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virendra jain ke nashtar वीरेन्द्र जैन के नश्तर्

व्यंग्य कविता एक जानवर और आ गया उनके बाड़े में                                 वीरेन्द्र जैन ======================================मूंछ एंठते पहलवान फिर रहे अखाड़े मेंएक जानवर और आ गया उनकेबाड़े मेंदण्ड बैठकें कर बाहोंको तेल पिलाया हैजितना मिल सकता था मालमुफ्त काखायाहैसेठों की चौकीदारी करते हैं भा...
virendra jain ke nashtar वीरेन्द्...
Tag :दलबदल
  December 13, 2011, 8:04 pm
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