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मेरी जुबानी

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Tag :जिन्दगी
  May 28, 2018, 6:21 pm
1:गरिमा गानमाँ भारती महानहमारी शान2:खूबसूरतजननी जन्म भूमितेरी मूरत3:सारे जहाँ में सदा झंडा लहरेतेरी शान में 4: आग भरी हो भारतीय रगों में गद्दारी न हो5:चाह है यही हो भारत से दूर भूख गरीबी 6:माथे पे मेरे  तेरी माटी चमके  संझा सबेरे 7:गाँधी बनूँ या सुभाष ...
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Tag :भारत
  May 28, 2018, 12:14 am
 वत्स,आज तुम फिर आ गए मेरे पासविनाश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने.अपने ही हाथों से अपना सर्व नाश कराने.कब समझोगे मेरे ही अस्तित्व में निहित हैतुम्हारा भविष्य सुनहरा.फिर भी चोट कर - करके धरा को तुमने कर दिया है अधमरा.कैसे हो सकते हो तुम इतने कृतघ्न!क्या तुम्हें बिल्कुल भी ...
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Tag :प्रकृति
  May 19, 2018, 11:03 am
संवेदनाओं के भँवर में तैरते - तैरतेजाना मैंने कि मूरख हूँ मैं.समझदारों की इस भीड़ मेंइंसानों की खोज में हूँ मैं.हाँ इंसान,जो कभी हुआ करते थेकब हुए वो लुप्त, अज्ञात है ये बात.डायनासोर, डोडो पक्षीया जैसे लुप्त हुईकई अन्य प्राणियों की जात .शायद भगवान सेखो गया है वह सांचाजि...
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Tag :खोज
  May 17, 2018, 1:53 am
 अदृश्य सी वह शक्ति जो सदैव मेरे साथ है पता है मुझे माँ, कि वह तेरा ही आशीर्वाद हैतेरा प्यार,तेरी ममता, तेरा स्नेह माँ निर्विवाद है तू मेरी संगी,मेरी साथी ,मेरी ईश्वर प्रदत्त मुराद हैतू मेरा बल, संबल, मेरे जीवन का आल्हाद है तू गीत है, संगीत है , मेरे जीवन का नाद है म...
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Tag :मातृ दिवस
  May 13, 2018, 2:08 am
तमाम कोशिशें उन्हें पाने की गोया नाकाम हुईरातें कटती हैं करवटों में मेरी नींदें भी हराम हुईन वो इकरार करते हैं न ही इनकार करते हैंउल्फत में क्यू जफा ही मेरे नाम हुईदिल की तड़प भी उन्हें दिखी नहीं या - खुदाउनकी बेवफ़ाईयां ही क्यों मेरा ईनाम हुईकिस सिम्त उन्हें ढूंढे, व...
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Tag :बेवफ़ाई
  May 12, 2018, 1:17 am
वक्त हूँ मैंमेरा इंतजार न करनालौटता नहीं मैं कभी किसी के लिएदेखता हूँ समदृष्टि से सभी कोज्ञात है तुम्हें भीउगता है सूरज समय से औरनिकलता है चांद समय परसमय से होते हैं परिवर्तित मौसमनियत समय पर वर्षा,गर्मी और सर्दीसब सुनते हैं केवल मेरी हीउन्हें पता है कि मैं कितना अन...
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Tag :प्रेरक
  May 4, 2018, 6:57 pm
   रात के साढ़े दस बज रहे थे. महीना अप्रैल का था पर तपन ज्येष्ठ मास से कम न थी. खूब गर्मी पड़ रही थी इसलिए आशीष, सिया और उनके दोनों बच्चे घर के बाहर का दरवाजा खोलकर हॉल में बैठ कर भोजन कर रहे थे. तभी सिया को कुछ अजीब - सा महसूस हुआ. उस की नजर ऊपर उठी. अचानक से अपने सिर के ऊपर चमग...
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Tag :चमगादड़
  May 4, 2018, 1:00 am
कह दो हवाओं से कि दरमियाँ न आएँ       दूरिया उनसे अब और सही जाती नहीं            उनके रुखसारों को जब चूमती हैं वो                   तो रकीब सी लगती हैं                        सुधा सिंह 🦋 02.05.18...
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Tag :रकीब
  May 2, 2018, 11:36 pm
नही छोड़ती कोई कसर, जिन्दगी हमें आजमाने मेंएक मजदूर ही तो हैं हम, जीवन के इस कारखाने मेंगिर्द बांध दिया है इसने, इक ऐसा मोह बंधन जकड़े हुए हैं सब, इसके तहखाने मेंदुख देखकर हमारा, हो जाती है मुदित येसुख मिलता है इसे, हमें मरीचिका दिखाने मेंजिद्दी है ये बड़ी ,ज्यों रूठी हो...
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Tag :मकड़जाल
  May 2, 2018, 1:48 am
अस्तित्व है क्या?क्या रूप नया!क्या जीवित रहना अस्तित्व है?या कुछ पा लेना अस्तित्व है?ये अस्तित्व है प्रश्नवाचक क्यों?और सब है उसके याचक क्यों?आख़िरक्या है ये??सत्ता... अधिकार...या प्रकृति...वजूद... या फिर.. उपस्थिति ???अजी कब तक और किसकी????आए कितने ही, गए कितने,पर अस्तित्व कहो टि...
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Tag :प्रश्नवाचक
  April 26, 2018, 11:41 pm
उस घडी का इंतजार मुझे अब भी है- Amarujala: चाहत तो ऊँची उड़ान भरने की थी। पर पंखों में जान ही कहाँ थी! उस कुकुर ने मेरे कोमल डैने जो तोड़ दिए थे। मेरी चाहतों...
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Tag :
  April 26, 2018, 11:11 am
 ये कैसी उकूबत थी उनकीये कैसी उकूबत थी उनकी, हमें चोटिल ज़रर कर गएहमने लिखी इबारतें सदा उनके नाम कीबिन पढे ही उन्हें वो बेकदर कर गएउनसे पूछे कोई उनकी बेवफ़ाई का अस्बाबहम तो अपनी ही कफ़स में जीते जी मर गएबह के आँखों से अश्कों ने लिखी तहरीर ऐसीकि बज्‍म में जाने अनजाने ...
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Tag :उकूबत
  April 25, 2018, 12:18 am
उनकी कुरबत भले ही मेरेरकीब के नसीब हो जो चेहरे पर तबस्सुम खिले उनके, तो तफ़ावत भी उनकी मंजूर है हमेंसुधा सिंह 🦋तफ़ावत: दूरी, फासलाकुरबत :निकटता...
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Tag :कुरबत
  April 24, 2018, 1:14 pm
यक्ष प्रश्नजीवन की प्रत्यंचा पर चढा करप्रश्न रुपी एक तीरछोड़ती हूँ प्रतिदिन ,और बढ़ जाती हूँ एक कदमआगे की ओरसोचती हूँ कदाचितइस पथ पर कोई वाजिब जवाबजरूर मिल जायेगा।पर न जाने किस शून्य मेंविचरण करके एक नए प्रश्न के साथवह तीर मेरे सामने दोबाराउपस्थित हो जाता हैएक यक्ष प...
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Tag :कदम
  April 17, 2018, 10:11 pm
जरूरी है थोड़ा डर भी मर्यादित अरु सुघड़ भी.  इसी से चलती है जिंदगी, और चलता है इंसान भी. जो डर नहीतो मस्जिद नहीं ,मंदिर नहीं.  गुरुद्वारा नहीं और गिरिजाघर नहीं.और खुदा की कदर भी नहीं.  ना हो डर,रिश्ते में खटास का,  तो मुंह में मिठास भी नहीं.  डर न हो असफल...
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Tag :मर्यादा
  April 14, 2018, 7:10 pm
हमेशा से ऐसा ही तो थाहाँ.. हमेशा से ऐसा ही थाजैसा आज हूँ मैंन कभी बदला था मैंऔर ना ही कभी बदलूंगाक्योंकि.. मृत हूँ मैं!मेरे पास...आत्मा तो कभी थी ही नहींभीड़ के साथ चलता हुआएक आदमी हूँ मैंहाँ.. आदमी ही हूँपर विवेक शून्य हूँ मैंक्योंकि... मृत हूँ मैं!देखता हूँ  शराबी पति कोबड...
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Tag :तटस्थता
  April 12, 2018, 11:15 pm
छूना है मुझे चाँद कोसोचती हूँ कि कर लूँ, मैं भीकुछ मनमानियाँ , थोड़ी नदानियांउतार फेंकू, पैरों में पड़ी जंजीरेबदल दूँ, अपने हाथों की अनचाही लकीरेंतोड़ दूँ, दकियानूसी दीवारों कोउन रिवाजों , उन रवायतों कोजो मेरे पथ में चुभते है कंटकों की तरहक्यों हैं सारी वर्जनाएँ केवल ...
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Tag :चाँद
  April 9, 2018, 12:13 am
ये सिंदूरी, सुरमई शाम का बहकता आँचलफलक से झरती ये अलमस्त चाँदनीरूह तक पहुँचता एहसास ये रूमानीनदिया की बहती ये नीरव रवानीहौले से कुछ कह जाए..ये कशिश, ये खुमारी और ये दयारकानों में चुपके से कुछ कहती फिरसर्रर् ... से बह जाती ये मतवाली बयारतुम्हारी गर्म साँसों की ये मदमस्त ख...
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Tag :तनहाई
  March 30, 2018, 5:44 pm
न मालूम था कि तुम भी निकलोगे उन जैसे ही ..खोल दी थी अपने दिल की किताब मैंने तुम्हारे सामनेउसके हर सफहे पर लिखी हर बात को गौर से पढ़ा था तुमने..जिसमें लिखे थे मेरे सारे जज्बात, सारे एहसास...वो स्याह, बदरँग, मैला - सा पन्ना भी तो तुमने देखा था जिसे मैंने सबसे छुपा कर रखा था...पर बे...
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Tag :जज्बात
  March 24, 2018, 7:56 pm
घनघोर तिमिर आतंक करेवायु भी वेग प्रचंड करेहो सघन बादलों का फेराया अति वृष्टि का हो घेरातू हृदय घट में भरले उजासमत पीछे हट, तू कर प्रयासहै पथिक तू, न ये भूलनाकरने तुझे कई काज हैंवो मानव ही तो मानव हैंजिसमें उम्मीद और आस हैमाना पतझड़ का मौसम है पर ये मौसम भी बीतेगातूफान ...
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Tag :उम्मीद
  March 18, 2018, 12:20 am
परिक्रमाकौन नहीं करता परिक्रमा?सब करते हैंऔर जरूरी भी है परिक्रमापरंतु अपनी ही धुरी सेजैसे चांद करता है धरती की परिक्रमा.धरती करती है सूर्य की परिक्रमा.और अनेकों ग्रह करते हैं सूर्य की परिक्रमाताकि वह अपनी धुरी से भटक ना जाएं.दिग्भ्रमित न हो जाएं.सब की सीमाएं होती ह...
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Tag :चाँद
  March 7, 2018, 11:41 pm
चलो आओ मौसम सुहाना हुआ है,ये दिल भी मेरा आशिकाना हुआ है।छाई है मदहोशी चारों तरफ,सुर्ख फूलों पे भँवरा दिवाना हुआ है।चलो आओ मौसम सुहाना हुआ है,ये दिल भी मेरा आशिकाना हुआ है।बागों में चिड़िया चहकने लगी है,कलियाँ भी खिलकर महकने लगी है।कि गुम है मेरे होश चाहत में तेरी ,मेरा ...
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Tag :प्रेम
  March 5, 2018, 1:17 pm
मैं बिरहन हूँ प्रेम की प्यासीन रँग, न कोई रास है!बदन संदली सूल सम लागेकैसा ये एहसास है!तुम जब से परदेस गए प्रियये मन बड़ा उदास है!बिना तुम्हारे रंग लगाए,फाग कहीं यो बीत न जाए!सखिया मोहे रोज छेड़तीकहती क्यो तोरे पिया न आए!टेसू पलाश के रंग न भाए,गुलमोहर भी बिछ - बिछ जाए !कस्तु...
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Tag :उदासी
  March 2, 2018, 12:01 am
तन्हाई...नहीं होती मूक!होती है मुखर ,अत्यंत प्रखर!उसकी अपनी भाषा हैअपनी बोली है!जन्मती है जिसके भी भीतरललकारती है उसे!करती है आर्तनादचीखती है चिल्लाती है!करती है यलगारशोर मचाती ,लाती है झंझावातअंतरद्वंद करतीरहती झिंझोड़ती हर पल !और करती है उपहृतव्याकुलता, वेदना, लाचा...
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Tag :
  February 27, 2018, 11:07 pm
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