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इन्द्रधनुष : View Blog Posts
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इन्द्रधनुष

आपकी इमदाद कर सकता हूँ मैं    (इमदाद = सहायता, मदद)अपने पर खुद भी क़तर सकता हूँ मैंजिस्म ही थोड़ी हूँ मैं इक सोच हूँगर्क हो कर भी उभर सकता हूँ मैंइक फकत कच्चे घड़े के साथ भीपार दरिया के उतर सकता हूँ मैंबाँध कर मुट्ठी में रखियेगा मुझेखोल दोगे तो बिखर सकता हूँ मैंकह तो पाऊँ...
इन्द्रधनुष...
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  August 31, 2015, 9:28 am
दीपावली के अवसर पर श्री पंकज सुबीर जी द्वारा आयोजित, तरही मुशायरे में कही गई मेरी यह ग़ज़ल, आप सब की नज्र: उसे उसी की ये कड़वी दवा पिलाते हैं,चल आइने को ज़रा आइना दिखाते हैं.गुज़र तो जाते हैं बादल ग़मों के भी लेकिन,हसीन चेहरों पे आज़ार छोड़ जाते हैं.(आज़ार = दर्द/तकलीफ़)खुद अपने ज़र्फ़ प...
इन्द्रधनुष...
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  November 10, 2014, 4:01 pm
मुख़्तसर सी एक पुरानी ग़ज़ल आपकी समाअतों की नज्र..वतन, गाँव, घर याद आते बहुत थेमगर फिर भी हम मुस्कुराते बहुत थेमेरे क़त्ल का शक गया दोस्तों परवही मेरे घर आते जाते बहुत थेसराबों को वो सामने रख के अक्सरमेरी तिश्नगी आज़माते बहुत थे(सराब=मृगतृष्णा, तिश्नगी=प्यास)हम अपने ही घर ...
इन्द्रधनुष...
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  August 8, 2014, 3:04 am
प्यास का कोई यहाँ हल नहीं होने वालासहरा सहरा है ये बादल नहीं होने वाला(सहरा = रेगिस्तान)सायबाँ होंगे कई मेरे सफ़र में लेकिनकोई साया तिरा आँचल नहीं होने वाला(सायबाँ=छाया देने वाले)इश्क़ के दावे मुहब्बत की नुमाइश होगीकैस जैसा कोई पागल नहीं होने वाला(कैस=मजनू का असली नाम)मु...
इन्द्रधनुष...
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  January 25, 2014, 12:39 pm
जुनूने शौक़ अगर है तो हिचकिचाना क्याउतरना पार या कश्ती का डूब जाना क्या(जुनूने शौक़ = कुछ प्राप्त करने का पागलपन)हमारे बिन भी वही कहकहे हैं महफ़िल मेंहमारा लौट के आना या उठ के जाना क्यायही कहा है सभी से कि ख़ैरियत से हूँअब अपना हाल हर इक शख्स को सुनाना क्यादिखाने को तो दिखा द...
इन्द्रधनुष...
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  December 24, 2013, 12:37 pm
बतला रहा हूँ यूं तो मैं सब कुछ सही सहीतफ़सीले-वाक़यात मगर फिर कभी सही( तफ़सीले-वाक़यात = Details of the events)उसने कबूतरों को भी आज़ाद कर दियाख़त की उमीद छोड़ दी मैंने रही सहीवैसे तो कहने सुनने को कुछ भी नहीं मगरमिल ही गये हैं आज तो कुछ बात ही सहीउसके भी ज़ब्तो-सब्र का कुछ एहतराम करजिसने तमाम ...
इन्द्रधनुष...
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  November 24, 2013, 9:52 am
आईना ही जब झूठा हो जाता है.तब सच कहने से भी क्या हो जाता है.अम्न की बातें इस माहौल में मत कीजे,ऐसी बातों पे झगड़ा हो जाता है!आँगन में इतनी बारिश भी ठीक नहीं,पाँव फिसलने का खतरा हो जाता है.मिलना जुलना कम ही होता है उनसे,बात हुए भी इक अरसा हो जाता है.आओ थोड़ा झगड़ें, कुछ तकरार करें,...
इन्द्रधनुष...
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  October 22, 2013, 12:41 pm
यहीं, बीवी बच्चों में, घरबार में,मैं उलझा रहा अपने किरदार में.जो 'कुछ-लोग'चाहेंगे, होगा वही,छपेगा वही कल के अखबार में.अँधेरों से सूरज के घर का पता,यूं ही पूछ बैठा मैं बेकार में.अजी छोड़िये बातें ईमान कीं,हरिक चीज़ बिकती है बाज़ार में.ख़ुशी ढूँढता है ये नादान मन,कभी नफ़रतों ...
इन्द्रधनुष...
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  September 23, 2013, 1:19 pm
देखा जाए तो भला चाहती है,मेरी बीमारी दवा चाहती है.खुद से बेज़ार हुआ चाहती है,तीरगी एक दिया चाहती है.(तीरगी = अँधेरा, बेज़ार = Dissatisfied)कितनी आसाँ है हयात उनके लिए, जिन चरागों को हवा चाहती है(हयात = ज़िन्दगी)डांटती है भी, तो अच्छे के लिए,माँ है, वो थोड़ी बुरा चाहती है.फिर से बहनों के पुर...
इन्द्रधनुष...
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  August 25, 2013, 12:57 pm
कब मुझे रास्ता दिखाती है,रौशनी यूं ही बरगलाती है.शाम ढलते ही लौट जाती है,वैसे इस घर में धूप आती है.अक्ल, बेअक्ल इस कदर भी नहीं,फिर भी अक्सर फरेब खाती है.जाने क्या चाहती है याद उसकी,पास आती है, लौट जाती है.रब्त हमको है इस ज़मीं से, हमें,इस ज़मीं पर ही नींद आती है.मांगता हूँ मैं खु...
इन्द्रधनुष...
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  July 25, 2013, 11:55 am
श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित होली के तरही मुशायरे में कही गई गज़ल पेश है...आँखों में थे सितारे, हर ख़ाब था गुलाबी,उस उम्र में था मेरा हर फलसफा गुलाबी.मौसम शरारती है मेरी निगाहों जैसा,है हर गुलाब तेरे, रुखसार सा गुलाबी.फूलों को बादलों को, हो क्यों न रश्क आखिर,गेसू घटा...
इन्द्रधनुष...
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  July 3, 2013, 1:56 pm
मित्रगण, श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित नववर्ष के तरही मुशायरे में पिछले वर्ष कही गई गज़ल पेश है...नई सोच हो नया आसमां, नए हौसलों की उमंग हो,नए साल में नए गुल खिलें, नई हो महक नया रंग हो.मेरे दर पे आये फ़कीर को मेरी झोंपड़ी से न कुछ मिले,मेरा हाथ ऐ मेरे आसमां कभी इस कदर भी न...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  December 31, 2012, 4:04 pm
समाअतों का यहाँ सिलसिला तो हो कोई,चलो गिला ही सही, इब्तिदा तो हो कोई.है इंकलाब ही इस दौर की ज़रूरत अब,पर इन्कलाब यहाँ चाहता तो हो कोई.मैं आसमान उसे कह भी दूं मगर उसका,बुलंदियों से कहीं वास्ता तो हो कोई.मिलेगी तुमको भी सरकार से मदद लेकिन,तुम्हारे साथ मियाँ हादसा तो हो कोई.च...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  July 27, 2012, 1:40 pm
तेरी खुशबू फिज़ाओं में बिखर जाए तो अच्छा हो, कोई झोंका तुझे छू कर गुज़र जाए तो अच्छा हो.कई दिन से तसव्वुर आपका मेहमां है इस दिल में,ये मेहमाँ और थोड़े दिन ठहर जाए तो अच्छा हो.सफर की मुश्किलों का यूं तो कुछ शिकवा नहीं फिर भी,मेरी मंजिल का हर रास्ता संवर जाए तो अच्छा हो.कफस में ह...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  June 9, 2012, 3:04 pm
हैरान है दरिया ये मंज़र देख कर,अपनी तरफ आता समंदर देख कर.अमनो अमां पर हो रही हैं बैठकें,बच्चे बहुत खुश हैं कबूतर देख कर.गुज़रा हुआ इक हादसा याद आ गया,फिर से उन्हीं हाथों में खंजर देख कर.अबके बरस बादल भी पछताए बहुत,सैलाब में डूबे हुए घर देख कर.पंछी बिना दाना चुगे ही उड़ गए,आँगन ...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  April 9, 2012, 2:14 pm
इस वर्ष दीपावली के अवसर पर श्री पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर आयोजित तरही मुशायरे में कही गई मेरी गज़ल पेश-ए-खिदमत है. तरही मिसरा था "दीप खुशियों के जल उठे हर सू". समाअत फरमाएं.मैंने चाहा था सच दिखे हर सू,उसने आईने रख दिए हर सू.ख्वाहिशों को हवस के सहरा में,धूप के काफिले मिले हर सू....
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  November 29, 2011, 1:57 pm
कहीं चौखट कहीं छप्पर नहीं है,यहाँ कोई मुकम्मल घर नहीं है.सुकूँ से पाँव फैलाऊं तो कैसे,मेरी इतनी बड़ी चादर नहीं है.अना के दायरे में जीते रहना,किसी भी कैद से कमतर नहीं है.मैं मुद्दत बाद तुमसे मिल रहा हूँ,खुशी से आँख फिर क्यों तर नहीं है?नज़र डाली तो है उसने इधर भी,मगर उसकी नज़र ...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  September 12, 2011, 12:07 pm
बुलंदियों से हमें यूँ तो डर नहीं लगता पर आसमां पे बना घर भीघर नहीं लगता.मैं उनके सामने सच बात कह तो देता हूँ,मेरा कहा उन्हें अच्छा मगर नहीं लगता.झुका के सर को अगर उसके दर पे जाते तो,तुम्हारा इस तरह चौखट से सर नहीं लगता.फलों से खूब लदा पेड़ है यकीनन वो,मगर जो छांव दे, ऐसा शजर* ...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  August 1, 2011, 10:41 am
जहाँ कहीं हमें दाने दिखाई देते हैं,वहीँ पे जाल भी फैले दिखाई देते हैं.मैं कैसे मान लूं बादल यहाँ भी बरसा है,यहाँ तो सब मुझे प्यासे दिखाई देते हैं.तुम्हारा दर्द भी तुमसा ही बेवफा निकला,हमारे ज़ख्म तो भरते दिखाई देते हैं. कभी तो चाँद को मेरी नज़र से भी देखो,नहीं दिखेंगे जो धब...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  June 25, 2011, 1:13 pm
मुहब्बत का कभी इज़हार करना ही नहीं आया,मेरी कश्ती को दरिया पार करना ही नहीं आया.जिसे जो चाहिए था तोड़ कर वो ले गया उनसे,दरख्तों को कभी इनकार करना ही नहीं आया.हमारे दोस्तों ने हाथ में खंजर थमाया भी,मगर दुश्मन पे हमको वार करना ही नहीं आया.इधर नज़रें मिलीं और तुम उधर दिल हार भी ब...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  May 25, 2011, 12:43 pm
तुम्हारी सोच के सांचे में ढल भी सकता था,वो आदमी ही था इक दिन बदल भी सकता था.हमारा एक ही रस्ता था एक ही मंजिल,वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था.ज़मीर की सभी बातें जो मानने लगते,हमारे हाथ से मौका निकल भी सकता था.लहू था सर्द वहाँ पर सभी का मुद्दत से,अगर तुम आंच दिखाते उबल भी सकता ...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  May 7, 2011, 1:47 pm
पड़ा हुआ जो ये पानी में जाल है साहब,यकीन जानिये दरिया की चाल है साहब.खिलाफ ज़ुल्म के गुस्सा है जो ये लोगों में,ज़रा सी देर का केवल उबाल है साहब.हरेक बात पे रो रो के बात मनवाना,ये आंसुओं का ग़लत इस्तेमाल है साहब.सुकूने दिल से है दौलत का वैर जग ज़ाहिर,अमीर है वो मगर ख़स्ताहालहै साह...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  March 9, 2011, 11:39 am
किसी सूरत ग़मे दिल का मदावा हो नहीं सकता, समंदर हो चुका हो जो वो दरिया हो नहीं सकता.हमारे दिल की फितरतभी है कुछ कुछ दोस्तों जैसी,हमारा होके भी ज़ालिम, हमारा हो नहीं सकता. रकीबों से गले मिल मिल के करना प्यार की बातें,महज मुझको जलाना तो इरादा हो नहीं सकता. मेरे हमदम तेरी बाते...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  January 31, 2011, 2:21 pm
जिसको काँटा नहीं चुभा होगा,वो कहाँ रात भर जगा होगा.धुंध बिखरी हुई है आंगन में,उसने बादल को छू लिया होगा.दिल की बस्ती में रौशनी कैसी,वो इसी राह से गया होगा.जम के बरसा था रात भर बादल,ज़ख्म कच्चा था खुल गया होगा.बंद कर के सभी झरोखों को,मन की खिड़की वो खोलता होगा. उसकी हर बात है गज़...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  December 19, 2010, 1:39 pm
मैं चाहता हूँ मैं सचमुच अमीर हो जाऊँ,दुआ करो कि मैं इक दिन फ़कीर हो जाऊँ.तेरी हयात में कुछ दख़्ल तो रहे मेरा,मैं तेरे हाथ की कोई लकीर हो जाऊँ.तू अपने आपसे मुझको अलग न कर पाए,जो मेरे बस में हो तेरा ज़मीर हो जाऊँ.ये जिंदगी के मसाइल भी मेरे हमदम हैं,मैं तेरी ज़ुल्फ़ का कैसे असी...
इन्द्रधनुष...
Tag :ग़ज़ल
  November 23, 2010, 11:25 am
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