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मेरी जुबानी

ढल जा ऐ रात...मुझे सूरज को मनाना हैबहुत दिन हुएन जाने क्यूँ...मुझसे रूठा हुआ है......
मेरी जुबानी ...
Tag :
  October 11, 2018, 11:44 pm
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Tag :one - liner
  September 23, 2018, 1:52 pm
तेरे काँधे पर सिर रखके सुकूं पाती हूँ. कान्हा, तुझमें इतनी कशिश क्यों है????...
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Tag :भक्तिभाव
  September 20, 2018, 11:04 pm
न  दौड़ना मना है, न  उड़ना मना हैन गिरना मना है , न चलना मना है! जो बादल घनेरे, करें शक्ति प्रदर्शन तो भयभीत होना, सहमना मना है! पत्थर मिलेंगे, और कंकड़ भी होंगे.राहों में कंटक, सहस्त्रों चुभेंगे! कछुए की भाँति निरन्तर चलो तुम, खरगोश बन कर, ठहरना मना है! भानु, शशि को भी लगते ग...
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Tag :कविता
  September 19, 2018, 10:50 pm
प्यारी मैं,मेरी प्यारी प्यारी... मैं....अरे.!अरे... !मुझे पता है तुम क्या सोच रही हो?यही न.. कि आज इसे क्या हो गया है??कैसी बहकी - बहकी बातें कर रही है??आज तक तो इसने मुझे कभी प्यारी नहीं कहा!!कभी प्यार से पुकारा नहीं!!हमेशा मेरी अनदेखा करती रही!!!फिर अचानक से इसे क्या सूझी???यही न???मैं आ...
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Tag :मैं... प्यारी मैं
  September 1, 2018, 8:56 pm
कहना तो था पर कभी कह न पाई ये सोचकर कि पड़ोसी क्या कहेंगे समाज क्या कहेगादुनिया क्या कहेगीमैं कुछ कह न पाई बांध दी किसी ने बेड़ियाँ जो पैरों मेंतो छुड़ाने की कोशिश भी न कीउसे अपना नसीब समझ लिया नसीब से कभी लड़  न पाई कहना तो था पर.... सदियों से लड़कियां चुप ही रही थीगाय की ...
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Tag :मजबूरी
  August 30, 2018, 5:51 pm
अंतरद्वन्द्वपेशानी मेरी, लंबी लकीरों से सजाते,वक्त से पहले ही, मुझे बूढ़ा बनाते,मेरे भीतर , ईर्ष्या - द्वेष  जगाते,मुझे अक्सर, गलत पथ पर दौड़ाते,रचते  साजिश सदा,मेरे स्वजनों को, मुझसे दूर करने कीमेरे उसूलों से, मुझे डगमगा देने की दिन का चैन, रात का सुकून छीन लेने कीअष...
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Tag :अन्तरद्वन्द्व
  August 4, 2018, 10:56 pm
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Tag :जिन्दगी
  May 28, 2018, 6:21 pm
1:गरिमा गानमाँ भारती महानहमारी शान2:खूबसूरतजननी जन्म भूमितेरी मूरत3:सारे जहाँ में सदा झंडा लहरेतेरी शान में 4: आग भरी हो भारतीय रगों में गद्दारी न हो5:चाह है यही हो भारत से दूर भूख गरीबी 6:माथे पे मेरे  तेरी माटी चमके  संझा सबेरे 7:गाँधी बनूँ या सुभाष ...
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Tag :भारत
  May 28, 2018, 12:14 am
 वत्स,आज तुम फिर आ गए मेरे पासविनाश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने.अपने ही हाथों से अपना सर्व नाश कराने.कब समझोगे मेरे ही अस्तित्व में निहित हैतुम्हारा भविष्य सुनहरा.फिर भी चोट कर - करके धरा को तुमने कर दिया है अधमरा.कैसे हो सकते हो तुम इतने कृतघ्न!क्या तुम्हें बिल्कुल भी ...
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Tag :प्रकृति
  May 19, 2018, 11:03 am
संवेदनाओं के भँवर में तैरते - तैरतेजाना मैंने कि मूरख हूँ मैं.समझदारों की इस भीड़ मेंइंसानों की खोज में हूँ मैं.हाँ इंसान,जो कभी हुआ करते थेकब हुए वो लुप्त, अज्ञात है ये बात.डायनासोर, डोडो पक्षीया जैसे लुप्त हुईकई अन्य प्राणियों की जात .शायद भगवान सेखो गया है वह सांचाजि...
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Tag :खोज
  May 17, 2018, 1:53 am
 अदृश्य सी वह शक्ति जो सदैव मेरे साथ है पता है मुझे माँ, कि वह तेरा ही आशीर्वाद हैतेरा प्यार,तेरी ममता, तेरा स्नेह माँ निर्विवाद है तू मेरी संगी,मेरी साथी ,मेरी ईश्वर प्रदत्त मुराद हैतू मेरा बल, संबल, मेरे जीवन का आल्हाद है तू गीत है, संगीत है , मेरे जीवन का नाद है म...
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Tag :मातृ दिवस
  May 13, 2018, 2:08 am
तमाम कोशिशें उन्हें पाने की गोया नाकाम हुईरातें कटती हैं करवटों में मेरी नींदें भी हराम हुईन वो इकरार करते हैं न ही इनकार करते हैंउल्फत में क्यू जफा ही मेरे नाम हुईदिल की तड़प भी उन्हें दिखी नहीं या - खुदाउनकी बेवफ़ाईयां ही क्यों मेरा ईनाम हुईकिस सिम्त उन्हें ढूंढे, व...
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Tag :बेवफ़ाई
  May 12, 2018, 1:17 am
वक्त हूँ मैंमेरा इंतजार न करनालौटता नहीं मैं कभी किसी के लिएदेखता हूँ समदृष्टि से सभी कोज्ञात है तुम्हें भीउगता है सूरज समय से औरनिकलता है चांद समय परसमय से होते हैं परिवर्तित मौसमनियत समय पर वर्षा,गर्मी और सर्दीसब सुनते हैं केवल मेरी हीउन्हें पता है कि मैं कितना अन...
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Tag :प्रेरक
  May 4, 2018, 6:57 pm
   रात के साढ़े दस बज रहे थे. महीना अप्रैल का था पर तपन ज्येष्ठ मास से कम न थी. खूब गर्मी पड़ रही थी इसलिए आशीष, सिया और उनके दोनों बच्चे घर के बाहर का दरवाजा खोलकर हॉल में बैठ कर भोजन कर रहे थे. तभी सिया को कुछ अजीब - सा महसूस हुआ. उस की नजर ऊपर उठी. अचानक से अपने सिर के ऊपर चमग...
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Tag :चमगादड़
  May 4, 2018, 1:00 am
कह दो हवाओं से कि दरमियाँ न आएँ       दूरिया उनसे अब और सही जाती नहीं            उनके रुखसारों को जब चूमती हैं वो                   तो रकीब सी लगती हैं                        सुधा सिंह 🦋 02.05.18...
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Tag :रकीब
  May 2, 2018, 11:36 pm
नही छोड़ती कोई कसर, जिन्दगी हमें आजमाने मेंएक मजदूर ही तो हैं हम, जीवन के इस कारखाने मेंगिर्द बांध दिया है इसने, इक ऐसा मोह बंधन जकड़े हुए हैं सब, इसके तहखाने मेंदुख देखकर हमारा, हो जाती है मुदित येसुख मिलता है इसे, हमें मरीचिका दिखाने मेंजिद्दी है ये बड़ी ,ज्यों रूठी हो...
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Tag :मकड़जाल
  May 2, 2018, 1:48 am
अस्तित्व है क्या?क्या रूप नया!क्या जीवित रहना अस्तित्व है?या कुछ पा लेना अस्तित्व है?ये अस्तित्व है प्रश्नवाचक क्यों?और सब है उसके याचक क्यों?आख़िरक्या है ये??सत्ता... अधिकार...या प्रकृति...वजूद... या फिर.. उपस्थिति ???अजी कब तक और किसकी????आए कितने ही, गए कितने,पर अस्तित्व कहो टि...
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Tag :प्रश्नवाचक
  April 26, 2018, 11:41 pm
उस घडी का इंतजार मुझे अब भी है- Amarujala: चाहत तो ऊँची उड़ान भरने की थी। पर पंखों में जान ही कहाँ थी! उस कुकुर ने मेरे कोमल डैने जो तोड़ दिए थे। मेरी चाहतों...
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Tag :
  April 26, 2018, 11:11 am
 ये कैसी उकूबत थी उनकीये कैसी उकूबत थी उनकी, हमें चोटिल ज़रर कर गएहमने लिखी इबारतें सदा उनके नाम कीबिन पढे ही उन्हें वो बेकदर कर गएउनसे पूछे कोई उनकी बेवफ़ाई का अस्बाबहम तो अपनी ही कफ़स में जीते जी मर गएबह के आँखों से अश्कों ने लिखी तहरीर ऐसीकि बज्‍म में जाने अनजाने ...
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Tag :उकूबत
  April 25, 2018, 12:18 am
उनकी कुरबत भले ही मेरेरकीब के नसीब हो जो चेहरे पर तबस्सुम खिले उनके, तो तफ़ावत भी उनकी मंजूर है हमेंसुधा सिंह 🦋तफ़ावत: दूरी, फासलाकुरबत :निकटता...
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Tag :कुरबत
  April 24, 2018, 1:14 pm
यक्ष प्रश्नजीवन की प्रत्यंचा पर चढा करप्रश्न रुपी एक तीरछोड़ती हूँ प्रतिदिन ,और बढ़ जाती हूँ एक कदमआगे की ओरसोचती हूँ कदाचितइस पथ पर कोई वाजिब जवाबजरूर मिल जायेगा।पर न जाने किस शून्य मेंविचरण करके एक नए प्रश्न के साथवह तीर मेरे सामने दोबाराउपस्थित हो जाता हैएक यक्ष प...
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Tag :कदम
  April 17, 2018, 10:11 pm
जरूरी है थोड़ा डर भी मर्यादित अरु सुघड़ भी.  इसी से चलती है जिंदगी, और चलता है इंसान भी. जो डर नहीतो मस्जिद नहीं ,मंदिर नहीं.  गुरुद्वारा नहीं और गिरिजाघर नहीं.और खुदा की कदर भी नहीं.  ना हो डर,रिश्ते में खटास का,  तो मुंह में मिठास भी नहीं.  डर न हो असफल...
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Tag :मर्यादा
  April 14, 2018, 7:10 pm
हमेशा से ऐसा ही तो थाहाँ.. हमेशा से ऐसा ही थाजैसा आज हूँ मैंन कभी बदला था मैंऔर ना ही कभी बदलूंगाक्योंकि.. मृत हूँ मैं!मेरे पास...आत्मा तो कभी थी ही नहींभीड़ के साथ चलता हुआएक आदमी हूँ मैंहाँ.. आदमी ही हूँपर विवेक शून्य हूँ मैंक्योंकि... मृत हूँ मैं!देखता हूँ  शराबी पति कोबड...
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Tag :तटस्थता
  April 12, 2018, 11:15 pm
छूना है मुझे चाँद कोसोचती हूँ कि कर लूँ, मैं भीकुछ मनमानियाँ , थोड़ी नदानियांउतार फेंकू, पैरों में पड़ी जंजीरेबदल दूँ, अपने हाथों की अनचाही लकीरेंतोड़ दूँ, दकियानूसी दीवारों कोउन रिवाजों , उन रवायतों कोजो मेरे पथ में चुभते है कंटकों की तरहक्यों हैं सारी वर्जनाएँ केवल ...
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Tag :चाँद
  April 9, 2018, 12:13 am
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