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कारवॉं karvaan

खेतड़ी महाराज को लिखित अपने एक पत्र में विवेकानंद लिखते हैं - जीवन में एक ही तत्‍व है, जो किसी भी कीमत पर अमूल्‍य है - वह है प्रेम, अनंत प्रेम। ईश्‍वर अनिर्वचनीय प्रेम स्‍वरूप है। भारतीय दर्शन में सामान्‍यतया चार पुरूषार्थों की चर्चा मिलती है, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। ...
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कुमार मुकुल
Tag :
  August 22, 2019, 12:47 pm
1900 के बाक्‍सर( ई.ख.च्‍वान - संयुक्‍त धार्मिक धूंसेबाज - कमर पर लाल पटटा बांधते थे ये, बाक्‍सर नाम योरोपियनों ने दिया , इनके अलावा एक अन्‍य ता.ताव.हवी समाज था जिसे खडगधारी समाज कहा जाता था जो बाद में बाक्‍सर का हिस्‍सा हो गया, इनका नारा था विदेशियों को निकाल दो। खडगधारी समाज ...
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कुमार मुकुल
Tag :ठाकुर गदाधर सिंह
  August 12, 2019, 3:56 pm
जिस तरह निराला ने कविता को छंदों से मुक्त किया, केदारनाथ सिंह ने उदात्तता से मुक्त किया उसी तरह एक हद तक रघुवीर सहाय ने और ज्यादा समर्थ ढंग से विष्णु खरे ने उसे करुणा की अकर्मण्य लय से मुक्त किया है, और कविता को बचा लिया है अस्तित्व के संकट से। कवियों की बड़ी दुनिया के लि...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  August 12, 2019, 2:30 pm
लेखक की राजनीतिक दृष्टि साफ होनी चाहिए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्रसे कवि, पत्रकार कुमार मुकुल कीबात-चीत-राष्‍ट्रकवि और जनकवि जैसे संबोधन को आप किस तरह देखते हैं। हाल के दशकों में ना कोई राष्‍ट्रकवि कहलाया ना जनकवि। जबकि राष्‍ट्र और जन दोनों विकसित हुए हैं ?राष्ट्र कवि और ज...
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कुमार मुकुल
Tag :Vijendra
  August 9, 2019, 5:55 pm
परिचय1933 में लोथल गुजरात में जन्‍मे और जयपुर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले हिम्‍मत शाह कला के क्षेत्र में विश्‍वविख्‍यात नाम है। जग्‍गूभाई शाह के शिष्‍य श्री शाह मध्‍यप्रदेश सरकार के कालिदास सम्‍मान, साहित्‍यकला परिषद अवार्ड, एलकेए अवार्ड, एआइएफएसीएस अवार्ड दिल्‍ली ...
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कुमार मुकुल
Tag :हिम्‍मत शाह
  August 8, 2019, 10:39 am
जब कोई प्रतिभा उद्बोधन के नये स्‍तरों को अपने कलात्‍मक संघर्ष से उद्घाटित करने की कोशिश करती है तो समय और प्रकृति अपने पारंपरिक स्‍वरूप में उसे भटकाना व तोड़ना चाहते हैं। ऐसे में वह संघर्ष पीढि़यों में विस्‍थापित होता चला जाता है। और समय की सीमाएं तोड़ता कालातीत ह...
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कुमार मुकुल
Tag :सत्‍यजीत राय
  August 8, 2019, 10:23 am
हंस कार्यालय में एक बार राजेन्‍द्र यादव ने बिहार को लेकर कुछ हंसी के मूड में कहा तो मैंने भी हंसते कहा था - बहुत सताता है मगध। चंद्रगुप्‍त, चाणक्‍य, बुद्ध याद आते हैं। मगध जिसकी सीमाएं कंधार को छूती थीं और जिसकी राजधानी थी पाटलिपुत्र यानि आज का पटना। 1990 के अंत में जब सहर...
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कुमार मुकुल
Tag :
  August 7, 2019, 5:42 pm
मार्च 2005 , प्रथम प्रवक्‍ता 'कवियों से लड़कर आत्‍महत्‍या थोड़े करनी है'वीरेन डंगवाल आपको केसे लगते हैं ? कुछ टिप्‍पणीकार उन्‍हें हाशिये का कवि बताकर दयाभाव दर्शा रहे हैं। अकादमी पुरस्‍कार विवाद पर आपकी क्‍या राय है ? वीरेन की कविताएं अच्‍छी लगती हैं। उनसे किसी को क्‍या...
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कुमार मुकुल
Tag :Vishnu khare
  August 7, 2019, 5:33 pm
क्या लय की कोई पूर्वनिर्धारित व्यवस्था है...क्या रचनाकार की लय और पाठक की लय एक ही 'फ्रीक्वेंसी'पर आ सकते हैं ... क्या कथ्य का लयानुकूल व्यक्तीकरण कथ्य की क्षति तो नहीं करता। कथ्य - निरूपण प्राथमिक है या लय - निर्वाह ? ...क्या कविता की वास्तविक शक्ति लय-निर्वाह है या इससे अलग ...
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कुमार मुकुल
Tag :
  July 26, 2019, 10:21 am
''मैं सामान्य हूं, पर मेरी कविता सामान्य नहीं, क्यों कि उसमें मेरे अलावा अन्य कई रचनाकार शामिल हैं। रचना व्यक्ति की नहीं समय की होती है। एक चित्रकार जब किसी का चित्र बनाता है तो उस व्यक्ति के साथ उस चेहरे पर समय का जो प्रभाव अंकित है उसे भी बना रहा होता है। मेरी कविता भी म...
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कुमार मुकुल
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  July 22, 2019, 11:42 am
हउ बबवा त चल गइल हो बबा..कौन बबवा रे, हमरा छोड के अउरो कवनो बाबा बा का ए भुइ्ंलोटनअरे हम उ सिधेसर बबा के बारे में कहत हइ्ंकावन उ सिधेसरा , ओकरा त सीधे परलोक जाए के लिखले रहे , हमरा से नू ओकर जनमपतरी देखवे के चाहत रहे..पर बबा - बाकी बबवा सब त ओकर लहास लेके बइठल बाडे से कि उ फेर से ज...
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कुमार मुकुल
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  July 2, 2019, 5:12 pm
अपनेबारे में सोचता हूं कि क्‍या हूं तो देखता हूं कि मैं किसानी चेतना का आदमी हूं,झट से जमीन धर लेना चाहता हूं। दिल्‍ली में भी वही फूल पत्‍ते पत्‍थर मिटटी देखता ढूंढता रहता हूं। चलने से थक जाता हूं तो दौडना चाहता हूं भाग लेना चाहता हूं इस बेमकसद चलते रहने से।मैं क्‍या ह...
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कुमार मुकुल
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  June 24, 2019, 10:12 am
सुलेमान सौदागर का यात्रा विवरण - 851 ई से कुछ अंश। अनुवाद - महेशप्रसाद साधु, बीएचयू, काशी। संवत 1968 में प्रकाशित। लंका के पास सुमात्रा द्वाीप में विवाह के लिए शर्त थी कि जो अपने जितने शत्रु की खोपडी हत्‍याकर जमा करेगा वह उतने विवाह कर सकता है। रामनी टापू में हाथी बहुत हैं। ...
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कुमार मुकुल
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  May 30, 2019, 5:02 pm
​​Smita Singh ने मेरे एक कवितांश के बारे में पूछा - कि क्या यह मेरी कविता है, इसे Instagram, twitteer और फेसबुक पर कई लोगों ने शेयर किया है, कुछ ने मेरा नाम दिया है, कुछ ने नहीं दिया है, साथ कुछ स्क्रीनशॉट भी थे।फिर मैंने तलाशा तो fb पर 33 लोगों ने मेरी कविता शेयर की थी,जिनमें 17 ने नाम नहीं दिया था, ...
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कुमार मुकुल
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  May 20, 2019, 10:54 am
1990में मैं पटना आ गया था सहरसा से। लेखकों से मिलना जुलना , गोष्ठियों आदि का दौर आरंभ था। अरूण कमल, आलोक धन्‍वा, नंदकिशोर नवल,खगेंद्र ठाकुर, भृगुनंदन त्रिपाठी, मदन कश्‍यप, कर्मेंदु शिशिर,प्रेम कुमार मणि आदि पटना के सक्रिय लेखकों के घर आना जाना आरंभ हो चुका था। नवतुरिया लेख...
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कुमार मुकुल
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  April 23, 2019, 12:25 pm
तो भैया अब और कितना डिजि टल-मल विकास चाहते हैं। धरती पर 'स्‍वच्‍छ भारत'चलाते-चलाते हमने अंतरिक्ष में कचरा फैलाने की क्षमता हासिल कर ली है। मिशन शक्ति पर नासा का प्रहार अमेरिकी दुष्‍प्रचार और प्रोपे गैंडा है। भाई यह अमेरिकी गैंडा तो बड़ा खतरनाक लग रहा। अब अपने मोदी जी क...
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कुमार मुकुल
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  April 3, 2019, 3:00 pm
ऐसा कुछ नहीं है। यह मान्‍यता है बस।वैदिक समय में जो ब्रहृम का चिंतन करते थे यानि यह सोचते थे कि यह दुनिया किसने बनायी या यह अस्ति‍तव में कैसे आयी, उन्‍हें ब्राहृमण कहा जाने लगा। वे पढने लिखने का काम करते थे इसलिए उनको मान मिला। जो भी पढते लिखते थे वे ब्रहमण कहे गये न कि क...
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कुमार मुकुल
Tag :महाभारत
  April 1, 2019, 11:08 am
जहाँ हर चौक चौराहे परराजनीतिक हुंडारअपनी रक्तस्लथ दाढ़लोकतंत्र की राख सेचमकाते फिर रहेकोई पांव-पैदल चल रहाजन-गण-मन की धुन पर'ज्यां द्रेज'दो शब्दों का तुम्हारा नाममेरी समझ में नहीं आतापर  तुम्हारी सायकिल की टुन-टुनसुन पा रहा मैंजैसे  गांधी की आदमकद हरकतों के पीछेय...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  March 30, 2019, 10:33 am
क्‍या पाकिस्‍तान शेर है ? नहीं जी, गीदड़ है। पर चुनाव तक उसे शेर मानने में अपुन के बाप का क्‍या जाता है। इसी तरह चुनाव में अपुन सवा सेर साबित हो जाएंगे! फिर इन गीदडों को कौन पूछेगा ? ये सीमा पर फूं फां करते रहेंगे लोहा लेने को अपने जवान हैं इतने, हम उनकी शहादत का सम्‍मान करत...
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कुमार मुकुल
Tag :व्‍यंग्‍य-मुकुल
  March 8, 2019, 10:43 am
युवाल नोआ हरारी की विश्‍वप्रसिद्ध पुस्‍तक'सेपियन्‍स'का अनुवाद अब हिंदी में उपलब्‍ध है। सेपियन्‍स रोचक ढंग से'मानव जाति का संक्षिप्‍त इतिहास'हमारे सामने रखती है। पुस्‍तक इस माने में अनोखी है कि मानव जाति के पूरे वैज्ञानिक विकास क्रम को सामने रखते हुए यह हमें आत्‍मा...
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कुमार मुकुल
Tag :युवाल नोआ हरारी
  March 4, 2019, 3:58 pm
Hearth र्ब्‍लाग के लिए अंचित द्वारा की गयी बातचीत at March 24, 2017आज से हमलोग अपनी इंटरव्यू वाली श्रृंखला की शुरुआत कर रहे हैं. इस श्रृंखला में हम कवियों से बात करेंगे और उनकी मनोस्थिति और कविता के प्रति नजरिया जानेंगे. हर कवि से हमने एक ही तरह के सवाल पूछे हैं और आगे हम देखेंगे कि उन...
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कुमार मुकुल
Tag :
  February 26, 2019, 12:45 pm
वैदिक काल के शब्‍द बताते हैं कि उनका निर्माण और नामकरण जीवों और वस्‍तुओं की गति के संदर्भ में किस तरह हुआ होगा। वेदों में गौ शब्‍द जाने और गति के अर्थ में प्रयुक्‍त है। यह किरणका पर्याय है क्‍योंकि किरण चलकर धरती तक आती है। सूर्य और चांदभी गौ हैं क्‍यों क‍ि वे चलते प्र...
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कुमार मुकुल
Tag :गाय
  February 13, 2019, 3:10 pm
चित्रकार बनने की आकांक्षा वॉन गॉग में शुरू से थी। गरीबी और अपमान में मृत्यु को प्राप्त होनेवाले महान चित्राकार रैम्ब्रां बहुत पसंद थे विन्सेन्ट को और उसका अंत भी रैम्ब्रां की तरह हुआ और दुनिया के कुछ महान लोगों की तरह उसकी पहचान भी मृत्यु के बाद हुई। जीते जी तो कला क...
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कुमार मुकुल
Tag :कुमार मुकुल
  December 12, 2018, 12:29 pm
सिद्ध मनोविज्ञानी कार्ल युंगने अपने एक लेख में पिकासो और उसकी कला को स्क्जिोफ्रेनिक कहा था। पिकासो के जीवन में और उसके चित्रों में आई दर्जन भर से ज्यादा स्त्रियों के साथ उसके व्यवहार को अगर देखा जाए तो युंग की बात सही लगती है। पर कलाकार यही तो करता है कि अपनी कमियों क...
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कुमार मुकुल
Tag :
  December 5, 2018, 2:06 pm
4 फरवरी 2016क्या आज का मेरा दिन खुशी में बीता है? दुकानदार से छुटटा पैसों की जगह माचिस की बजाए मिले तीन चॉकलेट मुंह में डालते हुए मैंने सोचा कि लगभग खुशी ही है यह। लगभग जयहिंद की तर्ज पर। हालांकि काफी बाइट से दिखते चॉकलेट का स्वाद वैसा नहीं था जैसा होना चाहिए था। अगर पसंद आत...
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कुमार मुकुल
Tag :डायरी
  November 26, 2018, 1:03 pm
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