनकीकर्मठता का लोहा मानते  हैंप्रकृति के चितेरे सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने भी कहा है-"चींटी को देखा?वह सरल, विरल, काली रेखाचींटी है प्राणी सामा... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   5:01am 18 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                       नाराज हैं मुझसेमेरी सबसे गहरी दोस्त किताबें..कल धूल झाड़ करीने से लगा रही थी तोमानो कर रहीं थीं शिकायत-माना 'कोरोना काल'हैएक साल से तुम परेशान हो..लहरें आ रहीं हैं - पहले पहली और अब दूसरीयह भी सच है किबाहर आना-जाना मना हैदूरी बनाये र... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   3:18am 14 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
        कई दिनों से...अक्षरों के ढेरी से तलाश रही हूँकुछ अनकहा सा..जिसमें भावों कीमज्जा का अभाव न होसंवेदनाओं केवितान में..प्राणों का वास होभूसे के ढेर से सुई की तरह बस..उन्हीं की खोज में हूँ ऐसे समय मेंसिमट रहा है मन कच्छप सदृशतृष्णा के अनन्त सागर सेनहीं ... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   5:02am 4 Apr 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                     झरें होंगे चाँदनी मे , हरसिंगार... निकलेंगे अगर घर से, तो देख लेंगे । नीम की टहनी पर, झूलता सा चाँद.. मिला फिर से अवसर, तो देखने की सोच लेंगे। शूल से चुभें, और द्वेष से सने..आ गिरे सिर पर ,वो पल तो झेल लेंगे।जिन्दगी छोटी सी, और उलझन... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:04am 30 Mar 2021 #
Blogger: Meena Bhardwaj
                     गहमागहमी.. बेतहाशा हताशा के दौर में ..मन की निराशाकिसी कलमकार के मन की..अंत:सलिला बन बहती हैकाग़ज और कलम के साथनहीं उकेरे जाते चंद अक्षर..एक संगतराश जैसे हाथ मिलते हैं दिलो-दिमाग के साथऔर अनगढ़ से भावों कोतराशते हैं ..अभिव्यक्त... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   3:39am 5 Mar 2021 #
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