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Amit Mishra

मैं ख़ुश हूँ जो मैं आहिस्ता  चल रहा हूँवो हैरां हैं फ़िर भी आगे निकल रहा हूँवक़्त लेता है करवट कई थमने से पहलेये  गुमां है  मì...
Amit Mishra...
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  November 19, 2018, 9:52 am
दायरों से निकलकर तुझे ख़ुद ही को आना होगा बदन पे  जमी धूल तुझे  ख़ुद ही को हटाना होगा परिंदों को सिखाता नहीं कला कोई उड़ान क&...
Amit Mishra...
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  November 2, 2018, 11:16 am
गहरा  ज़ख़्म है  दिखाऊं मैं कैसेये लंबा है क़िस्सा बताऊं मैं कैसेसड़कें शहर की जकड़े हैं बैठीवापस  मेरे गाँव  जाऊं  मैं कैसí...
Amit Mishra...
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  October 24, 2018, 10:09 am
घर  से  निकले  हैं  पढ़ने  कोजीवन  के पथ  पर  बढ़ने कोकदम  है अगला आज बढ़ायाएक रोज शिखर पर चढ़ने कोना  पहले  सी शामें  होंगीन...
Amit Mishra...
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  October 12, 2018, 4:33 pm
ग़र इश्क़ का कोई सार लिखूंउसको ही बारंबार लिखूंजो प्रेमपाश का वर्णन होउसकी बाहों का हार लिखूंकविता की पहली पंक्ति वोजब लय में कोई गज़ल लिखूंमैं एक सरोवर हो जाऊंऔर उसको अपना कमल लिखूंउसे अल्हड़ मस्त बयार कहूँमौसम की कोई बहार कहूँलिख दूँ बरखा की बूँद उसेसावन का पहला प्यार...
Amit Mishra...
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  September 20, 2018, 5:23 pm
यूँ  तन्हा  हर  रात  सुलाया  ना  करोफ़िर ख़्वाबों में मिलने आया ना करोकुछ  अरमान  सुलगने  लगते हैंयूँ बातों में इश्क़ जता...
Amit Mishra...
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  September 17, 2018, 10:40 am
आज सोमवार है....पुष्पा आज जल्दी उठ गई है...उसे व्रत जो रखना है...तो चार बजे उठ कर दैनिक कार्यों से निवृत होकर नहा धोकर मंदिर में प...
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  September 4, 2018, 11:09 am
ये आज का इंसान इतना सयाना क्यों हैअब आदमी ही आदमी से अनजाना क्यों हैझूठों की बस्ती है क़ीमत लहू की सस्ती हैफिर सच बयानी पे जान का जुर्माना क्यों हैतकनीक से बच्चे हुए हम बाप बन गएदुलार में बिगाड़ें और पूछें बेटा मनमाना क्यों है बातें लाज शरम की दो टके की हो चलीबेटी माँ से...
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  August 31, 2018, 5:09 pm
आज फिर इतवार है...वही इतवार जिसका छोटू और बबली बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं...करें भी क्यों ना? इतवार के दिन उन्हें जलेबी जí...
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  August 19, 2018, 12:43 pm
मुल्क के सिपहसालारों को भी कुछ काम दिया जाएसफेदपोशों को दग़ाबाज़ी का  अब इनाम दिया जाएख़्वाहिशे अधूरी  हैं  जिनकी  ये  मु...
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  August 16, 2018, 9:38 am
माहताब की लाली को बादलों में छुपाया ना करोयूँ  बेवजह  रूखसारों  पे जुल्फें  गिराया  ना करोबाहों  के  घेरों  में सिमटो  तो  नज़रें  झुका लोरंग-ए-हया के चिलमन से बाहर आया ना करोगुफ़्तगू  वस्ल  की बेशकीमती खजाना है जानांशब-ए-इश्क के किस्से सरेआम सुनाया ना ...
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  August 13, 2018, 2:36 pm
धरोहर.. हाँ यही नाम दिया है मैंने तुम्हारी यादों और तुम्हारे वादों को...यादों की अलमारी में मैंने रखे हैं वो सारे पल जो हमने...
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  July 28, 2018, 10:54 am
मैं  गुलों के  जैसा महकता  नही हूँसितारा हूँ लेकिन चमकता नही हूँज़माना ये समझे कि खोटा हूँ सिक्काबाज़ारों  में  इनकी  मै...
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  July 24, 2018, 10:52 am
काश..मैं लिख सकता एक कविताजो  मैं  हर  रोज  पढ़ता  हूँअंतर्मन के अनकहे जज़्बातजो  मैं  हर  रोज  सुनता  हूँरोज थक कर जब  सो ज&...
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  July 18, 2018, 11:27 am
*****स्वयंवर*****तोड़ धनुष जब शिव जी कामन  ही  मन  राम  हर्षाये थेभये  प्रसन्न  सब देव स्वर्ग मेंनभ  से  ही  पुष्प बरसाये थेप्रत...
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  July 13, 2018, 9:02 pm
कुछ यादें इस दिल से निकाली नही जातीकुछ निशानियाँ हैं जो  संभाली नही जातीकुछ  ख़्वाबों की  तामील भी  इस तरह  हुईशिद्दत से माँगी दुआ कभी ख़ाली नही जातीजवानी  यूँ ही सारी  भाग दौड़ में  गुजार दीमगर पीरी तलक भी ये बदहाली नही जातीहर   सहर   आफ़ताब  आया  कड़ी ...
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  July 5, 2018, 3:06 pm
ख़ज़ान  के  दिनों  में  धूप  सहा नही करतेउस बूढ़े शज़र पे अब परिंदे रहा नही करतेबेटे बड़े होकर  अब ख़ुद में मशगूल  रहते  हैंहक़ ë...
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  July 3, 2018, 11:46 am
बेख़ुदी में अपनी एक अलग ही सुकूँ आया हैदिल ने आज सारे रंज-ओ-ग़म को भुलाया हैक़िरदारों के पीछे  असली चेहरे देख लिये वक़्त से पह...
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  June 28, 2018, 10:40 am
रिश्तों को  इस तरह  कोई बिगाड़ता नही हैअपना ही आशियाना कोई उजाड़ता नही हैआइना  घर का  उदास रहा करता है  अबतेरे बाद उसकी ओर &#...
Amit Mishra...
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  June 23, 2018, 11:38 am
पिछला भाग पढ़ने के लिये इस लिंक पर:https://poetmishraji.blogspot.com/2018/03/blog-post_24.html सुनी मैंने तुम्हारी चाय और वो बातें...हाँ  मुझे  तो  सब  कुछ  याद हैवो  चाय  और  अपनी  वो  सारी  बातेंपर शायद तुम कुछ भूल रहे होचाय के बहाने अपनी हसीन मुलाकातें...कैसे  भूल  सकती  हूँ   उन  पल...
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  June 19, 2018, 11:10 am
इस वीराने में  भी शोर  सुनाई  देता हैबिन बारिश के ही मोर दिखाई देता हैबौराया पगलाया सा  यूँ ही  फिरता हूँअब यहाँ मुझे हर &#...
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  June 14, 2018, 8:34 pm
आधी रात का समय था अचानक रवि की आँख खुल गयी, पास में पड़े मोबाइल को उठाया और देखा तो रात के 12.30 हो रहे थे. वो क्या था आज रवि दफ़्तर से &#...
Amit Mishra...
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  June 12, 2018, 10:38 am
जो बनना हो इतिहास मुझेतो महाभारत मैं हो जाऊँपांडव कौरव में भेद नहीमैं किरदारों में ढल जाऊँजो मोह त्याग की बात चलेमैं भीष्म पितामह हो जाऊँशांतनु संग गंगा करे मिलनमैं ताउम्र अकेला रह जाऊँजो पतिव्रता ही बनना होमैं गांधारी बन आ जाऊँफिर अँधियारा मेरे हिस्से होमैं नेत्र...
Amit Mishra...
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  June 4, 2018, 12:16 pm
आँखें जो खुली तो उन्हें अपने क़रीब पाया ना थाकभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना थाबेपनाह मोहब्बत की जिनसे  उम्मीदें लिय...
Amit Mishra...
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  June 1, 2018, 10:39 am
वोकवितासीस्वच्छंदसदामैंग़ज़लोंसालयबद्धरहूँवोप्रेमत्यागकीपरिभाषामैंउसकेलियेनिबंधरहूँवोचाँदसीएकलालिमालियेमैंतारोंसाबिखराहीरहूँवोनदियोंसीहरओरबहेमैंसागरसाठहराहीरहूँवोनाज़ुककलीजोफूलबनेमैंपौधेसाबढ़ताहीरहूँवोमस्तहवाकेझोंकेसीमैंआँधीसाचलताहीरहूँव...
Amit Mishra...
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  May 26, 2018, 5:26 pm
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