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Blog: सफर के सजदे में

Blogger: शारदा अरोरा
धूप की सुनहली बातें धूप से है रौशनी पेड़-पौधे , जीव-जन्तु ,सारे नज़ारे धूप दुनिया का सबब है धूप से है कुल जहान धूप गढ़ती है कसीदे ,आदमी की शान में पाँव के छाले ये कहते ,धूप के टुकड़ों ने लिक्खी तेरी हिम्मत है नादान आदमी को चाहिए गुनगुनी हो धूप तो मजा ले सु... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   11:24am 26 May 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
तुझे बाहर न देख कर ,फिजाँ भी है खामोश ,ऐ इन्साँआये हैं परिन्दे बस्तिओं के करीब ,तेरा दिल बहलाने कोपेड़ों ने ली अँगड़ाई है , नव-अंकुर फूलेकोयल भो कूकती हैमौसम तो खिला हुआ हैनजर भर के तूने कभी देखा ही नहींपर्वत जँगल अब दूर से ही साफ नजर आने लगे हैंसुन रहे हैं कि जँगली जानवर अ... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   8:23am 15 May 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
हौसले की जँग ज़िन्दगी के लिएऐ ज़िन्दगी बता , और क्या चाहिए बन्दगी के लिएहर शर्त सर-माथे परज़िन्दगी की , ज़िन्दगी के लिएलबों पे हो मुस्कराहटकाबू में हो धड़कन की सुर-तालबजा ले मुझको ऐ ज़िन्दगी ,और क्या चाहिए साजिन्दगी के लिएधूप-छाया की कहानियों में उलझे तेरे किरदारतेरे ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   9:56am 27 Apr 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
दिया है प्रकाश का नाम जिसके आगे अन्धकार हारा है मन की बाती और संकल्पों का तेल और फिर देखो दिव्यता का खेल सम्पूर्ण विश्व साथ हो सर पर माँ भारती का हाथ हो मँगल की है कामना माँगल्य का ही वास हो सँताप न व्यापे कभी और दिव्यता का साथ हो poems... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   11:52am 5 Apr 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
क्या कहें अब मूक ज़ुबानें सुलगती चिंगारियाँ और फुंके घर-बार दुकानें कुर्बान हो गईं कितनी ज़िन्दगियाँ नफरत की जलती मिसालें अब नहीं बनना है कहानियाँ हमको नहीं झेलने हैं और बँटवारे के दर्द सदियों को झेलना पड़ता है ढोतीं हैं पीढ़ियाँ बोझा खोल के देख ले तू ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   3:23pm 29 Feb 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
वो भी डोलती होगी किसी के अँगने में होगी वो भी किसी की जाँ ,झूलती होगी ममता के पलने में प्यार उमड़ता है मुस्करा उठते हैं अहसास उठते हैं रह-रह के सीने में सींचता है कोई माली हर फूल को आबाद रहे हर फूल की दुनिया गुलशन के कोने-कोने में बड़ा मुबारक है आज का दिन सूर... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   10:44am 8 Jan 2020 #
Blogger: शारदा अरोरा
हाथों से फिसलती हुई दुनिया थीऔर क़दमों में दम था ही नहींअपने ही जिगर के टुकड़ों को ,जब देखते हैं हम मुश्किल मेंतारे टूटें , धरती धँसती , आँखों में समँदर ठहरा साऔर कहर की रात है क्याउठती-गिरती साँसें थींऔर ज़िन्दगी रुठी थीएक न्यामत होती है ज़िन्दगीटँग जाएँ हम उल्टे भीइस ... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   4:15am 16 Sep 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
साथ-साथ वक्त बिताना, मिलना-मिलाना अच्छा लगता है दुनिया के रँगों में रँग-रँग जाना अच्छा लगता है धीरे से जानोगे , धीरे से समझोगे बिना मक्सद के कोई किसी से नहीं है मिलता धीरे-धीरे खुलेगी कलई रिश्तों की , दोस्तों की गरज हो तो सिर पे बिठायेगी दुनिया ज़र्रे-ज़र्रे मे... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:38pm 21 Jul 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
होता है दूसरा खुदा तो डॉक्टर भी जो बदल देता है बद से बदतर होते हुए हालात को भी लिखता है खुशियाँ , गम की रात में होता है उजाले की किरण सा पोंछता है आँसू , बाँटता है मुस्कानें लिखता है तकदीर इक बार फिर से आदमी जी रहा है जो साँसों का कर्ज़ है चोट-चपेट है या फिर कोई मर्ज़... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   1:18am 13 Jul 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
दिन-दिन कर के बीत गयेपल-लम्हें सब रीत गयेएक ही सिक्के के दो पहलूमिलन जुदाई रीत भयेजा पहुँची है दुनिया चाँद पेचलती दुनिया के सब साथीदेख ले मनुवा तू है कहाँसीख ले कुछ अन्दाज़ नयेदिल के टुकड़े,सुहानी यादेंपीछे छूटे, हजारों मीलनम आँखें और नम सीने हैंकसक हमेशा प्रीत भयेआ पहु... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   12:24pm 26 Jun 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
हजारों मील का सफर ,और बाहें फैलाए हुए दिलकुछ रिश्ते तो हों ऐसे भी ,के झूल आयें सुकून की बाहेंहमारी राहों में चांद उग आता ,न दिन का पता होता न रात कानींद से बोझिल आँखों में भी ,सितारों सी टिमटिमाहट होतीआओ के मिलन के रंग में रंगे ,और फिर जुदाई की खुराकें पी लेंनहीं नहीं, तरक्... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   3:28am 27 Feb 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
हम घूम आयें चाहे जितना देश-विदेश दुबई,मॉरीशस,यूरोप हो या हो कोई भी देश अन्दर से हम वही होते हैं अपनी जड़ों से जुड़े अपने बचपन की अमानत ओढ़ लें चाहे हम कोई भी भेष नहीं भूलता है माँ की उँगलियों का स्वाद मिट्टी में रची-बसी सी वो खाने की महक लड़कपन के वो दोस्त , गुपचु... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   2:06pm 27 Jan 2019 #
Blogger: शारदा अरोरा
कैसे चलोगे जब न होंगीं राहें हक़ में जब भी कोई गुजर रहा होता है जिस्मानी तकलीफों से वो सिर्फ जिस्मानी दर्दों से ही नहीं गुजरता है ,वो गुजर रहा होता है,रूह तक उतरती हुई दुनिया की बेरुखी , नजर-अन्दाज़ी , हिकारत और नसीहतों के दर्द से भी कुछ बड़े करीबी भी खड़े हो जाते हैं दुनि... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:07am 13 Sep 2018 #
Blogger: शारदा अरोरा
दिन उड़ गये पँछियों की तरह , खबर न रही वक़्त की फितरत है , फिसल जाता है हाथों से ,उम्र की ही तरह अब ये आलम है कि कुछ छूट गया सा लगता है लम्हा-दर-लम्हा पकड़ पाना भी मुमकिन न था तुम्हारे घर की बाल्कनी से ,दूर उड़ते हुए प्लेन देख कर ये ख्याल तो आता था कई बार कि किसी दिन ऐसे ही... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   12:56pm 4 Aug 2018 #
Blogger: शारदा अरोरा
सहलाओ मेरे ज़ख्म भोले ताकि मैं सो जाऊँ शिव के प्राँगण में , नींद क्यूँ रूठी है लाशों के ढेर जहाँ कभी गाजर-मूली से बिछ गये हों दफन हुए अपने जहाँ ,साथ-साथ सपनों के आज वहाँ हमने बिस्तर लगाया है मेरे जख्म कुछ भी नहीं , मेरा दर्द छोटा है तेरे लिए सारी दुनिया है बराबर , ब... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   8:28am 29 May 2018 #
Blogger: शारदा अरोरा
चिया चली गई ससुरालआँखों में सितारे भर ,लहँगा पहन ,चुनरी ओढ़ ,डाल कर उसके हाथों में हाथसोचा भी बहुत था ,लिखा भी थाबोला मगर कुछ भी न गयान तो गाये विदाई के गीतन ही सुनाये स्वागत के बोल ,जो मुस्कराये मनमीतरुँधे गले से जो भी सुनातीउतर आता सावन तेरी अँखियों मेंऔर तेरी तकलीफ मुझे... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   5:57am 17 Mar 2018 #
Blogger: शारदा अरोरा
 जैसे है हक़ तुम्हें जीने का वैसे ही हक़ था उस नन्हीं जान को भी दुनिया में रहने का हाँ तुम्हारी आँखों में नहीं है तड़प ये जान लेने की कि किसने काटा गला तुम्हारी बेटी आरुषि का  अब लिख रही हो कविता तुम्हारी कविता भी वो सवाल नहीं उठाती मन फरेबी है , कब मछली सा पलट के स... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   10:16am 16 Oct 2017 #
Blogger: शारदा अरोरा
सूने हो गये घर-अँगना , जो आबाद हुये थे बच्चों के आने से ,मन की ये फितरत है , सजा लेता है दुनिया जिन क़दमों की आहट से भी ,बुन लेता है रँगी सपने उन लम्हों के अफसानों से भी.......अब के बरस कुछ अपने हैं हम से बिछड़े ,कुछ सपने परवान चढ़े जीवन की ये रीत पुरानी जैसे कोई बहता पानी इश्क ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   8:44am 6 Sep 2017 #
Blogger: शारदा अरोरा
दुनिया की सारी माँओं के लिये माँ  ये क्या बात है कि सुख में तुम मुझे याद आओ या न आओ दुख में तुम हमेशा मेरे सिरहाने खड़ी होती हो जब मैं नन्हीं बच्ची थी मैंने पहचाना पहला स्पर्श तुम्हारा ही मेरे आने से पहले ही तुमने ,सजा लिया था मुझसे अपना सँसार फूलों सा तु... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   2:25am 29 May 2017 #
Blogger: शारदा अरोरा
राकेश गुप्ता जी के निधन पर श्रद्धाँजलि   आज रोया है आसमाँ भी हाय खो दिया है हमने एक नम सीना तुमने जिया था ज़िन्दगी को एक शायर की तरह दर्द की इन्तिहाँ को जानता है एक शायर ही तुम चलते हुए कभी थके ही न थे वक़्त ने जकड़ा तो जंजीरों की तरह मौत की आदत है, ये बहाना माँगे ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   8:21am 10 Apr 2017 #
Blogger: शारदा अरोरा
थोड़े लम्हे चुरा लें थोड़ी बात बना लें जीवन की आपा-धापी से फुर्सत का कोई सामान जुटा लें पेड़ों के झुरमुट से झाँकता हुआ ,तारों भरा आसमाँ मद्धिम सी रौशनी में ,समुद्र  किनारे चंचल सी लहरों की अठखेलियाँ तुम ही तो लाये हो ये मुकाम यूँ ही चलते-चलते  लिखा है दिल ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   8:02am 6 Apr 2017 #
Blogger: शारदा अरोरा
चलो तुम्हारे जाने के अहसास को अभी ही जी लेते हैं थोड़ा गम पी लेते हैं ताकि तुम्हारे जाने के वक़्त आँख में आँसू न हो तुम्हारी बाइसिकिल जो तुम घर आ कर चलाया करतीं थीं पूछ रही है कि अब आगे इन्तिज़ार कितना लम्बा होगा कितनी ही चीजें जो तुम खरीद कर लाईं थीं बोलती हुईं स... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   11:30am 19 Dec 2016 #
Blogger: शारदा अरोरा
इक दिन निजता ले आती है चौराहे पर अच्छा होता बाँट जो देता , पैसा जितना ज्यादा था चेहरों पर मुस्कान देख कर , पा लेता थोड़ी साँसें थोड़े चूल्हे जल लेते , थोड़े अरमाँ पल लेते हेरा-फेरी , काला बाजारी , टैक्स की चोरी , कितने दिन !छुपा न सकेगी लीपा-पोती आज बहाने साथ न देंगे , ज़मी... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   7:09am 19 Nov 2016 #
Blogger: शारदा अरोरा
इक वो थी दिवाली ,दिवाली दियों वालीमुँडेरों पर रौशन कतारें दियों कीहर घर में लटकता दिये का कंडीललक्ष्मी गणेशा के आगमन की तैयारीअन्दर-बाहर बुहारादिये सा महकता हुआ मन-प्राण , उमंगे टपकती हुईंयूँ लगता कि पधारे हैं रिद्धि-सिध्दि के दाता गणेश , छम-छम करतीं हुईं माँ लक्ष्मीय... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:45am 29 Oct 2016 #
Blogger: शारदा अरोरा
अपनी प्यारी सी सखी के लिये  ....... तारों में ज्यों चन्दा हो नाम सार्थक करतीं अपना अँगने में ज्यों बृंदा हो पावन मन है ऐसा तुम्हारा पीड़ पराई समझो जैसे अपने गले का फन्दा हो आसाँ नहीं ये राह पकड़ना छोड़ आई हो घर को ऐसे जैसे कोई परिन्दा हो सींच रही हो जड़ों को ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:27pm 19 Sep 2016 #
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