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मेरी जुबानी

बरस जा ऐ बदरी..तेरे आने सेइस दरख्त को भीजीने की आस जगी है।बरस जा ऐ बदरीफिर से अनंत प्यास जगी है।।पपीहा बन तेरी बूंद को तरसता रहा है।बेरुखी तेरी पल - पल ये सहता रहा है।।बनके परदेसी तू तो भटकती रही है।बेवफा हर जगह तू बरसती रही है।।तेरी उम्मीद में, ये तो ठूँठ हो गया।भूला हरि...
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Tag :प्यास
  June 10, 2019, 6:44 pm
कनकपुष्प..जेठ की कड़कती दुपहरी मेंजब तपिश और गर्मी से सबलगते हैं कुम्हलाने ।नर नारी पशु पाखी सबकेबदन लगते हैं चुनचुनाने ।जब सूखने लगते हैं कंठऔर हर तरफ मचती है त्राहि त्राहि।तब चहुंँदिस तुम अपनीरक्तिम आभा लिए बिखरते हो ।सूरज की तेज प्रखररश्मियों में जल जलकरतुम और न...
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Tag :गुलमोहर
  May 27, 2019, 3:14 pm
चुपके से यामिनीने लहराया था दामन. सागर की लहरों पर सवार होकर तरुवर के पर्णों के मध्य से, हौले हौले अपनी राहबनाता चाँद तब , मंथर गतिसे, उतर आया था मेरे मन के सूने आँगन में, अपनी शुभ्र धवलरूपहली रश्मियों कागलीचा बिछाए मीठीसुरभित बयारों के संग मुखमंडल पर मीठी&nb...
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Tag :चाँद
  May 25, 2019, 1:09 am
इत्र सा महकता नाम तेरा, सुरभित समीर कर जाता हैकितनी है कशिश मोहब्बत में, मन बेखुद सा हो जाता है दिल में एक टीस सी जगती है जब नाम तुम्हारा आता है  विरहा की अग्नि जलाती है और तृषित हृदय अकुलाता है जब अधर तुम्हारे हास करे कांकर पाथर मुस्काता है उठती जब तुम्...
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Tag :मोहब्बत
  May 19, 2019, 5:47 pm
लक्ष्य साधो हे पथिक,हौसला टूटे नहीं।कठिन है डगर मगर, मंजिल कोई छूटे नहीं।।गिरोगे सौ बार पर, स्मरण तुम रखना यही।यत्न बिन हासिल कभी, कुछ भी तो होता है नहीं।।पग पखारेगा वो पथ भी, जो निराश न होगे कभी।काम कुछ ऐसा करो, मंजिल उतारे आरती।।संग उसको ले चलो,जो पंथ से भटका द...
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Tag :पथिक
  May 17, 2019, 11:11 pm
कभी अपनी फिक्र नहीं होती उन्हेंदूसरों की चिंता मेंअपने सुनहरे जीवन कीकुर्बानी देने से भीकभी घबराते नहीं वे.परायों को भी अपनाबना लेने का गुरकोई इनसे सीखे.इनका प्रयोजनकभी गलत नहीं थाफिर भी वे इल्जाम लगाते हैं,कि इनके ही कारण कईअपने प्राणों सेहाथ धो बैठे.कई जीवन उजड़ ग...
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Tag :लोग
  May 11, 2019, 9:54 pm
जाल बिछाता है और डालता है दाने#शिकारी बनकर के जीवन , शिकार करता है।कभी दुखों का प्रहार, कभी सुखों का उपहार#मदारी बन उंगलियों पर नाच नचाता है।मूस मांजर की क्रीड़ा में रंक होता राजा तोएक क्षण में दाता अकिंचन #भिखारी हो जाता है।पावों में डाल बंधन, हंटर से करके घायलकरके मनु...
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Tag :
  May 11, 2019, 1:13 pm
तुम्हें नाचते हुए पहली बार देखा था मैंने जब मेरा सहोदर तुम्हारे जीवन में आया था.आँखों से भर भर आँसू गिरते रहे. और हम खड़े देखते रहे ओंठों की लंबाई भी दोगुनी हो गई थी. तुम्हारी खुशी हमें भी खुश कर गई थी पर समझ न आया कभी कि इसके पहले भी तो घर मेंकितनी ही बार किलकारियां गूंजी ...
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Tag :
  May 10, 2019, 4:57 pm
कितना बेहतरीन था भूत मेरारहते थे हम सब साथ सदा.न कोई अणु बमन परमाणु बम.न ईर्ष्या न द्वेषन  ही मन में कोई रोष.न थी कोई टेक्नोलॉजीन ही सीमाओं पर फौजी.न ये ऊंँची- नीची जातियाँये तरक्की नहीं,ये हैं तरक्की की घिनौनी निशानियांँ.गुम है कहीं,प्रकृति माँ की गोद का वो आनंदझरने और ...
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Tag :तरक्की
  May 9, 2019, 12:16 am
कातर स्वर  करे धरणि पुकार ।स्वार्थ वश मनुष्यअपनी जड़ें रहा काट।।संभालो, बचा लोमैं मर रही हूँ आज।भविष्य के प्रति हुआनिश्चिंत ये इन्सान।उजाड दिया काननपहाड़ दिए काट।।फैलाता रहा गंदगीनदियों को दिया बांध।निज कामनाओं हेतुकरता रहा अपराध।।न चिड़ियों की अब चहक हैन ...
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Tag :प्रकृति
  May 7, 2019, 6:46 pm
वाह रे चापलूसी, तुझमें भी बात है।तू जिसके पास होती,वह बन्दा बड़ा खास है।।दुम हीनों को दुम दे, तू श्वान बनाती है।जीभ लपलपाना , तू उसको सिखाती है।।यस मैम, जी हुजूरी, तू जिससे कराती है।कंगाल हो जो बंदा, मालामाल बनाती है।।धर्म, कर्म, शर्म को, तू मुंह न लगाती है।पास हो ये जिनके, ...
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Tag :चापलूसी
  May 5, 2019, 6:36 pm
ओ मेरी प्यारी मइया तुम धूप में हो छइयांँ तुम ही मेरी खुशी हो तुम जिन्दगी मेरी होगर्मी से तुम बचाती सर्दी से तुम बचाती तुम अलाव सी गुनगुनी हो किस मृदा से बनी हो गीला किया जो मैंने छाती लगाया तुमने तर भाग में तुम सोई करुणा से तुम भरी हो हर हाल में मैं खु...
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Tag :ममता
  May 5, 2019, 8:07 am
सुनो बटोही,तुम मुसाफिर हो, तुम्हें चलते ही जाना है।बहु बाधा, बहु विघ्नों से, तुम्हें निर्भय टकराना है।ये जीवन, हर पल खुशियों और दुख का ताना बाना है।कभी उठाओगे तुम किसी को, तो कभी किसी को तुम्हें उठाना है ।।सुनो बटोही,काल की हर क्रीड़ा से तुम्हें सामंजस्य बिठाना है ।इस च...
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Tag :प्रेरक कविता
  May 3, 2019, 12:09 pm
लो आ गया एक और दिवसतथाकथित विश्व मजदूर दिवस।होंगे बड़े बड़े भाषण, बड़ी बड़ी बातें,मजदूर दिवस के नाम परपीठासीनों पदाधिकारियों कोहोगा एक दिन का अवकाश।पर मजदूर को इसका भी कहाँ आभास।इस तथ्य से अनजानअनभिज्ञ कि उसके नाम से भीपूरी दुनिया में होती है छुट्टी।वह डँटा रहता है ...
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Tag :Labour day
  May 1, 2019, 8:09 pm
तू कर दे बेड़ा पार.... हे साईं.. हे साईं - 2मोहपाश में फँसा हूँ मैंमेरा कर दे तू उद्धार.... हे साईं.. हे साईं - 2तू कर दे बेड़ा पार.... हे साईं.. हे साईं  - 2दुखियों का तू तारण हारा. - 2जन जन पर तेरा अधिकार... हे साईं.. हे साईंतू कर दे बेड़ा पार.... हे साईं.. हे साईंभूख ग़रीबी लाचारी मेंजीवन मेरा ...
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Tag :साईं कीर्तन
  April 25, 2019, 1:15 pm
रे अभिमानी..काश.. तुम समझ पाते स्त्री का हृदय. पढ़ पाते उसकी भावऩाओं को,उसके मनसरिता की पावन जलधारा को,जिसमें बहते हुए वह अपना सम्पूर्ण जीवनसमर्पित कर देती है तुम जैसों पुरुषों लिए.दमन कर देती है अपनी इच्छाओं का,और जरूरतों का ताकि तुम्हें खुश देख सके.रे अभिमानी..क्या ...
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Tag :कविता
  April 25, 2019, 12:31 am
तुम बिन .....मेरी रगों मेंलहू बनकरबहने वाले तुमये तो बता दो किमुझमें मैं बची हूँ कितनीतुम्हारा ख्याल जब - तबआकर घेर लेता है मुझेऔर कतरा - कतराबन रिसता हैंमेरे नेत्रों से.तड़पती हूँ मैंतुम्हारी यादों की इनजंजीरों से छूटने को. जैसे बिन जलतड़पती हो मछलीइक इक साँस पाने को.&n...
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Tag :यादें
  April 24, 2019, 11:14 am
वो समझ नहीं पाए, मैं समझाती रह गई।उनके अहम में, मैं खुद को मिटाती रह गई।उजाड़ी थी बागबां ने ही, बगिया हरी - भरीगुलाब सी मैं, काँटों में छटपटाती रह गई।महफिल ने यारों की, भेंट कर दी तन्हाइयामैं तन्हाइयों में खुद से, बतलाती रह गई ।मखमली सेज, तड़पती रही बेकस होकरमोहब्बत रात भर ...
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Tag :शायरी
  April 21, 2019, 12:09 am
1:गुटखा चबाकरमुँह से पीकगिराती हुईमैले वसनों मेंउस हृष्ट - पुष्टस्थूल कायस्याह वर्णपरपोषितपैंतीस छत्तीसवयीनपरोपजीवीवयस्का कोमस्तक उठाकरभीख मांगनाही क्योंआसान लगता है?2:आने - जाने वालेसभी लोगों केसिरों पर हाथरखकर आशीर्वचनबोलते हुएदो - चार रुपयों के लिएदुपहिया, त...
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Tag :ट्रेफिक सिग्नल
  April 6, 2019, 8:59 pm
खिंचा आया था पुष्प में, अलि की तरहपाश में ऐसा जकड़ा, निकल न सका।इन निगाहों ने ऐसा असर कर दियान मैं जिंदा रहा, और न मर ही सका।है प्रशांत सबसे गहरा, या चितवन तेरेडूबा मैं जब से इनमें, उबर न सका।खिंचा आया था पुष्प में अलि की तरह...व्योम नीला अधिक है, या दृग हैं तेरेआज तक और अभी तक...
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Tag :चितवन
  April 6, 2019, 3:47 pm
गरीबी- प्रश्नचिह्नतरसते दो जूनकी रोटी कोधन और साधन कीकमी से जूझतेमैले- कुचैलेचीथड़ों मेंजीवन केअनमोल स्वप्न सजातेसूखे शरीर से चिपकेनवजात कोअपने आँचल काअमृत - धारन पिला पाने कीविवशता मेंमन ही मन घुटतेतंगी में रह रहकरजीवन यापनकरने को मजबूरफटे लत्ते को भीभीख मेंमां...
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Tag :ग़रीबी
  March 30, 2019, 10:59 pm
न उठना चाहती है,न चलना चाहती है.स्वयं में सिमट कररह गई मेरी कलमआजकल बीमार रहती है.आक्रोशित हो जब लिखती है अपने मन कीतो चमकती है तेज़ टहकार- सी.चौंधिया देने वाली उस रोशनी से,स्याह आवरण के घेरे में,स्वयं को सदा महफूज समझते आये वे,असहज हो कोई इन्द्रजाल रच,करते हैं तांडव उसके...
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Tag :कलम
  March 24, 2019, 11:58 pm
      8 मार्च8 मार्च ये कोई तारीख हैया स्त्री के जख्मों परसाल दर साल बड़े प्रेम सेछिड़का जाने वाला नमक..ये 8 मार्च आखिर आता क्यों हैऔर आता भी है तो चुपचापचला क्यों नहीं जाताक्यों स्त्री कोएहसास दिलाया जाता हैकि तुम्हारे बिनायह सृष्टि चल ही नहीं सकतीतुम ही सब कुछ होतु...
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Tag :womens day.
  March 9, 2019, 11:09 pm
ललकार रहा है हिंदुस्तानललकार रहा है हिन्दुस्तानसुधर जा ओ अब पाकिस्तान!मारो, काटो, आतंक करो...ऐ दहशत गर्दों शर्म करो...क्या इस्लाम यही सिखलाता है?क्या कुरान से तुम्हारा नाता है?क्यों खून खराबा करता है?उस खुदा से क्यों नहीं डरता है?क्यों अपनी नीच हरकतों सेतू घाटी को दहलात...
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Tag :अवंतिपुर
  February 14, 2019, 10:44 pm
छूटा कुछ भी नहीं है ।जिन्दगी के हर सफ़हे कोबड़ी इत्मीनान से पढ़ा है मैंने।मटमैली जिल्द चढ़ी वह किताबबिलकुल सही पते पर आई थी।अच्छी तरह से उलट - पलट करबड़े गौर से देखा था मैंने उसे।उस पर मेरा ही नाम लिखा था।खिन्न हो गई थी मैंउस किताब को देखकर।रद्दी से पुराने जर्द पन्नेज...
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Tag :जिंदगी
  February 6, 2019, 9:59 pm
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