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जलधि विशाल तरंगित ऊर्मिनीलांचल नाद झंकृत धरणी कल-कल झिन्झिन झंकृत सरिता पारावार विहारिणी गंगा तरल तरंगिनी त्रिभुवन तारिनी शंकर जटा  विराजे वाहिनी शुभ्रोज्ज्वल चल धवल प्रवाहिनी मुनिवर कन्या हे ! भीष्म जननी पतित उद्धारिणी जाह्नवी गंगे त्रिभुवन तारिणी तरल तरंगे...
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  May 31, 2012, 8:10 pm
नदी के पार कोई गाता गीत उस स्वर में बसा है मन का मीत नदी की लहरों खेतों से उठकर आती ध्वनि मन लेता जीत होगा इस पार जो लेगा सुन इस देहाती गानों का उधेड़-बुन इन एकाकी गानों को सुनकर मरकर भी जी लेगा पुन-पुन भानु-चन्द्र का है आलिंगन प्रकाश से भरा है लालिमांगन इन गीतों ने छेड...
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Tag :kavita
  February 8, 2012, 5:53 pm
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