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उन्मुक्त उडान

देश में चुनाव का दौर चल रहा हैl सभी राजनीतिक पार्टी अपने- अपने दाव-पेच में लगी है,सिर्फ दो तरह के ही काम किए जा रहे हैl एक विपक्ष की आलोचना और दूसरा झूठे वादे करना, आजाद भारत में चुनाव के समय यही चीज़ हर पार्टी को एक दुसरे से जोडती हैl “झूठे वादे और आलोचना” सभी राजनीतिक पार्टी...
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  May 24, 2016, 12:13 am
पीने से कोई सवाल हल नहीं होताऔर ना पीने से भी मेरा कोई सवाल हल नहीं हुआपीते-पीते मैं पूरी रात पी गयारात का खोखलापन, शराब का खालीपन सब पी गयानशा पर रति भर नहीं चढ़ाभूली हुई बात, रिश्ता और साथसब एक साथ पी गयापर मेरे कोई सवाल हल नहीं हुआइधर शराब की बोतल खाली हो रही थीउधर दिमाग ...
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  May 22, 2016, 1:06 pm
 वो खाली पेट भटक रहाबंजर पड़ी ज़मीन कोतरही नज़र से ताक रहारोज़ सोचता गाँव छोड़ेशहर की तरफ खुद को मोडवो देश का अनंदाता हैभूखे पेट रोज़ सो जाता हैपेट की तपती आग जब शरीरको तोड़ जाती हैउसके बच्चो के पेट और पीठ का फर्क मिट जाता हैईट दर ईट जब बिक जाती हैवो देश का अनंदाता हैखून के आंस...
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  April 12, 2016, 5:30 pm
शिकायत साँझ ने कुछ ऐसे कीजैसा कोई रूठा दोस्त शिकायत कर रहा होकहा की मुझे भूल गया तूसुबह से रात तक जगताखून पसीना बहाकागज़ जोड़ रहाआज हाथ थाम उसने लिया बैठाउस गाँव मे जिसे बहुत पहले अकेला छोड़ आया था मैं तनहा,शाम ने धुंध को लपेटे हुए पूछा उस शहर में ऐसा क्या पायातूने जो अपनी ...
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  February 21, 2016, 12:51 am
देश में असहिष्णुता का मुदा आग की तरह लगी और बिना बुझाए बुझ भी गई, अब आगे का काम बुद्धिगीवी लोगो का है की वो सोचते रहे की असहिष्णुता के नाम पर देश में क्यों इतना शोर मचाIहम आम जनता के पास बहुत काम है,जैसे दाल,पेट्रोल और नई सिनेमा पर चर्चा करना आदिI फिर भी अपने विचार रखने में क...
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  January 5, 2016, 4:15 pm
‘जेब’ यानि पॉकेट यानि पैसा, ताकत संसाधन जुटाने और बाज़ार को खरीदने की ताकत पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान समाज में ‘ जेब’ शर्ट और पैंट में पाए जाते हैI जो महिलाए शर्ट और पैंट पहनती भी है, वो पैसे जेब में न रखकर पर्स में रखती है, पारंपरिक परिधान जैसे साड़ी, सलवार-कमीज़ में जेब नह...
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  December 30, 2015, 3:07 pm
मेरे सिरहाने रहकर भी मुझसे रूठी है किताबेकुछ टेबल पर,कुछ पलंगनीचे जा छुपीआधी पढ़ी, आधी बाकीकोने में रखी किताबेहमेश पढ़ी जाने के इंतजार मेंअलमीरा में सजी किताबेख़ामोशी से जिंदगी का साथ निभातीमेरी दोस्त किताबे..Rinki...
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  December 25, 2015, 3:35 pm
कही किसी ने धर्म पर अपनी राय दी मानवता की मर्यादा को तोड़ता हुआअसंवेदनशील टिप्पणीकही किसी ने खेल खेलाऐसा शतरंज का खेल जिसेखेलता कोई है पर मरते बस मोहरे हैमेरे शहर के मोहरे भीखबर सुन सक्रिय हो गएजुलुस निकला, नारा लगेशहर आतंक में डूब गयाहर इन्सान डरा थाआतंक चेहरे पर पसर...
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  December 15, 2015, 10:54 pm
ये सवाल जो पीछा करता हैहर मोड़ पर पूछा करता हैतू कौन?तू कौन है?मैं हूँ वो हमेशा हसंता हूँपुरषार्थ पर यकीन करता हूँसमय पर जगतासमय पर सोता हूँनियम पर ही चलता हूँसमाज ही मेरा धर्म हैरिवाज ही मेरा कर्म हैवो बोले जो मैं सुनता हूँउनकी कही मैं करता हूँमैं आदम हूँमैं आदम हूँफिर ...
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  December 8, 2015, 3:01 pm
ठण्ड में शाम जल्दी ही रात का कंबलओढ़े लेती हैसूरज भी अपने आप को स्वेटर में लपेट लेता हैहम भी आग से चिपक करगरमाहट को महशूस करते हैठण्ड की सुबह-शाम अलसाई सी नज़र आती हैदोपहर की धूप पूछो मत महबूबा सी नज़र आती हैबैठ साथ उसके दिन पलभर में गुजर जाता हैफिर शाम जल्दी से रात का कंबलओ...
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  December 4, 2015, 1:35 pm
चाहे कितना भी भर लोअपनी सोच से ज्यदापहुँच से ऊपरढेर लगा लो पैसे काजाल बिछा लो रिस्तो काजितना हो सके खरीद लोछल लो किसी को प्यार के नाम सेखुद को बंद कर लोखुशी नाम के संदूक मेंचाहे कुछ भी कर लोजीत नहीं पाओगेभीतर के सूनेपन कोआकाश से कम है तुम्हारे पासन कोई मुकाबला, न कोई मे...
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  November 30, 2015, 12:16 pm
गुलज़ार कहते हैखुशी फूलझड़ी सी होती हैरोशनी बिखरती झट से खत्म हो जाती हैदर्द देर तक महकता हैभीतर ही भीतर सुलगता हैउसकी खुशबू जेहन में देरतक रहती हैख़ुशी को भी हम दर्द भर कर अहा से याद करते हैक्योंकि दर्द ही देर तक ठहरता हैदर्द यादों में जम जाता हैपिघलता है आंसू बनकभी हंस...
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  November 24, 2015, 5:00 pm
बाल दिवस के मेले मेंहर बाल कन्हिया बन नाच रहाहर बालिका मलाला बन कर अपने अधिकारों पर बात रख रही हर बच्चा कलाम सा दिख रहाहर के चहरे पर प्रतिभा का नूर बिखर रहावो जो लड़का खड़ा है एक कोने मेंबस रंग-बिरंगे गुबारे को देख रहालाल उसे लड्डू सा नज़र आ रहाहरा रंग के चप्पल का जाने कब से ...
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  November 14, 2015, 8:47 pm
कुम्हार चाक चलता हुए सोचताकितना बिक पाएगा दीया इस बारबिजली के बल्ब और मोमबती के बीचक्या कही टिक पाएगामिट्टी का दिया इस बारमिठाई आती है अब दुकानों सेपहले जैसा कहा मानता अब त्यौहार सस्ती चीजों से पटा है बाज़ार पल्स्टिक से बने सामानबिगाड़ रहे गरीब कलाकारों का त्यौहारक्...
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  November 8, 2015, 6:00 pm
बार-बार जलाने के बाद भीरावण साल दर साल विशालकाय और विकराल रूप धारणकरता रहाना रावण को जलानेवाला हारेना ही रावण हारासिलसिला सदियों तक चलता रहारावण को जलानेवाले खुश है कीअपने से सौ गुना विशालकायरावण को हर बार जला ही देते हैरावण उनसे ज्यदा खुश हैजाने कब से जला रहे है फिर ...
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  November 2, 2015, 12:28 pm
पहली ठोकर ने मुह के बल गिरायादर्द पुराना होने तक महसूस कियादूसरी ठोकर ने सर खोल कर रखा दियाहोश आने तक जिंदगी हवा हो गई थीतीसरी ठोकर ने आत्मा को रुला दियादुबारा न गिराने का इरादा करसोचा पत्थर ही हटा देपत्थर को जो  देखादिल ने कहा, चलो फिरठोकर खाते हैक्योंकि उस पत्थर का ...
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  October 29, 2015, 12:09 pm
प्यार होने या न होने मेफर्क बस इतना थाजब वो था तो,मैं नहीं थाजब मैं था वो नहीं प्यार के देहलीज के लकीर परहम दोनों खड़े रहेसुबह से शाम तक परछाई बदलीहम खड़े रहे ठुठे पेड़ की तरहमौसम बदले हम खड़े रहेसमाज की तरफ मुह कियाबस उनकी सहमति के लिएआज हम दोनों खड़े है आमने-सामने अजनबी सा च...
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  October 13, 2015, 3:14 pm
लेटा था मैं समुंद्र किनारेलोगदौड़े-दौड़े आएमर गया ये तो..किसी ने कहाकितना सुन्दर बच्चा था..दुसरे ने कहामैं शांत लेटारहा समुंद किनारेशरणार्थी लगता हैडूब कर मर गयाएक रोशनी चमकीकिसी ने फोटो लियाकिसी ने लेख लिख दियामेरी कहानी सात समन्दर पर तक गईहंगामा ही हंगमा मचामैं फिर ...
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  October 11, 2015, 10:17 pm
सूरज की गरम रोशनीहवा का अपनापनफूलो की खुशबू का साथसब पहले जैसा हैकुछ तो खत्म नहीं हुआ बिखरे सपनों की आंचसूखे कुएं सी प्यासठण्ड में ठिठुरती हंसीरात में चांदनी सा जगता प्यारखत्म होने सा सवाल ही नहीं बनतातो तुम्हे क्यूँ लगता हैतुम्हारा जाना मेरे सब कुछ खत्म कर सकता हैत...
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  October 6, 2015, 8:18 pm
कहत कबीर प्रेम जैसे लम्बा पेड़ खजूरचढ़े तो प्रेम रस मिले गिरे तो चकनाचूरप्रेम जैसे अग्नि परीक्षाजो पार न किया तो खाकपार कर जाने पर भी वनवासप्रेम धागा कच्चा सापिरोए मोती तो टूट जाएबधे कलाई पर तोअटूट विश्वास सा बंध जाएबसे पिया नयन में ऐसेउसमे कोई कहा समाएप्रेम जैसे गीत ...
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  August 5, 2015, 12:12 am
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