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तीर-ए-नजर

मरु का-सा है सूखा आँगनकैसे सावन की पड़ी फुहार है?कुछ तुम ही बतलाओ राहीमेरे मन पर पड़ा तुषार है ।                                    जिस  राह  तुम चलते जाते                                   शूल  वहाँ  मुझे  दिखते  हैं,            &nb...
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Tag :
  May 21, 2017, 12:11 pm
चित्र साभार - cartoon baotinforum.com   पहलू-दर-पहलू बदलने के बाद भी मुझे नींद नहीं आई थी । अंततः बिस्तर छोड़कर कमरे से बाहर निकल आया था । इधर मेरे कदम तेज हुए थे, उधर तेज हवा का झोंका आकर टकराया था मेरे बदन से । अगले ही पल मैं पार्क में था । नींद आँखों में नहीं थी, लेकिन उसका आलस-तंत्र ...
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Tag :चुनाव
  May 21, 2017, 11:26 am
 पीछेमुड़करदेखरहेतुमदोकदमआगेबढ़नेपर,कौनराहचला  आताहैजीवनतज  मरने  पर।                  कदमबढ़ाए  जाते  होतुम                  मनतो  पीछे  छूटरहाहै,                  किसकीआहसतातीतुमको                  कौन  लगनकोलू...
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  May 16, 2017, 3:35 pm
     पत्रकार-वार्ता में इस वक्त जबर्दस्त भीड़ है । पत्रकारों की संख्या तो उंगलियों पर गिनने लायक है, किन्तु मंत्रियों-सभासदों की ढेर लगी हुई है । वही पत्रकार बुलाए गए हैं, जो प्रश्न पूछते समय दिमाग का इस्तेमाल ज्यादा न करते हों । गड़े मुर्दे उखाड़ने वाले पत्रकार त...
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Tag :नीला सियार
  May 16, 2017, 3:26 pm
केश  तुम्हारे  उड़े  हुए  हैंजैसे बदली छिटके अम्बर में,किस नीर को दौड़े जाते  होइस  भरे  हुए  सागर  में ।                      कंचन  काया  कहाँ गई वह                      सूखी  काया   लेकर  ब...
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  May 9, 2017, 4:32 pm
विचित्र सी बाना पहनेकिस पथ के तुम राही हो,हमें बताओ जरा ठहर केकिस मंजिल के राही हो ।                    कदम तेज से चलते जाते                    धूल  लपेटे  वसनों  में,                    चेहरे पर है व्यथा झलकती                    दर्द  ...
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  May 9, 2017, 4:18 pm
                                                                     नीलेसियारअपनेसिंहासनपरविराजमानहैं।ठीकबगलमेंउनकेखाससलाहकारमुस्तैदीसेजमेहुएहैं।सामनेअन्यपदाधिकारीअपनी-अपनीसीटोंसेइसतरहचिपकेहुएहैंकिदेखनेवालेकोलगेक...
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Tag :कुर्सी
  May 9, 2017, 3:16 pm
                       घर में खूब तैयारी की गई थी । दरवाजे पर रंगोली बनी थी । बाहरी रेखा पर शुद्धिकरण का प्रयास कुछ इस तरह से किया गया था कि स्वच्छता भी खुल कर दिखाई दे और स्वागतम् के उभरे अक्षर हार्दिक प्रसन्नता को भी व्यक्त करें । घर के अंदर बिस्तर की चादर को ...
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Tag :बाबू
  May 2, 2017, 2:32 pm
                                      ट्रेन स्टेशन पर आ लगी थी । उन्होंने खिड़की से बाहर झांका । अगवानी के लिए कोई उपस्थित नहीं था । यात्रियों की भीड़ छँटने के बाद अपना सामान समेटा और दरवाजे तक आ गये । उन्हें लगा कि उनके आने से पहले ही उनक...
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Tag :
  March 21, 2017, 3:19 pm
                  वह जैसे ही ढाबों के सामने पहुँचा, ढाबे वाले उस पर टूट पड़े । उसे लगा कि उसकी खुशी के भी फूट पड़ने का यही वक्त है । क्यों न लपककर दोनों हाथों से इस वक्त को ही लूट लूँ । वह लूटने के लिए थोड़ा और आगे बढ़ा । ढाबे वाले भी टूटने के लिए आँधी के पंख पर सवार ...
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Tag :इज्जत
  March 14, 2017, 3:31 pm
                    नए साहब के आने से पहले ही उनके बारे में सच्ची और अच्छी खबरें आने लगी थीं । जितनी खुशी थी, उससे अधिक हैरानी थी लोगों के मन में । कौतूहल चरम पर था कि आज के जमाने में भी ऐसे लोग धरती की शोभा बढ़ाने के लिए अवतरित हो रहे हैं । साहब कितने न्यायप्रिय ...
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Tag :खर्च
  February 26, 2017, 3:32 pm
                                  पिछली बार भइया जी जब सत्ता में आए थे, तो अपने सारे नेताओं को निर्देश निर्गत किया था कि वे प्रत्येक कम से कम एक महंगी गाड़ी अवश्य ही हस्तगत कर लें । पूछने पर बताया था कि ऐसा दो कारणों से नितांत आवश्यक था । एक, नेता...
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Tag :काम बोलता है
  February 16, 2017, 3:56 pm
                        तिलकू की चाल उसकी खुशी को बयान कर रही थी । उसे लग रहा था, जैसे वह हवा में उड़ता चला जा रहा हो । सच भी है, जब अंदर खुशी का अहसास होता है, तो अजीब सा हल्कापन भी महसूस होता है । या फिर खुशी की अधिकता शरीर में पंख लगा देती है । जो भी हो, तिलकू के पाँव...
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Tag :कर्ज
  February 6, 2017, 4:55 pm
                        erms.rcnc.org से साभार       तीसरी बार उन फटेहाल, अधनंगों को आधा दर्जन पुरानी साड़ी-धोती खैरात-स्वरूप बाँटते ही मुझे आत्म-ज्ञान की प्राप्ति हो गई । मुझे लगा कि मैं भी खैरात बाँटकर लोगों का विकास कर सकता हूँ । कर क्या सकता हूँ, बल्कि मैंने त...
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Tag :खैरात
  January 17, 2017, 3:15 pm
                    चाय की अड़ी पर इस समय भी तीन लोग अड़े हुए थे । सामने की सड़क लगभग वीरान हो चुकी थी । कभी-कभार इक्के-दुक्के लोग ही आते-जाते दिख जाते थे । कोयले की अतिरिक्त खुराक न मिलने के कारण अंगीठी अब ठंडी हो चली थी, पर शीशे के गिलासों में उड़ेली गई चाय पूरी ...
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Tag :कश्मीर
  January 10, 2017, 5:02 pm
               संयोग ऐसा हुआ कि दोनों की गाड़ियां एक साथ रुकीं मंदिर के बाहर । दोनों को हड़बड़ी थी, अतः दोनों दौड़ने लगे मंदिर के अहाते में । दोनों एक साथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुँचे और मुश्किल से टकराते-टकराते बचे । शारीरिक भिड़न्त तो नहीं हुई, पर मुँह भिड़ ...
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Tag :दरबार
  January 3, 2017, 4:20 pm
                   सुबह से ही करीमन की दुकान पर भीड़ उमड़ने लगी थी । आस-पास के सभी लोग तो लेट-लतीफ ट्रेनों की तरह काफी पीछे चल रहे थे । उनके लिए तो उसकी दुकान पर जाना रोजमर्रा की ही बात थी । उन्हें लगा कि रोज वाली ही बात होगी । जो लेना होगा, आराम से चलकर ले लेंगे उसे ...
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Tag :इज्जत
  November 24, 2016, 3:54 pm
                   ‘चित्रगुप्त जी, आजकल आपके रहन-सहन कुछ ठीक दिखाई नहीं देते...जब देखो आँखें बन्द ।’ महाराज यमराज अपने सिंहासन पर पहलू बदलते हुए बोले । चेहरा तनिक क्रोध से लालिमा के छींटों से युक्त होने लगा था ।   ‘क्षमा महाराज, ऐसी कोई बात नहीं है ।’ महाराज य...
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Tag :खुशी
  November 16, 2016, 4:47 pm
                      यहाँ स्थानान्तरित होकर आने के बाद मैंने अपने कार्य-क्षेत्र के पड़ोसियों पर एक जासूस की तरह निगाह दौड़ाई । पड़ोसियों से अभिप्राय अलग-अलग कार्यों के प्रभार वाले मेरे सहकर्मी । आपसी बातचीत के बाद मुझे सौ टका यकीन हो गया कि मुझसे अधिक य...
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Tag :अर्थनीति
  November 9, 2016, 5:44 pm
                                            महाराज सियार इस वक्त अपने सिंहासन पर मौजूद हैं । पिछली रातों में बिन बुलाए मेहमान की तरह आ धमके सपनों ने उन्हें परेशान कर रखा है । प्रत्येक सपना चीख-चीख कर यही संदेश दे रहा है कि सिंहासन पर उ...
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Tag :खबरी खरगोश
  November 1, 2016, 3:07 pm
                     चूहों की सालाना आम बैठक आहूत की गई थी । तमाम पदाधिकारी और सिविल सोसायटी के चूहे अपने-अपने तर्कों-कुतर्कों के साथ अपने लिए निर्धारित सीटों पर ठसक और कसक के साथ शोभा को प्राप्त हो रहे थे । ठसक इस बात का...कि वे हाई प्रोफाइल चूहे हैं और उनके बैठ...
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Tag :असहिष्णुता
  October 25, 2016, 5:13 pm
                      सिंहासन की ओर देखते-देखते आँखें पथरा गई हैं । युवराज सियार को तो बस खाट का ही सहारा है । खाट की हिमाकत इतनी कि वह उन्हें काट रही है । एक चादर भला कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकती है । जिसका जन्म सिंहासन पर बैठने के लिए हुआ हो, वह खाट पर बैठे-यह सच्...
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Tag :किसान
  October 14, 2016, 4:50 pm
                      नींद नहीं आ रही थी । करवट बदल-बदल कर उसे बुलाने की सारी कोशिशें बेकार गई थीं । अंततः बिस्तर को छोड़ देना ही मुझे उचित जान पड़ा । मैं घर से बाहर निकल आया और धीरे-धीरे सड़क पर बढ़ने लगा । पार्क के पास आते ही अचानक मुझे खतरे का अहसास हुआ । सामने ब...
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Tag :अंधेरा
  October 11, 2016, 4:40 pm
                      शाम को पार्क में टहलते हुए शुक्ला जी मिल गए । आज रोज की तरह उनकी चाल में वह तेजी नहीं थी । सामना होते ही मैंने पूछा, ‘क्या बात है मान्यवर, आप तो जैसे पैसेन्जर ट्रेन हो लिए हैं आज?’   उन्होंने मुझे ध्यान से देखते हुए कहा, ‘कोई बात नही...
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Tag :उद्योग
  October 7, 2016, 3:58 pm
                            अगले दिन अवकाश होने पर रात को यह दृढ़ संकल्प लेकर सोया कि कल देर तक नींद का सुख लूटूँगा, पर सुबह मुँह अँधेरे ही पत्नी ने इस अरमान पर झाड़ू फेर दिया । वह चिल्लाते हुए बोली-–पड़ोसी झाड़ू लेकर निकल गये हैं और तुम हो...
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Tag :India
  October 4, 2016, 4:37 pm
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