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बाल सजग : View Blog Posts
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बाल सजग

"बल मजदूर "नाजुक हाथों ने क्या कर दिया पाप, जन्म से ही दे दिया कामों का वनवास |कलियों जैसी खिलने वाले उस मासूम, जिंदगी को कर दिया तबाह |हर बचपन के लम्हों को, हर सजाये हुए सपनों को |दो मिनुट में कर दिया राख,दर्दनाक जिंदगी उसे तडपा दिया |बचपन के खिलौनों की जगह, जिंदगी से ...
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  December 4, 2017, 3:28 pm
"सुबह - सुबह जब मैं जागा "सुबह - सुबह जब मैं जागा, बिस्तर छोड़कर व्यायाम को  भागा | तब सुबह के बज रहे थे चार, चिड़ियाँ उड़ी पंख को पसार | मानों प्रकति कह रही हो,क्या घूमना चाहते हो संसार | मैं तो था बिल्कुल तैयार, लेकिन सपना टूटा तो हो गया सब बेकार | | कवि : देवराज क...
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  December 1, 2017, 3:46 pm
"उठो जवानों " कब तक सोए रहोगे जवानों, अब तुमको उठ कर दिखलाना है | चाहे हो मुसीबतों का पहाड़, इससे भी ऊँची छलांग लगाना है | अपने हक़ के हक़दार बानों, गलतियों से तुमको लड़ना है | शरहद के पार होकर भी, एक टारे की तरह चमकना है | अब मत सोओ आलस के बन्दों, अब तुमको भी लड़ना है...
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  November 25, 2017, 3:43 pm
 "ठंडी का मौसम आया "ठंडी का मौसम आया है  उनींदार कपड़ें है लाया है | बिना स्वेटर लगती है ठंडी, पहनो टोपी पूरी ठंडी | ठिठुर रहे हैं हाथ हमारे, चलो बैठते हैं आग के किनारे | कोहरा भी होता है इस दिन,देख कर चलो भईया नहीं तो भिड़ोगे  किसी दिन | | कवि : कुलदीप कुमार , ...
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  November 25, 2017, 3:29 pm
 "नएपन के ख़ुशी में "हमें गुदगुदाओ इस नयापन के ख़ुशी में ,निकलो उस दुखी दहलीज़ से | जिसमें गुदगुदी के लम्हें हो, जिओ ख़ुशी के पक्षिओं की तरह,जिस पक्षी के कुछ गीत हो | हमेशा तुम चहचहाना सीखो, हर दिन को  खाश बनाना सीखो | उन दिनों की यादों को भूल न पाय, याद  करो फिर भी या...
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  November 15, 2017, 3:51 pm
"दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी "दिवाली आयी खुशियाँ हज़ार लायी,, उन दीपों के बीच , वो खूब सुन्दर ख्यालों के साथ, जगमगाते बत्तियों के पास | सालों  -साल होता है पावन, इस त्योहार का इंतज़ार | फिर होता है दीपों का अकाश में, चमचमाते सितारे करते हैं दीदार |  दिवाली ...
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  November 13, 2017, 4:04 pm
" Try to fly " When a little bird try to fly,fall down many times but not shy.till it rise up and then try. but its little uniques,not help him to fly.  A beautiful excitement,which is in his mind.when it see any bird flying,  its mother never teach him to fly, but it has to learn by its trying........   Poet : Devraj kumar , class: 7th, Apnaghar  Introduction : He is Devraj kumar belongs to Bihar state and settle in Apnaghar for study. He is always interested in dance , poem writting ,and sports as well as drama etc. He has always smile on his face ....
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  November 13, 2017, 3:45 pm
" Beneath the Sky " We surprised beneath the sky,why we can not go so high .would be also have feather, so that we can fly together.to sit on the clouds, talk a lot and clear all doubts. we face the first ray of sun, then release the ray of bun. no more problems and tension,all bad deads fprgot, turn off television. Poet : Pranjul kumar , Class : 8th, Apnaghar Introduction : He is Pranjul from Chhattisgarh and he is well known for its poem , games ,drawing etc.He is good in study as well as mental skill .He joined Apnaghar for to change his family background from worst to better ....
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  November 11, 2017, 3:24 pm
" पढ़ाता है तू, " अनपढ़ों को पढ़ाता है तू, सबके दिल को छू जाता है तू | इस देश के वासियों को, अच्छी बातें है बताता तू | हिंसा तेरे बस में नहीं ,अहिंसा का पाठ पढ़ाता | अगर तू ये काम न करता,गाँधी नहीं कहलाता तू | कवि : समीर कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघरकवि परिचय : यह हैं समीर कुमार ज...
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  November 10, 2017, 4:14 pm
" DON'T CHANGE INTENTION "If the people is laughing at you.it's means you are doing something new.They would be compelled to change view.and give idea to you.would be thought I am crazy.and it will be make you to more lazy.but you there keep patient.and pay attention.Don't change there your intention.POET : DEVRAJ KUMAR , CLASS : 7TH , APNAGHARIntroduction : he is Devraj from Bihar state . Always read for an competition whatever of dance or poetry .Always smile is on his face and better in any game and favourite game is volleyball and cricket ...
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  November 7, 2017, 4:20 pm
"तितली के सुनहरे पंख "  तितली के सुनहरे पंख,देखकर मन बहल जाए | छुओ तितली के कोमल पंखों को ,तो टिम -टिमाते हुए उड़ जाए | सुनहरे से मौसम के पल में,तितली की रंगों की रौशनी | उनके सुंदर पंखों से निकलती है,पंखो में कुछ जादू है जिससे | जुगनू के रंग जैसे बदलती है,बाग - बगीच...
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  November 7, 2017, 3:49 pm
"दुनियाँ घूमूँ " चाह है मेरी की दुनियां घूमूँ ,हर जगह मस्ती में झूमूँ | देखूं मैं नई किरणों का शहर,जंहा न हो दुश्मनों का कहर | पद यात्रा से  हवाई यात्रा करूँ ,आसमान में जाकर नई साँस भरूँ | जहाँ -जहाँ जाऊँ मैं,सारे संस्कृति को अपनाऊँ मैं | ठंडी, गर्मी और झेलूं बरसातें,...
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  November 3, 2017, 5:01 pm
"माँ "माँ होती है सबसे पारी, सुनती है हर बात हमारी | खाना भी वो खिलाती है, सपनों में वो आती है | माँ होती है सबसे प्यारी, अच्छी बातें बताती है | स्कूल तक ले जाती है, स्कूल में डांट भी खाती हैं | फिर वो मुझको समझती है,माँ होती है सबसे प्यारी,सुनती है हर बात हमारी | ...
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  November 3, 2017, 4:45 pm
"अब का सोचना "कल को  क्या अब सोचना, वो तो यूँ ही  गुजर गया | तैयार रहना है अब हमें,आने वाले कल के लिए | आने वाला जो कल है, शायद कल बदल जाए, और किसी की मिट  जाए | किसने सोचा होगा उस कल को,क्या होगा उस कल को | कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 7th , अपनाघर...
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  October 31, 2017, 10:18 pm
"ऐ खुदा कुछ ऐसा कर "ऐ खुदा कुछ ऐसा कर, कि मेरी जिंदगी सुधर जाए | काश कुछ ऐसा हो, जिस पर मैं चल सकूं | की झुक जाए सारा संसार तेरी ही बल पर जिऊँ,तेरी ही शरण में मरूँ | काश कोई दे रह मुझे, चाहे जिऊँ या  मरूँ | ये परवाह नहीं मिझे, तेरी ही आचरण में रहूँ  | कवि : नितीश ...
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  October 27, 2017, 10:22 pm
"हैं बेचैन सभी "घर जाने को हैं बेचैन सभी, घर वाले इंतज़ार करते होंगें सभी | तड़प रहा हूँ यहाँ बेकरार, घर हो चाहे या हो बिहार | घर तो जाना है एक बार, करते होंगें मेरी फरियाद |  आती है हर पल घर की याद | | कवि : संतोष कुमार , कक्षा 4th , अपनाघर कवि परिचय : कक्षा 4th में ही कवित...
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  October 27, 2017, 10:06 pm
 "जब सुबह मैं जागा "जब मैं सुबह सुबह -जागा,  बिस्तर छोड़कर व्यायाम को भागा | तब बज रहे थे सुबह के चार,, बह रही थी ठंडी -ठंडी हवा,चिड़िया उड़ रहीं थी पंख पसार | मानों प्रकृति कुछ रही हो, क्या घूमना चाहते हैं संसार | मैं तो था बिलकुल तैयार, लेकिन जब सपना टूटा तो | सब कु...
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  October 27, 2017, 9:49 pm
"छोटे - छोटे हाथ हमारे"छोटे - छोटे हाथ हमारे, फिर भी करते काम सारे | कूड़ा हम उठाते हैं, स्वच्छ हम बनाते हैं | भारत बहुत बेकार हो गया,कूड़े का यहाँ भंडार हो गया  | कूड़ा न हम फैलाएंगे, स्वच्छ भारत हम कहलाएंगे | कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 6th , अपनाघर ...
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  October 22, 2017, 5:27 pm
"  माँ का प्यार  "  मन करता है मैं छोटा बन जाऊँ, माँ का प्यार दोबारा पाऊँ | उंगली पकड़कर चलना सिखाती, नया संसार की बात बताती | क ,ख ,ग पढ़ना सिखाती,एक से बढ़कर सपने दिखती | इस प्यार की प्यासी सारी दुनिया,माँ ने दुनियाँ को सहराया | वो छोटी सी भी मुस्कराहट तेरी, हर ...
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  October 14, 2017, 10:55 pm
 "नई किरण " निकला नया सूरज जब,नई किरणे कमरे में आई तब | मैं तो यूँ ही सोया हुआ था, सपनों की दुनियाँ में खोया था | प्यारी से एक आवाज़ आई, लगता था कोई जगाने है आई | थोड़ी गुनगुनाहट सी आवाज़ आई, बिस्तर से कोई जगाने है आई | रेशम की डोरी नया  संदेशा लाई, प्रेम का धागा बा...
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  October 14, 2017, 10:32 pm
 "अपने आप को पहचानो "इंसान अपने आप को पहचानो, अंदर छिपे हुए रहस्य को जानो | इंसान अपने आप को पहचानो, खुद करो काबिलियत जगजाहिर, जिसमें हो तुम सबसे माहिर |  कुछ बिगड़ा नहीं ,कुछ गया नहीं, बात है यही सही ,खुद पर दया नहीं | हुनर भरा है कूट -कूट कर, रो रहे हो खुद से रू...
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  October 13, 2017, 10:31 pm
"घबराइए मत "अगर ख्याल हो बड़ी तो घबराइए मत,लाखो सपने पहले से ही सजाइये मत | मेहनत और लगन बरक़रार रखिये, अगर कदम रखा है अपने हौसलों से | तो वापसक़दमों को  लौटाइये मत, कुछ चलने के बाद विचार मन में आएंगे | लेकिन उन विचारों से लडख़ड़ाईये मत | | कवि : देवराज कुमार  ,कक्षा : 8th ...
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  October 13, 2017, 10:03 pm
"जब अपना देश था गुलाम" जब अपना देश था गुलाम, अंग्रेजों का था यहाँ कोहराम | देश में न थी कोई खुशहाली, देशवासियों पर करते थे अत्याचारी | गाँधी ने देशवासियों का साहस बढ़ाया अपने हक़ के लिए विरोध करवाया | खाकी धोती और घड़ी लटकाये ,जीवन में सत्य अहिंसा अपनाये | अंग...
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  October 12, 2017, 10:26 pm
"आदत से लाचार " लोग हो गए हैं आदत से लाचार, इसीलिए गंगा को कर दिया है बेकार | एक नहीं नालें  बहाये हैं हज़ार, तभी मिलते है पिने को पानी बेकार | इसीसे बीमारी उत्पन्न हो रही है हज़ार, डॉक्टर के बढ़ गए हैं पगार | कुछ नहीं करवा रहे हैं सरकार, सिर्फ करते हैं फर्जी का ...
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  October 12, 2017, 10:03 pm
 " पृथ्वी निराली  "सुंदर सा संसार हमारा, जिस पर बसा है दुनिया सारा | ढूंढ आए और जग सारा,कहीं नहीं मिला पृथ्वी जैसा सहारा | पृथ्वी बानी खुली आसमानों में, तारे टिमटिमाएँ रत में | दिन में खो जाता है तारा, फिर न दिखाई देता तारा | क्योंकि पृथ्वी है सुंदर निराला | ...
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  October 11, 2017, 5:51 pm
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