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Blog: स्वप्न मेरे

Blogger: दिगम्बर नासवा
किसी की आँखों में झाँकना उसके दर्द को खींच निकालना नहीं होता  ना ही होता है उसके मन की बात लफ्ज़-दर-लफ्ज़ पढ़नाउसकी गहरी नीली आँखों में प्रेम ढूँढना तो बिलकुल भी नहीं होता  हाँ ... होते हैं कुछ अधूरे सपने उन आँखों मेंदेखना चाहता हूँ जिन्हेंसमेटना चाहता हूँ जिनको करना चा... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   6:34am 1 Jun 2020 #जंगली_गुलाब
Blogger: दिगम्बर नासवा
अध्-खुली नींद में रोज़ बुदबुदाता हूँ एक तुम हो जो सुनती नहीं हालांकि ये चाँद, सूरज ... ये भी नहीं सुनते और हवा ...  इसने तो जैसे “इगनोरे” करने की ठान ली है    ठीक तुम्हारी तरह धुंधले होते तारों के साथ उठ जाती हो रोज मेरे पहलू से  कितनी बार तो कहा है  जमाने भर को रोशनी दे... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   6:32am 25 May 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा
कितना कुछ होता रहता है और सच तो ये भी है कितना कुछ नहीं भी होता ... फिर भी ... बहुत कुछ जब नहीं हो रहा होता  कायनात में कुछ न कुछ ज़रूर होता रहता है जैसे ...  मैंने डाले नहीं, तुमने सींचे नहीं प्रेम के बीज हैं अपने आप ही उगते रहते हैं  उठती हैं,मिटती हैं,फिर उठती हैं लहरों की चाह... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   3:45pm 18 May 2020 #खेल
Blogger: दिगम्बर नासवा
बहाने से प्रश्न करता हूँ स्वयं से ... पर उलझ जाता हूँ अपने कर्म से ... असम्भव को सम्भव करने के प्रयास में फिर फंस जाता हूँ मोह-जाल में ... फिर सोचता हूँ, ऐसी चाह रखता ही क्यों हूँ ... चाहत का कोई तो अंत होना चाहिए ...क्या मनुष्यया सत्य कहूं तो ...मैं कभी कृष्ण बन पाऊंगा ... ? मोह-माया ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   7:17am 11 May 2020 #कृष्ण
Blogger: दिगम्बर नासवा
पूछता हूँ अपने आप से ... क्या प्रेम रहा है हर वक़्त ... या इसके आवरण के पीछे छुपी रहती है शैतानी सोच  ... अन्दर बाहर एक बने रहने का नाटक करता इंसान ...क्या थक कर अन्दर या बाहर के किसी एक सच को अंजाम दे पायेगा ... सुनो तुम अगर पढ़ रही हो तो इस बात को दिल से न लगाना ... सच तो तुम जानती ही हो ...... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   3:20pm 2 May 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा
पता नही प्रेम है के नही ... पर कुछ करने का मन करना वो भी किसी एक की ख़ातिर ... जो भी नाम देना चाहो दे देना ... हाँ ... जैसे कुछ शब्द रखते हैं ताकत अन्दर तक भिगो देने की, वैसे कुछ बारिशें बरस कर भी नहीं बरस पातीं ... लम्हों का क्या ... कभी सो गए कभी चुभ गए ... ये भी तो लम्हे हैं तितर-बितर यादों ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   3:46pm 20 Apr 2020 #गुलाबी
Blogger: दिगम्बर नासवा
एहसास ... जी हाँ ... क्यों करें किसी दूसरे के एहसास की बातें,जब खुद का होना भी बे-मानी हो कभी कभी ... अकसर ज़िन्दगी गुज़र जाती है खुद को च्यूंटी काटते ... जिन्दा हूँ, तो जिन्दा होने एहसास क्यों नहीं होता  ...  उँगलियों में चुभे कांटे इसलिए भी गढ़े रहने देता हूँ  की हो सके एहसास खुद ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   9:57am 8 Apr 2020 #कविता
Blogger: दिगम्बर नासवा
कहाँ खिलते हैं फूल रेगिस्तान में ... हालांकि पेड़ हैं जो जीते हैं बरसों बरसों नमी की इंतज़ार में ... धूल है की साथ छोड़ती नहीं ... नमी है की पास आती नहीं ... कहने को सागर साथ है पीला सा ... मैंने चाहा तेरा हर दर्द अपनी रेत के गहरे समुन्दर में लीलना तपती धूप के रेगिस्तान में मैंने कोशिश ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   8:16am 30 Mar 2020 #चाहत
Blogger: दिगम्बर नासवा
हालाँकि छूट गया था शहर छूट जाती है जैसे उम्र समय के साथ टूट गया वो पुल उम्मीद रहती थी जहाँ से लौट आने की पर एक ख़ुशबू है, भरी रहती है जो नासों में बिना खिंचे, बिना सूंघे लगता है खिलने लगा है आस-पास&nb... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   1:13pm 23 Mar 2020 #nostelic
Blogger: दिगम्बर नासवा
क़रीब दो महीने हो गए, अभी तक देश की मिट्टी का आनंद ले रहा हूँ ... कुछ काम तो कुछ करोना का शोर ... उम्मीद है जल्दी ही मलेशिया लौटना होगा ... ब्लॉग पर लिखना भी शायद तभी नियमित हो सके ... तब तक एक ताज... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   6:05pm 15 Mar 2020 #कश्ती
Blogger: दिगम्बर नासवा
एक और पन्ना कोशिश, माँ को समेटने की से ... आपका प्रेम मिल रहा है इस किताब को, बहुत आभार है आपका ... कल पुस्तक मेले, दिल्ली में आप सब से मिलने की प्रतीक्षा है ... पूरा जनवरी का महीना इस बार भारत की तीखी चुलबुली सर्दी के बीच ...  लगा तो लेता तेरी तस्वीर दीवार पर जो दिल के कोने वाले ह... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   1:27am 6 Jan 2020 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
मेरी ही नज़्म से किरदार मेरा गढ़ लेंगेकभी छपेंगे तो हमको भी लोग पढ़ लेंगे ...और मेरी किताब यहाँ भी मिलेगी अगर आप आस-पास ही हों और पढ़ना चाहें. वैसे 7 जनवरी मैं भी रहूँगा ... इसी स्टाल पर मिलूँगा.स्टॉल 94, हाल: 12A, बोधि प्रकाशन, प्रगति मैदान, नई दिल्लीजनवरी 4 से 12, 2020#कोशिश_माँ_को_समेट... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   9:23am 29 Dec 2019 ##माँ
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज अचानक ही उस दिन की याद हो आई जैसे मेरी अपनी फिल्म चल रही हो और मैं दूर खड़ा उसे देख रहा हूँ. दुबई से जॉब का मैसेज आया था और अपनी ही धुन में इतना खुश था, की समझ ही नहीं पाया तू क्या सोचने लगी. लगा तो था की तू उदास है, पर शायद देख नहीं सका ...  मेरे लिए खुशी का दिन ओर तुम्हारे लिए ...... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   1:57am 17 Dec 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
एक समीक्षा मेरी किताब कोशिश,माँ को समेटने की ... आदरणीय मीना जी की कलम से ... जो सन 2015 से अपने ब्लॉग "मंथन"पे लगातार लिख रही हैं ... https://www.shubhrvastravita.com/ 'कोशिश माँ को समेटने की'एक संवेदनशील चार्टेड एकाउटेंट श्री दिगम्बर नासवा जी पुस्तक है, जो घर -परिवार से दूर विदेशों में प्रव... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   7:11am 13 Dec 2019 #अमेज़न
Blogger: दिगम्बर नासवा
#कोशिश_माँ_को_समेटने_कीबहुत आभार बोधि प्रकाशन का, आदरणीय मायामृग जी का, सभी मित्र, पत्नी, बच्चे, भाई-बंधुओं का और माँ का (जो जहाँ भी है, मेरे करीब है) ... जिनके सहयोग और प्रेरणा के बिना ये संभव न होता ... ये हर किसी के मन के भाव हैं मेरी बस लेखनी है ... हाँ एक बात और ... अगर इस किताब को ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   5:38am 5 Dec 2019 #अमेज़न
Blogger: दिगम्बर नासवा
“कोशिश – माँ को समेटने की” तैयार है ... कुछ ही दिनों में आपके बीच होगी. आज एक और “पन्ना” आपके साथ साझा कर रहा हूँ ... आज सोचता हूँ तो तेरी चिर-परिचित मुस्कान सामने आ जाती है ... मेरे खुद के चेहरे पर ...  कहते हैं गंगा मिलन मुक्ति का मार्ग है कनखल पे अस्थियाँ प्रवाहित करते समय इक प... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:05am 2 Dec 2019 #अम्मा
Blogger: दिगम्बर नासवा
लिखे थे दो तभी तो चार दाने हाथ ना आएबहुत डूबे समुन्दर में खज़ाने हाथ ना आएगिरे थे हम भी जैसे लोग सब गिरते हैं राहों मेंयही है फ़र्क बस हमको उठाने हाथ ना आएरकीबों ने तो सारा मैल दिल से साफ़ कर डाला समझते थे जिन्हें अपना मिलाने हाथ ना आएसभी बचपन की गलियों में गुज़र कर देख आया हू... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   3:41am 25 Nov 2019 #धक्का
Blogger: दिगम्बर नासवा
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” का एक अन्श ... अक्सर जब बेटियाँ बड़ी होती हैं, धीरे धीरे हर अच्छे बुरे को समझने लगती हैं ... गुज़रते समय के साथ जाने अनजाने ही, पिता के लिए वो उसकी माँ का रूप बन कर सामने आ जाती हैं ... ऐसे ही कुछ लम्हे, कुछ किस्से रोज़-मर्रा के जीवन में भी ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   4:39am 18 Nov 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
आने वाली किताब “कोशिश ... माँ को समेटने की” में सिमटा एक पन्ना ...तमाम कोशिशों के बावजूद उस दीवार पे तेरी तस्वीर नहीं लगा पाया तूने तो देखा था चुपचाप खड़ी जो हो गई थीं मेरे साथ फोटो-फ्रेम से बाहर निकल के एक कील भी नहीं ठोक पाया था    सूनी सपाट दीवार पे हालांकि हाथ चलने स... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   4:26am 11 Nov 2019 #किताब
Blogger: दिगम्बर नासवा
ठँडी मीठी छाँव कभी तीखा “सन” है जीवन आपा-धापी “एजिटे-शन” है इश्क़ हुआ तो बस झींगालाला होगा“माइंड” में कुछ ऐसा ही “इम्प्रे-शन” है मिलने पर तो इतने तल्ख़ नहीं लगतेपर “सोशल” मंचों पर दिखती “टेन्शन” हैबतलाता है अब “इस्टेटस” “सेल्फी” का खुश है बच्चा या कोई “डिप्रे-शन” है नव ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   1:32am 4 Nov 2019 #इन्स्टा
Blogger: दिगम्बर नासवा
आज अपनी पहली पुस्तक का कवर पेज आपके सम्मुख है ... शीघ्र ही किताब आपके बीच होगी ... आपके आशीर्वाद की आकाँक्षा है ... ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   3:48pm 31 Oct 2019 #डायरी
Blogger: दिगम्बर नासवा
दिन उगा सूरज की बत्ती जल गईरात की काली स्याही ढल गईसो रहे थे बेच कर घोड़े, बड़ेऔर छोटे थे उनींदे से खड़ेज़ोर से टन-टन बजी कानों में जब  धड-धड़ाते बूट, बस्ते, चल पड़े   हर सवारी आठ तक निकल गईरात की काली ...कुछ बुजुर्गों का भी घर में ज़ोर थासाथ कपड़े, बरतनों का शोर थामाँ थी सीधी ये सम... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   1:33am 28 Oct 2019 #घोड़े
Blogger: दिगम्बर नासवा
मूल मन्त्र इस श्रृष्टि का ये जाना है खो कर ही इसजीवन में कुछ पाना हैनव कोंपल उस पल पेड़ों पर आते हैंपात पुरातन जड़ से जब झड़ जाते हैं    जैविक घटकों में हैं ऐसे जीवाणू  मिट कर खुद जो दो बन कर मुस्काते हैं दंश नहीं मानो, खोना अवसर समझो यही शाश्वत सत्य चिरंतन माना है खो कर ... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   4:48am 8 Oct 2019 #कुदरत
Blogger: दिगम्बर नासवा
घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है हर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है       पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध है रूई के तकिये, रज़ाई, चादरें    खेस है जिसमें के माँ की गन्ध है ताम्बे के बर्तन,कलेंडर,फोटुएँ जंग लगी छर्रों की इक बन्दूक है घर मेरा टूटा ..."शैल्फ"पे  चुप सी कतारों में खड़ी &nbs... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:45am 30 Sep 2019 #घर
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