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Blog: कारवाँ

Blogger: Jaydeep Shekhar
(21)कहने को दिल मेरा अलमस्त है साकीमगर, जहाँ का दर्द समेटे है साकी,कहीं भी इक कतराये-अश्क गिरामेरे दिल में उठी इक हूक है साकी।---(22)देखो, चाँद चलते-चलते रूक गया है साकीआधी रात का समां भी महक गया है साकी,तारों ने यकायक टिमटिमाना छोड़ दिया हैवो नीन्द से उठके छत पे टहल रहे हैं साक... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   12:33pm 12 Jun 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
(16)हम बे-मौसम तो नहीं आये हैं साकीघटा छाने के बाद ही आये हैं साकी,क्या, यह सावन का महीना ही नहीं है?ओह, आज उनकी जुल्फें खुली थीं साकी!---(17)हमें बदनामी से डर नहीं लगता साकीहम कुछ भी खुले-आम करते हैं साकी,वो तो शराफत बरतते हैं जन्नत में जाके-हूर औ’ मय पाने की उम्मीद में साकी।---(18)वे... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:49pm 10 Jun 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
(11)देर से आने का सबब पूछते हो साकीआज उनसे मिलने का वादा था साकी,वो आ न सकें, मगर पैगाम भेजवायाउनके पैरों की मेहन्दी अभी गीली थी साकी।---(12)जहाँ में इतना दर्द औ’ गम क्यों है साकी?हमदर्दों की हैसियत कम क्यों है साकी?खुदा की खुदाई से यकीं हटायें तो कैसे?ला पिला दे, और एक जाम पिला ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:26pm 7 Jun 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
(6)वे हमसे मयकशीं छोड़ने को कहते हैं साकीखुदा की बन्दगी करने को कहते हैं साकी,जबकि खुदा के दर पे डर लगता है हमें-उसकी खौफ नहीं, बन्दूकों के साये से साकी।---(7)अपनी मय पे इतना गरूर न कर साकीतुझे इक बात का तजुर्बा ही नहीं है साकी,कि इश्क में मय से कहीं ज्यादा नशा हैतेरे दर पे हम त... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:46am 5 Jun 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
(1)उस रोज जितना पिलाया था साकीआज उससे कहीं ज्यादा पिला दे साकी,उस रोज वादा किया था मिलने का उन्होंनेआज वो वादा तोड़ दिया है साकी।---(2)सुना है पुराना मयकदा है यह साकीअफसाने तुमने बहुत सुने हैं साकी,हमें भी बताना, वो खुदा की अमानतकिसके लिये बचाके रक्खे हैं साकी।---(3)शराफत औ’ न... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   12:44am 2 Jun 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
Art- Gourang Beshaiजब सिन्दुरी शाम ढल चुकी होऔर सूर्यशान्त झील में अस्त हो चुका होपँछी लौट रहे हों बसेरों की तरफ-कलरव ध्वनी के साथ।पेड़ और झुरमुट लिपटने लगे होंकालिमा की चादर मेंतब ........ पायल की मद्धम छनक के साथतुम चली आना झील के किनारे,आँचल से चेहरे को छुपातेचूड़ियों की खनक कोयथा... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   12:19am 27 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
आओ खो जायेंभोर के इस घने कोहरे मेंहम-तुम दोनों।जहाँ न हम दुनिया को देख पायेंऔर न दुनिया वाले हमें।एक-दूसरे को बाँहों का सहारा देकरहम चुपचाप चलते रहेंगेघने कोहरे के बीचपतली पगडण्डी पर।हमारे चारों तरफकोहरे की ऊँची दीवारें होंगी-आकाश को छूती।हरी भींगी घास काएक छोटा म... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:18am 27 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
चित्रकार: अनूप श्रीधरन सावन आकर बीत गयाहाय पिया नहीं मेरे आये,बिन सजना के एक भी पलहाय जीया नहीं अब जाये।कहके गये थे अबकि बरसवो सावन में घए आयेंगे,बरसों की प्यासी धरती परवो घनघोर घटा बरसायेंगे।पापी पपीहा की बोली अब तोहाय दिल में तीर चलाये.सावन आकर....दिन तो कट जाता पनघट म... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   10:43am 22 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
यह कैसी चाहत है किचाहकर भीतुम्हारी गलियों मेंकदम बढ़ा नहीं पाते हैं। यह कैसी चाहत है किचाहकर भीतुम्हारी नजरों सेनजरें मिला नहीं पाते हैं। बहुत हमने चाहा किबता दें तुम्हेंअपनी चाहत के बारे में,पर जब भी सामने आते हो- यह कैसी चाहत है किचाहकर भीअपने दिल की बाततुम्हें बत... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   2:22am 8 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
किसी खिलती हुई कली को देखकरतुम्हारे चेहरे को याद कर लेता हूँ,चेहरा खिला रहे तुम्हारा-खुदा से यही फरियाद कर लेता हूँ।गहराती हर शाम की ठण्डी हवातुम्हारे साथ होने का अहसास दे जाती है,दिन-रात निहारने पर भी नहीं मिटतीतुम्हारी तस्वीर यह कैसी प्यास दे जाती है।तुम्हारी उँगल... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   4:58pm 6 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
 (1)जाने कितनी चोटों को सहकर सख्त हुआ है यारोंवर्ना बात-बात पर पिघल जाया करता था यह दिल। (2)हम तो हार गये, अब तुम्हीं बता दो ऐ मेरे मालिक,कभी मुस्कुराने, कभी आँसू बहाने को जी क्यों चाहता है? (3)सबसे तेज सवारी चुनकर हम समय से पहले पहुँच गये,वहाँ देखा- शतरंज की बिसात, अभी बिछी... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   1:36am 5 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
राह चलते मुड़-मुड़ के यूँ देखा न करोलोग गलत समझते हैं।किताबें खोलकर सामने, यूँ खो जाया न करो लोग गलत समझते हैं।चुप बैठे-बैठे, अचानक यूँ मुस्कुराया न करो लोग गलत समझते हैं।बातें करते इतना तो खुश नजर आया न करो लोग गलत समझते हैं।मिलने-बिछुड़ने के नग्मे यूँ गुनगुनाया... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   1:04am 5 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
खिंचे चले आये थे हम तोबड़ी दूर से ऐ शमां,वो तो ठोकर खाने के बाद जानाकि शीशे की दीवारें भी हैं। शीशे की दीवारें भी हैं-ताकि तू बुझ न जाये,परवाने ठोकरें खाते रहेंऔर तू उनपर मुस्कुराती रहे। --:0:-- ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   1:23am 4 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
ओट में छुप गये थे हमें देखकर तुमहमें आज भी सुहानी वो शाम याद है,एक झलक ही तो देख पाये थे मगरआज भी तुम्हारी वो मुस्कान याद है। --:0:--... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   1:22am 4 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
लोग नाम पूछ्ते हैं उनकापर कैसे कहें किहम तो अभी जी भर केआँखें भी मिला न पाये थे।काश,  कि चन्द बातें कर ली होती हमनेपर जाने क्यों उन मौकों परहम दोनों ही शर्माये थे। सब कुछ तो रह गया यहीं, सभी तो रह गये,एक वो ही शायदजुदा होने को आये थे।--:0:-- ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   3:12am 2 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
निहाल हो गयी मैं तोउन्होंने जो थामा दुपट्टे को मेरेपलट कर जब देखा,तो सोचना पड़ा-इतनी शरारत कब से सीख लीकाँटों ने?--:0:-- ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   12:58am 1 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
बड़ा घमण्ड था हमें नसीब पे अपनेलेकिन वह चकनाचूर हुआ,जब हमने इतराते देखा, सनम के-सीने पे गुलाबी दुपट्टे को।--:0:-- ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   12:56am 1 May 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
आप इस तरह देखा न कीजियेहमारी धड़कनें रुक-सी जाती हैं,जी तो चाहता है कि नजरें मिलायें हम भीपर आँखें हमारी झुक क्यों जाती हैं?--:0:-- ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   4:31am 30 Apr 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
तुम साथ रहते हो तोपतझड़ भी सुहाने हो जाते हैं।वही, तुम न रहो तोदिन बेगाने क्यों हो जाते हैं?--:0:-- ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   4:30am 30 Apr 2010 #
Blogger: Jaydeep Shekhar
एक वो भी दिन थेजब तुम्हारे बदन की खुशबूमेरी साँसों तक आती थी।ये भी एक दिन हैंजब तुम्हारे दामन से चली हुईहवा तक नसीब नहीं।--:0:-- ... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   2:53pm 28 Apr 2010 #
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