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Meri Jubani (मेरी जुबानी )

मुंबईकर थोड़ा धीरे चलोथोड़ी सी राहत की साँस ले लोथोड़ा सब्र करोमाना मायानगरी है यह!मृगमरीचीका है जो सिर्फ हमें भ्रमित कर रही हैहमें अपने जाल में फँसा रही है!और हम जानते - बूझते फंसते जा रहे हैं!पर हम तो समझदार हैं!हमें आखिर क्या चाहिए!हमें वही चाहिए न, जो बाकी सबको चाह...
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Tag :भागदौड़
  October 2, 2017, 5:14 pm
कहानी है मेरे पड़ोसन की - एक दिन वह मेरे पास आई उसकी आंखें थी डबडबाई उसे चिंतित देख जब रह न पाई मैंने उससे पूछ ही डाला - इस उदासी का क्या है कारण? आख़िर ऐसी क्या है बात ?कहो तो कुछ उपाय सोचेजल्द से जल्द करें  निवारण कुछ सकुचाते बामुश्किल से उसने आप बीती सुनाई...
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Tag :व्यवहार
  September 21, 2017, 10:17 pm
डरती हूँ अपनी सौतन सेउसकी चलाकियों के आगे मैं मजबूर हूँकहती है वह बड़े प्यार से - "तुम जननी बनो.गर्भ धारण करो.अपने जेहन में एक सुंदर से बालक की तस्वीर गढ़ो.उसका पोषण करो.आनेवाले नौ माह की तकलीफें सहो.प्रसव में पीड़ा हो तो घबराना नहीं.कोई चिंता फिकर करना नहीं.मैं सदा तुम्ह...
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Tag :
  September 18, 2017, 12:35 am
देख रही हूँ आजकल कुछ नए किस्म की गायों कोजो अपने नवजात बछड़े कीकोमल काया कोअपनी खुरदुरी जीभ से चाट चाट कर लहूलुहान कर रही है!इस सोच में कि वह उन पर प्यार की बरसात कर रही है!उनपर अपनी ममता लुटा रही है उन्हें सुरक्षित महसूस करा रही है!पर इस बात से अनजान किवह खुद ही अपने बच्च...
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Tag :
  June 19, 2017, 6:40 pm
पाताल में समाने को बेताब है धरा।आँखों में करुणा विगलित अश्रु है भरा।हृदय से उसके निकलती एक ही धुन।हे मनुज, मेरी करुण पुकार तो सुन.."तूने ऐसे कर्म किए!बचा नहीं कुछ भविष्य के लिए!जो कुछ मैंने तुझे दिया!गलत उसका उपयोग किया!थी मैं कभी नई दुल्हन - सी! हो गयी आज जर्जर, गुमसुम - स...
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Tag :धरा
  June 5, 2017, 10:09 pm
मुझे मेरा बचपन पुनः चाहिए,पाने फिर इनको कहाँ जाइये?वो पेड़ो पर चढ़ना, गिलहरी पकड़ना,अमिया की डाली पर झूले लगाना,वो पेंगें मारके  बेफिकरी से झूलना,वो मामा और मासी का मनुहार करना,मेरे रूठ जाने पर मुझको मनाना,पाने फिर इनको कहाँ जाइये?मुझे मेरा बचपन पुनः चाहिए!खिलौनों की ...
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Tag :
  May 21, 2017, 9:05 pm
व्यस्त हूँ मैं..क्योंकि मेरे पास कोई काम नहीं है,इसलिए व्यस्त हूँ मैं...काम की खोज में हूँ!रोजगार की तलाश में हूँ!रोज दर - दर की खाक छानता हूँ! डिग्रीयां लिए - लिएदफ्तर- दर- दफ्तर भटकता हूँ!इसलिए व्यस्त हूँ मैं...मेहनतकश इन्सान हूँ!पर सिफारिश नहीं है!दो वक़्त की रोटी की खातिरक...
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Tag :उम्मीद
  May 15, 2017, 3:53 pm
माँमाँ ऐसा कुछ नहीं,जो तेरी ममता के समतुल्य है!मुझपर तेरा प्रेम, तेरा कर्ज अतुल्‍य है!धूप में सदा तू छाँह की तरह रही ,पापा की डाँट से बचाने वाली ढाल की तरह रही!मेरी दुख की घड़ियों में सुख के सुर और मधुर ताल की तरह रही!अपनी हर ख्वाहिश को दबा कर,मेरी हर ख्वाहिशों को पूर्ण किय...
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Tag :
  May 13, 2017, 9:18 pm
'भावों की गरिमा 'भावों की क्या बात करेंभावों की अपनी हस्ती हैभावो के  रंग भी अगणित हैंइससे ही दुनिया सजती हैमूल्यांकन भी  इसका ...व्यक्ति दर व्यक्ति होता है!गैरों को भी प्रेम भरीमाला में ये तो पिरोता हैभाव महानुभावों के है तो'वाह भाई वाह.. क्या बात'हैदीन, अकिंचन, मजदूर ...
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Tag :
  May 10, 2017, 3:45 pm
मुझे ऐसा हिंदुस्तान चाहिए!मुझे एक खुला और उन्मुक्त आसमान चाहिए!मिले जहाँ आशा का सूरज, ऐसी एक दुकान चाहिए! (1)संवेदनाए अभी बाकी हो जिसमें, ऐसा इन्सान चाहिए!दरों -दीवारों से टपके जहाँ प्रेम रस, ऐसा एक मकान चाहिए!(2)मझधार में फंसे डूबते जहाज को जो पार लगा दे, ऐसा कप्तान चाहिए!दे...
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Tag :
  May 7, 2017, 12:51 pm
 आख़िरी लम्हाऔर हाथ से रेत की तरह फिसल गयाजो कुछ अपना सा लगता था!दोनों हाथों को मैं निहारता रहाबेबस, लाचार, निरीह - साऔर सोचता रहा, कहाँ से चला था,पहुंचा कहाँ हूँ!उम्र की साँझ ढलने को है,कितना कुछ छूट गया पीछे,खड़ा हूँ, अतीत के पन्नों को पलटता हुआ,भूतकाल की सीढ़ियों से गुज...
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Tag :
  May 3, 2017, 4:12 pm
इल्म है मुझे कि तुम मेरे दुख का सबब भी न पूछोगे,सोचके कि कही तुम्हें आँसू न पोछने पड़ जाएंशायद अनजान बने रहनाही तुम्हें वाजिब लगता है.सुधा सिंह...
Meri Jubani (मेरी जुबानी ) ...
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  April 23, 2017, 8:19 pm
देखा उन्हें ख्यालों में खोए हुए,न जाने किसका तसव्वुर है,जो उन्हें उनसे ही जुदा कर रहा है.सुधा सिंह ...
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Tag :
  April 20, 2017, 10:50 pm
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Tag :
  March 28, 2017, 8:49 pm
भारत माँ के वीर सपूत हम,कभी नहीं घबराएंगे!नहीं डरेंगे दुश्मन से,छाती पर गोली खाएंगे!हम साहस से भरे हुए हैं,हर विपदा दूर भगाएंगे!बधाए आती है आए,हम उनसे टकराएंगे!ध्वज को सदा रखेंगे ऊंचा,उसकी शान बढ़ाएंगे!भारत माँ के वीर सपूत हम,हम कभी नहीं घबराएंगे!रक्त से रंजित धरा न होगी,...
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Tag :बाल कविता
  March 28, 2017, 4:11 pm
 साथ रहते -रहते  दशकों बीत गएपर न् मैंने तुम्हे जाना,न् तुम् मुझे जान पाए।फिर भी एक साथ एक छत के नीचेजीए जा रहे है।क्या इसी को कहते हैं परिणय सूत्र ?नही यह केवल मजबूरी है...तुम्हे भले नही , पर मुझे मेरा एकाकीपन नजर आता है।यह एकाकीपन मुझेसर्प की मानिंद डसता है!जीवन् में त...
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Tag :टीस
  March 20, 2017, 10:48 pm
दादा दादी को पोते पहचानते नहींनाना नानी को नवासे अब जानते नहींन जाने कैसा  कलयुगी  चलन है येकि रिश्ते इतने बेमाने हो गए! और ताने  बाने  ऐसे  उलझे कि अपने  सभी बेगाने  हो गए!प्यार  अनुराग  और  स्नेह  के  बंधन  पर आजकैसी  गिरी है  गाज!कद्र  रिश्तो क...
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Tag :
  March 19, 2017, 9:40 pm
सिया की मेहनत का आज गुणगान हो रहा है!रिया की  कोशिशों का भी खूब बखान हो रहा है!जहाँ प्रथम का चेहरा खुशी से लाल हुआ जा रहा है!वही शुभम आज मां से आखें  चुरा रहा है!ओम ने बाजार से खास मिठाइयां लाई हैं!पर सोम के घर में खामोशी-सी क्यों छाई है?खुशियों और गम का ये कैसा संगम है!कही...
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Tag :रिज़ल्ट
  March 11, 2017, 8:40 pm
भागती रही जिससे मैं हमेशा!जिससे हमेशा लड़ती रही!वही झूठ न जाने क्यूँ मुझे अपनी ओर खींच रहा है!क्यूँ अब मुझे वही सच लगने लगा है!क्यूँ यह झूठ चीख चीख कर मुझसे कहता है  किहर ओर आज उसी का बोलबाला है! वही आज की सच्चाई है!  क्यूँ वह पूछता है  मुझसे...कि आखिर..इस सच से तुझे मिला ह...
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Tag :
  February 7, 2017, 11:32 am
जिन्दगी ...तेरी आजमाइश अभी बाकी है,मेरे ख्वाब अभी मुकम्मल कहाँ हुए?मेरी फरमाइशें अभी बाकी है ।कई ख्वाहिशें अभी बाकी हैं।माना कि ..दूसरों की भावनाओं से खिलवाड़ करना,तेरी आदत में शुमार है।पर मुझे तुझ पर बेइंतहां ऐतबार है।तू कभी किसी को जमींदोज करती है ,कभी आसमां की बुलंदी ...
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  December 31, 2016, 12:51 pm
माना कि मंजिल दूर है,पर ये भी तो मशहूर है.....मजबूत इरादे हो अगर,पाषाण भी पिघला करते है।दृढ निश्चय कर ले इंसाँ तो,तूफ़ान भी संभला करते हैं।हौसले बुलंदी छुएं तो ,नभ का मस्तक झुक जाता है।जब साहस अपने चरम पे हो ,तो सागर भी शरमाता है।मुश्किलें बहुत सी आयेंगी,तुझे राहों से भटकाये...
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Tag :प्रयास
  December 29, 2016, 3:31 pm
ये झुर्रियाँ..।ये झुर्रियाँ मामूली नहीं,ये निशानी है अनुभवों की।इन्हें तुम अपना अपमान न समझोकोने में पड़ा कूड़ा नहीं ये,इन्हें घर का मान और सम्मान समझो।हर गुजरे पल के गवाह है ये,इन्हें  बेकार  न समझो।चिलचिलाती धूप में छांव है ये,इन्हें अंधकार न समझो।ये पोपले चेहरे क...
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Tag :
  December 17, 2016, 12:12 pm
1:पास होकर भी ,तेरे पास होने का, अहसास नही होता।न् जाने ये कैसी दूरी है ,हम दोनों के दरमियाँ।2: दिल तोड़ना और साथ छोड़ना तो ज़माने का दस्तूर है ऐ दोस्त।कायल तो हम तुम्हारे तब होंगे , जब् तुम् साथ देने की कला सीख लोगे ।3:अपनों को ठुकराना ,गैरों को अपना बताना और इस बात पर इ...
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Tag :
  December 5, 2016, 12:29 am
संध्या चाहे कितनी भयावह क्यों न् हो।सूरज फिर निकलेगा ,फिर चमकेगा।संध्या तो संध्या है जब्  भी आती है अपने साथ काली स्याह रातोंका पैगाम  ही लाती है और सबके खुशनुमा जीवन मेंभयावह अँधेरा और गमगिनियां भर जाती है।अपना विद्रूप और अभद्र रंग दिखाती है।कृष्ण पक्ष में तो और ...
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Tag :
  November 4, 2016, 3:49 pm
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