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स्वप्न मेरे ...

सूरज खिला तो धूप के साए मचल गए कुछ बर्फ के पहाड़ भी झट-पट पिघल गए तहजीब मिट गयी है नया दौर आ गया इन आँधियों के रुख तो कभी के बदल गए जोशो जुनून साथ था किस्मत अटक गई हम साहिलों के पास ही आ कर फिसल गए झूठे परों के साथ कहाँ तक उड़ोगे तुम मंज़िल अभी है दूर ये सूरज भी ढल गए निकले तो कितन...
स्वप्न मेरे ......
Tag :जूनून
  June 18, 2018, 8:38 am
जीत मेरी हो न तेरी हार हो जो सही है बस वही हरबार हो रात ने बादल के कानों में कहा हट जरा सा चाँद का दीदार होनाव उतरेगी सफीनों से तभीहाथ में लहरों के जब पतवार हो है मुझे मंज़ूर हर व्योपार पर पाँच ना हो दो जमा दो,चार हो मौत है फिर भी नदी का ख्वाब है बस समुन्दर ही मेरा घरबार हो इक न...
स्वप्न मेरे ......
Tag :चार
  June 11, 2018, 9:40 am
नहीं जाता है ये इक बार आ करबुढ़ापा जाएगा साँसें छुड़ा कर फकत इस बात पे सोई नहीं वो अभी सो जायेगी मुझको सुला कर तुम्हारे हाथ भी तो कांपते हैं में रख देता हूँ ये बर्तन उठा कर “शुगर” है गुड़ नहीं खाऊंगा जाना न रक्खो यूँ मेरा “डेन्चर” छुपा कर तुझे भी “वाइरल”,मैं भी पड़ा हूँ दिखा आ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :ola
  June 4, 2018, 7:51 am
होठ दांतों में दबाना तो नहींयूँ ही कुछ कहना सुनाना तो नहींआप जो मसरूफ दिखते हो मुझे गम छुपाने का बहाना तो नहीं एक टक देखा हँसे फिर चल दिएसच कहो, ये दिल लगाना तो नहींपास आना फिर सिमिट जाना तेरा प्रेम ही है ना, सताना तो नहीं कप से मेरे चाय जो पीती हो तुम कुछ इशारों में बताना ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :अदा
  May 28, 2018, 7:02 am
दिन पुराने ढूंढ लाओ साब जी लौट के इस शहर आओ साब जी कश पे कश छल्लों पे छल्ले उफ़ वो दिन विल्स की सिगरेट पिलाओ साब जी मैस की पतली दाल रोटी,पेट फुलपान कलकत्ति खिलाओ साब जी मेज मैं फिर से बजाता हूँ चलो तुम रफ़ी के गीत गाओ साब जी क्यों न मिल के छत पे बचपन ढूंढ लें कुछ पतंगें तुम उडा...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  May 22, 2018, 9:44 am
जाने किसने भेजी है पर मुझको तो बे-नाम मिली आज सुबह दरवाज़ा खोला तो अख़बार के नीचे से यादों की खुशबू से महकी इक चिट्ठी गुमनाम मिली टूटी निब, पेन्सिल के टुकड़े, साइकिल की टूटी गद्दी दागी कंचे, गोदे लट्टू, चरखी से लिपटी सद्दी छुट्टी के दिन सुबह से लेकर रात तलक की कुछ बातें बीते ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गीत
  April 16, 2018, 8:13 am
जिनके जीवन में हमेशा प्रेम है, उल्लास हैदर्द जितना भी मिले टिकता नहीं फिर पास है   दूसरों के घाव सिलने से नहीं फुर्सत जिन्हेंअपने उधड़े ज़ख्म का उनको कहाँ आभास हैहोठ चुप हैं पर नज़र को देख कर लगता है यूँदिल धड़कता है मेरा शायद उन्हें एहसास है दिन गुज़रते ही जला लेते हैं अप...
स्वप्न मेरे ......
Tag :एहसास
  April 9, 2018, 10:05 am
लम्हे जो गुम हुए थे दराजों में मिल गए दो चार दिन सुकून से अपने निकल गएडट कर चुनौतियों का किया सामना मगरदो आंसुओं के वार से पल भर में हिल गए दुश्मन के तीर पर ही ये इलज़ाम रख दिया किस किस को कहते यार के खंज़र से छिल गए  इतिहास बन गए जो समय पर चले नहीं  बहते रहे दरिया तो समुं...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  April 2, 2018, 9:24 am
सपने पालने की कोई उम्र नहीं होती वो अक्सर उतावली हो के बिखर जाना चाहती थी ऊंचाई से गिरते झरने की बूँद सरीखी ओर जब बाँध लिया आवारा मोहब्बत ने उसे ...  उतर गई अंधेरे की सीडियां, आँखें बंद किएये सच है वो होता है बस एक पल  बिखर जाने के बाद समेटने का मन नहीं होता जिसे उम्र की सल...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  March 26, 2018, 8:14 am
यादें यादें यादें ... क्यों आती हैं ... कब आती हैं ... कैसे आती हैं ... जरूरी है यादों की यादों में रहना ... या साँसों  का हिसाब रखना ... या फिर जंगली गुलाब का याद रखना ...सांसों के सिवा मुसलसल कुछ नहीं जिंदगी में वैसे तिश्नगी भी मुसलसल होती है जब तक तू नहीं होती पतझड़ का आना बेसबब नहीं&...
स्वप्न मेरे ......
Tag :इरेज़र
  March 19, 2018, 1:00 pm
बेतहाशा फिसलन की राह पर काम नहीं आता मुट्ठियों से घास पकड़ना   सुकून देता है उम्मीद के पत्थर से टकराना या रौशनी का लिबास ओढ़े अंजान टहनी का सहारा  थाम लेती है जो वक़्त के हाथ  चुभने के कितने समय बाद तक वक़्त का महीन तिनका  घूमता रहता है दर्द का तूफानी दरिया बन कर पाँव ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :उम्मीद
  March 12, 2018, 9:17 am
उम्र खर्च हो जाती है लम्हा लम्हातुम्हारी यादों का सिलसिला ख़त्म नहीं होताकडाके की ठंड और बरसाती लम्हों के बीच बूढ़ी होती दूकान से उठती अदरक वाली चाय की महक  खाली कप पे ताज़ा लिपस्टिक के निशान कुछ साए उठ के गए हैं यहाँ से अभी  क़दमों के निशान कितने मिलते हैं तेरे मेरे क़दम...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कंधे
  March 5, 2018, 10:08 am
ढूंढता हूँ बर्फ से ढंकी पहाड़ियों परउँगलियों से बनाए प्रेम के निशान मुहब्बत का इज़हार करते तीन लफ्ज़ जिसके साक्षी थे मैं और तुम और चुप से खड़े देवदार के कुछ ऊंचे ऊंचे वृक्ष     हाँ ... तलाश है बोले हुए कुछ शब्दों की  जिनको पकड़ने की कोशिश में भागता हूँ सरगोशियों के इर्द...
स्वप्न मेरे ......
Tag :देवदार
  February 26, 2018, 10:54 am
तुम्हारा प्यार जैसे पहाड़ों पे उतरी कुनमुनी धूप झांकती तो थी मेरे आँगन   पर मैं समझ न सका वो प्यार की आंख-मिचोली है या सुलगते सूरज से पिधलती सर्दियों की धूप सर्दियों के दिन भी कितनी जल्दी ढल जाते हैं  अभी पहाड़ी से निकले नहीं की उतर गए देवदार की लंबी कतारों के पीछे मौस...
स्वप्न मेरे ......
Tag :कविता
  January 20, 2018, 4:22 pm
सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाएं ... २०१८ सबके लिए शुभ हो. नव वर्ष की शुरुआत एक रचना के साथ ... जाने क्यों अभी तक ब्लॉग पे नहीं डाली ... अगर आपके दिल को भी छू सके तो लिखना सार्थक होगा ...तेरे चले जाने के बाद पतझड़ की तरह कुछ पत्ते डाल से झड़ने लगे थे  गमले में लगी तुल...
स्वप्न मेरे ......
Tag :उम्र
  January 3, 2018, 11:34 am
नया वर्ष आने वाला है ... सभी मित्रों को २०१८ की बहुत बहुत शुभकामनाएं ... २०१७ की अच्छी यादों के साथ २०१८ का स्वागत है ... ये किरदार अपना बदलना पड़ेगा जो जैसा है वैसा ही बनना पड़ेगाये जद्दोजहद ज़िन्दगी की कठिन है यहाँ अपने लोगों को डसना पड़ेगा बहुत भीड़ है रास्तों पर शिखर के किसी ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :झुण्ड
  December 25, 2017, 2:36 pm
छत भिगोने आ गईं जो बदलियाँशोर क्यों करती हैं इतना बिजलियाँ आदमी शहरों के ऐसे हो गए चूस कर छोड़ी हों जैसे गुठलियाँ फेर में कानून के हम आ गएअब कराहेंगी हमारी पसलियाँहाथ में आते ही सत्ता क्या हुआ पी गईं सागर को खुद ही मछलियाँउँगलियों की चाल, डोरी का चलन जानती हैं खेल सारा प...
स्वप्न मेरे ......
Tag :पसलियाँ
  December 18, 2017, 8:36 am
फूलों की कैद से पराग लेने दो इन तितलियों से कुछ सुराग लेने दो इस दौड़ में कहीं पिछड़ न जाएं हम मंजिल अभी है दूर भाग लेने दोराजा हो रंक पेट तो सताएगा उनको भी तो चूल्हे से आग लेने दोनज़दीक वो कभी नज़र न आएंगेसोए हुए हैं शेर जाग लेने दो हम आस्तीन में छुपा के रख लेंगे इस शहर में हमक...
स्वप्न मेरे ......
Tag :चराग
  December 11, 2017, 9:53 am
लहू का रंग है यकसाँ कहा शमशीर भालों ने लगा डाली है फिर भी आग बस्ती के दलालों ने  यकीनन दूर है मंज़िल मगर मैं ढूंढ ही लूंगा झलक दिखलाई है मुझको अँधेरे में उजालों नेवो लड़की है तो माँ के पेट में क्या ख़त्म हो जाए  झुका डाली मेरी गर्दन कुछ ऐसे ही सवालों ने अलग धर्मों के भूखे न...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  December 4, 2017, 9:44 am
अपने मन मोहने सांवले रंग में श्याम रँग दो हमें सांवरे रंग में मैं ही अग्नि हूँ जल पृथ्वी वायु गगनआत्मा है अजर सब मेरे रंग में ओढ़ कर फिर बसंती सा चोला चलोआज धरती को रँग दें नए रंग में थर-थराते लबों पर सुलगती हंसीआओ रँग दें तुम्हें इश्क के रंग मेंआसमानी दुपट्टा छलकते नयन स...
स्वप्न मेरे ......
Tag :आत्मा
  November 28, 2017, 10:32 am
हम बुज़ुर्गों के चरणों में झुकते रहे पद प्रतिष्ठा के संजोग बनते रहे वो समुंदर में डूबेंगे हर हाल में  नाव कागज़ की ले के जो चलते रहे इसलिए बढ़ गईं उनकी बदमाशियाँहम गुनाहों को बच्चों के ढकते रहे आश्की और फकीरी खुदा का करम डूब कर ज़िन्दगी में उभरते रहे धूप बारिश हवा सब से मह...
स्वप्न मेरे ......
Tag :तरक्की
  November 20, 2017, 9:49 am
बस वही मेरी निशानी, है अभी तक गाँव में बोलता था जिसको नानी, है अभी तक गाँव में खंडहरों में हो गई तब्दील पर अपनी तो है  वो हवेली जो पुरानी, है अभी तक गाँव में चाय तुलसी की,पराठे,मूफली गरमा गरम धूप सर्दी की सुहानी, है अभी तक गाँव में याद है घुँघरू का बजना रात के चोथे पहर क्या च...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गाँव
  November 13, 2017, 9:11 am
जुगनुओं से यूँ न दिल बहलाइएजा के पुडिया धूप की ले आइएपोटली यादों की खुलती जाएगीवक़्त की गलियों से मिलते जाइएस्वाद बचपन का तुम्हें मिल जाएगाफिर उसी ठेले पे रुक के खाइएहोंसला मजबूत होता जाएगाइम्तिहानों से नहीं घबराइएफूल, बादल, तितलियाँ सब हैं यहाँबेवजह किब्ला कभी मुस...
स्वप्न मेरे ......
Tag :गज़ल
  November 6, 2017, 9:51 am
लिक्खी है गज़ल ताज़ा खामोश इबारत में दिन रात इसे रखना, होठों की हिफाज़त में हंसती है कहीं पायल, रोते हैं कहीं घुँघरूलटकी हैं कई यादें जालों सी इमारत मेंतारीफ़ नहीं करते अब मुझपे नहीं मरतेआता है मज़ा उनको दिन रात शिकायत मेंछलके थे उदासी में, निकले हैं ख़ुशी बन करउलझे ही रहे हम ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :इमारत
  October 31, 2017, 11:25 am
बारूद की खुशबू है, दिन रात हवाओं में देता है कोई छुप कर, तकरीर सभाओं में इक याद भटकती है, इक रूह सिसकती है घुंघरू से खनकते हैं, खामोश गुफाओं में बादल तो नहीं गरजे, बूँदें भी नहीं आईंकितना है असर देखो, आशिक की दुआओं मेंचीज़ों से रसोई की, अम्मा जो बनाती थी देखा है असर उनका, देखा ...
स्वप्न मेरे ......
Tag :अहिल्या
  September 18, 2017, 9:20 am
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